मास्टर रवि की कहानी: शशि कपूर से भिड़कर चमकी किस्मत, बने 'जूनियर अमिताभ' 70 और 80 के दशक के चर्चित बाल कलाकार मास्टर रवि ने चार साल की उम्र में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। दिग्गज शशि कपूर से हुई पहली तीखी और मजेदार झड़प के बाद उन्हें फिल्मों में एंट्री मिली और वे 'जूनियर अमिताभ' के नाम से मशहूर हुए। साठ और सत्तर के दशक के भारतीय सिनेमा पटल पर कई बाल कलाकारों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी, लेकिन जिस तरह की शोहरत मास्टर रवि वालेचा के हिस्से आई, वह बहुत कम लोगों को मिलती है। जीवन के चौथे वर्ष में ही कैमरा फेस करने वाले इस नन्हें सितारे ने देखते ही देखते सैकड़ों फिल्मों में अपने अभिनय के जलवे बिखेरे। मेगास्टार अमिताभ बच्चन के बचपन के रोल्स अदा करने की वजह से उन्हें 'जूनियर अमिताभ' की उपाधि से नवाजा गया। उस समय उनकी कमाई इतनी शानदार थी कि वे अपनी पीढ़ी के सबसे अमीर चाइल्ड आर्टिस्ट्स की सूची में सबसे ऊपर गिने जाते थे। लेकिन इस चमक-धमक और शोहरत के पीछे एक ऐसा संघर्ष भी छिपा था, जिसने उनसे उनका सहज बचपन छीन लिया और आगे चलकर उन्हें एक बिल्कुल अलग रास्ते पर ले गया। शशि कपूर के साथ पहली मुलाकात और कुर्सी का दिलचस्प किस्सा मास्टर रवि वालेचा की फिल्मी दुनिया में एंट्री किसी साधारण ऑडिशन या किसी बड़े फिल्मी खानदान की सिफारिश के जरिए नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे एक बहुत ही मजेदार वाकया जुड़ा हुआ है। साल 1976 में 'फकीरा' मूवी की शूटिंग चल रही थी। रवि के भाई इस प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे और उन्हीं के साथ चार साल का नन्हा रवि भी सेट पर जा पहुंचा था। उस जमाने में फिल्म के सेट पर कलाकारों और निर्देशकों के बैठने के लिए विशेष कुर्सियां रिजर्व रहती थीं। नासमझ रवि को यह नहीं मालूम था कि जिस आरामदेह कुर्सी पर वह जमता हुआ बैठा है, वह किसी और की नहीं बल्कि दिग्गज अभिनेता शशि कपूर की है। जब अपना शॉट पूरा करके शशि कपूर वहां आए, तो उन्होंने बच्चे से कहा कि वह उनकी कुर्सी खाली कर दे। बेबाक जवाब से बदला नन्हें रवि का पूरा भविष्य अपनी जगह से उठने के बजाय नन्हें रवि ने तपाक से जवाब दिया कि वह अपनी सीट छोड़ने वाले नहीं हैं। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि यदि शशि कपूर चाहें तो वे उनकी गोद में बैठ सकते हैं। बच्चे की इस मासूम और बेखौफ हाजिरजवाबी ने उस मंजे हुए कलाकार का दिल जीत लिया। शशि कपूर ने तुरंत फिल्म के डायरेक्टर से उस बच्चे को कैमरे के सामने लाने की सिफारिश कर डाली। इसके बाद 'फकीरा' में उन्हें शबाना आजमी के बेटे का चार साल की उम्र वाला रोल मिल गया। यह फिल्म 6 सितंबर 1976 को पर्दे पर आई थी और इसके कलाकारों में शशि कपूर, शबाना आजमी और डैनी डेंजोंगपा जैसे दिग्गज शामिल थे। इसके बाद रवि ने कई बड़ी फिल्मों में काम किया और अपनी खास पहचान बनाई। चौदह साल के सफर में तीन सौ से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कम उम्र में ही अभिनय के मैदान में उतरे रवि की लोकप्रियता आसमान छूने लगी थी। वे हिंदी के साथ-साथ तमिल और तेलुगु भाषा की मूवीज में भी नजर आने लगे। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने खुद इस बात का जिक्र किया था कि अपने बाल कलाकार के करियर के दौरान उन्होंने तीन सौ से अधिक फिल्मों में काम किया और चौदह साल तक इस इंडस्ट्री से पूरी तरह जुड़े रहे। जैसे-जैसे रवि की उम्र बढ़ी, उनके नैन-नक्श और हाव-भाव अमिताभ बच्चन से मिलने लगे। यही वजह थी कि वह कई दिग्गज निर्देशकों की पहली पसंद बन चुके थे। 'अमर अकबर एंथनी', 'कुली', 'शक्ति', 'देश प्रेमी', 'खुद्दार' और 'नास्तिक' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में उनके काम ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। अस्सी के दशक के सबसे महंगे और व्यस्त बाल कलाकार अस्सी के दौर में जहां आम कलाकारों को काम पाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़ते थे, वहीं मास्टर रवि अपनी पीढ़ी के सबसे ज्यादा पैसे कमाने वाले चाइल्ड आर्टिस्ट्स में गिने जाते थे। उस समय उन्हें रोजाना के तीन हजार से साढ़े तीन हजार रुपए मेहनताना मिलता था। आज के समय की महंगाई और मुद्रास्फीति के हिसाब से अगर इसका आकलन किया जाए, तो यह रकम रोजाना सत्तर हजार से नब्बे हजार रुपए बैठती है। निर्माता-निर्देशकों के बीच उनकी डिमांड इतनी ज्यादा थी कि रवि एक ही दिन में चार-चार शिफ्ट्स में काम करते थे। उनकी इस ताबड़तोड़ सफलता का सबसे बड़ा आधार उनकी बेहतरीन लोकप्रियता के साथ-साथ उनका एक ही टेक में ओके हो जाने वाला रिकॉर्ड भी था। बचपन की कीमत चुकाकर मिली सफलता और गुमनामी बेहिसाब धन, नाम और शोहरत मिलने के बावजूद, रवि वालेचा को इस सफलता की भारी कीमत अपने बचपन के रूप में चुकानी पड़ी। जिस उम्र में बाकी बच्चे स्कूलों के खेल के मैदानों में मस्ती करते थे, रवि मुंबई के अलग-अलग स्टूडियो की चकाचौंध और लाइटों के बीच काम कर रहे थे। काम के अत्यधिक बोझ ने उन्हें उम्र से पहले ही बहुत समझदार बना दिया था। अपनी पुरानी यादों को याद करते हुए उन्होंने एक बार साझा किया था कि उन्होंने जीवन में बहुत कुछ खो दिया है क्योंकि बिना किसी त्याग के कुछ हासिल नहीं होता। उन्होंने बताया कि आठ साल की उम्र में भी वे एक चौबीस साल के वयस्क की तरह विचार करते थे और लगातार काम करने के चलते उनका पूरा बचपन और किशोरावस्था गायब हो चुकी थी। मनमोहन देसाई से रिश्ता और सिनेमा से दूरी रवि ने मशहूर निर्देशक मनमोहन देसाई के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया था और वे उनके चहेते कलाकारों में गिने जाते थे। उनकी अभिनय यात्रा का आखिरी बड़ा प्रोजेक्ट साल 1985 में आई फिल्म 'गिरफ्तार' था। अठारह साल की उम्र तक आते-आते उन्होंने फिल्मों से पूरी तरह किनारा कर लिया और एक नई दिशा की ओर बढ़ चले। सवाल-जवाब 1. मास्टर रवि ने अपने करियर में कुल कितनी फिल्मों में काम किया था? मास्टर रवि ने अपने चौदह साल लंबे करियर के दौरान तीन सौ से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया था। 2. मास्टर रवि को 'जूनियर अमिताभ' क्यों कहा जाता था? उन्होंने कई फिल्मों में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के बचपन के किरदार निभाए थे और उनकी शक्ल-सूरत भी उनसे काफी मिलती थी। 3. फिल्मी दुनिया में मास्टर रवि की एंट्री कैसे हुई थी? साल 1976 में फिल्म 'फकीरा' की शूटिंग के दौरान चार साल के रवि शशि कपूर की कुर्सी पर बैठ गए थे और उनके बेबाक जवाब से प्रभावित होकर उन्हें कास्ट कर लिया गया था। 4. अस्सी के दशक में मास्टर रवि की रोजाना की कमाई कितनी थी? उस दौर में उन्हें प्रति दिन तीन हजार से साढ़े तीन हजार रुपए मेहनताना मिलता था। 5. रवि ने किस उम्र में फिल्मों से दूरी बना ली थी? अठारह साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते रवि ने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया था। https://trendkia.com/bollywood/master-ravi-journey-how-a-bold-reply-to-shashi-kapoor-made-him-junior-amitabh-25430 TrendKia — Har trend, sabse pehle.