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  "title": "राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने के कुछ ही दिन बाद रणदीप हुड्डा ने मुंबई में आयकर दिवस वॉकथॉन का नेतृत्व किया",
  "summary": "अभिनेता-फिल्मकार रणदीप हुड्डा ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' के लिए बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर अवार्ड जीतने के कुछ दिन बाद मुंबई में 167वें आयकर दिवस से पहले आयकर विभाग के वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाई।",
  "content": "अभिनेता और फिल्मकार रणदीप हुड्डा रविवार सुबह मुंबई की सड़कों पर उतरे और आयकर विभाग, मुंबई क्षेत्र की ओर से आयोजित एक वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाई। यह आयोजन उनके निर्देशन डेब्यू के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने के महज कुछ दिन बाद हुआ।\n\n167वें आयकर दिवस से पहले वॉकथॉन\nआयकर विभाग, मुंबई क्षेत्र ने हर साल 24 जुलाई को मनाए जाने वाले आयकर दिवस की 167वीं वर्षगांठ से पहले इस वॉकथॉन का आयोजन किया। मीडिया से बातचीत में हुड्डा ने बताया कि इस पहल के जरिए दो संदेश दिए जा रहे हैं, लोगों को फिटनेस के लिए प्रेरित करना और आयकर विभाग के काम के साथ-साथ हर टैक्सपेयर के जरिए राष्ट्र निर्माण में योगदान की जानकारी देना। उन्होंने कहा, \"मुझे नहीं पता लोग क्यों डरते हैं, हर किसी को बस अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।\"\n\nवॉकिंग को बताया सबसे बेहतर एक्सरसाइज़\nसामाजिक संदेश देने के अलावा हुड्डा ने अपनी फिटनेस को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्होंने जिम में कई तरह की वर्कआउट्स और कई खेल आजमाए हैं, लेकिन आखिरकार उन्हें एहसास हुआ कि पैदल चलना सबसे फायदेमंद एक्सरसाइज़ है। उनके मुताबिक अगर किसी के पास और कुछ करने का समय नहीं है, तो सिर्फ रोज़ाना 30 से 45 मिनट पैदल चलना भी सेहत के लिए बहुत उपयोगी साबित होता है।\n\n72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में मिली पहचान\nमुंबई में यह सार्वजनिक उपस्थिति हुड्डा के करियर के एक अहम पड़ाव पर आई है। भारतीय सिनेमा में फीचर फिल्मों, नॉन-फीचर कामों और सिनेमा पर लेखन जैसी श्रेणियों में उत्कृष्टता को सम्मानित करने वाले 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में उन्हें उनकी बायोपिक 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' के लिए बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर चुना गया। इस सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए हुड्डा ने कहा कि वे अब भी इस उपलब्धि को महसूस करने की कोशिश कर रहे हैं और इसे अपने करियर का अब तक का सबसे मुश्किल प्रोजेक्ट बताया। उन्होंने इस पहचान के लिए आभार जताया और बताया कि इस फिल्म के जरिए उन्हें विनायक दामोदर सावरकर की जीवनी और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने खुद अभिनय, लेखन और निर्देशन संभाला और आखिर में इसका निर्माण भी किया।\n\nफिल्म और सावरकर की कहानी\n'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के जीवन पर आधारित है, जिसमें हुड्डा मुख्य भूमिका में हैं जबकि अंकिता लोखंडे और अमित सियाल सहयोगी भूमिकाओं में नजर आए। सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को भगूर में हुआ था। अंग्रेजी शासन के खिलाफ उनके प्रतिरोध के चलते 1911 में उन्हें लगातार दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जो कुल मिलाकर 50 साल की जेल के बराबर थी। उन्होंने यह सजा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सेल्युलर जेल में काटी, जिसे 'कालापानी' के नाम से भी जाना जाता है। सावरकर का निधन 26 फरवरी 1966 को हुआ।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह वॉकथॉन 24 जुलाई को मनाए जाने वाले 167वें आयकर दिवस से ठीक पहले हुआ, जो हर टैक्सपेयर को समय पर टैक्स भरने और राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान की याद दिलाता है।\n• मुंबई में: आयकर विभाग, मुंबई क्षेत्र के इस वॉकथॉन में शामिल लोगों को एक जाने-माने फिल्मी चेहरे से सीधे फिटनेस और टैक्स कंप्लायंस दोनों को लेकर प्रेरणा मिली।\n• सेहत के लिए: हुड्डा की यह सलाह कि रोज़ाना सिर्फ 30 से 45 मिनट पैदल चलना ही काफी फायदेमंद है, हर किसी के लिए आज से ही अपनाई जा सकने वाली आसान और मुफ्त आदत है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रविवार को मुंबई में वॉकथॉन किसने हरी झंडी दिखाकर शुरू किया?\nअभिनेता-फिल्मकार रणदीप हुड्डा ने रविवार को इस वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाई।\n\n2. यह वॉकथॉन किसने और क्यों आयोजित किया?\nआयकर विभाग, मुंबई क्षेत्र ने हर साल 24 जुलाई को मनाए जाने वाले 167वें आयकर दिवस से पहले इसे आयोजित किया।\n\n3. रणदीप हुड्डा को हाल ही में कौन सा पुरस्कार मिला?\nउन्हें 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' के लिए बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर अवार्ड मिला।\n\n4. हुड्डा ने किस एक्सरसाइज़ की सलाह दी?\nउन्होंने बताया कि रोज़ाना 30 से 45 मिनट पैदल चलना सबसे फायदेमंद एक्सरसाइज़ है, यह उन्होंने जिम और कई खेल आजमाने के बाद कहा।\n\n5. 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' में हुड्डा के अलावा और कौन थे?\nअंकिता लोखंडे और अमित सियाल ने हुड्डा के साथ सहयोगी भूमिकाएं निभाईं, जबकि हुड्डा मुख्य भूमिका में थे।\n\n6. इस फिल्म के लिए हुड्डा ने क्या-क्या भूमिकाएं निभाईं?\nउन्होंने अभिनय, लेखन और निर्देशन खुद संभाला और आखिर में फिल्म का निर्माण भी किया।\n\n7. विनायक दामोदर सावरकर कौन थे?\nवे स्वतंत्रता सेनानी थे जिन पर यह फिल्म आधारित है, उनका जन्म 28 मई 1883 को भगूर में हुआ था।\n\n8. अंग्रेजों ने सावरकर को क्या सजा दी थी?\n1911 में उन्हें लगातार दो आजीवन कारावास यानी कुल 50 साल की सजा सुनाई गई, जो उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की 'कालापानी' सेल्युलर जेल में काटी।\n\n9. सावरकर का निधन कब हुआ था?\nउनका निधन 26 फरवरी 1966 को हुआ था।\n\nप्रेरणा और सबक\nअपने निर्देशन डेब्यू में मिली इस जीत से रणदीप हुड्डा की यात्रा किसी भी बड़े सपने पर काम कर रहे व्यक्ति के लिए कुछ असली सबक देती है।\n\n• जरूरत पड़ने पर कई भूमिकाएं निभाएं: हुड्डा ने 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' में अभिनय, लेखन और निर्देशन खुद संभाला और आखिर में इसका निर्माण भी किया, जो दिखाता है कि किसी पैशन प्रोजेक्ट के लिए हाथों-हाथ जुड़ाव कितना आगे ले जा सकता है।\n• सादी आदतें भी असर करती हैं: जिम और कई खेल आजमाने के बावजूद उन्होंने पाया कि रोज़ाना 30 से 45 मिनट पैदल चलना ही सबसे ज्यादा फायदेमंद रहा, यानी टिकाऊ आदतें अक्सर पेचीदा रूटीन से बेहतर साबित होती हैं।\n• पहचान को महसूस करने में समय लगता है: जीत के बाद भी हुड्डा ने माना कि वे अभी इसे महसूस करने की कोशिश कर रहे हैं, जो बताता है कि किसी बड़ी उपलब्धि को अपनाने में वक्त लगना सामान्य है।\n• अपने मंच का इस्तेमाल सिर्फ खुद के लिए न करें: हुड्डा ने अपनी सार्वजनिक मौजूदगी का इस्तेमाल सिर्फ अपने काम को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि टैक्स कंप्लायंस जैसे नागरिक कर्तव्य के लिए भी किया।",
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  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-07-19",
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