फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा ने साझा कीं नाना पाटेकर से जुड़ी यादें, 'वनवास' के दिनों को बताया अविस्मरणीय नाना पाटेकर के निधन के बाद फिल्म निर्माता अनिल शर्मा ने उनके साथ काम करने के अनुभव साझा किए और उनकी सादगी तथा समाज सेवा को याद किया। सिनेमा जगत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद पूरे देश और फिल्म उद्योग में गहरा दुख देखा जा रहा है। उन्होंने अपने लंबे करियर में कई यादगार किरदार निभाए, जिन्होंने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। उनके जाने पर मनोरंजन जगत के कई दिग्गजों ने अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। इसी कड़ी में जाने-माने निर्देशक और निर्माता अनिल शर्मा ने भी इस दुखद घड़ी में अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और उनके साथ काम करने के पलों को याद किया। 'वनवास' के सेट पर बिताए पलों की याद अनिल शर्मा ने साल 2024 में रिलीज हुई फिल्म 'वनवास' में 75 वर्षीय अभिनेता के साथ मिलकर काम किया था। उन्होंने बताया कि इस वरिष्ठ कलाकार के साथ शूटिंग का अनुभव बेहद खास और प्रेरणादायक रहा। सेट पर उनका व्यवहार सभी के प्रति बहुत आत्मीय रहता था। वे अक्सर यूनिट के सदस्यों के साथ बैठकर बातचीत करते थे और कई बार अपने हाथों से लोगों को खाना भी खिलाते थे। इस तरह का अपनापन और सादगी बहुत कम देखने को मिलती है। सादगी और समाज सेवा का अनोखा उदाहरण अनिल शर्मा ने रेखांकित किया कि यह क्षति सिर्फ सिनेमा जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मुल्क के लिए एक बड़ा नुकसान है। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर एक असाधारण इंसान और बहुत समर्पित व्यक्तित्व थे। वे समाज के वंचित वर्गों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। उन्होंने पुणे के इलाके में जल संरक्षण की दिशा में व्यापक जमीनी स्तर पर कार्य किया था। वे अक्सर गांवों और जंगलों का दौरा करते थे, जहां आम लोगों से सीधे मिलकर उनकी परेशानियों को समझते थे। इसके अलावा, वे अपनी कुल कमाई का आधे से अधिक हिस्सा जनकल्याण और दान में लगा देते थे। काम करने में सबसे सहज इंसान इंडस्ट्री में कुछ लोगों का मानना था कि उनके साथ काम करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन अनिल शर्मा का अनुभव इसके बिल्कुल विपरीत रहा। उन्होंने साफ किया कि उनके साथ काम करना बेहद सहज और सरल था। उन्होंने बताया कि उनके साथ बिताया गया समय बहुत सुखद था। शर्मा ने कहा कि वे उन्हें 'नटसम्राट' मानते हैं और उनके जैसा दूसरा कोई कलाकार नहीं हो सकता। इस दुखद अवसर पर शर्मा ने उनके बेटे मल्हार से भी संपर्क किया और परिवार तथा दोस्तों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। गोवा में बीते अंतिम क्षणों का घटनाक्रम जीवन के अंतिम पलों में यह वरिष्ठ अभिनेता गोवा में अपने आवास पर मौजूद थे, जहां देर रात उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। उन्होंने रात करीब 2:30 बजे अपने एक मित्र को संदेश भेजकर अस्वस्थ होने की बात कही थी, लेकिन देर रात होने के चलते वह संदेश उस समय नहीं देखा जा सका। बाद में जब दोस्त ने फोन किया, तो वह सुबह करीब 4 बजे उनके आवास पर पहुंचे। उस वक्त अभिनेता को अत्यधिक पसीना आ रहा था और वे धीरे-धीरे अचेत होने लगे थे। इसके बाद उनके केयरटेकर को अस्पताल भेजा गया और फौरन एम्बुलेंस मंगवाई गई। आपातकालीन मेडिकल टीम ने मौके पर ही कार्डियक मसाज देना शुरू कर दिया था। गुरुवार को तड़के करीब 4.30 बजे उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने लगभग 45 मिनट तक उनकी जान बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद सुबह 5.20 बजे उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसका आप पर असर भारतीय सिनेमा के एक बहुमुखी अभिनेता और समर्पित समाजसेवी के निधन से कला प्रेमियों और सामाजिक क्षेत्र दोनों में गहरा खालीपन आया है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: दर्शकों ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है जिन्होंने अभिनय की अपनी अनूठी शैली से दशकों तक सिनेमा को समृद्ध किया। उनके द्वारा निभाए गए चरित्र आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिनय की पाठशाला रहेंगे। • सामाजिक पहलों पर: उन्होंने जल संरक्षण और ग्रामीण उत्थान के लिए जो कार्य किए थे, उनके समर्थकों को अब इन पहलों को आगे बढ़ाना होगा। अपनी आधी से ज्यादा आय दान करने का उनका जज्बा कई लोगों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। • उद्योग जगत के लिए: फिल्म उद्योग ने एक ऐसा वरिष्ठ मार्गदर्शक खो दिया है जिनका जुड़ाव जमीन से कभी नहीं टूटा। फिल्म निर्माण के दौरान उनकी सादगी और सहयोग की मिसाल हमेशा दी जाएगी। • स्वास्थ्य सतर्कता: देर रात अस्वस्थ महसूस होने पर तुरंत मेडिकल सहायता बुलाना जीवन रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। किसी भी आपात स्थिति में परिजनों या आपातकालीन सेवाओं को समय रहते सूचित करना जरूरी है। ऐसा क्यों हुआ अभिनेता की तबीयत देर रात गोवा स्थित उनके घर पर अचानक बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल ले जाया गया। • अचानक बिगड़ी तबीयत: देर रात करीब 2:30 बजे उन्होंने एक मित्र को अपनी अस्वस्थता का संदेश भेजा था, जिसे देर होने के कारण तुरंत नहीं देखा जा सका। जब दोस्त करीब 4 बजे पहुंचा, तब तक उनकी हालत काफी गंभीर हो चुकी थी। • कार्डियक अरेस्ट: अत्यधिक पसीना आने और अचेत होने के बाद आपातकालीन टीम ने उन्हें कार्डियक मसाज दिया। इसके बाद सुबह 4:30 बजे उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। • इलाज के बावजूद निधन: अस्पताल में डॉक्टरों के दल ने करीब 45 मिनट तक पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, लेकिन सुबह 5:20 बजे उनका निधन हो गया। सवाल-जवाब 1. अनिल शर्मा ने नाना पाटेकर के साथ किस फिल्म में काम किया था? अनिल शर्मा ने साल 2024 में रिलीज हुई फिल्म 'वनवास' में नाना पाटेकर के साथ काम किया था। 2. फिल्म के सेट पर नाना पाटेकर का व्यवहार कैसा रहता था? अनिल शर्मा के अनुसार, वे सेट पर सभी से घुल-मिलकर रहते थे और कई बार अपने हाथों से यूनिट के लोगों को खाना खिलाते थे। 3. नाना पाटेकर ने किस सामाजिक कार्य में बड़ा योगदान दिया था? उन्होंने पुणे के आसपास जल संरक्षण के लिए कार्य किया, ग्रामीण इलाकों का दौरा किया और अपनी कमाई का आधे से ज्यादा हिस्सा दान किया। 4. नाना पाटेकर का निधन किस समय और कहां हुआ? गोवा के एक निजी अस्पताल में गुरुवार सुबह 5:20 बजे उनका निधन हुआ। 5. अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास कितनी देर तक किया? डॉक्टरों की टीम ने अस्पताल में करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने का प्रयास किया था। प्रेरणा और सबक नाना पाटेकर का जीवन सादगी, समर्पण और समाज के प्रति अटूट निष्ठा का एक असाधारण उदाहरण प्रस्तुत करता है। • निस्वार्थ सेवा: प्रसिद्धि के शिखर पर होने के बावजूद वे अपनी कमाई का आधे से अधिक हिस्सा जनकल्याण में दान कर देते थे, जो समाज के प्रति जिम्मेदारी सिखाता है। • जमीनी जुड़ाव: उन्होंने पुणे और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए जंगलों और गांवों का खुद दौरा किया और आम लोगों के साथ मिलकर काम किया। • अहंकारविहीन सादगी: फिल्म सेट पर अपने हाथों से दूसरों को खाना खिलाना और हर सहयोगी के साथ आत्मीयता से पेश आना दर्शाता है कि इंसान की महानता उसकी विनम्रता में है। https://trendkia.com/bollywood/philma-nirdeshaka-anil-sharma-ne-sajha-kin-nana-patekar-se-juri-yaden-vanvaas-ke-dinon-ko-bataya-avismaraniya-45259 TrendKia — Har trend, sabse pehle.