# मिशन मंगल रिव्यू (2019): अक्षय कुमार और पांच अभिनेत्रियों वाली इस ब्लॉकबस्टर ने बॉक्स ऑफिस पर छापे थे 290 करोड़

> साल 2019 में रिलीज हुई फिल्म 'मिशन मंगल' ने महज 40 से 45 करोड़ के बजट में बनकर दुनिया भर में 290 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया था। इस अंतरिक्ष ड्रामा फिल्म में अक्षय कुमार के साथ पांच प्रमुख अभिनेत्रियों ने दमदार अभिनय किया था।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/mission-mangal-review-2019-how-akshay-kumar-and-five-leading-ladies-conquered-the-box-office-with-rs-290-crore-51095 · **Language:** Hindi
**Tags:** मिशन मंगल, अक्षय कुमार, विद्या बालन, जगन शक्ति, बॉलीवुड रिव्यू, इसरो मिशन

मिशन मंगल रिव्यू (2019): बॉलीवुड के गलियारों में अंतरिक्ष और विज्ञान पर आधारित फिल्मों का निर्माण हमेशा से ही बहुत खर्चीला सौदा माना जाता है, लेकिन निर्देशक जगन शक्ति के निर्देशन में बनी फिल्म 'मिशन मंगल' ने कम बजट में भी वर्ल्ड-क्लास सिनेमा का बेहतरीन उदाहरण पेश कर एक नया इतिहास रच दिया था। जब यह फिल्म 15 अगस्त 2019 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सिनेमाघरों में उतरी, तो इसे दर्शकों और समीक्षकों की तरफ से बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिली। इस मल्टी-स्टारर फिल्म का मूल निर्माण बजट लगभग 40 से 45 करोड़ रुपये के आसपास था, जिसने बॉक्स ऑफिस पर अपनी लागत से कई गुना ज्यादा कमाई करते हुए दुनिया भर में कुल 290 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया। केवल घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ही इस मूवी ने 200 करोड़ रुपये का जादुई आंकड़ा आसानी से पार कर लिया और यह सुपरस्टार अक्षय कुमार के फिल्मी करियर की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलताओं में शुमार हो गई।

 

## शानदार स्टार कास्ट और अनोखी कहानी

इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी अनूठी और दमदार स्टार कास्ट थी, जिसमें एक साथ कई बड़े कलाकारों ने स्क्रीन शेयर किया। फिल्म में अक्षय कुमार और शरमन जोशी के रूप में दो मुख्य पुरुष अभिनेता नजर आए, जिन्होंने अपनी अदायगी से कहानी को मजबूती दी। वहीं दूसरी ओर, इस प्रोजेक्ट की असली ताकत इसकी पांच प्रमुख अभिनेत्रियां थीं, जिनमें विद्या बालन, तापसी पन्नू, सोनाक्षी सिन्हा, कीर्ति कुल्हारी और नित्या मेनन शामिल थीं। आमतौर पर यह देखा जाता है कि मल्टी-स्टारर फिल्मों में कलाकारों के बीच स्क्रीन टाइम और लाइमलाइट को लेकर खींचतान रहती है, लेकिन इस मूवी में हर एक किरदार को बराबर तवज्जो और सम्मान दिया गया। कहानी में महिला वैज्ञानिकों के अडिग जज्बे और उनकी व्यक्तिगत तथा पेशेवर जिंदगी के बीच के संघर्ष व संतुलन को बहुत ही खूबसूरती के साथ पर्दे पर उतारा गया, जिसने सिनेमाप्रेमियों का दिल जीत लिया।

 

## इसरो के मार्स ऑर्बिटर मिशन पर आधारित प्रेरणादायक प्लॉट

फिल्म की पटकथा भारत के ऐतिहासिक मार्स ऑर्बिटर मिशन पर पूरी तरह से आधारित है, जिसे हमारे देश ने बेहद सीमित बजट और न्यूनतम संसाधनों के बावजूद सफलतापूर्वक पूरा करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। डायरेक्टर जगन शक्ति ने इतने पेचیدہ और मुश्किल वैज्ञानिक प्रोसेस को बेहद सरल, सहज और मनोरंजक भाषा में आम दर्शकों के सामने पेश किया, जिसे एक आम इंसान भी आसानी से समझ सकता है। फिल्म का वह बेहद चर्चित और रोमांचक दृश्य आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है जब विद्या बालन का किरदार तारा शिंदे रसोई में पूरी तलने की घरेलू तकनीक यानी होम साइंस का इस्तेमाल करके सैटेलाइट के इंजन को ऊर्जा देने का नायाब आइडिया खोज निकालती है। इस शानदार तरीके से कम ईंधन में मंगल ग्रह की कक्षा तक पहुंचने का जुगाड़ निकाला जाता है। विज्ञान और भावनाओं का यह अनूठा संगम ही इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी और यूएसपी साबित हुआ।

 

## क्लाइमेक्स का रोमांच और देशभक्ति की भावना

भले ही देश के हर नागरिक को पहले से ही इस बात की पूरी जानकारी थी कि भारत का मार्स ऑर्बिटर मिशन सफल रहा है, लेकिन इसके बावजूद फिल्म का स्क्रीनप्ले और इसका क्लाइमेक्स इस तरह से बुना गया था कि दर्शक अपनी सीटों से बंधे रहने को मजबूर हो जाएं। अंतरिक्ष यात्रा के दौरान रॉकेट लॉन्चिंग के वक्त आई तमाम तकनीकी बाधाएं, खराब मौसम का मंडराता हुआ गंभीर खतरा और सिर पर लटकती सख्त डेडलाइन ने मिलकर पर्दे पर एक ऐसा रोमांचक अनुभव पैदा किया जिसने देखने वालों की धड़कनों को तेज कर दिया। स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व पर रिलीज होने के कारण फिल्म में कूट-कूट कर भरी देशभक्ति की भावना ने हर आयु वर्ग के दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में अहम भूमिका निभाई। यह फिल्म केवल एक कमर्शियल एंटरटेनर नहीं थी, बल्कि उन तमाम गुमनाम महिला वैज्ञानिकों को एक सच्ची श्रद्धांजलि थी जिन्होंने भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनाने के लिए बिना थके और बिना रुके अथक परिश्रम किया था।

 

## सफलता और महिला सशक्तिकरण का संदेश

बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों और शानदार समीक्षाओं से परे, इस फिल्म ने इस बात का पुख्ता प्रमाण दे दिया कि भारतीय महिलाएं घर की रसोई से लेकर अंतरिक्ष की अथाह गहराइयों तक, हर मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन कर सकती हैं। साल 2019 में बड़े पर्दे पर आई यह फिल्म आज भी दर्शकों के बीच उतनी ही लोकप्रिय है और इसे आज के दौर की भी बेहतरीन पारिवारिक व प्रेरणादायक फिल्मों में गिना जाता है। कम लागत में अंतरिक्ष के सफर को इतने भव्य तरीके से पर्दे पर उतारना मेकर्स की बड़ी जीत थी, जिसने यह साबित कर दिया कि बेहतरीन सिनेमा के लिए सिर्फ बड़ा बजट ही नहीं, बल्कि एक मजबूत और जज्बे से भरी कहानी का होना भी उतना ही जरूरी है।

## इसका आप पर असर
फिल्म की बॉक्स ऑफिस सफलता और अंतरिक्ष विज्ञान पर आधारित इसके प्रभाव का असर दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री पर गहरा रहा है।

- **दर्शकों के लिए:** दर्शकों को कम बजट में भी उच्च स्तर की प्रेरणादायक और देशभक्ति से ओत-प्रोत फिल्में देखने का मौका मिला। इससे लोगों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि और जिज्ञासा दोनों में इजाफा हुआ।

- **फिल्म इंडस्ट्री के लिए:** निर्माताओं और निर्देशकों को यह विश्वास मिला कि बड़े बजट के बिना भी केवल मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के दम पर ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाई जा सकती हैं।

- **महिला सशक्तिकरण:** इस फिल्म ने समाज में यह मजबूत संदेश दिया कि महिलाएं विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में भी पुरुषों के बराबर नेतृत्व कर सकती हैं।

- **बॉक्स ऑफिस पर असर:** फिल्म ने यह साबित कर दिया कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर सही विषय चुनने से फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम कर सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्म की बंपर सफलता और इसके निर्माण के पीछे कई खास वजहें और परिस्थितियां जिम्मेदार थीं जिन्होंने इसे ब्लॉकबस्टर बनाया।

- **कम लागत में बेहतरीन मेकिंग:** मेकर्स ने वीएफएक्स और प्रोडक्शन लागत को नियंत्रित रखते हुए केवल 40 से 45 करोड़ रुपये के बजट में अंतरिक्ष मिशन जैसी जटिल कहानी को प्रभावी ढंग से पर्दे पर उतारा।

- **स्टार कास्ट का संतुलन:** अक्षय कुमार जैसे बड़े स्टार के साथ पांच शीर्ष अभिनेत्रियों को समान महत्व देने से फिल्म का दायरा और दर्शक वर्ग दोनों काफी बड़े हो गए।

- **वैज्ञानिक विषयों का सरलीकरण:** इसरो के जटिल मार्स ऑर्बिटर मिशन को आम जनता की भाषा में और घरेलू उदाहरणों से समझाकर निर्देशक ने इसे हर वर्ग के दर्शक से जोड़ दिया।

- **रिलीज की सही तारीख:** 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज होने के कारण फिल्म की देशभक्ति की थीम ने स्वाभाविक रूप से दर्शकों को सिनेमाघरों की तरफ आकर्षित किया।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या मिशन मंगल देखने लायक है?
हाँ, यह फिल्म अपने प्रेरणादायक कथानक, बेहतरीन अभिनय और रोमांचक क्लाइमेक्स के चलते देखने लायक है।

### 2. मिशन मंगल का बजट कितना था?
इस फिल्म का ओरिजिनल प्रोडक्शन बजट लगभग 40 से 45 करोड़ रुपये था।

### 3. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कुल कितनी कमाई की थी?
फिल्म ने देश और दुनिया भर में कुल मिलाकर 290 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया था।

### 4. मिशन मंगल किस घटना पर आधारित थी?
यह फिल्म भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के मार्स ऑर्बिटर मिशन पर आधारित थी।

### 5. फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में कौन-कौन कलाकार थे?
फिल्म में अक्षय कुमार, शरमन जोशी, विद्या बालन, तापसी पन्नू, सोनाक्षी सिन्हा, कीर्ति कुल्हारी और नित्या मेनन ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं।

### 6. मिशन मंगल को किस निर्देशक ने निर्देशित किया था?
इस फिल्म का निर्देशन जगन शक्ति ने किया था।

### 7. यह फिल्म किस तारीख को रिलीज हुई थी?
यह फिल्म 15 अगस्त 2019 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।

## प्रेरणा और सबक
मिशन मंगल की सफलता और इसकी कहानी से कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सीख ली जा सकती हैं।

- **सीमित संसाधनों में सफलता:** बड़े बजट की कमी को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय रचनात्मकता और मजबूत योजना से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।

- **टीम वर्क और समानता:** किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में हर सदस्य के योगदान को बराबर सम्मान देने से सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

- **घरेलू तरीकों का महत्व:** कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान कभी-कभी हमारे दैनिक जीवन के साधारण अनुभवों और तौर-तरीकों में छिपा होता है।

- **दृढ़ संकल्प:** विपरीत परिस्थितियों और कड़े डेडलाइन के बावजूद अपने लक्ष्य पर टिके रहकर इतिहास बदला जा सकता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._