मुंबई में किताब विमोचन पर दिखी गुलजार और जया बच्चन की आत्मीयता, सिनेमा के शुरुआती दौर से जुड़ा है दोनों का रिश्ता मुंबई में एक पुस्तक विमोचन के मंच पर जया बच्चन और गुलजार की गर्मजोशी भरी मुलाकात ने दर्शकों का ध्यान खींचा। दोनों की यह रचनात्मक साझेदारी वर्ष 1971 की फिल्म 'गुड्डी' से शुरू होकर कई यादगार फिल्मों तक फैली हुई है। मुंबई में आयोजित एक विशेष पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान मंच पर जब जया बच्चन और प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक गुलजार आमने-सामने आए, तो दोनों के बीच की पुरानी आत्मीयता साफ झलक रही थी। इस कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन भी उपस्थित थे। डॉक्टर पी. जगन्नाथ की पुस्तक 'डीआर ब्लू: ए कैंसर सर्जन्स जर्नी इनटू द ह्यूमन साइड ऑफ हीलिंग' के लोकार्पण के अवसर पर जया बच्चन काफी प्रसन्न मुद्रा में नजर आईं और गुलजार के साथ उनकी बातचीत के पलों ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि हिंदी सिनेमा के उस सुनहरे दौर की याद दिला रही थी जब दोनों ने मिलकर कई यादगार प्रोजेक्ट्स पर काम किया था। सिनेमाई सफर की शुरुआती कड़ी बनी फिल्म गुड्डी जया बच्चन और गुलजार के आपसी संबंधों की जड़ें फिल्मी सेट पर ही मजबूत हुई थीं। जब जया बच्चन ने हिंदी फिल्म उद्योग में अपना करियर शुरू किया और अपने सहज अभिनय से एक नई पहचान गढ़ रही थीं, तभी उनका संपर्क गुलजार से हुआ। वर्ष 1971 में ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म 'गुड्डी' इस रचनात्मक साझेदारी का पहला बड़ा पड़ाव साबित हुई। इस फिल्म में जया बच्चन ने शीर्षक किरदार यानी गुड्डी की मुख्य भूमिका निभाई थी, जिसने उन्हें रातोंरात दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया था। फिल्म 'गुड्डी' के संवाद गुलजार ने ही लिखे थे। इसके साथ ही उन्होंने इस फिल्म के लिए एक ऐसा अमर गीत रचा जो आज भी भारतीय जनमानस में रचा-बसा है। 'हमको मन की शक्ति देना' शीर्षक वाला यह प्रार्थना गीत दशकों बाद भी देश भर के अनेक स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभाओं में गाया जाता है। संवाद और अभिनय के इस मेल ने दोनों कलाकारों के बीच एक मजबूत रचनात्मक तालमेल की नींव रख दी थी। बतौर निर्देशक गुलजार की फिल्मों में जया की मुख्य भूमिका गुलजार ने जब स्वतंत्र रूप से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा, तो उन्होंने अपनी शुरुआती दो महत्वपूर्ण फिल्मों में मुख्य भूमिका के लिए जया बच्चन पर ही भरोसा जताया। वर्ष 1972 में प्रदर्शित हुई फिल्म 'कोशिश' इस कड़ी का सबसे संवेदनशील उदाहरण है। गुलजार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जया बच्चन और संजीव कुमार ने मुख्य किरदार निभाए थे। फिल्म में जया बच्चन ने आरती माथुर नाम की मूक-बधिर युवती का किरदार निभाया, जबकि संजीव कुमार ने हरि की भूमिका अदा की थी। समाज में दिव्यांग दंपती के संघर्ष, उनके जीवन के उतार-चढ़ाव और आपसी रिश्ते की गहराई को इस कहानी के केंद्र में रखा गया था। उसी वर्ष यानी 1972 में ही गुलजार के निर्देशन में बनी एक और क्लासिक फिल्म 'परिचय' सामने आई, जिसमें जया बच्चन ने रमा रॉय का अहम किरदार निभाया। इस फिल्म में उनके साथ जितेंद्र और प्राण जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। 'परिचय' की कहानी पारिवारिक रिश्तों, अनुशासनात्मक संघर्षों, बच्चों के मनोविज्ञान और भावनात्मक जुड़ाव के महत्व को बड़ी ही सादगी से पर्दे पर प्रस्तुत करती है। बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रहीं दोनों क्लासिक फिल्में निर्देशन के स्तर पर गुलजार और अभिनय के स्तर पर जया बच्चन का यह संयोजन टिकट खिड़की पर भी बेहद कामयाब साबित हुआ। वर्ष 1972 में रिलीज हुईं 'कोशिश' और 'परिचय', दोनों ही फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों की भरपूर सराहना मिली। इन दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट का दर्जा हासिल किया और समय के साथ भारतीय सिनेमा के इतिहास में क्लासिक कृतियों के रूप में दर्ज हो गईं। गंभीर मानवीय संवेदनाओं को व्यावसायिक सफलता के साथ जोड़ने का यह एक दुर्लभ उदाहरण बना। बच्चन परिवार से गुलजार का दशकों पुराना नाता गुलजार का यह गहरा संबंध सिर्फ जया बच्चन तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरे बच्चन परिवार के साथ उनके रिश्ते कई दशकों पुराने हैं। अमिताभ बच्चन के साथ भी उनका पेशेवर जुड़ाव सिनेमाई जगत में लंबे समय से बना हुआ है। दोनों ने अलग-अलग भूमिकाओं और रचनात्मक स्तरों पर एक साथ काम किया है। इसके अलावा साहित्य, कविता और कलात्मक सिनेमा के प्रति दोनों की गहरी रुचि ने इस व्यक्तिगत और पेशेवर संबंध को और भी अधिक मजबूत बनाया है। इसका आप पर असर सिनेमा प्रेमियों और पाठकों के लिए यह प्रसंग भारतीय कला जगत के क्लासिक दौर के संरक्षण और मानवीय संबंधों के महत्व को दर्शाता है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह पुरानी क्लासिक फिल्मों और उनके निर्माण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने का अवसर देता है। दर्शक 'कोशिश' और 'परिचय' जैसी संवेदनशील फिल्मों की विरासत से दोबारा जुड़ सकते हैं। • पाठकों के लिए: कैंसर सर्जन डॉक्टर पी. जगन्नाथ की नई पुस्तक चिकित्सा और मानवीय संवेदनशीलता के पहलुओं को सामने लाती है। गंभीर स्वास्थ्य यात्राओं से जुड़े अनुभवों को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए यह एक उपयोगी संसाधन बन सकती है। • विद्यार्थियों के लिए: 'हमको मन की शक्ति देना' जैसे प्रसिद्ध प्रार्थना गीतों के साहित्यिक महत्व की जानकारी मिलती है। यह दिखाता है कि सिनेमा का सार्थक साहित्य किस तरह पीढ़ियों तक दैनिक जीवन का हिस्सा बना रह सकता है। • कला क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए: रचनात्मक तालमेल और दशकों तक चलने वाले पेशेवर संबंधों के मूल्यों की सीख मिलती है। यह स्पष्ट करता है कि आपसी सम्मान से उत्कृष्ट कृतियों का निर्माण कैसे संभव होता है। ऐसा क्यों हुआ यह घटना मुंबई में कैंसर सर्जन डॉक्टर पी. जगन्नाथ की पुस्तक के विमोचन समारोह के आयोजन के कारण सामने आई, जहां सिनेमा जगत की दिग्गज हस्तियों को आमंत्रित किया गया था। • पुस्तक विमोचन का मंच: डॉक्टर पी. जगन्नाथ की चिकित्सा आधारित पुस्तक 'डीआर ब्लू: ए कैंसर सर्जन्स जर्नी इनटू द ह्यूमन साइड ऑफ हीलिंग' का औपचारिक लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस गरिमामय अवसर पर जया बच्चन, अमिताभ बच्चन और गुलजार एक साथ मंच पर उपस्थित हुए। • दशकों पुराना रचनात्मक इतिहास: सार्वजनिक मंच पर दोनों की गर्मजोशी इसलिए भी स्वाभाविक दिखी क्योंकि उनका परिचय 1971 की फिल्म 'गुड्डी' के समय से है। पचास से अधिक वर्षों का यह पेशेवर और आत्मीय संबंध मंच पर सहज बातचीत के रूप में दिखाई दिया। • साझा कलात्मक रुचि: बच्चन परिवार और गुलजार के बीच साहित्य, कविता और सिनेमा के प्रति गहरी समानता रही है। इसी साझा सांस्कृतिक लगाव ने उनके पारिवारिक और पेशेवर रिश्तों को कई दशकों तक जीवंत बनाए रखा है। सवाल-जवाब 1. जया बच्चन और गुलजार हाल ही में किस कार्यक्रम में साथ नजर आए? दोनों मुंबई में डॉक्टर पी. जगन्नाथ की पुस्तक 'डीआर ब्लू: ए कैंसर सर्जन्स जर्नी इनटू द ह्यूमन साइड ऑफ हीलिंग' के विमोचन समारोह में शामिल हुए थे। 2. गुलजार के निर्देशन में जया बच्चन ने कौन सी दो फिल्में की थीं? जया बच्चन ने वर्ष 1972 में गुलजार द्वारा निर्देशित दो फिल्मों, 'कोशिश' और 'परिचय' में अभिनय किया था। 3. फिल्म 'कोशिश' में जया बच्चन ने क्या भूमिका निभाई थी? इस फिल्म में जया बच्चन ने आरती माथुर नाम की एक मूक-बधिर महिला का किरदार निभाया था, जिसमें उनके साथ संजीव कुमार मुख्य भूमिका में थे। 4. फिल्म 'गुड्डी' में गुलजार का क्या योगदान था? ऋषिकेश मुखर्जी द्वारा निर्देशित इस फिल्म के संवाद गुलजार ने लिखे थे और उन्होंने अमर प्रार्थना गीत 'हमको मन की शक्ति देना' भी रचा था। 5. फिल्म 'परिचय' में जया बच्चन के अलावा कौन से प्रमुख कलाकार थे? फिल्म 'परिचय' में जया बच्चन के साथ जितेंद्र और प्राण जैसे कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। https://trendkia.com/bollywood/munbai-men-kitaba-vimochana-para-dikhi-gulzar-aura-jaya-bachchan-ki-atmiyata-sinema-ke-shuruati-daura-se-jura-hai-donon-ka-rishta-44353 TrendKia — Har trend, sabse pehle.