# मां शर्मिला टैगोर की दी तालीम से लेकर घर में मंदिर न होने तक, सबा पटौदी ने खोला धार्मिक परवरिश का सच

> अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और पूर्व क्रिकेटर मन्सूर अली खान पटौदी की बड़ी बेटी सबा पटौदी ने अपने बचपन, घर के माहौल और धार्मिक शिक्षा को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-08-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/man-sharmila-tagore-ki-di-talima-se-lekara-ghara-men-mndira-na-hone-taka-saba-pataudi-ne-khola-dharmika-paravarisha-ka-sacha-17109 · **Language:** Hindi
**Tags:** शर्मिला टैगोर, सबा पटौदी, मन्सूर अली खान पटौदी, सैफ अली खान, सोहा अली खान, बॉलीवुड न्यूज़

भारतीय सिनेमा और ग्लैम वर्ल्ड में अंतरधार्मिक शादियां अक्सर चर्चा और सार्वजनिक बहस का विषय बन जाती हैं। अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा जैसे कई सितारों को अलग धर्म में शादी करने पर समाज में समय-समय पर आलोचनाओं और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। हालांकि, समय के साथ मजबूत हुए कई रिश्तों ने इन तमाम सामाजिक धारणाओं को खारिज भी किया है। बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और दिग्गज क्रिकेटर मन्सूर अली खान पटौदी का रिश्ता भी ऐसी ही एक मिसाल रहा है। शादी के बाद शर्मिला टैगोर ने इस्लाम धर्म अपना लिया था। अब उनकी बड़ी बेटी सबा पटौदी ने एक इंटरव्यू में अपनी मां की दी हुई धार्मिक तालीम और बचपन की परवरिश से जुड़े कई अहम पहलुओं पर खुलकर बात की है।

## बच्चों की मजबूत नींव के लिए दी गई इस्लाम की तालीम
यूट्यूब चैनल बिग बॉलीवुड बफ्स पर दिए एक इंटरव्यू के दौरान सबा पटौदी ने बताया कि उनकी मां शर्मिला टैगोर ने आखिर क्यों अपने बच्चों को इस्लाम की तालीम देने का फैसला किया। सबा के मुताबिक, उनकी मां का मानना था कि बच्चों के मन में धर्म को लेकर कोई उलझन या भ्रम नहीं होना चाहिए। वे चाहती थीं कि उनके बच्चों की वैचारिक और धार्मिक नींव मजबूत हो। इसी वजह से शर्मिला टैगोर ने बच्चों को इस्लाम, रमजान और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं की शुरुआती समझ दी। सबा ने बताया कि इसी स्पष्टता को बनाए रखने के लिए उनके घर में कोई मंदिर नहीं रखा गया था और न ही परिवार में हिंदू रीति-रिवाजों का पालन किया जाता था।

सबा पटौदी ने स्पष्ट किया कि उनकी मां ने यह तालीम सिर्फ इसलिए दी ताकि बच्चे किसी तरह की दुविधा में न रहें। हालांकि, इस तालीम के बाद भी बच्चों को अपना रास्ता खुद चुनने की पूरी आजादी दी गई थी। उनके पिता मन्सूर अली खान पटौदी और मां शर्मिला टैगोर ने कभी भी सैफ अली खान, सोहा अली खान या सबा पर किसी खास धर्म को मानने का दबाव नहीं बनाया।

## आस्था को बताया बेहद निजी मामला और मनाए सारे त्योहार
अपनी व्यक्तिगत आस्था पर बात करते हुए सबा पटौदी ने कहा कि उनका धर्म इस्लाम है और वे इससे गहरा जुड़ाव महसूस करती हैं। उन्होंने साझा किया कि जब भी वे ईश्वर या आध्यात्मिकता के बारे में सोचती हैं, तो उनके मन में स्वाभाविक रूप से अल्लाह का नाम ही आता है। इसके साथ ही सबा ने कहा कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे अन्य धर्मों का आदर नहीं करतीं। उनके अनुसार, आस्था एक बहुत ही व्यक्तिगत विषय है जिसे किसी पर जबरन नहीं थोपा जा सकता।

सबा ने यह भी बताया कि उनके भाई सैफ अली खान और बहन सोहा अली खान ने अलग-अलग धर्म के लोगों से शादियां की हैं, जिससे परिवार में धर्म को लेकर कोई सख्त नजरिया नहीं रहा। उनका बचपन एक ऐसे माहौल में बीता जहां हर धर्म के त्योहारों को समान उत्साह से मनाया जाता था। सबा अपने भाई-बहनों के साथ क्रिसमस, दिवाली और होली जैसे तमाम पर्व खुशियों के साथ मनाते हुए बड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता द्वारा दी गई यह स्वतंत्रता बिल्कुल सही थी और हर माता-पिता को अपने बच्चों को अपनी आस्था चुनने की ऐसी ही आजादी देनी चाहिए।

## फिल्मी दुनिया से दूर सबा पटौदी की अलग पहचान
1 मई 1976 को जन्मी सबा पटौदी की उम्र इस समय 50 साल है। अपनी मां शर्मिला टैगोर और भाई-बहनों सैफ अली खान व सोहा अली खान के विपरीत, सबा ने अभिनय के क्षेत्र में कदम न रखने का फैसला किया। बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर उन्होंने अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनाई है।

सबा पटौदी पेशे से एक सफल ज्वैलरी डिजाइनर हैं। इसके अलावा वे एक टैरो कार्ड रीडर और स्पिरिचुअल हीलर के रूप में भी सक्रिय हैं। अपनी इन कलात्मक और आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सबा एक बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी भी संभालती हैं। वे भोपाल स्थित रॉयल एंडोमेंट ट्रस्ट की चीफ कस्टोडियन हैं, जहां वे ऐतिहासिक पारिवारिक संपत्तियों और धर्मार्थ कार्यों की देखरेख करती हैं।

## इसका आप पर असर
**पारिवारिक संदर्भ में:** यह खबर बच्चों की परवरिश में धार्मिक स्पष्टता, आपसी समझ और सहिष्णुता के महत्व को रेखांकित करती है।

**व्यक्तिगत स्तर पर:** यह व्यक्तिगत आस्था के सम्मान और विभिन्न सांस्कृतिक व धार्मिक परंपराओं के साथ सामंजस्य बिठाने का संदेश देती है।

## सवाल-जवाब

### 1. सबा पटौदी के घर में मंदिर क्यों नहीं था?
सबा पटौदी के अनुसार, उनकी मां शर्मिला टैगोर ने बच्चों को स्पष्टता और मजबूत नींव देने के लिए इस्लाम की तालीम दी थी, ताकि वे भ्रमित न हों। इसी कारण घर में मंदिर नहीं रखा गया था।

### 2. क्या शर्मिला टैगोर और मन्सूर अली खान पटौदी ने बच्चों पर धर्म थोपा?
नहीं, सबा पटौदी ने स्पष्ट किया कि उनके माता-पिता ने उन पर या उनके भाई-बहनों सैफ और सोहा अली खान पर कभी किसी धर्म को मानने का दबाव नहीं बनाया।

### 3. सबा पटौदी की उम्र कितनी है और उनका जन्म कब हुआ था?
सबा पटौदी का जन्म 1 मई 1976 को हुआ था और उनकी उम्र 50 साल है।

### 4. सबा पटौदी का क्या पेशा है?
सबा पटौदी एक ज्वैलरी डिजाइनर, टैरो कार्ड रीडर और स्पिरिचुअल हीलर हैं। इसके अलावा वे भोपाल के रॉयल एंडोमेंट ट्रस्ट की चीफ कस्टोडियन भी हैं।

### 5. सबा पटौदी और उनका परिवार कौन-कौन से त्योहार मनाता है?
सबा और उनके भाई-बहन बचपन से ही दिवाली, होली और क्रिसमस जैसे विभिन्न धर्मों के त्योहार एक साथ मनाते आए हैं।

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