फिल्म 'हनुमान अंश' के भक्ति गीत 'पार्वती' का डिजिटल दुनिया में दबदबा, यूट्यूब पर 10 करोड़ से अधिक बार देखा गया बुंदेली लोक संगीत पर आधारित 'पार्वती' गीत यूट्यूब म्यूजिक के भारतीय चार्ट में शीर्ष पर पहुंच गया है, जिसे 10 करोड़ से अधिक कुल व्यूज मिल चुके हैं। सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन के बाद अब फिल्म 'हनुमान अंश' की चर्चा उसके भक्ति संगीत को लेकर चारों तरफ हो रही है। इस फिल्म का भक्ति रचना 'पार्वती' श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुका है और इसने यूट्यूब म्यूजिक के वीकली सॉन्ग्स चार्ट में भारत के भीतर पहला पायदान अपने नाम कर लिया है। घरेलू स्तर पर शीर्ष पर रहने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय पटल पर भी इस गीत का जादू चल रहा है, जहां यह वैश्विक वीकली चार्ट में दूसरे नंबर पर काबिज हो गया है। बुंदेली लोक धुनों से सजा यह ट्रैक अब सिर्फ फिल्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए आम संगीत प्रेमियों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। घरेलू म्यूजिक चार्ट में शीर्ष स्थान और भारी व्यूज यूट्यूब चार्ट्स के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, तय चार्टिंग अवधि में 'पार्वती' को भारत में कुल 4,72,66,182 व्यूज हासिल हुए। इन आंकड़ों के दम पर इस ट्रैक ने देश के वीकली सॉन्ग्स चार्ट में सबसे ऊपरी पायदान हासिल किया। वैश्विक स्तर पर यह गीत दूसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि इस अंतरराष्ट्रीय सूची में केवल शकीरा और बर्ना बॉय का संयुक्त ट्रैक 'डाई डाई' ही इससे आगे पहले स्थान पर है। इस पूरे संगीत की सबसे अहम विशेषता इसका ठेठ पारंपरिक मिजाज है, जिसकी जड़ें बुंदेली लोक संगीत में रची-बसी हैं। इस पूरे गीत को साधु तिवारी ने ही लिखा है, उन्होंने ही इसकी धुन तैयार की है और इसे अपनी आवाज में गाया भी है। डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर 'पार्वती' गीत का कुल आंकड़ा 100 मिलियन यानी 10 करोड़ व्यूज को पार कर गया है। सिनेमाघरों में कहानी देखने वाले दर्शकों के अतिरिक्त ऐसे अनगिनत संगीत प्रेमी भी इसे बार-बार सुन रहे हैं, जिन्होंने यह फिल्म नहीं देखी है। सोशल मीडिया रील्स पर छाया लोक संगीत का जादू इस भक्ति रचना की लोकप्रियता केवल वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तक ही सीमित नहीं है। इंस्टाग्राम रील्स और अन्य प्रमुख सोशल मीडिया माध्यमों पर भी लोग इस गाने की धुन का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी पारम्परिक बुंदेली लय और भक्ति भाव से भरी रचना आम जनता को तेजी से आकर्षित कर रही है। यही कारण है कि फिल्म के प्रदर्शन के काफी समय बीत जाने के बाद भी इसका संगीत लगातार नए श्रोताओं को जोड़ रहा है। भारत के वीकली सॉन्ग्स चार्ट की बात करें तो 'पार्वती' के ठीक पीछे गायिका श्रेया घोषाल का गाया गीत 'कल्याणी' दूसरे स्थान पर मौजूद है। वहीं इस सूची में 'द पैराडाइज' का गाना 'येशनागुला' तीसरे पायदान पर अपनी जगह बनाए हुए है। ऐसी कड़ी व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के बीच एक शुद्ध भक्ति रचना का चार्ट के शीर्ष पर पहुंचना पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक अप्रत्याशित और ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। दिल्ली के भजन क्लबिंग मंच पर गूंजी बुंदेली धुन हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित एक विशेष सांस्कृतिक आयोजन में भी इस भक्ति रचना की शानदार गूंज सुनाई दी। 25 सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के उपलक्ष्य में 'भजन क्लबिंग' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित रहे। इसी मंच पर साधु तिवारी ने 'पार्वती' गीत की लाइव प्रस्तुति दी। इस दौरान नरेंद्र मोदी को इस गायन का आनंद लेते, तालियां बजाते और साथ में खंजरी बजाते हुए देखा गया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा, 'शानदार भजन क्लबिंग इन दिल्ली।' भजन क्लबिंग दरअसल एक ऐसा सांस्कृतिक प्रारूप है जिसमें पारंपरिक भक्ति भजनों को आधुनिक कॉन्सर्ट शैली की ऊर्जा के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इस तरह के आयोजनों का प्रमुख लक्ष्य सनातन और भक्ति संगीत को नई पीढ़ी के युवाओं के बीच प्रासंगिक और आकर्षक बनाना है, और 'पार्वती' की सफलता इस सांस्कृतिक बदलाव का एक बड़ा प्रमाण बनकर उभरी है। फिल्म 'हनुमान अंश' की पृष्ठभूमि और व्यावसायिक प्रदर्शन फिल्म 'हनुमान अंश' का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने संभाला है। इस फिल्म का कथानक लक्ष्मी नारायण नाम के एक साधारण युवक के आध्यात्मिक सफर पर केंद्रित है, जो आगे चलकर पूज्य नीम करोली बाबा के रूप में लोक कल्याण के लिए समर्पित हो जाते हैं। फिल्म की यह पूरी कहानी निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की अपनी पुस्तक 'डिवाइन डेटोर: दैट चेंज्ड माई लाइफ' पर आधारित है। निर्माताओं ने इसे तीन कड़ियों वाली एक भव्य ट्रायलॉजी के पहले भाग के रूप में तैयार किया है। फिल्म के मुख्य किरदार में अभिनेता शोभिनव सत्या ने अभिनय किया है। महज लगभग 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर 410 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई दर्ज की है। इस अप्रत्याशित सफलता के प्रभाव से अब नीम करोली बाबा के जीवन प्रसंगों पर आधारित एक नया टीवी धारावाहिक भी दर्शकों के सामने लाने की तैयारी हो चुकी है। इसका आप पर असर पारंपरिक लोक संगीत और भक्ति विधाओं का मुख्यधारा की वैश्विक पॉप संस्कृति के समानांतर शीर्ष चार्ट्स पर पहुंचना भारतीय संगीत उद्योग के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो रहा है। • संगीत श्रोताओं के लिए: पारंपरिक बुंदेली लोक धुनों से सजे भक्ति गीत अब आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध और ट्रेंडिंग हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि संगीत प्रेमियों को नए प्रयोगों और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े नए ट्रैक सुनने के लिए कई विकल्प मिल रहे हैं। • कंटेंट क्रिएटर्स के लिए: इस गाने की बढ़ती लोकप्रियता के कारण सोशल मीडिया रील्स और शॉर्ट्स में पारंपरिक भक्ति धुनों का उपयोग काफी बढ़ गया है। जो लोग डिजिटल कंटेंट बनाते हैं, वे इस ट्रेंडिंग ऑडियो का इस्तेमाल करके अपनी रीच को बढ़ा सकते हैं। • युवा संस्कृति और कार्यक्रमों में: भजन क्लबिंग जैसे नए प्रयोगों के जरिए आधुनिक कॉन्सर्ट माहौल में भक्ति संगीत को नया मंच मिल रहा है। युवा दर्शक अब पारंपरिक भजनों को एक नए और ऊर्जावान संगीत अनुभव के रूप में देख पा रहे हैं। • स्वतंत्र लोक कलाकारों के लिए: बिना किसी भारी-भरकम व्यावसायिक प्रचार के लोक आधारित संगीत का चार्ट टॉपर बनना छोटे कलाकारों के लिए अवसर खोलता है। स्थानीय और क्षेत्रीय बोलियों में काम करने वाले संगीतकारों के लिए मुख्यधारा के राष्ट्रीय संगीत पटल पर अपनी जगह बनाना अब अधिक सुलभ हो रहा है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक भक्ति गीत 'पार्वती' की यह भारी डिजिटल सफलता कई सांस्कृतिक, कलात्मक और रणनीतिक कारकों का संयुक्त परिणाम है। • बुंदेली लोक संगीत की सहज ताजगी: गीत की सबसे बड़ी ताकत इसकी पारंपरिक बुंदेली धुन है, जो वर्तमान के व्यावसायिक संगीत से पूरी तरह अलग और मौलिक सुनाई देती है। साधु तिवारी के संपूर्ण गायन, लेखन और संगीत संयोजन ने सीधे श्रोताओं के मन को छुआ। • फिल्म 'हनुमान अंश' की बॉक्स ऑफिस सुनामी: करीब 2 करोड़ रुपये के बेहद सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने 410 करोड़ रुपये से अधिक की ऐतिहासिक कमाई की। फिल्म की इस विशाल सफलता ने इसके संगीत को स्वाभाविक रूप से करोड़ों नए दर्शकों तक तुरंत पहुंचा दिया। • उच्च स्तरीय मंच और सोशल मीडिया का प्रभाव: 25 सितंबर को दिल्ली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आयोजित 'भजन क्लबिंग' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति और उनके द्वारा साझा किए गए वीडियो ने इसे व्यापक राष्ट्रीय दृश्यता दी। इसके साथ ही इंस्टाग्राम रील्स पर इस धुन के व्यापक उपयोग ने इसे वायरल कर दिया। सवाल-जवाब 1. 'पार्वती' गीत को यूट्यूब म्यूजिक के भारतीय चार्ट में कौन सा स्थान मिला है? 'पार्वती' गीत यूट्यूब म्यूजिक के वीकली सॉन्ग्स चार्ट में भारत में पहले स्थान पर पहुंच गया है, जहां इसे तय चार्टिंग अवधि में 4,72,66,182 व्यूज मिले। 2. यूट्यूब के ग्लोबल वीकली सॉन्ग्स चार्ट में 'पार्वती' किस स्थान पर है? ग्लोबल चार्ट में यह गीत दूसरे नंबर पर काबिज है, जहां इससे आगे केवल शकीरा और बर्ना बॉय का गाना 'डाई डाई' मौजूद है। 3. इस भक्ति गीत के लेखक, संगीतकार और गायक कौन हैं? 'पार्वती' गीत को संगीतकार साधु तिवारी ने ही लिखा है, उन्होंने ही इसकी धुन तैयार की है और इसे अपनी आवाज दी है। 4. गीत 'पार्वती' किस संगीत शैली और क्षेत्रीय संस्कृति पर आधारित है? यह एक शुद्ध भक्ति रचना है, जिसकी संगीतमय जड़ें मध्य भारत के पारंपरिक बुंदेली लोक संगीत से जुड़ी हुई हैं। 5. फिल्म 'हनुमान अंश' की कहानी किस व्यक्तित्व के जीवन पर आधारित है? फिल्म का कथानक लक्ष्मी नारायण नाम के युवक की आध्यात्मिक यात्रा पर केंद्रित है, जो आगे चलकर पूज्य नीम करोली बाबा के रूप में जाने जाते हैं। 6. फिल्म 'हनुमान अंश' का बजट कितना था और इसने कितनी कमाई की? लगभग 2 करोड़ रुपये के कथित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर असाधारण प्रदर्शन करते हुए दुनिया भर में 410 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन किया है। 7. दिल्ली के भजन क्लबिंग कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या किया? 25 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साधु तिवारी के गायन का आनंद लेते हुए तालियां बजाईं, खंजरी बजाई और बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसका वीडियो भी शेयर किया। प्रेरणा और सबक साधु तिवारी की रचना और फिल्म 'हनुमान अंश' की यात्रा साबित करती है कि जड़ों से जुड़ी मौलिक कला सीमित संसाधनों के बावजूद वैश्विक स्तर पर इतिहास रच सकती है। • अपनी सांस्कृतिक जड़ों पर भरोसा: आधुनिक रुझानों की नकल करने के बजाय अपनी पारंपरिक बुंदेली लोक विधा को चुनना सफलता का सबसे बड़ा आधार बना। अपनी क्षेत्रीय विरासत और लोक संगीत को आधुनिक दुनिया में अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया जा सकता है। • सीमित संसाधनों में बड़ा प्रभाव: फिल्म का निर्माण महज 2 करोड़ रुपये के साधारण बजट में हुआ, लेकिन इसकी कमाई 410 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई। कला और सामग्री में यदि दम हो तो बड़े बजट और तकनीकी तामझाम की कमी कभी रुकावट नहीं बनती। • बहुमुखी प्रतिभा का समर्पण: साधु तिवारी ने इस गीत को स्वयं लिखा, संगीतबद्ध किया और अपनी आवाज भी दी। जब कोई रचनाकार अपनी कला के हर पहलू पर पूरी निष्ठा से काम करता है, तो उसका परिणाम बेहद प्रभावशाली होता है। https://trendkia.com/bollywood/philma-hanuman-ansh-ke-bhakti-gita-parvati-ka-dijitala-duniya-men-dabadaba-youtube-para-10-karora-se-adhika-bara-dekha-gaya-41180 TrendKia — Har trend, sabse pehle.