# फिल्म सेट और फिल्मी पत्रिकाओं से दूर पली-बढ़ीं अथिया शेट्टी ने कैसे तय किया बॉलीवुड का सफर

> अभिनेता सुनील शेट्टी ने अपनी बेटी अथिया शेट्टी को चकाचौंध, फिल्मी गॉसिप और सेट के माहौल से दूर एक अनुशासित परिवेश में बड़ा किया था। इसके बावजूद अथिया ने सिनेमाई दुनिया में अपनी राह बनाई और न्यूयॉर्क से अभिनय की तालीम लेकर हिंदी फिल्मों में कदम रखा।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/philma-seta-aura-philmi-patrikaon-se-dura-pali-barhin-athiya-shetty-ne-kaise-taya-kiya-bollywood-ka-saphara-56741 · **Language:** Hindi
**Tags:** अथिया शेट्टी, सुनील शेट्टी, माना शेट्टी, अहान शेट्टी, बॉलीवुड, न्यूयॉर्क फिल्म एकेडमी, हीरो फिल्म

फिल्म उद्योग में परिवारों से ताल्लुक रखने वाली नई पीढ़ी के लिए अक्सर यह मान लिया जाता है कि उनकी परवरिश सिनेमा के सेट और फिल्मी माहौल के बीच ही होती है। हालांकि, अभिनेत्री अथिया शेट्टी की जिंदगी की शुरुआत इससे बिल्कुल अलग ढंग से हुई। एक बड़े फिल्मी सितारे की संतान होने के बावजूद उनका बचपन कड़े अनुशासन, तय नियमों और फिल्मी चकाचौंध से दूर बीता। उनके घर में न तो फिल्मी पत्रिकाओं को लाने की अनुमति थी और न ही बच्चों को शूटिंग के सेट पर जाने दिया जाता था। इस कड़े सुरक्षात्मक और सादगी भरे माहौल के बाद भी अथिया ने आगे चलकर अभिनय की ही दुनिया को अपने करियर के रूप में चुना।

## साउथ मुंबई में सादगी से भरा बचपन
5 नवंबर 1992 को मुंबई में जन्मी अथिया शेट्टी के पिता सुनील शेट्टी हिंदी सिनेमा के एक बड़े नाम हैं, जबकि उनकी मां माना शेट्टी एक फैशन डिजाइनर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आमतौर पर फिल्मी हस्तियों के परिवार जुहू या बांद्रा जैसे इलाकों में रहते हैं, जहां फिल्म इंडस्ट्री का प्रभाव बेहद गहरा होता है। इसके उलट, माना शेट्टी और सुनील शेट्टी ने अपने बच्चों की परवरिश साउथ मुंबई के अल्टमाउंट रोड वाले इलाके में करने का फैसला किया। उनका प्राथमिक उद्देश्य यह था कि अथिया और उनके भाई अहान शेट्टी दोनों ही एक आम बच्चे की तरह बड़े हों और उन्हें स्टार किड होने की वजह से किसी तरह का असामान्य दबाव न झेलना पड़े।

## फिल्म पत्रिकाओं और शूटिंग सेट पर पूरी तरह रोक
आज के दौर में जहां बच्चों और किशोरों के लिए स्क्रीन टाइम और मनोरंजन पर निगरानी रखना एक कठिन चुनौती बन चुका है, वहीं अथिया शेट्टी के बचपन में मनोरंजन की हर गतिविधि पर माता-पिता की सख्त नजर रहती थी। सुनील शेट्टी के घर में एक कड़ा नियम लागू था कि घर की दहलीज के भीतर कोई भी फिल्मी मैगजीन नहीं आएगी। इसके अलावा, अथिया और अहान को अपने पिता की फिल्मों के सेट पर जाने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं थी।

इस कड़े फैसले के पीछे सुनील शेट्टी की सोच बेहद स्पष्ट थी। वे नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे फिल्म जगत की अफवाहों, गॉसिप या किसी भी किस्म की नकारात्मक सुर्खियों को पढ़कर बड़े हों। फिल्म इंडस्ट्री में आने वाली सफलता और नाकामी, उतार-चढ़ाव और मीडिया ट्रायल का असर बच्चों के कोमल मन पर न पड़े, इसलिए उन्हें लाइमलाइट से मीलों दूर रखा गया ताकि वे एक सुरक्षित, स्वस्थ और सहज बचपन जी सकें।

## सेवा भाव और सामाजिक कार्यों से जुड़ाव
ग्लैमर से दूर रखने के साथ-साथ अथिया शेट्टी में बचपन से ही सामाजिक कार्यों के संस्कार रोपे गए। जब वे मात्र 10 से 12 साल की थीं, तभी से वे अपनी मां और नानी द्वारा संचालित संस्था 'सेव द चिल्ड्रन इंडिया' से जुड़ गईं। वहां वे नियमित रूप से विशेष जरूरतों वाले बच्चों को पढ़ाने और उनके रोजमर्रा के कामों में हाथ बंटाने का काम करती थीं। इस अनुभव ने उन्हें जमीन से जुड़े रहने और समाज की वास्तविकताओं को समझने में बड़ी मदद की।

## इंटरनेशनल स्कूल और शिक्षकों का चयन
बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को लेकर भी सुनील शेट्टी ने एक खास रणनीति बनाई थी। एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि उन्होंने अपने बच्चों को भारतीय बोर्ड वाले स्कूलों के बजाय इंटरनेशनल या अमेरिकन बोर्ड के स्कूल में क्यों भेजा। सुनील शेट्टी के अनुसार, वे चाहते थे कि बच्चों के स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक और अन्य स्टाफ विदेशी अथवा अमेरिकी हों, जिन्हें भारतीय सिनेमा और यहां के फिल्मी सितारों के बारे में ज्यादा जानकारी न हो।

इस व्यवस्था की वजह से स्कूल में अथिया और अहान पर 'सुनील शेट्टी के बच्चे' होने का कोई खास लेबल नहीं लगा। उन्हें किसी भी तरह का विशेषाधिकार या अनावश्यक दबाव नहीं मिला। शिक्षकों के लिए वे अन्य आम विद्यार्थियों की तरह थे, जिससे वे अपनी व्यक्तिगत पहचान के साथ बिना किसी हीनभावना या अतिरिक्त दंभ के सामान्य रूप से विकसित हो सके।

## एयरपोर्ट पर अचानक बदला फैसला और सिनेमा की ओर रुख
घर में इतनी पाबंदियों और सुरक्षात्मक माहौल के बावजूद सिनेमा के प्रति अथिया शेट्टी का आकर्षण कम नहीं हुआ। अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका के अटलांटा स्थित एक कॉलेज में एडमिशन ले लिया था। वे अपनी आगे की पढ़ाई शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार थीं, लेकिन ऐन वक्त पर एयरपोर्ट पर उनका मन बदल गया।

एयरपोर्ट पर खड़े होकर अथिया ने अपने पिता सुनील शेट्टी को अपने दिल की बात बताई कि वे अकादमिक दुनिया के बजाय फिल्मों और अभिनय के क्षेत्र में ही अपना जीवन बनाना चाहती हैं। बेटी के इस दृढ़ संकल्प को देखते हुए परिवार ने उनके फैसले का सम्मान किया। इसके बाद अथिया अकेले न्यूयॉर्क शहर चली गईं और वहां की प्रतिष्ठित न्यूयॉर्क फिल्म एकेडमी में प्रवेश लिया।

न्यूयॉर्क में रहकर उन्होंने फिल्ममेकिंग और लिबरल आर्ट्स में अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की। अभिनय की तकनीकी और रचनात्मक बारीकियों को गहराई से सीखने के बाद, उन्होंने साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म 'हीरो' के जरिए बॉलीवुड में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर अपना औपचारिक सफर शुरू किया।

## इसका आप पर असर
यह खबर स्टार परिवारों में बच्चों की संतुलित परवरिश, करियर चयन और युवाओं द्वारा अपने सच्चे जुनून को पहचानने के संदर्भ में व्यावहारिक सीख देती है।

- **अभिभावकों के लिए:** बच्चों को अत्यधिक सोशल मीडिया और ग्लैमर की चकाचौंध से दूर रखकर मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। इससे वे बिना किसी अनुचित पारिवारिक दबाव के अपनी स्वतंत्र पहचान विकसित करने में सक्षम होते हैं।
- **करियर चयन पर:** शैक्षणिक डिग्री और करियर की दिशा तय करते समय अपनी वास्तविक रुचि को पहचानना सबसे जरूरी कदम है। जब युवा अपनी पसंद के क्षेत्र में औपचारिक तालीम लेते हैं, तो उनका आत्मविश्वास और हुनर दोनों मजबूत होते हैं।
- **पारिवारिक माहौल पर:** घर में स्पष्ट नियम और सामाजिक कार्यों से जुड़ाव बच्चों में संवेदनशीलता और विनम्रता विकसित करता है। बचपन से ही सेवा कार्यों में भाग लेने से बच्चों का दृष्टिकोण व्यापक और जमीन से जुड़ा रहता है।
- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह जानकारी दर्शाती है कि फिल्मी पृष्ठभूमि होने के बावजूद तकनीकी प्रशिक्षण और औपचारिक शिक्षा कितनी मायने रखती है। किसी भी क्षेत्र में कदम रखने से पहले उसकी बुनियादी समझ और तालीम सफलता की राह आसान करती है।

## ऐसा क्यों हुआ
सुनील शेट्टी ने अपने बच्चों को फिल्मी सेट और गॉसिप मैगजीन से दूर रखने का फैसला एक सोची-समझी योजना के तहत किया था, ताकि उनका सामान्य मानसिक विकास सुनिश्चित हो सके।

- **मानसिक सुरक्षा का उद्देश्य:** फिल्म उद्योग की अनिश्चितता, सार्वजनिक आलोचना और गॉसिप से बच्चों को बचाना सबसे प्रमुख वजह थी। सुनील शेट्टी का स्पष्ट मानना था कि मीडिया के दबाव और फिल्मी चर्चाओं का असर बच्चों के भावनात्मक विकास पर नहीं पड़ना चाहिए।
- **समानता का वातावरण:** अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी शिक्षकों वाले स्कूल का चयन इसलिए किया गया ताकि वहां भारतीय सितारों का प्रभाव न हो। इस व्यवस्था से अथिया और उनके भाई को किसी विशेषाधिकार के बिना आम छात्रों की तरह सामान्य व्यवहार मिला।
- **आवासीय दूरी का चयन:** जुहू और बांद्रा जैसे फिल्मी केंद्रों के बजाय साउथ मुंबई के अल्टमाउंट रोड पर रहने का निर्णय भी इसी सोच का हिस्सा था। इससे बच्चों की दिनचर्या और सामाजिक दायरा फिल्म इंडस्ट्री के ग्लैमरस परिवेश से अलग बना रहा।

## सवाल-जवाब

### 1. अथिया शेट्टी का जन्म कब और कहां हुआ था?
अथिया शेट्टी का जन्म 5 नवंबर 1992 को मुंबई में हुआ था।

### 2. सुनील शेट्टी के घर में फिल्मी मैगजीन पर रोक क्यों थी?
वे नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे फिल्म जगत की अफवाहों, गॉसिप और नकारात्मक खबरों को पढ़कर बड़े हों।

### 3. अथिया शेट्टी को बचपन में किस सामाजिक संस्था से जोड़ा गया था?
वे 10-12 वर्ष की उम्र से अपनी मां और नानी की संस्था 'सेव द चिल्ड्रन इंडिया' में विशेष जरूरतों वाले बच्चों की मदद करती थीं।

### 4. सुनील शेट्टी ने बच्चों को इंटरनेशनल बोर्ड वाले स्कूल में क्यों पढ़ाया?
ताकि विदेशी शिक्षकों को भारतीय फिल्मी सितारों की जानकारी न हो और बच्चों पर स्टार किड होने का कोई दबाव न बने।

### 5. अथिया शेट्टी ने अभिनय की औपचारिक शिक्षा कहां से पूरी की?
उन्होंने न्यूयॉर्क जाकर न्यूयॉर्क फिल्म एकेडमी से फिल्ममेकिंग और लिबरल आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया।

### 6. अथिया शेट्टी ने बॉलीवुड में किस फिल्म और किस वर्ष डेब्यू किया?
उन्होंने साल 2015 में फिल्म 'हीरो' के जरिए बॉलीवुड में मुख्य अभिनेत्री के रूप में कदम रखा।

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