# नितेश तिवारी की रामायण के संगीत पर उठे सवाल तो संगीतकार एआर रहमान ने रखी बात

> फिल्म रामायण के ट्रैक मंगल रंग को लेकर सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना के बीच संगीतकार एआर रहमान ने कहा कि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद उनमें इंटरनेट पर फीडबैक देखने की ऊर्जा नहीं बचती।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/nitesh-tiwari-ki-ramayana-ke-sngita-para-uthe-savala-to-sngitakara-ar-rahman-ne-rakhi-bata-52054 · **Language:** Hindi
**Tags:** रामायण, एआर रहमान, रणबीर कपूर, नितेश तिवारी, मंगल रंग, बॉलीवुड

फिल्म निर्देशक नितेश तिवारी की आगामी बड़े बजट की बहुचर्चित फिल्म रामायण अपने संगीत को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गई है। सिनेमाघरों में आने से पहले ही इस फिल्म के गानों मंगल रंग और रावण तांडव ने इंटरनेट पर खासी हलचल मचा दी है। विशेष रूप से हालिया ट्रैक मंगल रंग के सामने आने के बाद कुछ इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने इसके संगीत संयोजन की तीखी आलोचना की और संगीतकार एआर रहमान को निशाने पर ले लिया। इस लगातार हो रही चर्चा और नकारात्मक टिप्पणियों के बीच अब संगीतकार ने अपना स्पष्ट दृष्टिकोण सामने रखा है।

## संगीत निर्माण की प्रक्रिया और फीडबैक पर एआर रहमान का बयान
प्रोजेक्ट के संगीत पक्ष को संभालने वाले एआर रहमान ने स्पष्ट किया कि किसी भी नई फिल्म के लिए धुनें तैयार करना कभी भी सहज या आसान कार्य नहीं होता। प्रत्येक नई परियोजना अपनी अलग रचनात्मक मांग लेकर आती है, जिसके लिए नए तरीकों से सोचना पड़ता है और संगीत में कई तरह के नए प्रयोग करने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी गीत को अंतिम रूप देने से पहले उसके हर छोटे पहलू की बेहद बारीकी से जांच-पड़ताल की जाती है और पूरी टीम इसमें अपना शत-प्रतिशत प्रयास झोंक देती है।

लगातार हो रही ऑनलाइन आलोचना के संबंध में उन्होंने कहा कि जब कोई प्रोजेक्ट पूरी लगन के साथ पूरा हो जाता है, तो उसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं या टिप्पणियां पढ़ने की ऊर्जा ही उनके भीतर शेष नहीं बचती। उन्होंने यह भी साझा किया कि इंटरनेट पर चल रही बातचीत और चर्चाओं की जानकारी उनका बेटा उन्हें देता रहता है। संगीतकार ने उम्मीद जताई कि श्रोताओं को अंततः उनका समर्पण और काम पसंद आएगा, क्योंकि उन्होंने इस रचना में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया है।

## मंगल रंग ट्रैक की तुलना और कॉपी करने के आरोप
अभिनेता रणबीर कपूर की मुख्य भूमिका वाली इस भव्य फिल्म का ट्रैक मंगल रंग जब पहली बार सामने आया, तो शुरुआत में इसे कई श्रोताओं का भरपूर स्नेह मिला। हालांकि कुछ ही घंटों के भीतर सोशल मीडिया पर इस गाने की मौलिकता को लेकर सवाल उठने लगे। कई उपयोगकर्ताओं ने इसकी ध्वनि बनावट की तुलना वर्ष 2012 में आई लोकप्रिय फिल्म रॉकस्टार के प्रसिद्ध सूफी गीत कुन फाया कुन से कर दी।

पार्श्व गायक अरिजीत सिंह और गायिका श्रेया घोषाल के सुरों से सजे इस गीत के संगीत को कुछ श्रोताओं ने कव्वाली शैली का करार दिया। वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य लोगों ने दावा किया कि इस गीत की धुन किसी मलयालम ट्रैक से मिलती-जुलती है। इस प्रकार संगीत के अलग-अलग तत्वों को लेकर इंटरनेट पर तुलनात्मक बहस तेज हो गई।

## दृश्य संरचना और पारंपरिक चित्रण पर भी आपत्ति
धुन और गायकी के अलावा इस गीत के दृश्यों को लेकर भी कुछ दर्शकों ने आपत्तियां उठाई हैं। गीत के एक विशेष दृश्य में रणबीर कपूर भगवान राम के स्वरूप में दिखाई देते हैं, जिनके चारों ओर परिवार की महिलाएं उपस्थित हैं। इस दृश्य में उनके शरीर पर पीले रंग का पारंपरिक लेप लगाया जा रहा है।

दर्शकों के एक वर्ग ने शुरुआत में इसे विवाह पूर्व होने वाली हल्दी की रस्म समझा, जबकि अन्य लोगों का मानना था कि यह किसी विशेष पारंपरिक विधि का चित्रण है। इसे लेकर ऑनलाइन मंचों पर सवाल उठाए गए कि यदि यह हल्दी का विधान है, तो उस प्रसंग में वर और वधू का एक साथ उपस्थित होना परंपरा के अनुकूल नहीं जान पड़ता। इस तरह संगीत के साथ-साथ दृश्य चित्रण भी चर्चा का विषय बन गया।

## इसका आप पर असर
फिल्म रामायण के संगीत पर छिड़ी यह बहस दिखाती है कि दर्शक पौराणिक विषयों पर बनी फिल्मों के हर दृश्य और धुन को बेहद बारीकी से परख रहे हैं।

- **दर्शकों और संगीत प्रेमियों पर:** नए संगीत प्रयोगों को लेकर श्रोताओं की अपेक्षाएं काफी संवेदनशील हो चुकी हैं। आगामी रिलीज से पहले श्रोता अब फिल्म के अन्य गानों और बैकग्राउंड स्कोर को भी गहरी समीक्षा की नजर से देखेंगे।
- **मनोरंजन उद्योग पर:** बड़े बजट की फिल्मों के निर्माताओं को अब पारंपरिक रीति-रिवाजों के सटीक फिल्मांकन पर अधिक ध्यान देना होगा। सोशल मीडिया की त्वरित प्रतिक्रियाओं के कारण रिलीज से पहले प्रचार रणनीति में निरंतर सतर्कता बरतनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्म के गीत मंगल रंग पर विवाद मुख्य रूप से संगीत शैलियों की समानता और दृश्य में दिखाए गए धार्मिक व पारंपरिक प्रसंगों की भिन्न व्याख्याओं के कारण उत्पन्न हुआ।

- **धुन और सूफी शैली की समानता:** श्रोताओं ने गीत की संरचना को पहले से लोकप्रिय भक्ति व सूफी ट्रैक से मिलता-जुलता पाया। इसी समानता के चलते सोशल मीडिया पर इसे रॉकस्टार के कुन फाया कुन और अन्य धुनों की नकल बताया जाने लगा।
- **विवाह पूर्व रस्मों पर सांस्कृतिक आपत्ति:** गीत के दृश्य में पीले लेप के प्रयोग को दर्शकों ने हल्दी की रस्म समझा। इस आधार पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि पारंपरिक रीति-रिवाजों में ऐसी रस्मों के दौरान वर-वधू का साथ दिखना उचित नहीं माना जाता।
- **संगीतकार का व्यक्तिगत कार्यभार:** जटिल संगीत निर्माण में लगने वाले व्यापक श्रम के चलते संगीतकार ऑनलाइन चर्चाओं से दूरी बनाए रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि काम पूरा होने के बाद सोशल मीडिया देखने का शारीरिक व मानसिक सामर्थ्य नहीं बचता।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म रामायण के किस गाने को लेकर विवाद शुरू हुआ?
फिल्म के नए ट्रैक 'मंगल रंग' के संगीत और उसके एक दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हुआ।

### 2. सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना पर एआर रहमान ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि किसी प्रोजेक्ट में पूरी मेहनत लगाने के बाद उनके पास सोशल मीडिया पर लोगों का फीडबैक देखने की ऊर्जा नहीं बचती।

### 3. मंगल रंग गीत की तुलना किन गानों से की जा रही है?
कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसकी तुलना वर्ष 2012 की फिल्म रॉकस्टार के गाने कुन फाया कुन और एक मलयालम धुन से की है।

### 4. गीत के दृश्य पर दर्शकों ने क्या आपत्ति जताई?
दर्शकों ने पीले लेप वाले दृश्य को हल्दी की रस्म मानते हुए वर और वधू को उस तरह साथ दिखाए जाने पर सवाल उठाए।

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