फराह खान की पहली फिल्म: जब तीन मिनट के सिंगल टेक शॉट के लिए सेट पर मचा दिया था कोहराम कोरियोग्राफर से निर्देशक बनीं फराह खान ने अपनी पहली ही फिल्म मैं हूं ना से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था। इस सुपरहिट फिल्म के एक गाने को बिना रुके एक ही टेक में शूट करने की उनकी जिद ने चार दिनों तक सेट पर तनाव पैदा कर दिया था। फिल्म इंडस्ट्री के बड़े कलाकारों को अपने इशारों पर नचाने वाली मशहूर कोरियोग्राफर ने जब निर्देशन की दुनिया में कदम रखा, तो हर कोई हैरान रह गया। बतौर निर्देशक उनकी पहली ही फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इस पहली फिल्म में उन्होंने शाहरुख खान और सुष्मिता सेन जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया। यह मशहूर हस्ती कोई और नहीं बल्कि फराह खान हैं, जिन्होंने साल 2004 में फिल्म ‘मैं हूं ना’ के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में अपनी पारी की शुरुआत की थी। इस फिल्म में शाहरुख खान और सुष्मिता सेन के अलावा अमृता राव और जायद खान जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म में रोमांस, एक्शन, कॉमेडी, कॉलेज के दिनों की यादें और शानदार संगीत का पूरा तड़का देखने को मिला था। इन सब के बीच फिल्म का गाना ‘चले जैसे हवाएं’ एक ऐसा ट्रैक था, जिसकी शूटिंग किसी बड़े मिशन को अंजाम देने से कम नहीं थी। फिल्म का यह लोकप्रिय गाना ‘चले जैसे हवाएं सनन-सनन’ मुख्य रूप से अभिनेत्री अमृता राव पर फिल्माया गया था। एक ही टेक में पूरा सीक्वेंस शूट करने की जिद फराह खान के दिमाग में इस गाने को लेकर शुरुआत से ही एक खास कल्पना थी। वह चाहती थीं कि गाने का एक बड़ा हिस्सा कैमरे को बिना रोके लगातार रिकॉर्ड किया जाए। खास तौर पर लगभग 2 से 3 मिनट का लंबा हिस्सा ऐसा होना चाहिए था, जिसे बिना कट के एक ही टेक में पूरा किया जा सके। जरा कल्पना कीजिए कि एक तरफ कलाकारों का नृत्य निर्देशन, दूसरी तरफ दर्जनों डांसर्स का सही तालमेल, कैमरे की लगातार घूमती हुई मूवमेंट और इतनी लंबी अवधि की शूटिंग। इस पूरे गाने को एक ही टेक में कैमरे में कैद करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। यदि शूटिंग के दौरान छोटी सी भी चूक हो जाती, तो पूरी मेहनत को सिरे से दोबारा शुरू करना पड़ता। फराह खान ने इस बड़ी चुनौती को स्वीकार किया और सभी कलाकारों के साथ कड़ा अभ्यास शुरू कर दिया। गाने के इस खास सीक्वेंस के लिए अमृता राव और जायद खान ने काफी लंबे समय तक तैयारी और रिहर्सल की थी। फराह खान ने खुद साझा किया था कि वह इस पूरे गाने को एक ही टेक में फिल्माने की अपनी जिद पर पूरी तरह अड़ी रही थीं, जिसके चलते उन्होंने सेट पर कलाकारों और टीम की जमकर क्लास भी लगाई थी। चार दिनों तक सेट पर बना रहा तनाव का माहौल फराह खान ने अपने इस गाने की शूटिंग से पहले मुंबई में लगभग 4 दिनों तक लगातार रिहर्सल का सिलसिला जारी रखा था। कैमरे के साथ हर एक मूवमेंट का मिलान करके देखा जाता था, ताकि मुख्य टेक के वक्त किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश न बचे। स्थिति यह थी कि सामान्य शूटिंग का समय पूरा होने के बाद भी पूरी टीम अतिरिक्त एक-दो घंटे तक अभ्यास किया करती थी। यदि एक ही टेक के दौरान कैमरा अपनी निर्धारित जगह पर समय पर नहीं पहुंच पाता, तो पूरा शॉट बेकार हो जाता था। कभी बदलता मौसम और रोशनी की दिक्कतें परेशानी खड़ी करती थीं, तो कभी कलाकारों या कैमरा मूवमेंट का समय थोड़ा सा बिगड़ जाता था। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, अमृता राव ने अपने हिस्से के सीक्वेंस को मात्र तीन टेक में ही बेहतरीन तरीके से पूरा कर लिया था, लेकिन तकनीकी कारणों की वजह से यूनिट को कई बार दोबारा प्रयास करना पड़ा। फराह खान की साफ इच्छा थी कि जब यह गाना पर्दे पर उतरे, तो दर्शक उसे देखते ही रह जाएं। ब्लॉकबस्टर साबित हुई शाहरुख और सुष्मिता की फिल्म लंबी मशक्कत और कई दिनों की कड़ी मेहनत के बाद जब फराह खान की फिल्म ‘मैं हूं ना’ का गाना ‘चले जैसे हवाएं सनन-सनन’ दर्शकों के सामने आया, तो हर कोई इसके जादू में खो गया। ब्लॉकबस्टर का दर्जा पाने वाली इस फिल्म का यह गाना रिलीज के साथ ही चार्टबस्टर बन गया। उस दौर में गानों की लोकप्रियता का पैमाना मुख्य रूप से रेडियो हुआ करता था और यह गाना लंबे समय तक रेडियो की दुनिया पर पूरी तरह छाया रहा था। इसका आप पर असर फराह खान के निर्देशन से जुड़े इस किस्से का आम पाठकों पर कोई सीधा वित्तीय या नीतिगत प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन यह सिनेमा प्रेमियों के लिए फिल्म निर्माण के पीछे की मेहनत को दर्शाता है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: दर्शकों को यह समझने में मदद मिलती है कि पर्दे पर दिखने वाले तीन मिनट के एक सहज सीक्वेंस के पीछे कलाकारों और निर्देशकों को कितनी तकनीकी और शारीरिक चुनौतियों से गुजरना पड़ता है। • मनोरंजन जगत के लिए: यह वाकया स्पष्ट करता है कि किसी भी कलात्मक या व्यावसायिक सफलता के पीछे कड़ा अभ्यास, अनुशासन और बिना समझौता किए गए दृष्टिकोण की अहमियत कितनी होती है। ऐसा क्यों हुआ यह किस्सा इस बात को उजागर करता है कि फिल्म के एक विशिष्ट दृश्य को तकनीकी रूप से परफेक्ट बनाने के लिए निर्देशक की जिद और कलाकारों की तैयारी किस स्तर तक जाती है। • निर्देशक का दृष्टिकोण: फराह खान चाहती थीं कि गाना एक अलग और प्रामाणिक प्रभाव छोड़े, जिसके लिए उन्होंने बिना कट वाले लंबे शॉट को आवश्यक माना। • तकनीकी जटिलताएं: दर्जनों डांसर्स की टाइमिंग, कैमरे की सटीक गति और मौसम के तालमेल जैसी बाधाओं ने शूटिंग को अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया था। • लंबी रिहर्सल: त्रुटि की गुंजाइश को खत्म करने के लिए मुंबई में चार दिनों तक लगातार अभ्यास किया गया ताकि कलाकार हर मूवमेंट में सहज हो सकें। सवाल-जवाब 1. फराह खान ने बतौर निर्देशक अपनी किस फिल्म से शुरुआत की थी? फराह खान ने साल 2004 में आई फिल्म ‘मैं हूं ना’ से बतौर निर्देशक अपनी शुरुआत की थी। 2. फिल्म ‘मैं हूं ना’ में मुख्य भूमिकाओं में कौन-कौन कलाकार थे? इस फिल्म में शाहरुख खान, सुष्मिता सेन, अमृता राव और जायद खान जैसे प्रमुख सितारे शामिल थे। 3. किस गाने की शूटिंग के दौरान चार दिनों तक सेट पर तनाव रहा था? फिल्म के लोकप्रिय गाने ‘चले जैसे हवाएं सनन-सनन’ की शूटिंग के दौरान चार दिनों तक सेट पर कड़ा अभ्यास और तनाव का माहौल रहा था। 4. फराह खान इस गाने की शूटिंग को लेकर क्या चाहती थीं? फराह खान चाहती थीं कि इस गाने का 2 से 3 मिनट का बड़ा हिस्सा बिना किसी कट के एक ही टेक में शूट किया जाए। प्रेरणा और सबक फराह खान के निर्देशन सफर से कुछ महत्वपूर्ण सीख ली जा सकती हैं जो हर क्षेत्र में काम आ सकती हैं। • दृष्टिकोण पर अडिग रहना: जब आपको अपनी किसी रचनात्मक योजना की सफलता पर पूरा भरोसा हो, तो शुरुआती मुश्किलों के बावजूद अपने विजन से पीछे न हटें। • कड़ी मेहनत और रिहर्सल: किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए मैदान में उतरने से पहले पर्याप्त अभ्यास और तैयारी करना सफलता की कुंजी है। • अनुशासन का महत्व: सेट पर उच्च मानक बनाए रखने के लिए सख्त होना और हर छोटी तकनीकी बारीकी पर ध्यान देना बेहतरीन परिणाम देता है। https://trendkia.com/bollywood/pharaha-khana-ki-pahali-philma-jaba-tina-minata-ke-singala-teka-shota-ke-lie-seta-para-macha-diya-tha-koharama-30486 TrendKia — Har trend, sabse pehle.