# फिल्म 'बाजीगर' में शाहरुख खान के बचपन का रोल करने वाले सुमीत पाठक अब क्या कर रहे हैं

> फिल्म 'बाजीगर' में बाल कलाकार के तौर पर फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतने वाले सुमीत पाठक ने अब मीडिया और पोस्ट प्रोडक्शन इंडस्ट्री में एक सफल आंत्रप्रेन्योर के रूप में नई पहचान बनाई है।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/philma-baazigar-men-shah-rukh-khan-ke-bachapana-ka-rola-karane-vale-sumeet-pathak-aba-kya-kara-rahe-hain-43255 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुमीत पाठक, बाजीगर, शाहरुख खान, गुलमोहर मीडिया, बाल कलाकार, सत्यमेव जयते, बॉलीवुड

सिनेमा की दुनिया में कई चेहरे ऐसे होते हैं जो महज कुछ मिनटों के स्क्रीन टाइम में दर्शकों के दिलों पर अपनी गहरी छाप छोड़ जाते हैं। साल 1993 में जब निर्देशक जोड़ी अब्बास मस्तान की थ्रिलर 'बाजीगर' सिनेमाघरों में आई थी, तो उसमें मुख्य पात्र अजय मल्होत्रा के बचपन का एक दर्दनाक और संजीदा दृश्य हर दर्शक की यादों में दर्ज हो गया था। उस भूमिका को निभाने वाले नन्हे कलाकार सुमीत पाठक ने अपनी सशक्त अदायगी के दम पर फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार पुरस्कार अपने नाम किया था। आज वही सुमीत पाठक कैमरे के आगे की चकाचौंध से निकलकर पर्दे के पीछे मीडिया टेक्नोलॉजी और पोस्ट प्रोडक्शन क्षेत्र का एक बड़ा नाम बन चुके हैं।

## बाल कलाकार के रूप में शुरुआती सफर और अभिनय की दुनिया
सुमीत पाठक ने बड़े पर्दे पर अपने अभिनय करियर का आगाज 1992 की फिल्म 'एक लड़का एक लड़की' से किया था। इसके फौरन बाद उन्हें 'बाजीगर' में शाहरुख खान के बचपन के किरदार को जीवंत करने का सुनहरा मौका हाथ लगा। फिल्म में उनका दृश्य भले ही संक्षिप्त था, पर उनकी भावुक अदाकारी ने फिल्म विश्लेषकों और दर्शकों दोनों को गहराई से प्रभावित किया। इस बड़ी कामयाबी ने उनके लिए हिंदी सिनेमा में कई नए दरवाजे खोले।

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इसके बाद 1994 में उन्होंने 'इक्के पे इक्का' में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अभिनय के प्रति अपने रुझान को जारी रखते हुए वे 1996 में रिलीज हुई फिल्मों 'राजकुमार' और 'माहीर' में भी नजर आए। सुमीत ने सिर्फ अभिनय को ही अपनी पहचान नहीं माना, बल्कि कला की बारीकियों को समझने के लिए दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से विधिवत प्रशिक्षण हासिल किया और साथ ही क्लासिकल डांस की भी गहरी तालीम ली।

## बड़े पर्दे से लेकर छोटे पर्दे पर सुपरहीरो बनने तक की यात्रा
चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में लोकप्रियता हासिल करने के बाद बड़े अभिनेता के तौर पर इंडस्ट्री में खुद को स्थापित करना हमेशा एक चुनौतीपूर्ण सफर रहता है। सुमीत पाठक ने भी इस बदलाव को अपनाया और साल 2002 में फिल्म 'तुमको ना भूल पाएंगे' से बड़े पर्दे पर वापसी की, जिसमें उन्होंने सलमान खान के भाई का किरदार अदा किया था। इसके उपरांत साल 2004 में वे वत्सल सेठ के साथ फिल्म 'टार्जन: द वंडर कार' में भी नजर आए।

हालांकि, टेलीविजन की दुनिया ने उन्हें बच्चों के बीच एक अलग ही मुकाम दिलाया। वर्ष 2005 से 2007 के दौरान हंगामा टीवी पर प्रसारित हुए बेहद लोकप्रिय फैंटेसी शो 'हीरो-भक्ति ही शक्ति है' में उन्होंने मुख्य नायक जॉय सहगल की भूमिका निभाई। शो की पटकथा में जॉय को मां दुर्गा की कृपा से अलौकिक सुपरपावर प्राप्त होती हैं, जिनका उपयोग वह समाज में फैली बुराइयों और खलनायकों से निपटने के लिए करता है। इस धारावाहिक ने युवा वर्ग और नन्हें दर्शकों के बीच सुमीत को एक चर्चित घरेलू नाम बना दिया था।

## वॉइस ओवर इंडस्ट्री में हुनर और कैमरे के पीछे का रुख
अभिनय के अतिरिक्त सुमीत पाठक ने अपनी आवाज के दम पर भी मनोरंजन जगत में एक मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने कई लोकप्रिय एनिमेटेड धारावाहिकों जैसे 'ऑसवाल्ड', 'पावर रेंजर्स', 'रिची रिच' और 'बेब्लेड' के हिंदी संस्करणों के लिए प्रमुख किरदारों को अपनी सशक्त आवाज दी। इसके अलावा दक्षिण भारत की कई चर्चित फिल्मों के हिंदी डबिंग प्रोजेक्ट्स में भी उनके स्वर का हुनर देखने को मिला।

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धीरे-धीरे सुमीत ने ऑन स्क्रीन अभिनय से दूरी बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने मनोरंजन उद्योग के उस पहलू को अपना कार्यक्षेत्र चुना जो भले ही परदे के पीछे रहता हो, लेकिन किसी भी सिनेमाई सामग्री को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने में रीढ़ की हड्डी साबित होता है।

## पत्नी श्वेता के साथ गुलमोहर मीडिया की स्थापना और तकनीकी विस्तार
सुमीत पाठक ने अपनी पत्नी एवं कारोबारी साझेदार श्वेता पाठक के साथ मिलकर 'गुलमोहर मीडिया' की नींव रखी। शुरुआत में इस उद्यम का मुख्य फोकस भाषा लोकलाइजेशन और डबिंग तक सीमित था, परंतु समय के साथ कंपनी ने पोस्ट प्रोडक्शन और आधुनिक मीडिया टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा विस्तार किया। वर्तमान में यह उद्यम मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई सहित देश के छह प्रमुख शहरों में सक्रिय है।

पारंपरिक स्टूडियो व्यवस्था के दायरे से बाहर निकलते हुए इस कंपनी ने क्लाउड आधारित आधुनिक एडिटिंग और डिजिटल प्रोडक्शन कार्यप्रणाली को अपने तंत्र का हिस्सा बनाया। इस तकनीक की मदद से देश-विदेश में अलग-अलग स्थानों पर मौजूद रचनात्मक टीमें एक ही प्रोजेक्ट पर रियल टाइम में मिलकर काम करने में सक्षम हुई हैं।

## 'सत्यमेव जयते' से मिली वैश्विक पहचान और भविष्य की योजनाएं
गुलमोहर मीडिया के पेशेवर सफर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब इसे आमिर खान प्रोडक्शंस के चर्चित और संवेदनशील सामाजिक टॉक शो 'सत्यमेव जयते' के बहुभाषी लोकलाइजेशन की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। इस शो को भारत की विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत करने के कार्य ने कंपनी को बड़े पैमाने के जटिल प्रोजेक्ट्स संभालने की विशेष दक्षता दी।

आज यह कंपनी केवल अनुवाद या लोकलाइजेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि ओरिजिनल कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में भी तेजी से कदम बढ़ा रही है। वर्तमान समय में कंपनी दो भारतीय एनीमे प्रोजेक्ट्स तैयार करने में जुटी है। इसके साथ ही फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय मुल्कों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय सिनेमाई कंटेंट को दक्षिण-पूर्व एशिया के विभिन्न देशों के दर्शकों के अनुकूल ढालने के बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी निरंतर कार्य कर रही है।

## इसका आप पर असर
यह कहानी दर्शाती है कि कैसे अभिनय की दुनिया के कलाकार अपने हुनर और अनुभव को तकनीक आधारित सफल उद्यम में बदल सकते हैं।

- **करियर मार्गदर्शन:** मनोरंजन उद्योग से जुड़े युवा कलाकार पर्दे के पीछे के तकनीकी अवसरों को समझ सकते हैं। वे वॉइस ओवर, डबिंग और पोस्ट प्रोडक्शन को एक दीर्घकालिक पेशे के रूप में चुन सकते हैं।
- **आधुनिक तकनीक:** क्लाउड आधारित एडिटिंग से प्रोडक्शन का काम काफी सुगम हुआ है। दूरदराज बैठे क्रिएटिव प्रोफेशनल्स अब बड़े मीडिया प्रोजेक्ट्स में आसानी से अपनी भागीदारी दर्ज करा सकते हैं।
- **कंटेंट दर्शक:** भारतीय एनीमे और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा का विस्तार हो रहा है। दर्शकों को आने वाले समय में वैश्विक स्तर का बहुभाषी कंटेंट देखने को मिलेगा।
- **व्यावसायिक प्रेरणा:** यह यात्रा दर्शाती है कि निरंतर सीखने से करियर को नई दिशा मिलती है। अपनी विशेषज्ञता का विस्तार करके कोई भी पेशेवर सफल उद्यमी बन सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
सुमीत पाठक का अभिनय से आंत्रप्रेन्योरशिप की तरफ जाना मनोरंजन जगत में आधुनिक तकनीक और कंटेंट लोकलाइजेशन की बढ़ती मांग का परिणाम है।

- **उद्योग में बदलाव:** ओटीटी और सैटेलाइट टीवी के विस्तार से बहुभाषी कंटेंट की मांग में भारी उछाल आया। इसी मांग को भांपते हुए सुमीत ने डबिंग और भाषा लोकलाइजेशन को अपने व्यवसाय का मुख्य आधार बनाया।
- **तकनीकी प्रशिक्षण:** नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से मिले अभिनय प्रशिक्षण और वॉइस ओवर के लंबे अनुभव ने उन्हें पर्दे के पीछे की जरूरतों को गहराई से समझने में मदद की। इस अनुभव का इस्तेमाल उन्होंने अपनी कंपनी के संचालन में किया।
- **क्लाउड टेक्नोलॉजी का उभार:** पारंपरिक स्टूडियो व्यवस्था की सीमाओं को दूर करने के लिए आधुनिक क्लाउड प्रोडक्शन को अपनाया गया। इससे छह प्रमुख शहरों में टीमों को जोड़कर काम करना आसान हो गया।

## सवाल-जवाब

### 1. सुमीत पाठक ने फिल्म 'बाजीगर' में कौन सा रोल निभाया था?
सुमीत पाठक ने 1993 की फिल्म 'बाजीगर' में शाहरुख खान के किरदार अजय मल्होत्रा के बचपन का रोल निभाया था और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था।

### 2. सुमीत पाठक ने किन प्रमुख फिल्मों में काम किया है?
उन्होंने 'एक लड़का एक लड़की', 'बाजीगर', 'इक्के पे इक्का', 'राजकुमार', 'माहीर', 'तुमको ना भूल पाएंगे' और 'टार्जन: द वंडर कार' जैसी फिल्मों में अभिनय किया है।

### 3. टीवी शो 'हीरो-भक्ति ही शक्ति है' में उनका क्या किरदार था?
उन्होंने 2005 से 2007 तक प्रसारित हुए हंगामा टीवी के शो 'हीरो-भक्ति ही शक्ति है' में मुख्य किरदार जॉय सहगल की भूमिका निभाई थी।

### 4. सुमीत पाठक ने किन चर्चित एनिमेटेड शोज को अपनी आवाज दी है?
उन्होंने 'ऑसवाल्ड', 'पावर रेंजर्स', 'रिची रिच' और 'बेब्लेड' जैसे बेहद लोकप्रिय एनिमेटेड शोज के हिंदी वर्जन में अपनी आवाज दी है।

### 5. गुलमोहर मीडिया की शुरुआत किसने की और यह क्या काम करती है?
सुमीत पाठक ने अपनी पत्नी श्वेता पाठक के साथ मिलकर गुलमोहर मीडिया शुरू की, जो भाषा लोकलाइजेशन, पोस्ट-प्रोडक्शन और क्लाउड मीडिया टेक्नोलॉजी पर काम करती है।

### 6. गुलमोहर मीडिया को किस टीवी शो से बड़ा मुकाम मिला?
आमिर खान प्रोडक्शंस के चर्चित सामाजिक कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' के बहुभाषी लोकलाइजेशन का काम संभालने के बाद कंपनी को बड़ी पहचान मिली।

## प्रेरणा और सबक
सुमीत पाठक की यात्रा दर्शाती है कि कैसे कलात्मक प्रतिभा और व्यावहारिक समझ मिलकर एक नई सफलता की इबारत लिख सकते हैं।

- **सबक:** अपनी पहचान को सिर्फ एक दायरे में सीमित न रखें। कैमरे के सामने मिली शुरुआती सफलता के बाद उन्होंने पर्दे के पीछे की संभावनाओं को पहचाना और अपनाया।
- **सबक:** निरंतर औपचारिक शिक्षा और प्रशिक्षण में निवेश करें। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और क्लासिकल डांस की उनकी तालीम ने उनके कौशल को बहुआयामी बनाया।
- **सबक:** बाजार के बदलावों के साथ खुद को अपग्रेड करते रहें। वॉयस ओवर से शुरुआत करके उन्होंने आधुनिक क्लाउड पोस्ट-प्रोडक्शन कंपनी खड़ी की।

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