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  "title": "पत्रकार बनना चाहती थीं, बन गईं तीन बार की नेशनल अवॉर्ड विजेता, यही थी सुरेखा सीकरी की कहानी",
  "summary": "टीवी, बॉलीवुड और रंगमंच तीनों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वालीं सुरेखा सीकरी की आज पुण्यतिथि है, पढ़ें कैसे पत्रकार बनने का सपना देखने वालीं यह लड़की तीन बार नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली एक्ट्रेस बनी.",
  "content": "बॉलीवुड, टीवी और रंगमंच तीनों जगह अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वालीं सुरेखा सीकरी की आज पुण्यतिथि है. टीवी की दुनिया हो, बॉलीवुड इंडस्ट्री हो या रंगमंच की महफिल, हर जगह उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी और लाइमलाइट अपने नाम की. दादी और मां जैसे किरदारों को उन्होंने इतनी शिद्दत से निभाया कि आज भी दर्शक उन्हें भूल नहीं पाए हैं. साल 2018 में आई एक फिल्म में तो उन्होंने अपने दमदार अभिनय से फिल्म के लीड हीरो तक को पीछे छोड़ दिया था.\n\nपत्रकार बनना चाहती थीं, पहुंच गईं रंगमंच पर\nदिलचस्प बात यह है कि सुरेखा सीकरी की पहली पसंद अभिनय नहीं, पत्रकारिता थी. एक्ट्रेस बनने का सपना उन्होंने कभी नहीं देखा था. लेकिन किस्मत उन्हें रंगमंच की दुनिया में खींच लाई और यही मोड़ आगे चलकर उनकी पूरी पहचान बन गया. उनका बचपन अल्मोड़ा और नैनीताल में बीता था. साल 1971 में उन्होंने एनएसडी यानी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अपनी पढ़ाई पूरी की. आज उनकी पुण्यतिथि पर उनके करियर से जुड़ी कुछ ऐसी ही खास बातें सामने आ रही हैं, जो बताती हैं कि कैसे पत्रकार बनने की चाहत रखने वाली एक लड़की आगे चलकर अभिनय की दुनिया की मलिका बन गई.\n\nरंगमंच पर वर्षों की मेहनत, फिर बॉलीवुड में एंट्री\nएनएसडी से निकलने के बाद सुरेखा सीकरी ने कई सालों तक थिएटर में काम किया. उन्होंने एनएसडी रिपर्टरी कंपनी के साथ लंबे समय तक रंगमंच किया और कई यादगार नाटकों में अपनी अभिनय प्रतिभा दिखाई. इसी रंगमंच के अनुभव ने उनकी अदाकारी को इतना मजबूत बना दिया कि आगे चलकर फिल्मों और टेलीविजन में भी उन्हें इसका सीधा फायदा मिला. साल 1977 में उन्होंने फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' से बॉलीवुड में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने छोटे और बड़े हर तरह के किरदार निभाए और हर बार अपनी अलग शैली से उसे यादगार बना दिया. 'तमस', 'मम्मो', 'सरफरोश', 'ज़ुबैदा' और 'रेनकोट' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई.\n\nज़ुबैदा में बनीं करिश्मा कपूर की मां\nसाल 2001 में आई फिल्म 'ज़ुबैदा' में सुरेखा सीकरी ने करिश्मा कपूर की मां का रोल निभाया था. इस किरदार को भी उन्होंने अपने खास अंदाज से यादगार बना दिया, जो उनकी अदाकारी की विविधता को साफ दिखाता है.\n\nबधाई हो में दादी का किरदार और तीसरा नेशनल अवॉर्ड\nसाल 2018 में आई फिल्म 'बधाई हो' में सुरेखा सीकरी ने आयुष्मान खुराना की दादी का रोल निभाकर इतिहास रच दिया. इस फिल्म से पहले उन्हें दो नेशनल अवॉर्ड मिल चुके थे, लेकिन 'बधाई हो' में इस भूमिका के लिए उन्हें तीसरी बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें कई अन्य फिल्म पुरस्कारों से भी नवाजा गया. बधाई हो के लिए मिला यह सम्मान साबित करता है कि उम्र सिर्फ एक नंबर है और सही किरदार मिलने पर अभिनय अपने चरम पर पहुंच सकता है.\n\nबीमारी में भी नहीं छोड़ा हौसला, 76 साल की उम्र में निधन\nसाल 2018 में ही सुरेखा सीकरी को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिसका असर उनकी सेहत पर लंबे समय तक बना रहा. इसके बावजूद उन्होंने काम करने की इच्छा और हिम्मत कभी नहीं छोड़ी. लेकिन 16 जुलाई 2021 को मुंबई में कार्डियक अरेस्ट के चलते 76 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. हिंदी सिनेमा, टेलीविजन और रंगमंच की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली सुरेखा सीकरी के निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं, चाहे वह सख्त दादी का अंदाज हो या मां और मजबूत महिला के रोल.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुरेखा सीकरी का निधन कब हुआ था?\n16 जुलाई 2021 को मुंबई में कार्डियक अरेस्ट के चलते 76 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था.\n\n2. सुरेखा सीकरी ने कितनी बार नेशनल अवॉर्ड जीता?\nउन्होंने तीन बार नेशनल अवॉर्ड जीता, आखिरी बार 2018 की फिल्म 'बधाई हो' के लिए.\n\n3. बधाई हो में सुरेखा सीकरी ने क्या रोल निभाया था?\nउन्होंने आयुष्मान खुराना की दादी का किरदार निभाया था.\n\n4. करिश्मा कपूर के साथ सुरेखा सीकरी ने किस फिल्म में काम किया था?\nसाल 2001 की फिल्म 'ज़ुबैदा' में उन्होंने करिश्मा कपूर की मां का रोल निभाया था.\n\n5. सुरेखा सीकरी ने बॉलीवुड में डेब्यू कब किया?\nउन्होंने 1977 की फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' से बॉलीवुड में कदम रखा था.\n\n6. सुरेखा सीकरी पहले क्या बनना चाहती थीं?\nवे शुरुआत में अभिनेत्री नहीं बल्कि पत्रकार बनना चाहती थीं.\n\n7. सुरेखा सीकरी की कौन सी फिल्में मशहूर हैं?\nतमस, मम्मो, सरफरोश, ज़ुबैदा और रेनकोट जैसी फिल्मों में उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई थी.\n\n8. 2018 में सुरेखा सीकरी की सेहत को क्या हुआ था?\nउन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिसका असर लंबे समय तक उनकी सेहत पर बना रहा.\n\nप्रेरणा और सबक\nसुरेखा सीकरी का सफर बताता है कि सही मेहनत और धैर्य के साथ करियर कभी भी बदला जा सकता है, बशर्ते उसमें दिल से मेहनत की जाए.\n\n• रास्ता बदलने से मत डरें: पत्रकार बनने का सपना देखने वालीं सुरेखा सीकरी ने किस्मत के मोड़ को अपनाया और रंगमंच को अपना करियर बना लिया.\n• बुनियाद मजबूत रखें: एनएसडी और सालों की रंगमंच की मेहनत ने उनकी अदाकारी को इतना पुख्ता बनाया कि उसका फायदा उन्हें दशकों तक मिलता रहा.\n• उम्र को बहाना न बनाएं: करियर के आखिरी दौर में मिली 'बधाई हो' जैसी भूमिका ने उन्हें तीसरा नेशनल अवॉर्ड दिलाया, यह साबित करते हुए कि सही मौका किसी भी उम्र में मिल सकता है.\n• मुश्किल हालात में भी काम जारी रखें: 2018 में ब्रेन स्ट्रोक के बाद भी उन्होंने काम करने की इच्छा और हिम्मत नहीं छोड़ी.\n• हर किरदार को पूरी शिद्दत दें: चाहे छोटा रोल हो या बड़ा, उन्होंने हर भूमिका को अपनी खास अदाकारी से यादगार बनाया.",
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  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-07-16",
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