नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार में बेटे मल्हार ने मुंह पर उल्टा हाथ रखकर क्यों लगाई आवाज पुणे के डोंजे फार्महाउस पर नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के समय बेटे मल्हार द्वारा मुखाग्नि से पहले मुंह पर उल्टा हाथ रखकर पुकारने की क्रिया ने सबका ध्यान खींचा। पुणे के पास डोंजे गांव स्थित फार्महाउस पर गुरुवार देर रात दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान वहां मौजूद हजारों लोगों ने नम आंखों से अभिनेता को याद किया और परिसर नाना अमर रहें के नारों से गूंज उठा। अंतिम संस्कार की मुख्य रस्में उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने पूरी कीं। जब मल्हार पिता की चिता को मुखाग्नि देने आगे बढ़े, तब उन्होंने एक अनोखी क्रिया की जिससे सभी की निगाहें उन पर टिक गईं। मुखाग्नि समर्पित करने से ठीक पहले मल्हार ने अपना उल्टा हाथ मुंह पर रखा और तेज आवाज में पुकारा। इस मार्मिक दृश्य के सामने आने के बाद से ही लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि इस भावुक पल में किए गए इशारे की असल वजह क्या है और क्या इसका कोई पारंपरिक आधार है। मुखाग्नि से ठीक पहले मल्हार पाटेकर के उस भावुक इशारे की चर्चा आमतौर पर दाह संस्कार के समय परिजन शांत रहकर या अश्रुपूरित होकर अपने प्रियजन को अंतिम प्रणाम करते हैं। लेकिन मल्हार पाटेकर द्वारा मुंह पर उलटा हाथ रखकर जोर से आवाज लगाने की घटना ने उपस्थित जनसमूह और प्रशंसकों के बीच गहरी चर्चा छेड़ दी। कुछ क्षेत्रों और विशिष्ट समुदायों में शवदाह के समय अलग तरह के रीति-रिवाज निभाने का चलन रहा है। मल्हार के इस कदम को भी कई लोग इन्हीं सामाजिक या पारिवारिक परंपराओं के चश्मे से देख रहे हैं। हालांकि, इस विशिष्ट क्रिया को लेकर मल्हार अथवा पाटेकर परिवार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है। परिवार की ओर से कोई बात सामने न आने के कारण इसे किसी तयशुदा धार्मिक नियम के तौर पर प्रस्तुत करना उचित नहीं है, बल्कि यह उनकी निजी भावना या पारिवारिक परंपरा का हिस्सा भी हो सकता है। उल्टा हाथ रखकर आवाज लगाने से जुड़ी लोक परंपराएं और मान्यताएं भारत में अंतिम संस्कार से जुड़ी पद्धतियां और रीतियां अलग-अलग इलाकों, जातियों और पारिवारिक परंपराओं के हिसाब से काफी भिन्न होती हैं। महाराष्ट्र सहित देश के कई अंचलों में शव को अग्नि देते समय विशेष ध्वनि निकालने या हाथों से खास संकेत करने की स्थानीय प्रथाएं प्रचलित हैं। विभिन्न समुदायों में इन संकेतों के मायने भी अलग-अलग निकाले जाते हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि मुंह पर उल्टा हाथ रखकर तेज आवाज लगाना पूरे हिंदू समाज का कोई अनिवार्य या सार्वभौमिक नियम नहीं है। कुछ लोक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी क्रियाएं दिवंगत आत्मा की परलोक यात्रा, संसार के बंधनों और सांसारिक मोह से अंतिम अलगाव को दर्शाती हैं। वहीं कुछ आध्यात्मिक विश्वासों में यह माना जाता है कि श्मशान में तेज ध्वनि करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। बहरहाल, इन सभी विचारों को केवल लोकविश्वास और क्षेत्रीय आस्था के रूप में ही समझा जाना चाहिए, क्योंकि इनके पीछे कोई सर्वमान्य शास्त्रीय आदेश या वैज्ञानिक आधार सिद्ध नहीं है। डोंजे गांव के फार्महाउस पर हुआ अंतिम संस्कार और गोवा में निधन 75 वर्षीय नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर गुरुवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास से लाया गया था, जहां उनका देहांत हो गया था। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, उन्हें दिल का दौरा पड़ने की आशंका जताई गई थी। गोवा से उनका पार्थिव शरीर विमान द्वारा पुणे लाया गया। अभिनेता के सहयोगियों के अनुसार, नाना पाटेकर की यह व्यक्तिगत इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार डोंजे गांव स्थित उनके अपने फार्महाउस पर ही संपन्न किया जाए। परिवार ने उनकी इसी इच्छा का सम्मान करते हुए फार्महाउस पर ही अंतिम संस्कार की सभी औपचारिकताएं पूरी कीं। क्रांतिवीर और खामोशी: द म्यूजिकल जैसी यादगार फिल्मों में अपने अद्वितीय अभिनय से अमिट छाप छोड़ने वाले इस महान कलाकार के चले जाने से पूरे सिनेमा जगत और उनके अनगिनत प्रशंसकों में शोक की गहरी लहर फैल गई। राजनीतिक दिग्गजों और फिल्मी हस्तियों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि नाना पाटेकर को अंतिम नमन करने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे थे। वहीं डोंजे गांव स्थित फार्महाउस पर आयोजित अंतिम संस्कार में कई शीर्ष राजनीतिक नेता और फिल्मी सितारे उपस्थित रहे। अंतिम विदाई के दौरान महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल मौजूद रहे। इसके अलावा राज्य सरकार के मंत्री चंद्रकांत पाटिल, उदय सामंत, माधुरी मिसाल और सांसद सुनील तटकरे ने भी दिवंगत अभिनेता को श्रद्धांजलि अर्पित की। कला जगत से अभिनेता जैकी श्रॉफ, मकरंद अनासपुरे और फिल्म निर्माता साजिद नाडियाडवाला सहित अनेक हस्तियां अंतिम संस्कार में शामिल हुईं और नम आंखों से अपने साथी कलाकार को विदा किया। प्रशंसकों और सहयोगियों ने नाना पाटेकर के असाधारण अभिनय, समाज सेवा और उनकी विशिष्ट जीवनशैली को याद करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसका आप पर असर प्रशंसकों और संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह घटना पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक मान्यताओं के अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। • परंपराओं की समझ: भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अंतिम संस्कार की विधियों में काफी विविधता पाई जाती है। लोग इस बात को समझ सकते हैं कि हर समुदाय और परिवार की अपनी विशिष्ट लोक मान्यताएं हो सकती हैं। • आधिकारिक जानकारी: परिवार की ओर से कोई आधिकारिक व्याख्या न होने के कारण किसी भी प्रथा को बिना पुष्टि के सार्वभौमिक नियम नहीं माना जाना चाहिए। पाठक अपुष्ट दावों और भ्रांतियों से दूर रहकर केवल प्रामाणिक सूचनाओं पर ही ध्यान दें। • नाना पाटेकर की विरासत: अभिनेता के प्रशंसक उनके Donje फार्महाउस और उनकी कलात्मक यात्रा से जुड़े प्रसंगों को याद कर रहे हैं। सार्वजनिक जीवन में सादगी और ग्रामीण परिवेश से जुड़े उनके फैसले आज भी चर्चा का केंद्र हैं। • पुणे और महाराष्ट्र में:Donje गांव और पुणे में इस अंतिम संस्कार के चलते भारी संख्या में हस्तियां और आम लोग जुटे। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियों के प्रति लोगों का गहरा जुड़ाव बना रहता है। ऐसा क्यों हुआ अंतिम संस्कार के दौरान मल्हार पाटेकर के इस अनोखे संकेत और पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि कई कारणों और मान्यताओं से जुड़ी हुई है। • विशेष क्रिया की वजह: मुखाग्नि देते समय मुंह पर उल्टा हाथ रखकर आवाज लगाना कुछ क्षेत्रों में लोक परंपराओं का हिस्सा माना जाता है। हालांकि परिवार की ओर से इसकी कोई आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की गई है। • पारिवारिक वसीयत और इच्छा: अंतिम संस्कार Donje स्थित फार्महाउस पर आयोजित किया गया क्योंकि सहयोगियों के मुताबिक यह नाना पाटेकर की अपनी इच्छा थी। परिवार ने उनकी इसी अंतिम इच्छा का पालन करते हुए फार्महाउस को चुना। • आकस्मिक निधन की पृष्ठभूमि: 75 वर्ष की उम्र में गोवा स्थित घर पर गुरुवार तड़के उनका निधन हुआ। शुरुआती विवरण में उन्हें दिल का दौरा पड़ने की आशंका जताई गई, जिसके बाद पार्थिव शरीर को पुणे लाया गया। सवाल-जवाब 1. नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार कहां संपन्न हुआ? नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे के डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। 2. मुखाग्नि के समय मल्हार पाटेकर ने क्या किया? मुखाग्नि देने से ठीक पहले मल्हार पाटेकर ने मुंह पर उल्टा हाथ रखकर तेज आवाज में पुकारा। 3. क्या मुंह पर उल्टा हाथ रखकर आवाज लगाना कोई अनिवार्य धार्मिक रस्म है? नहीं, यह कोई सार्वभौमिक या अनिवार्य हिंदू धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि कुछ क्षेत्रों की लोक मान्यताओं और स्थानीय प्रथाओं से जुड़ी हो सकती है। 4. नाना पाटेकर का निधन कब और कहां हुआ था? 75 वर्षीय नाना पाटेकर का निधन गुरुवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने की आशंका के चलते हुआ। 5. अंतिम संस्कार में कौन-सी प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं? महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, मुरलीधर मोहोल और कई राज्य मंत्री इसमें शामिल हुए, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि दी। https://trendkia.com/bollywood/nana-patekar-ke-antima-snskara-men-bete-malhar-ne-munha-para-ulta-hatha-rakhakara-kyon-lagai-avaja-45461 TrendKia — Har trend, sabse pehle.