मुकेश खन्ना की बड़े पर्दे पर वापसी, जानिए क्यों सालों तक फिल्मों से दूर रहे शक्तिमान फेम एक्टर धारावाहिक शक्तिमान फेम वरिष्ठ अभिनेता मुकेश खन्ना आगामी फिल्म विश्वगुरु के साथ सिनेमाघरों में लौट रहे हैं। उन्होंने फिल्मों से लंबे अंतराल और काम के चयन को लेकर अपनी बात साझा की है। भारतीय टेलीविजन के लोकप्रिय धारावाहिक शक्तिमान से घर-घर में पहचान बनाने वाले वरिष्ठ अभिनेता मुकेश खन्ना अब एक बार फिर रूपहले पर्दे पर नजर आने की तैयारी में हैं। अपनी आगामी फिल्म विश्वगुरु को लेकर अभिनेता काफी उत्साहित दिखाई दे रहे हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब इस प्रोजेक्ट की पटकथा उनके पास पहुंची, तो विषय की गहराई और मजबूती ने उनका दिल छू लिया, जिसके बाद उन्होंने इस फिल्म का हिस्सा बनने का फैसला किया। पिछले काफी समय से सिनेमा के पर्दे से दूर रहे अभिनेता का मानना है कि मजबूत कहानी मिलने पर वे खुद को इस सफर से जुड़ने से नहीं रोक सके। काम की तलाश में भागदौड़ नहीं करने का फैसला सिनेमा जगत से लंबे समय तक दूर रहने और स्क्रीन पर बेहद कम नजर आने की वजह साझा करते हुए मुकेश खन्ना ने अपने करियर के उसूलों पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे काम हासिल करने के लिए किसी के पास अर्जी लगाने या भागदौड़ करने के पक्षधर कभी नहीं रहे। उनका मानना है कि जब कोई निर्देशक या निर्माता उनके पास एक दमदार और प्रभावशाली किरदार लेकर आता है, तो वे पूरे मन और खुशी से उसे स्वीकार करते हैं। सिर्फ स्क्रीन पर दिखने के लिए किसी भी तरह का रोल स्वीकार करना उनके स्वभाव और काम करने के तौर-तरीके में शामिल नहीं रहा है। देव आनंद की सेंसर के बाद एक लंबा अंतराल अपने फिल्मी सफर के पुराने पड़ावों को याद करते हुए वरिष्ठ अभिनेता ने उल्लेख किया कि सिनेमाघरों में व्यापक स्तर पर प्रदर्शित होने वाली उनकी पिछली मुख्य फिल्म देव आनंद के निर्देशन में बनी सेंसर थी। उस प्रोजेक्ट के बाद एक लंबा दौर बीता जब वे बड़े पर्दे के मुख्यधारा प्रोजेक्ट्स में दिखाई नहीं दिए। अब इतने सालों के बाद विश्वगुरु के साथ जुड़ना उनके लिए एक ताजगी भरा और संतोषजनक रचनात्मक अनुभव साबित हुआ है। उनका कहना है कि इस फिल्म का कथानक केवल एक ढर्रे पर नहीं चलता, बल्कि इसमें कई दिलचस्प और विचारोत्तेजक कहानियां एक साथ बुनी गई हैं, जो दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखेंगी। गुजराती भाषा की चिंता और निर्माताओं का आश्वासन इस प्रोजेक्ट को स्वीकार करने के शुरुआती दौर में अभिनेता के मन में भाषा को लेकर एक बड़ा संशय था। पटकथा पसंद आने के बावजूद उन्होंने शुरुआत में निर्माताओं के सामने अपनी असमर्थता जाहिर कर दी थी। उन्होंने निर्माताओं को दो टूक बताया था कि उन्हें गुजराती भाषा बोलने का अभ्यास नहीं है, इसलिए वे इस संबंध में संकोच कर रहे थे। हालांकि, निर्माताओं ने उनकी इस चिंता को पूरी तरह दूर करते हुए भरोसा दिलाया कि उनके सभी संवाद पूरी फिल्म में केवल हिंदी में ही रखे जाएंगे। भाषा की इस स्पष्टता और आश्वासन के बाद ही अभिनेता ने आधिकारिक तौर पर इस फिल्म में काम करने की सहमति दी। शिक्षा मंत्रियों और अभिभावकों के लिए सामाजिक सीख फिल्म के संदेश और सामाजिक सरोकार पर जोर देते हुए अभिनेता ने कहा कि यह परियोजना केवल सामान्य मनोरंजन तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, विश्वगुरु में समाज और देश से जुड़े अत्यंत संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया गया है। उन्होंने विचार रखा कि इस फिल्म को केवल युवाओं तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि देश के सभी अभिभावकों और परिवारों को भी इसे देखना चाहिए। इसके अलावा, जो लोग भारत की शैक्षणिक नीतियों का संचालन कर रहे हैं, उन शिक्षा मंत्रियों को भी यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए ताकि वे इसमें छुपे गहरे संदेश और सीख को समझ सकें। इसका आप पर असर सिनेमा प्रेमियों और पारिवारिक दर्शकों के लिए एक वरिष्ठ अभिनेता की वापसी और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन सीधा महत्व रखता है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: दर्शकों को लंबे अंतराल के बाद एक प्रतिष्ठित अभिनेता की दमदार स्क्रीन उपस्थिति देखने को मिलेगी। इससे साफ-सुथरे और संदेशपरक सिनेमा की तलाश कर रहे दर्शकों को नया विकल्प मिलेगा। • अभिभावकों के लिए: फिल्म में बच्चों और समाज के संवेदनशील मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। माता-पिता इसके जरिए वर्तमान शैक्षणिक व सामाजिक परिवेश से जुड़े सवालों को समझ सकेंगे। • शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए: यह फिल्म देश की व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली से जुड़े पहलुओं पर विमर्श खड़ा करती है। शिक्षा नीति निर्धारकों के लिए इस कथानक में व्यावहारिक सोच और सीख देखने को मिल सकती है। • क्षेत्रीय सिनेमा के दर्शकों के लिए: हिंदी और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के निर्माताओं का यह समन्वय व्यापक पहुंच बनाता है। इससे विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के कलाकारों का रचनात्मक तालमेल मजबूत होता है। ऐसा क्यों हुआ मुकेश खन्ना का यह फैसला उनके अभिनय सिद्धांतों और फिल्म की प्रासंगिक विषयवस्तु के चलते सामने आया है। • मजबूत पटकथा का प्रभाव: पटकथा में कई समानांतर और विचारणीय कहानियों का अनूठा समावेश था। इसी सशक्त कहानी ने अभिनेता को लंबे अंतराल के बाद प्रोजेक्ट स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। • काम के चयन का उसूल: अभिनेता नियमित भूमिकाओं के पीछे भागने के बजाय चुनिंदा किरदारों को तरजीह देते हैं। जब उन्हें एक उपयुक्त और सार्थक भूमिका मिली, तभी उन्होंने अपनी सहमति दी। • भाषा की स्पष्टता: निर्माताओं ने संवादों को पूरी तरह हिंदी में रखने का ठोस आश्वासन दिया। इस सहमति ने भाषा संबंधी हिचकिचाहट को दूर कर उनके जुड़ने का रास्ता साफ किया। सवाल-जवाब 1. मुकेश खन्ना किस नई फिल्म से बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं? मुकेश खन्ना आगामी फिल्म विश्वगुरु के जरिए बड़े पर्दे पर वापसी करने जा रहे हैं। 2. मुकेश खन्ना इतने लंबे समय तक फिल्मों से दूर क्यों रहे? उन्होंने बताया कि वे काम मांगने या रोल के पीछे भागदौड़ करने के बजाय केवल दमदार और अच्छे ऑफर्स मिलने पर ही काम करना पसंद करते हैं। 3. बड़े पर्दे पर बड़े पैमाने पर रिलीज होने वाली उनकी पिछली फिल्म कौन सी थी? उनकी पिछली व्यापक रिलीज देव आनंद के निर्देशन में बनी फिल्म सेंसर थी। 4. फिल्म विश्वगुरु साइन करने से पहले अभिनेता के मन में क्या संकोच था? उन्हें गुजराती भाषा न आने को लेकर संकोच था, जिसे निर्माताओं ने सभी डायलॉग हिंदी में रखने का भरोसा देकर दूर किया। 5. मुकेश खन्ना के अनुसार यह फिल्म किन लोगों को जरूर देखनी चाहिए? उनका मानना है कि यह फिल्म देश के युवाओं, अभिभावकों और शिक्षा व्यवस्था का संचालन कर रहे शिक्षा मंत्रियों को जरूर देखनी चाहिए। https://trendkia.com/bollywood/mukesh-khanna-ki-bare-parde-para-vapasi-janie-kyon-salon-taka-philmon-se-dura-rahe-shaktimaan-phema-ektara-42420 TrendKia — Har trend, sabse pehle.