# कोलकाता का वो जादूगर जिसने बोतल में फूंक मारकर बना दिया बॉलीवुड का सबसे अमर गाना

> राहुल देव बर्मन 'पंचम दा' ने 27 जून 1939 को कोलकाता में जन्म लिया और बॉलीवुड को ऐसे गाने दिए जो आज भी अमर हैं। बोतल में फूंक, कंघी की रगड़ और चम्मच की टकराहट को उन्होंने संगीत बना दिया और 'महबूबा महबूबा' से '1942: ए लव स्टोरी' तक उनकी धुनें हर पीढ़ी का दिल जीतती रहीं।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-06-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/kolkata-ka-vo-jadugara-jisane-botala-men-phunka-marakara-bana-diya-bollywood-ka-sabase-amara-gana-3191 · **Language:** Hindi
**Tags:** राहुल देव बर्मन, पंचम दा, बॉलीवुड संगीत, शोले, यादों की बारात, 1942 ए लव स्टोरी, आरडी बर्मन जयंती, हिंदी सिनेमा संगीत

राहुल देव बर्मन यानी 'पंचम दा' हिंदी सिनेमा के उन संगीतकारों में से थे जिन्होंने संगीत की पूरी समझ को ही बदल कर रख दिया। उनकी सोच थी कि धुन किसी महंगे साज की मोहताज नहीं होती, बल्कि इस दुनिया की हर आवाज़ में संगीत छिपा है। 27 जून 1939 को कोलकाता में जन्मे पंचम दा को संगीत की विरासत परिवार से मिली थी। उनके पिता सचिन देव बर्मन अपने दौर के बड़े संगीतकार थे। लेकिन पंचम दा ने साबित किया कि विरासत एक शुरुआत होती है, मंजिल नहीं।

## नौ साल में जगाई प्रतिभा की पहचान
पंचम दा की संगीत प्रतिभा बहुत कम उम्र में ही झलकने लगी थी। महज नौ बरस की उम्र में उन्होंने फिल्म 'फंटूश' के गाने 'ऐ मेरी टोपी पलट के आ' की धुन बनाई, जो उनकी असाधारण क्षमता का पहला प्रमाण था। मुंबई आकर शुरुआत में वे पिता के असिस्टेंट के रूप में काम करते रहे, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपनी अलग संगीत शैली तराशी। धीरे-धीरे वे एक ऐसे स्वतंत्र संगीतकार बनकर उभरे जिसने पूरे देश को अपना दीवाना बना लिया।

## 'तीसरी मंजिल' से आया असली मोड़
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पंचम दा को वो बड़ी पहचान मिली फिल्म 'तीसरी मंजिल' के गाने 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा' से। इसके बाद हिट गानों का सिलसिला जैसे थमा ही नहीं। 'दम मारो दम' और 'ये शाम मस्तानी' ने उन्हें बॉलीवुड का सबसे क्रांतिकारी और ट्रेंड-सेटिंग संगीतकार बना दिया। 1970 और 80 के दशक में राजेश खन्ना, किशोर कुमार और आरडी बर्मन की तिकड़ी ने 'मेरे सपनों की रानी' और 'चिंगारी कोई भड़के' जैसे वो गाने दिए जो पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।

## जब बोतल और कंघी बन गए साज़
पंचम दा को सबसे खास बनाता था उनका बेमिसाल प्रयोगशील स्वभाव। वे घर-आंगन में मिलने वाली आम चीज़ों को उठाते और उनसे संगीत रच देते थे। कांच, बोतल, चम्मच और कंघी, सब उनके लिए साज़ थे।

फिल्म 'शोले' के मशहूर गाने 'महबूबा महबूबा' में उन्होंने एक खाली बोतल के मुंह पर फूंक मारकर गाने की रिदम तैयार की। 'यादों की बारात' के गाने 'चुरा लिया है' में कांच की प्याली पर चम्मच की हल्की चोट से जो मीठी आवाज़ निकली, वह आज भी सुनने वालों के मन में उतर जाती है। 'पड़ोसन' के गाने 'एक चतुर नार' में उन्होंने कंघी की खुरदरी सतह को रगड़कर एक अनोखा साउंड इफेक्ट दिया जो उस गाने की अलग पहचान बन गया।

## मुश्किल दौर में भी संगीत का जज़्बा बरकरार
80 के दशक के बाद पंचम दा के करियर में उतार-चढ़ाव का दौर आया और सेहत ने भी साथ देना कम कर दिया। लेकिन संगीत के प्रति उनकी दीवानगी कभी नहीं टूटी। इस मुश्किल दौर में भी उन्होंने 'आने वाला पल जाने वाला है' और 'तुझसे नाराज नहीं जिंदगी' जैसे गहरे और आत्मा को छूने वाले गाने दिए, जो उनकी भावनात्मक गहराई का प्रमाण हैं।

## '1942: ए लव स्टोरी' और आखिरी विदाई
फिल्म '1942: ए लव स्टोरी' के ज़रिए पंचम दा ने यह साबित कर दिया कि उनकी प्रतिभा किसी दौर में कमज़ोर नहीं पड़ी। इस फिल्म के गाने 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' और 'रिमझिम रिमझिम' आज भी हर उम्र के श्रोताओं के पसंदीदा हैं। दुखद यह रहा कि 4 जनवरी 1994 को पंचम दा इस दुनिया से विदा हो गए और इस फिल्म की जो अपार कामयाबी मिली, उसका जश्न वे खुद नहीं देख सके। उनका संगीत आज भी हर पीढ़ी में उतनी ही ताज़गी से गूंजता है। एक खाली बोतल की फूंक से लेकर कंघी की खुरदरी आवाज़ तक, पंचम दा का हर प्रयोग अमर है।

## सवाल-जवाब

### 1. पंचम दा का पूरा नाम और जन्म की तारीख क्या है?
उनका पूरा नाम राहुल देव बर्मन था और उनका जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था।

### 2. पंचम दा के पिता कौन थे?
उनके पिता सचिन देव बर्मन थे, जो अपने दौर के जाने-माने संगीतकार थे।

### 3. नौ साल की उम्र में पंचम दा ने किस फिल्म के लिए धुन बनाई थी?
उन्होंने फिल्म 'फंटूश' के गाने 'ऐ मेरी टोपी पलट के आ' की धुन महज नौ साल की उम्र में बनाई थी।

### 4. पंचम दा को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा ब्रेक किस फिल्म से मिला?
फिल्म 'तीसरी मंजिल' के गाने 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा' ने उन्हें पहचान और बड़ा ब्रेक दिलाया।

### 5. 'महबूबा महबूबा' गाने में पंचम दा ने क्या अनोखा प्रयोग किया?
फिल्म 'शोले' के इस गाने में उन्होंने खाली बोतल के मुंह पर फूंक मारकर गाने की रिदम तैयार की थी।

### 6. 'चुरा लिया है' गाने में किन घरेलू चीज़ों से संगीत बनाया गया?
'यादों की बारात' के इस गाने में कांच की प्याली और चम्मच की टकराहट से खास साउंड तैयार किया गया था।

### 7. पंचम दा का निधन कब हुआ?
उनका निधन 4 जनवरी 1994 को हुआ।

### 8. पंचम दा की आखिरी बड़ी फिल्म कौन सी थी और उसके कौन से गाने मशहूर हुए?
'1942: ए लव स्टोरी' उनकी आखिरी बड़ी फिल्म थी और 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' तथा 'रिमझिम रिमझिम' उसके सबसे लोकप्रिय गाने हैं।

## प्रेरणा और सबक
पंचम दा की जीवन यात्रा से कई ऐसे सबक मिलते हैं जो हर किसी के काम आ सकते हैं।

- **जो पास है, उसी से काम करो:** पंचम दा ने बोतल, कंघी और चम्मच जैसी आम चीज़ों से ऐसा संगीत रचा जो इतिहास में दर्ज हो गया। सीमित संसाधन कभी बड़ा काम करने में असली रुकावट नहीं बनते।
- **प्रतिभा उम्र नहीं देखती:** नौ साल की उम्र में फिल्म 'फंटूश' के लिए धुन बनाकर उन्होंने साबित किया कि जब जज़्बा सच्चा हो तो उम्र मायने नहीं रखती।
- **विरासत से सीखो, नकल मत करो:** पिता सचिन देव बर्मन से संगीत की नींव मिली, पर पंचम दा ने अपनी बिल्कुल अलग पहचान बनाई। किसी की छाया में पले-बढ़े होने के बावजूद अपनी धूप खोजी जा सकती है।
- **मुश्किल दौर में भी रचना मत छोड़ो:** 80 के दशक के बाद करियर में उतार-चढ़ाव और सेहत की मुश्किलें आईं, फिर भी उन्होंने 'आने वाला पल जाने वाला है' जैसे गहरे गाने दिए और '1942: ए लव स्टोरी' से शानदार वापसी की।
- **सच्चा काम हमेशा याद रहता है:** 4 जनवरी 1994 को पंचम दा दुनिया से चले गए, लेकिन उनकी आखिरी फिल्म की कामयाबी उनके जाने के बाद आई। सच्ची कला का कोई अंत नहीं होता।

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