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  "type": "article",
  "title": "नितेश तिवारी की रामायण आने से पहले रणबीर कपूर ने खोला पिता ऋषि कपूर से जुड़ा पुराना किस्सा",
  "summary": "कौन बनेगा करोड़पति में पहुंचे रणबीर कपूर ने बताया कि उनके पिता ऋषि कपूर को शुरुआती दौर में उनकी गैर-पारंपरिक फिल्मों का चयन बिल्कुल पसंद नहीं आता था।",
  "content": "बड़े पर्दे पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे अभिनेता रणबीर कपूर ने अपने दिवंगत पिता ऋषि कपूर के साथ अपने जटिल संबंधों पर खुलकर चर्चा की है। नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा के निर्देशन में बनी भव्य पौराणिक ड्रामा रामायण 5 नवंबर को सिनेमाघरों में दस्तक दे रही है। इस बहुप्रतीक्षित रिलीज से पहले रणबीर अपने सह-कलाकारों के साथ लोकप्रिय गेम शो कौन बनेगा करोड़पति में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने अपने निजी जीवन, पारिवारिक विरासत और सिनेमाई सफर के कई अनछुए पहलुओं को साझा किया।\n\nपिता और पुत्र के बीच का वैचारिक फासला\nदर्शकों के बीच ऋषि कपूर और उनके बेटे के बीच के अनूठे समीकरण हमेशा चर्चा का विषय रहे हैं। दोनों के बीच विचारों का टकराव किसी से छिपा नहीं था और ऋषि कपूर भी अक्सर साक्षात्कारों में इस बात का जिक्र करते थे। गेम शो के दौरान जब मेजबान अमिताभ बच्चन ने इस रिश्ते पर सवाल किया, तो रणबीर ने स्वीकार किया कि उनके पिता ने कभी खुलकर उनके अभिनय कौशल या सिनेमाई फैसलों की सराहना नहीं की। अमिताभ बच्चन ने दोनों अभिनेताओं को करीब से देखा था, इसलिए उन्होंने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि क्या कभी पिता ने बेटे की कला को खुले दिल से सराहा था।\n\nस्क्रिप्ट के चयन पर उठते थे सवाल\nइस बातचीत में रणबीर ने खुलासा किया कि ऋषि कपूर उनके प्रोजेक्ट्स के चुनाव से अक्सर असहमत रहते थे। वरिष्ठ अभिनेता का मानना था कि एक मुख्यधारा के नायक को पारंपरिक खांचे में फिट होना चाहिए। रणबीर जब लीक से हटकर कहानियों को चुन रहे थे, तब उनके पिता उन निर्णयों को आसानी से स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। अभिनेता ने कुछ विशिष्ट शीर्षकों का नाम लेते हुए बताया कि किस तरह उनके पिता उनकी चुनी हुई राह से हैरान थे।\n\n• वेक अप सिड: एक लापरवाह शहरी युवक के आत्म-खोज की इस यात्रा को लेकर पिता के मन में गहरे संदेह थे।\n• रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर: एक सीधे-सादे सेल्समैन के संघर्ष पर आधारित इस कथा को ऋषि कपूर व्यावसायिक दृष्टि से जोखिम भरा मानते थे।\n• बर्फी!: बिना संवादों वाले एक मूक-बधिर नायक का किरदार निभाना पारंपरिक नायक की छवि से एकदम उलट था।\n• तमाशा: पहचान के संकट से जूझते आम आदमी की इस मनोवैज्ञानिक यात्रा पर भी पिता की भौंहें तनी रहती थीं।\n\nकपूर खानदान की विरासत और परदादा का मंत्र\nबातचीत के दौरान अभिनेता ने अपनी पारिवारिक जड़ों और परदादा पृथ्वीराज कपूर के स्थापित सिद्धांतों को भी याद किया। कपूर परिवार में पीढ़ियों से एक विचार को बहुत गंभीरता से लिया जाता रहा है कि कला के माध्यम से राष्ट्र की सेवा की जानी चाहिए। ऋषि कपूर अक्सर इसी पारिवारिक सीख की याद दिलाते हुए रणबीर पर तंज कसते थे कि वे जिस तरह के अतरंगी रोल कर रहे हैं, उससे भला देश की क्या सेवा हो रही है।\n\nरणबीर ने स्पष्ट किया कि करियर के उस दौर में वे पिता के इस दृष्टिकोण की गहराई को पूरी तरह नहीं भांप पाए थे। एक नवोदित कलाकार के रूप में उनका पूरा ध्यान उन किरदारों पर था जो उन्हें अंदर से छूते थे। वे हिंदी सिनेमा के घिसे-पिटे फॉर्मूले से दूर अपनी एक स्वतंत्र पहचान गढ़ना चाहते थे। अब जब वे रामायण में एक आदर्श बेटे और मर्यादा पुरुषोत्तम की भूमिका निभा रहे हैं, तो पुरानी यादें उनके इस पूरे सफर को बेहद खास बना देती हैं।\n\nइसका आप पर असर\nफिल्म उद्योग में रचनात्मक स्वतंत्रता और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच के संतुलन को यह बातचीत दर्शाती है।\n\n• दर्शकों के लिए: यह प्रसंग दिखाता है कि आज के शीर्ष सितारे भी अपने करियर के शुरुआती वर्षों में भारी पारिवारिक शंकाओं और असुरक्षाओं से गुजरे हैं। इससे युवाओं को अपने स्वतंत्र रचनात्मक निर्णयों पर विश्वास बनाए रखने की सीख मिलती है।\n• सिनेमा प्रेमियों के लिए: वेक अप सिड और बर्फी जैसी पंथ क्लासिक फिल्मों के निर्माण के पीछे के आंतरिक संघर्ष को समझने का अवसर मिलता है। इससे स्पष्ट होता है कि कल्ट फिल्मों को शुरुआत में अपनों के ही विरोध का सामना करना पड़ता था।\n• कलाकारों के लिए: अभिनय के क्षेत्र में सुरक्षित फॉर्मूला चुनने के बजाय जोखिम भरी कहानियों को चुनना ही लंबी रेस का घोड़ा बनाता है। जोखिम भरे फैसले ही अंततः एक अभिनेता को व्यापक पहचान दिलाते हैं।\n• पारिवारिक संवाद पर: माता-पिता और बच्चों के बीच पेशेवर मतभेद स्वाभाविक हैं और वे एक-दूसरे के सम्मान को कम नहीं करते। तकरार के बावजूद अपने लक्ष्य पर टिके रहना संभव है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह बातचीत कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर अमिताभ बच्चन द्वारा दोनों अभिनेताओं के संबंधों पर पूछे गए सीधे सवाल के कारण सामने आई।\n\n• सीधा कारण: खेल के दौरान मेजबान अमिताभ बच्चन ने रणबीर से पूछा कि क्या ऋषि कपूर ने कभी उनके काम की तारीफ की थी। इस प्रश्न के जवाब में रणबीर ने अपने पिता के संशयवादी नजरिए का विस्तार से ब्योरा दिया।\n• पारिवारिक पृष्ठभूमि: कपूर खानदान की शुरुआत से ही कला को राष्ट्र सेवा मानने की एक मजबूत परंपरा रही है। इस ऊंचे मानदंड के कारण ऋषि कपूर अपने बेटे की शहरी और जटिल फिल्मों को लेकर सवाल उठाते थे।\n• पीढ़ियों का अंतर: मुख्यधारा के मसाला सिनेमा के दौर में पले-बढ़े ऋषि कपूर पारंपरिक नायक की छवि को प्राथमिकता देते थे, जबकि रणबीर नए जमाने के यथार्थवादी सिनेमा की ओर आकर्षित थे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नितेश तिवारी की फिल्म रामायण सिनेमाघरों में कब रिलीज हो रही है?\nनितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा की रामायण 5 नवंबर को बड़े पर्दे पर रिलीज होने के लिए निर्धारित है।\n\n2. रणबीर कपूर ने अपने पिता से जुड़े ये अनुभव किस मंच पर साझा किए?\nअभिनेता ने अपनी आगामी फिल्म के प्रचार के दौरान अमिताभ बच्चन द्वारा संचालित गेम शो कौन बनेगा करोड़पति में यह बातचीत की।\n\n3. ऋषि कपूर को अपने बेटे की किन फिल्मों को लेकर सबसे ज्यादा आपत्ति थी?\nउन्होंने वेक अप सिड, रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर, बर्फी! और तमाशा जैसी फिल्मों के चुनाव पर सवाल उठाए थे।\n\n4. पृथ्वीराज कपूर की किस सीख का उल्लेख ऋषि कपूर अक्सर करते थे?\nपृथ्वीराज कपूर का मानना था कि कला देश की सेवा में होनी चाहिए, और ऋषि कपूर इसी सीख का हवाला देकर फिल्मों के चुनाव पर बहस करते थे।",
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  "publishedAt": "2026-11-04",
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