# लावणी की महारानी की जिंदगी पर्दे पर लाएंगी श्रद्धा कपूर, 'ईठा' के टीजर ने मचाई धूम

> श्रद्धा कपूर अपनी अगली फिल्म 'ईठा' में महाराष्ट्र की मशहूर लावणी कलाकार वीठाबाई नारायणगांवकर का किरदार निभा रही हैं, और टीजर सामने आते ही उनके लुक की जमकर तारीफ हो रही है।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-06-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/lavani-ki-maharani-ki-jindagi-parde-para-laengi-shraddha-kapoor-eetha-ke-tijara-ne-machai-dhuma-2686 · **Language:** Hindi
**Tags:** श्रद्धा कपूर, ईठा फिल्म, वीठाबाई नारायणगांवकर, लावणी, तमाशा, महाराष्ट्र लोक कला, बॉलीवुड

श्रद्धा कपूर इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म 'ईठा' को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। इस फिल्म में वह ईठा के किरदार में दिखाई देंगी, और हाल में रिलीज हुए टीजर ने दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। टीजर इतना दमदार है कि कई लोग इसे श्रद्धा के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म बता रहे हैं। सबसे ज्यादा बातें तो उनके लुक को लेकर हो रही हैं, जिसने पहली झलक में ही सबका ध्यान खींच लिया।

## महाराष्ट्र की लोक संस्कृति से जुड़ी कहानी
यह फिल्म महाराष्ट्र की लोक संस्कृति की पृष्ठभूमि पर बुनी गई है। इसकी कहानी मशहूर लावणी कलाकार वीठाबाई नारायणगांवकर की जिंदगी पर आधारित है। वीठाबाई अपने डांस के लिए मशहूर थीं और अपने काम के लिए आज भी याद की जाती हैं। टीजर से ही यह साफ हो गया कि कहानी लावणी और तमाशा जैसी महाराष्ट्र की पारंपरिक लोक कलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में दिखाया जाएगा कि वीठा ने अपने काम के लिए अपनी जान तक की परवाह नहीं की। यह उनके संघर्षों की भी कहानी है।

## श्रद्धा के लुक ने जीता दिल
टीजर में श्रद्धा के अंदाज ने लोगों को उनका मुरीद बना दिया। नौवारी साड़ी, भारी पारंपरिक गहनों और मंचीय साज-सज्जा वाले इस लुक से दर्शक नजरें ही नहीं हटा पा रहे। फिल्म में वह काफी हद तक वीठाबाई नारायणगांवकर जैसी ही नजर आ रही हैं।

## आखिर कौन थीं वीठाबाई नारायणगांवकर
अगर यह नाम आपके लिए अनजाना है तो जान लीजिए कि यह वह शख्सियत हैं जिन पर अब यह फिल्म बन रही है। वीठाबाई नारायणगांवकर महाराष्ट्र की जानी-मानी लावणी परफॉर्मर में से एक थीं। लोक कलाकारों के परिवार में जन्मीं वीठाबाई ने बहुत कम उम्र में ही मंच पर अपनी कला दिखानी शुरू कर दी थी।

अपनी एनर्जी, दमदार अभिनय और धुआं उड़ा देने वाली परफॉर्मेंस के दम पर उन्होंने सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देशभर में पहचान बनाई। उस दौर में लोक कलाकारों को मुख्यधारा में ज्यादा अहमियत नहीं मिलती थी, फिर भी वीठाबाई ने लावणी कला को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

## परदे पर ईठा, असल जिंदगी में वीठाबाई
फिल्म में भले ही श्रद्धा कपूर के किरदार का नाम ईठा रखा गया है, लेकिन असल जिंदगी में उस कलाकार का नाम वीठाबाई नारायणगांवकर था। वह एक भारतीय डांसर, सिंगर और तमाशा कलाकार थीं। उनके पिता और चाचा भाऊ-बापू मांग नारायणगांवकर के नाम से एक पारिवारिक मंडली चलाते थे। इसी वजह से वीठा की पहचान लावण्या, गवलान और भेदिक जैसे गानों से जुड़ी रही। पढ़ाई में वह बहुत तेज नहीं थीं, लेकिन स्टेज पर उन्हें कोई टक्कर नहीं दे पाता था।

## इसका आप पर असर
- **फैंस के लिए:** श्रद्धा कपूर के चाहने वालों को उनका एकदम नया, पारंपरिक अंदाज देखने को मिलेगा, जहां वह लावणी कलाकार के किरदार में नजर आएंगी।
- **लोक कला प्रेमियों के लिए:** महाराष्ट्र की लावणी और तमाशा जैसी पारंपरिक लोक कलाओं और वीठाबाई नारायणगांवकर की विरासत को बड़े पर्दे पर नई पहचान मिलेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. 'ईठा' फिल्म में श्रद्धा कपूर कौन सा किरदार निभा रही हैं?
श्रद्धा कपूर इस फिल्म में ईठा के किरदार में नजर आएंगी, जो मशहूर लावणी कलाकार वीठाबाई नारायणगांवकर की जिंदगी पर आधारित है।

### 2. वीठाबाई नारायणगांवकर कौन थीं?
वह महाराष्ट्र की जानी-मानी लावणी परफॉर्मर, भारतीय डांसर, सिंगर और तमाशा कलाकार थीं, जो अपने दमदार मंचीय अभिनय के लिए मशहूर थीं।

### 3. फिल्म 'ईठा' किस पृष्ठभूमि पर बनी है?
यह फिल्म महाराष्ट्र की लोक संस्कृति पर आधारित है और लावणी व तमाशा जैसी पारंपरिक लोक कलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है।

### 4. टीजर में श्रद्धा का लुक कैसा है?
टीजर में वह नौवारी साड़ी, भारी पारंपरिक गहनों और मंचीय साज-सज्जा में नजर आ रही हैं, और काफी हद तक वीठाबाई नारायणगांवकर जैसी दिखती हैं।

### 5. वीठाबाई किन गानों के लिए जानी जाती थीं?
वह लावण्या, गवलान और भेदिक जैसे गानों के लिए जानी जाती थीं।

### 6. वीठाबाई का परिवार किस तरह कला से जुड़ा था?
उनके पिता और चाचा भाऊ-बापू मांग नारायणगांवकर के नाम से एक पारिवारिक मंडली चलाते थे।

## प्रेरणा और सबक
- **कम उम्र से शुरुआत:** वीठाबाई ने बहुत छोटी उम्र में ही मंच पर अपनी कला दिखानी शुरू कर दी थी, जो बताता है कि जुनून को उम्र का इंतजार नहीं होता।
- **अपने काम के प्रति समर्पण:** उन्होंने अपनी कला के लिए जान तक की परवाह नहीं की, यानी अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहना ही असली पहचान बनाता है।
- **हालात से न हारना:** उस दौर में लोक कलाकारों को मुख्यधारा में अहमियत नहीं मिलती थी, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।
- **अपनी ताकत पहचानना:** पढ़ाई में तेज न होने के बावजूद उन्होंने स्टेज को अपनी ताकत बनाया, जहां कोई उन्हें टक्कर नहीं दे पाता था।

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