महान गायिका एस जानकी का 88 वर्ष की आयु में निधन, संगीत जगत में शोक की लहर दक्षिण भारत की मशहूर पार्श्व गायिका एस जानकी ने 88 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है। उनके निधन से फिल्म उद्योग और संगीत प्रेमियों के बीच गहरा शोक है। संगीत की दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। दक्षिण भारत की मशहूर पार्श्व गायिका एस जानकी का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। इस सूचना के आने के बाद पूरी दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री और संगीत के दीवानों के बीच गम का माहौल छा गया है। दिग्गज गायिका ने अपने पीछे संगीत के दशकों लंबे सफर की एक अमूल्य और प्रेरणादायक विरासत छोड़ी है। सोशल मीडिया के माध्यम से कई फिल्मी हस्तियों और कलाकारों ने उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। एस जानकी का अंतिम समय एस जानकी ने अपनी अंतिम सांस कर्नाटक के मैसूर स्थित अपोलो अस्पताल में ली। हालांकि उनके निधन के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा अभी तक नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वह काफी समय से उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही थीं। आज, 11 जुलाई 2026 को उनके निधन की दुखद पुष्टि हुई। इस खबर ने देश भर में उनके असंख्य प्रशंसकों को गहरा धक्का पहुंचाया है और लोग सोशल मीडिया पर लगातार अपनी संवेदनाएं प्रकट कर रहे हैं। संगीत में असाधारण सफर एस जानकी का जन्म आंध्र प्रदेश के पल्लापतला में हुआ था। उन्होंने अपने पार्श्व गायन सफर की औपचारिक शुरुआत वर्ष 1957 में फिल्म 'विधिइन विलायट्टु' के साथ की थी। अपने सुदीर्घ करियर के दौरान उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में 48,000 से अधिक गानों को अपनी जादुई आवाज दी। उन्होंने न केवल तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और हिंदी जैसी प्रमुख भारतीय भाषाओं में अपना हुनर दिखाया, बल्कि अंग्रेजी, जापानी और जर्मन भाषाओं में भी अपनी गायकी का लोहा मनवाया। उन्हें दक्षिण भारत की 'नाइटिंगेल', जानकी अम्मा और 'दक्षिण भारत की कोकिला' जैसे सम्मानजनक नामों से पुकारा जाता था। छह दशकों का शानदार योगदान एस जानकी ने छह दशक से अधिक समय तक संगीत उद्योग पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। वर्ष 2016 में उन्होंने गायकी से संन्यास लेने का निर्णय लिया था, जिसके बाद उन्होंने स्टेज और फिल्मों से दूरी बना ली थी। हालांकि, संगीत के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें 2018 में फिर से वापस आने के लिए प्रेरित किया, जब उन्होंने फिल्म 'पन्नादी' के लिए अपनी आवाज रिकॉर्ड की। संगीत क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें 4 बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 33 अलग-अलग राज्य स्तरीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनका जाना भारतीय कला और संगीत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। इसका आप पर असर देश भर में: एस जानकी का निधन भारतीय संगीत की एक बड़ी क्षति है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके हजारों गानों के रूप में एक प्रेरणा बनकर जीवित रहेगी। सवाल-जवाब 1. एस जानकी का निधन कब और कहाँ हुआ? एस जानकी का निधन 11 जुलाई 2026 को मैसूर के अपोलो अस्पताल में हुआ। 2. एस जानकी के करियर की शुरुआत कब हुई थी? उन्होंने 1957 में फिल्म 'विधिइन विलायट्टु' के साथ अपने पार्श्व गायन करियर की शुरुआत की थी। 3. एस जानकी ने अपने करियर में कितनी भाषाओं में गाने गाए? उन्होंने अपने करियर के दौरान 20 से अधिक भाषाओं में गाने गाए। 4. एस जानकी को किन पुरस्कारों से नवाजा गया था? उन्हें अपने संगीत योगदान के लिए 4 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 33 राज्य फिल्म पुरस्कार मिले थे। प्रेरणा और सबक • बहुभाषी कौशल: 20 भाषाओं में गाने का अभ्यास दिखाता है कि नई चुनौतियों को स्वीकार करना और सीखना निरंतर सफलता की कुंजी है। • दीर्घकालिक समर्पण: छह दशकों तक एक क्षेत्र में सक्रिय रहना अनुशासन और अपने काम के प्रति गहरे प्रेम का परिणाम है। • संन्यास के बाद भी सक्रियता: 2016 में संन्यास लेने के बावजूद 2018 में संगीत की वापसी दिखाती है कि कलाकार कभी अपने जुनून से पूरी तरह दूर नहीं होते। https://trendkia.com/bollywood/mahana-gayika-s-janaki-ka-88-varsha-ki-ayu-men-nidhana-sngita-jagata-men-shoka-ki-lahara-6906 TrendKia — Har trend, sabse pehle.