'पाकिस्तान जाओ' का शोर मचाने वालों को फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने दिया दो टूक जवाब, बताया भारतीय मुसलमानों का असली देशप्रेम फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के सिलसिले में चंडीगढ़ पहुंचे इम्तियाज अली ने विभाजन के इतिहास पर चर्चा की और 'पाकिस्तान चले जाओ' जैसे तानों पर भारतीय मुसलमानों के फैसले को सच्चा राष्ट्रवाद करार दिया। प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली इन दिनों अपनी पारिवारिक और पेशेवर जिंदगी दोनों ही वजहों से चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। एक तरफ जहां उनकी छब्बीस वर्षीय बेटी इदा ने अपने प्रेमी के साथ सगाई कर के अपने जीवन के नए सफर की शुरुआत की है, वहीं दूसरी तरफ उनकी नई फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। पंजाब की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म विभाजन की त्रासदी, विस्थापन के गहरे दर्द और एक बेहद संवेदनशील मानवीय कहानी को दर्शकों के सामने पेश करती है। इसी सिलसिले में निर्देशक चंडीगढ़ पहुंचे, जहां उन्होंने देश के इतिहास, अपनी फिल्म की प्रेरणा और विशेष रूप से भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। विभाजन की त्रासदी को समझने के लिए किताबों का लिया सहारा अपनी इस महत्वाकांक्षी फिल्म के निर्माण से पहले इस संवेदनशील विषय के साथ पूरा न्याय करने के लिए इम्तियाज अली ने गहन शोध किया। उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान के बंटवारे और पंजाब के उस दौर के इतिहास को गहराई से समझने के लिए उन्होंने अनगिनत किताबों का अध्ययन किया और उस दौर पर बनी कई महत्वपूर्ण फिल्मों को भी देखा। उनके अनुसार, लैरी कॉलिन्स और डॉमिनिक लैपिएर द्वारा लिखी गई कालजयी किताब 'फ्रीडम एट मिडनाइट' उस भीषण दौर की परिस्थितियों और राजनीतिक फैसलों को करीब से समझने के लिए सबसे मददगार और आवश्यक किताबों में से एक रही। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फिल्म की असली ताकत किसी किताब से ज्यादा उन आम लोगों की सच्ची कहानियां हैं, जिनकी जिंदगी सरहद की लकीर जल्दबाजी में खिंचने से हमेशा के लिए बदल गई। रेडक्लिफ लाइन की जल्दबाजी और दो अलग कालखंडों की कहानी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' की मुख्य प्रेरणा उन अनगिनत लोगों के वास्तविक जीवन के अनुभवों से आती है, जिनकी दुनिया रेडक्लिफ लाइन के अचानक और जल्दबाजी में खींचे जाने के कारण रातों-रात बदल गई थी। इम्तियाज अली ने अपनी इस फिल्म की संरचना को दो अलग-अलग कालखंडों में विभाजित किया है। इसमें एक तरफ साल 1947 का वह दौर दिखाया गया है जब देश का बंटवारा नहीं हुआ था यानी अखंड भारत की एक खूबसूरत तस्वीर, और दूसरी तरफ आज के समय का आधुनिक पंजाब नजर आता है। फिल्म के मुख्य संदेश को स्पष्ट करते हुए निर्देशक ने कहा कि इस कहानी को पर्दे पर उतारने का मकसद पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के प्रति नफरत या प्यार दिखाना बिल्कुल नहीं है। उन्होंने साझा किया कि फिल्म की तैयारी और शोध के सिलसिले में वे जितने भी लोगों से मिले, उनमें से किसी भी व्यक्ति के मन में सीमा पार के लोगों के लिए कोई दुर्भावना या कड़वाहट देखने को नहीं मिली। भारतीय मुसलमानों के देशप्रेम पर दिया बेबाक बयान इस दौरान इम्तियाज अली ने अक्सर हवा में तैरने वाले उस कड़वे और संकीर्ण नारे पर भी कड़ा रुख अपनाया, जिसमें कई बार भारतीय मुसलमानों को 'पाकिस्तान चले जाओ' का तंज कसा जाता है। इस पर अपना नजरिया रखते हुए उन्होंने एक बेहद तार्किक और दिल छू लेने वाली बात कही। उन्होंने कहा कि देश के बंटवारे के वक्त भारतीय मुसलमानों के पास यह पूरी आजादी और विकल्प था कि वे नवगठित देश पाकिस्तान जा सकते थे, लेकिन उन्होंने तमाम अनिश्चितताओं के बावजूद अपनी मिट्टी यानी भारत में ही रहने का फैसला किया। उनका यह निर्णय ही उनके सबसे बड़े और सच्चे देशप्रेम का जीता-जागता सबूत है, जिसे किसी को भी साबित करने की आवश्यकता नहीं है। घर की असली परिभाषा और खुद को खोजने की चाह बातचीत के आखिरी चरण में इम्तियाज अली ने 'घर' शब्द के वास्तविक अर्थ को बहुत ही दार्शनिक अंदाज में समझाया। उनके अनुसार, घर कोई ईंट-पत्थर से बनी हुई निर्जीव जगह मात्र नहीं होती, बल्कि घर का सीधा संबंध प्रेम और हमारे अतीत के उस अहसास से होता है जो हम कभी हुआ करते थे। जहां पर प्यार और आत्मीयता होती है, असल में वही इंसान का असली आशियाना होता है। उन्होंने अपनी फिल्म के एक प्रमुख पात्र ईशर का उदाहरण देते हुए कहा कि हम सभी अपने जीवन में कहीं न कहीं उसी पुराने वजूद और उस आत्मीय घर को तलाशने की कोशिश करते हैं, जहां हम खुद को सबसे ज्यादा सुरक्षित, सहज और अपना महसूस कर पाते थे। इसका आप पर असर • दर्शकों के लिए: यह खबर लोगों को फिल्ममेकर इम्तियाज अली के सिनेमाई दृष्टिकोण और उनकी आगामी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' के गहरे ऐतिहासिक संदर्भ को समझने में मदद करती है। • सामाजिक स्तर पर: देशप्रेम और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर एक सकारात्मक और एकता को बढ़ावा देने वाली चर्चा को प्रेरित करती है। सवाल-जवाब 1. फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' का मुख्य विषय क्या है? यह फिल्म पंजाब की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो भारत-पाकिस्तान विभाजन के दर्द और मानवीय विस्थापन की एक अनूठी कहानी को दो अलग-अलग कालखंडों (1947 और वर्तमान) के जरिए दर्शाती है। 2. इम्तियाज अली ने विभाजन के इतिहास को समझने के लिए किस प्रसिद्ध किताब का जिक्र किया? उन्होंने लैरी कॉलिन्स और डॉमिनिक लैपिएर द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक 'फ्रीडम एट मिडनाइट' का उल्लेख इतिहास को गहराई से समझने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में किया। 3. भारतीय मुसलमानों के देशप्रेम पर इम्तियाज अली का क्या विचार है? उन्होंने कहा कि विभाजन के समय पाकिस्तान जाने का विकल्प होने के बावजूद भारत में ही रहने का फैसला करना ही भारतीय मुसलमानों के सबसे बड़े देशप्रेम का प्रमाण है। 4. इम्तियाज अली के अनुसार 'घर' की असली परिभाषा क्या है? उनके अनुसार, घर केवल एक भौतिक स्थान नहीं है, बल्कि यह प्रेम और उस आत्मीय भावना से जुड़ा अहसास है जहाँ कोई व्यक्ति खुद को सबसे अधिक अपना महसूस करता है। https://trendkia.com/bollywood/pakistana-jao-ka-shora-machane-valon-ko-philmamekara-imtiaz-ali-ne-diya-do-tuka-javaba-bataya-bharatiya-musalamanon-ka-asali-desha-7350 TrendKia — Har trend, sabse pehle.