# बिना सुपरस्टार और कम बजट के ऑस्कर पहुंची लापता लेडीज, जानिए 25 करोड़ कमाने वाली इस फिल्म की पूरी कहानी

> किरण राव द्वारा निर्देशित फिल्म 'लापता लेडीज' ने छोटे बजट में तैयार होकर वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ी। बिना किसी बड़े सितारे के यह फिल्म अकादमी पुरस्कारों तक पहुँची।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-09-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/laapataa-ladies-review-2024-the-low-budget-oscar-contender-that-won-hearts-25712 · **Language:** Hindi
**Tags:** लापता लेडीज, किरण राव, ऑस्कर, बॉलीवुड, रवि किशन, ओटीटी

सिनेमा जगत में अक्सर यह माना जाता है कि किसी भी फिल्म की सफलता के लिए बड़े बजट और नामचीन कलाकारों का होना बेहद जरूरी है। यदि किसी प्रोजेक्ट में ये दोनों ही बातें न हों, तो सामान्य तौर पर यह मान लिया जाता है कि उसका बॉक्स ऑफिस पर बहुत बुरा हाल होगा। हालांकि, कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो इन सभी पुरानी धारणाओं को पूरी तरह से गलत साबित कर देती हैं। करीब तीन साल पहले रिलीज हुई एक ऐसी ही फिल्म ने सिनेमाघरों में अपनी अनोखी छाप छोड़ी थी, जिसमें न तो कोई बहुत बड़ा सुपरस्टार था और न ही करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बजट। इसके बावजूद इस फिल्म ने केवल अपनी मजबूत कहानी के दम पर ऐसा करिश्मा कर दिखाया कि देखने वाले दंग रह गए।

## कम बजट और सीमित संसाधनों में बनी खास फिल्म

यहाँ जिस फिल्म की चर्चा हो रही है, उसने न केवल देश के भीतर बल्कि विदेशों में भी दर्शकों के दिलों पर अपनी गहरी छाप छोड़ी थी। इस भारतीय फिल्म का जादू पूरी दुनिया में सिर चढ़कर बोला। बिना किसी भारी-भरकम प्रचार, बड़े बजट और किसी बड़े चेहरे के ‘लापता लेडीज’ सीधे दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रही। साल 2024 में रिलीज हुई यह फिल्म पहली नजर में भले ही एक बेहद हल्की-फुल्की कॉमेडी फिल्म जैसी महसूस होती हो, लेकिन जैसे-जैसे इसकी कहानी आगे बढ़ती है, यह समाज, महिलाओं की पहचान, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और पितृसत्ता जैसी गंभीर व्यवस्थाओं पर बहुत ही सहजता से सवाल खड़े करती है।

## समाज की कड़वी सच्चाइयों को पेश करती अनूठी कहानी

हंसाते-हंसाते निर्देशक किरण राव ने अपनी इस फिल्म के माध्यम से समाज की कई कड़वी सच्चाइयों को परदे पर कुछ इस शालीनता से पेश किया कि कोई भी दर्शक चाहकर भी इससे नजरें नहीं फेर सका। ‘लापता लेडीज’ केवल मनोरंजन नहीं करती बल्कि दर्शकों को हंसते-हंसाते हुए भी सोचने पर मजबूर कर देती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फिल्म का कुल बजट लगभग 4 करोड़ रुपये के आसपास बताया जाता है। इतने सीमित और सामान्य बजट में किसी फिल्म का निर्माण करना और फिर बॉक्स ऑफिस पर लगभग 25 करोड़ रुपये की कमाई कर लेना अपने आप में एक बहुत बड़ी और खास उपलब्धि मानी जाती है।

## ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स

हालांकि, इस फिल्म की असली सफलता केवल सिनेमाघरों से हुई टिकट खिड़की की कमाई तक ही सीमित नहीं रही। जब यह फिल्म थिएटर्स के बाद ओटीटी पर आई, तो यहाँ भी इसे दर्शकों का भरपूर और जबरदस्त प्यार मिला। छोटे-छोटे शहरों और गाँवों की पृष्ठभूमि पर बुनी गई इस कहानी ने उन तमाम दर्शकों के दिलों को गहराई से छुआ, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के बड़े पर्दे की कहानियों में अपनी असल जिंदगी बहुत कम दिखाई देती है। सबसे दिलचस्प बात यह देखने को मिली कि इस फिल्म को सिनेमाघरों से भी ज्यादा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर पसंद किया गया, जहाँ इसने सफलता के कई नए कीर्तिमान स्थापित किए।

## मजबूत अभिनय और नए कलाकारों की टोली

‘लापता लेडीज’ में नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा, स्पर्श श्रीवास्तव और रवि किशन जैसे बेहतरीन कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। रवि किशन को छोड़कर उस समय इनमें से किसी भी कलाकार का ऐसा नाम नहीं था जिसके बलबूते पर इस प्रोजेक्ट को किसी स्टार पावर वाली फिल्म की श्रेणी में रखा जा सके। लेकिन किरण राव की इस फिल्म को इस तरह के किसी सहारे की कोई आवश्यकता भी नहीं थी, क्योंकि यहाँ पर असली स्टार तो केवल इसकी कहानी ही थी जिसने पर्दे पर अपना जादू बिखेरा।

## ऑस्कर के मंच तक पहुँचने का गौरव

इस फिल्म की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धियों में से एक इसका ऑस्कर पुरस्कारों की दौड़ तक पहुँचना रहा। यह फिल्म भारत की तरफ से 97वें अकादमी पुरस्कार यानी ऑस्कर अवॉर्ड्स के तहत सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म की श्रेणी में आधिकारिक एंट्री के रूप में भेजी गई थी। भले ही यह फिल्म ऑस्कर के आखिरी नॉमिनेशन तक पहुँचने में कामयाब नहीं हो पाई, लेकिन देश की तरफ से इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय रेस में शामिल होना ही इसके लिए बहुत बड़ा गौरव था।

## निर्देशक किरण राव की शानदार वापसी

‘लापता लेडीज’ के जरिए निर्देशक किरण राव ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि वह अपने काम में कितनी माहिर हैं। किरण ने इसी फिल्म के माध्यम से बतौर निर्देशक एक लंबे अरसे के बाद वापसी की थी। उन्होंने साल 2010 में आई फिल्म ‘धोबी घाट’ के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में अपना पदार्पण किया था। लगभग 13 साल के एक लंबे और महत्वपूर्ण अंतराल के बाद जब उन्होंने निर्देशन की दुनिया में वापसी की, तो देश और दुनिया के तमाम लोग उनके इस अद्भुत हुनर को एक बार फिर से सलाम करने के लिए मजबूर हो गए।

## इसका आप पर असर
यह फिल्म दर्शाती है कि मजबूत सामग्री और बेहतर कहानी के दम पर बिना किसी भारी निवेश के भी सफलता हासिल की जा सकती है।

- **भारत में:** छोटे बजट की कहानियों और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्मों को दर्शकों द्वारा बड़े पैमाने पर स्वीकार किए जाने का रास्ता साफ हुआ है।

- **दर्शकों के लिए:** पारंपरिक मसाला फिल्मों के अलावा सामाजिक मुद्दों पर बनी सहज कहानियों को ओटीटी पर देखने और चुनने का एक नया विकल्प मिला है।

- **सिनेमा जगत में:** बड़े सितारों पर अंधाधुंध पैसा खर्च करने के बजाय मजबूत स्क्रिप्ट और नए कलाकारों पर भरोसा जताने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला है।

- **संस्कृति के स्तर पर:** ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि और महिलाओं के स्वावलंबन से जुड़े मुद्दों पर मुख्यधारा की जनता का ध्यान अधिक केंद्रित हुआ है।

- **व्यापारी वर्ग और निर्माताओं के लिए:** कम लागत वाले प्रोजेक्ट्स के भी वित्तीय रूप से बेहद सफल और लाभदायक साबित होने की संभावना बढ़ी है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या लापता लेडीज देखने लायक है?
हाँ, यह फिल्म अपनी सहज कॉमेडी और सामाजिक मुद्दों के प्रभावी चित्रण के कारण बेहद सराहनीय है और देखने योग्य है।

### 2. लापता लेडीज फिल्म का निर्देशन किसने किया है?
इस फिल्म का निर्देशन किरण राव ने किया है।

### 3. फिल्म का कुल बजट कितना था?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस फिल्म का बजट लगभग 4 करोड़ रुपये था।

### 4. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कितनी कमाई की थी?
फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 25 करोड़ रुपये के आसपास कमाई की थी।

### 5. लापता लेडीज किस वर्ष रिलीज हुई थी?
यह फिल्म वर्ष 2024 में रिलीज हुई थी।

### 6. फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में कौन-कौन नजर आया था?
फिल्म में नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा, स्पर्श श्रीवास्तव और रवि किशन मुख्य भूमिकाओं में थे।

### 7. क्या यह फिल्म ऑस्कर के लिए भेजी गई थी?
हाँ, यह फिल्म 97वें अकादमी पुरस्कारों में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि थी।

## प्रेरणा और सबक
किरण राव की इस फिल्म के निर्माण और उसकी यात्रा से रचनाकारों और युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं।

- **गुणवत्ता पर भरोसा:** भारी भरकम बजट या स्थापित स्टारकास्ट के बिना भी केवल उत्कृष्ट सामग्री और मजबूत पटकथा के बल पर सफलता पाई जा सकती है।

- **धैर्य का परिणाम:** अपने काम से लंबा ब्रेक लेने के बाद भी रचनात्मकता और अपनी कला के प्रति समर्पण के जरिए शानदार वापसी संभव है।

- **स्थानीय जुड़ाव:** अपनी जड़ों और वास्तविक जीवन से जुड़ी कहानियों को पर्दे पर उतारकर वैश्विक स्तर के दर्शकों का दिल जीता जा सकता है।

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