कुणाल खेमू की बहुचर्चित फिल्म वाइब को आईएमडीबी पर मिली 7.3 रेटिंग, फिर भी बॉक्स ऑफिस पर धीमी पड़ी रफ्तार कुणाल खेमू के निर्देशन और अभिनय वाली फिल्म वाइब 7.3 की आईएमडीबी रेटिंग के बावजूद सिनेमाघरों में दर्शकों के लिए संघर्ष कर रही है, आठ दिनों में इसका कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 16.42 करोड़ रुपये रहा। सिनेमा जगत में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय देते हुए कुणाल खेमू ने एक ही प्रोजेक्ट में हीरो, लेखक, निर्देशक और निर्माता की चौतरफा भूमिका निभाई, लेकिन उनकी नई फिल्म वाइब को सिनेमाघरों में दर्शकों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पा रहा है। 18 सितंबर 2026 को बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली इस फिल्म को आईएमडीबी पर 7.3 की सम्मानजनक रेटिंग हासिल हुई है, इसके बावजूद टिकट खिड़की पर इसकी दैनिक रफ्तार काफी सुस्त बनी हुई है। फिल्म में पारिवारिक और पेशेवर तालमेल का अनोखा संगम देखने को मिला जब कुणाल खेमू ने अपनी सासू मां और हिंदी सिनेमा की मशहूर अदाकारा शर्मिला टैगोर को भी एक विशेष किरदार में निर्देशित किया। शुरुआती वीकेंड के बाद बॉक्स ऑफिस पर दर्ज हुई भारी गिरावट फिल्म ने अपने पहले दिन भारत में 1.70 करोड़ रुपये का शुद्ध कारोबार करके एक सामान्य शुरुआत दर्ज की थी। इसके बाद शनिवार को दर्शकों की संख्या में थोड़ा इजाफा हुआ और दूसरे दिन की कमाई 2.75 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। रिलीज के तीसरे दिन यानी रविवार को फिल्म ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 3 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन अपने खाते में जोड़ा। हालांकि, पहले वीकेंड के खत्म होते ही कार्यदिवसों में फिल्म के आंकड़े तेजी से नीचे लुढ़क गए। सोमवार यानी चौथे दिन फिल्म का कलेक्शन घटकर 90 लाख रुपये पर आ गया। पांचवें दिन इसने संभलते हुए 1.10 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि छठे दिन यह आंकड़ा 1 करोड़ रुपये दर्ज हुआ। सातवें दिन टिकट बिक्री में फिर से मंदी देखी गई और फिल्म महज 80 लाख रुपये ही जुटा सकी। दूसरे हफ्ते के पहले दिन यानी आठवें दिन फिल्म की झोली में 85 लाख रुपये आए। इस तरह घरेलू बाजार में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 14.37 करोड़ रुपये तक ही पहुंच सका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से आए 2.05 करोड़ रुपये को मिलाकर फिल्म का अब तक का कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 16.42 करोड़ रुपये हुआ है। जासूसी, रोमांच और हास्य से भरपूर दो घंटे छब्बीस मिनट का ताना-बाना कुल 2 घंटे 26 मिनट की इस फिल्म को एक्शन, रोमांच, हास्य और थ्रिलर के संतुलित मेल के रूप में तैयार किया गया है। कहानी के केंद्र में दो गहरे दोस्त हार्दिक और बग्स हैं, जो आम जिंदगी की उलझनों में फंसे रहते हैं। कहानी में मुख्य मोड़ तब आता है जब हार्दिक की मुलाकात करीना नाम की युवती से होती है। इस मुलाकात के बाद वह अनपेक्षित रूप से देश की सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील जांच के घेरे में आ जाता है। इसके बाद हार्दिक और बग्स एक अंतरराष्ट्रीय और गोपनीय जासूसी अभियान में उलझ जाते हैं, जिसका नेतृत्व सीक्रेट एजेंट मैडम एच के हाथों में होता है। मैडम एच के रूप में प्रीति जिंटा का अंदाज देखने लायक है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मिशन में ये दोनों अल्हड़ और नौसिखिए दोस्त खुद की जान बचाते हुए देश को संकट से निकालने का प्रयास करते हैं, जिससे पूरी कहानी में हास्य और रोमांच की कई स्थितियां पैदा होती हैं। मडगांव एक्सप्रेस के बाद कुणाल खेमू का नया दांव और सितारों की टोली बतौर निर्देशक मडगांव एक्सप्रेस से एक सफल शुरुआत करने के बाद कुणाल खेमू ने इस फिल्म में अपनी कलात्मक जिम्मेदारियों का दायरा काफी बढ़ा लिया। उन्होंने न केवल मुख्य भूमिका में खुद को पेश किया, बल्कि स्क्रीनप्ले लेखन, संवाद और प्रोडक्शन की बागडोर भी संभाली। फिल्म की स्टारकास्ट में विविधता का खास ख्याल रखा गया है, जिसमें प्रीति जिंटा के साथ स्पर्श श्रीवास्तव, यशपाल शर्मा और दिनेश लाल यादव निरहुआ जैसे मंझे हुए कलाकारों ने स्क्रीन साझा की है। इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की मौजूदगी रही। यह पहला अवसर है जब पर्दे पर सास और दामाद की इस वास्तविक जोड़ी ने किसी फिल्म में एक साथ काम किया है। कुणाल खेमू ने एक साक्षात्कार के दौरान साझा किया था कि उनकी पत्नी सोहा अली खान ने उन्हें बताया था कि शर्मिला टैगोर उनकी पहली निर्देशित फिल्म मडगांव एक्सप्रेस से काफी प्रभावित हुई थीं। जब उन्हें पता चला कि कुणाल एक नई फिल्म पर काम कर रहे हैं, तो उन्होंने उसमें एक मजेदार कैमियो करने की इच्छा जताई। कुणाल द्वारा भूमिका की रूपरेखा समझाए जाने पर शर्मिला टैगोर ने तुरंत अपनी सहमति दे दी थी। सिनेमाघरों में दर्शकों का अभाव और डिजिटल मंचों पर टिकी निगाहें कुणाल खेमू के लिए अपनी सासू मां को कैमरे के सामने एक्शन और कट बोलना एक बेहद नया और यादगार अनुभव साबित हुआ। इसके बावजूद, सकारात्मक समीक्षाओं और 7.3 की आईएमडीबी रेटिंग के बाद भी थिएटर्स में सीटों का खाली रहना इस बात का प्रमाण है कि आजकल दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचना कितना कठिन हो चुका है। सिनेमा प्रेमियों की ठंडी प्रतिक्रिया के बीच अब ट्रेड विश्लेषकों और निर्माताओं को उम्मीद है कि बड़े पर्दे के बाद जब यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आएगी, तब इसे डिजिटल दर्शकों का बेहतर प्रतिसाद मिल सकता है। इसका आप पर असर फिल्म वाइब के बॉक्स ऑफिस आंकड़े यह दर्शाते हैं कि दर्शकों के सिनेमा देखने के प्राथमिक नजरिए में बड़ा बदलाव आया है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: अच्छी समीक्षाओं और 7.3 की आईएमडीबी रेटिंग वाली फिल्मों को भी अब दर्शक सीधे सिनेमाघरों में देखने के बजाय घर पर देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऐसे में अगर आप थिएटर जाने की योजना बना रहे हैं, तो सुबह और दोपहर के शोज में टिकट की आसान उपलब्धता मिल सकती है। • ओटीटी दर्शकों के लिए: बॉक्स ऑफिस पर सीमित कारोबार करने वाली फिल्मों का डिजिटल प्रीमियर अक्सर समय से पहले कर दिया जाता है। इसका मतलब है कि घरेलू दर्शक इस एक्शन कॉमेडी को कुछ ही हफ्तों के भीतर अपने निजी स्क्रीन्स पर देख सकेंगे। • फिल्म निर्माताओं के लिए: मल्टी-हाइफनेट भूमिकाएं निभाने और स्थापित सितारों को शामिल करने के बावजूद वीकेंड के बाद के कार्यदिवसों की कमाई सुनिश्चित करना बेहद मुश्किल हो गया है। निर्देशकों और प्रोडक्शन हाउसों को अब थिएटर्स के लिए कंटेंट की मार्केटिंग रणनीति पर नए सिरे से विचार करना होगा। • थिएटर संचालकों के लिए: वीकडेज में लगातार कम ऑक्यूपेंसी मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन दोनों के राजस्व पर दबाव बनाती है। संचालकों को वीकेंड के बाद खाली सीटों को भरने के लिए रियायती टिकट या कॉम्बो ऑफर्स जैसे विकल्प आजमाने पड़ सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ फिल्म वाइब के बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष करने के पीछे रिलीज के शुरुआती दिनों के बाद दर्शकों की संख्या में आई तेज गिरावट मुख्य कारण रही। • वीकेंड के बाद तीव्र गिरावट: शुरुआती तीन दिनों में 7.45 करोड़ रुपये जुटाने के बाद फिल्म सोमवार को केवल 90 लाख रुपये कमा सकी। कार्यदिवसों में दर्शकों की संख्या बनाए रखने में विफलता ने इसके कुल ग्रॉस कलेक्शन को सीमित कर दिया। • थिएटर फुटफॉल में सामान्य संकोच: फिल्म की 7.3 आईएमडीबी रेटिंग और सकारात्मक कॉमेडी होने के बावजूद सिनेमा टिकट की कीमतों और समय की कमी के कारण दर्शक केवल बड़े पैमाने के आयोजनों वाली फिल्मों के लिए ही थिएटर्स का रुख कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति मध्यम बजट की कॉमेडी फिल्मों की टिकट खिड़की पर निरंतरता को बुरी तरह प्रभावित करती है। • सीमित वर्ड-ऑफ-माउथ विस्तार: मडगांव एक्सप्रेस से बनी कुणाल खेमू की साख ने शुरुआती सप्ताहांत में दर्शक जुटाए, लेकिन बाद के दिनों में फिल्म बड़े पैमाने पर नए दर्शकों को आकर्षित करने वाला प्रभाव नहीं छोड़ सकी। इसके चलते आठवें दिन तक घरेलू ग्रॉस 14.37 करोड़ रुपये तक ही सीमित रहा। सवाल-जवाब 1. फिल्म वाइब कब रिलीज हुई थी? यह फिल्म 18 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज की गई थी। 2. फिल्म वाइब में कुणाल खेमू ने कौन-कौन सी जिम्मेदारियां निभाई हैं? कुणाल खेमू ने इस फिल्म में मुख्य अभिनेता, निर्देशक, स्क्रीनप्ले लेखक और निर्माता की भूमिका निभाई है। 3. आठ दिनों में फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन कितना रहा है? आठ दिनों में फिल्म ने भारत में 14.37 करोड़ रुपये ग्रॉस और विदेशों में 2.05 करोड़ रुपये कमाकर कुल 16.42 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन किया है। 4. फिल्म में शर्मिला टैगोर कैसे शामिल हुईं? सोहा अली खान ने बताया था कि शर्मिला टैगोर कुणाल की पहली फिल्म मडगांव एक्सप्रेस से काफी प्रभावित थीं और उन्होंने इस फिल्म में एक मजेदार कैमियो करने की इच्छा जताई थी। 5. फिल्म की कहानी किस विषय पर आधारित है? यह दो दोस्तों हार्दिक और बग्स की कहानी है, जो अनजाने में एक राष्ट्रीय सुरक्षा जांच और एजेंट मैडम एच के जासूसी मिशन में फंस जाते हैं। https://trendkia.com/bollywood/kunal-kemmu-ki-bahucharchita-philma-vibe-ko-imdb-para-mili-7-3-retinga-phira-bhi-boksa-phisa-para-dhimi-pari-raphtara-38814 TrendKia — Har trend, sabse pehle.