# फिल्म सेट पर पालतू कुत्तों के लिए नैनी, सनग्लास और मेकअप, दयानंद शेट्टी ने खोले फिल्मी सितारों के ठाठ-बाट के राज

> टेलीविजन धारावाहिक सीआईडी से लोकप्रिय हुए अभिनेता दयानंद शेट्टी ने बताया कि कुछ फिल्मी कलाकार शूटिंग सेट पर पालतू कुत्तों के लिए अलग से नैनी, डिजाइनर कपड़े और ग्रूमिंग का पूरा इंतजाम रखते हैं।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/philma-seta-para-palatu-kutton-ke-lie-naini-sanaglasa-aura-mekaapa-dayanand-shetty-ne-khole-philmi-sitaron-ke-thatha-bata-ke-raja-41359 · **Language:** Hindi
**Tags:** दयानंद शेट्टी, सीआईडी, बॉलीवुड लाइफस्टाइल, संजय गुप्ता, अनुराग कश्यप, करण जौहर

फिल्म उद्योग में काम करने वाले प्रमुख कलाकारों का निजी जीवन और उनकी कार्यशैली अक्सर लोगों को चकित करती रहती है। फिल्मों की शूटिंग के दौरान बड़े कलाकारों के साथ आने वाला भारी-भरकम अमला और उनकी विशेष मांगें अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं। इसी सिलसिले में लोकप्रिय टेलीविजन शो सीआईडी में दया की भूमिका निभाने वाले जाने-माने अभिनेता दयानंद शेट्टी ने फिल्म सेटों के इस चलन को लेकर कुछ दिलचस्प अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने उजागर किया कि कई कलाकार अपने पालतू कुत्तों को सेट पर लेकर आते हैं और इन जानवरों की देखभाल के लिए एक समर्पित डॉग नैनी भी साथ मौजूद रहती है।

## शूटिंग स्थल पर पालतू कुत्तों का ठाठ-बाट
सिद्धार्थ कन्नन के यूट्यूब चैनल पर हुई एक विस्तृत बातचीत में जब दयानंद शेट्टी से फिल्मी हस्तियों के विशाल दल और कार्यस्थल पर उनके तौर-तरीकों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे परवरिश और विशेष मानसिकता से जुड़ा मामला बताया। उनके अनुसार कुछ कलाकारों को लगता है कि एक बड़ा स्टार होने का अर्थ ही एक खास किस्म की भव्य जीवनशैली का सार्वजनिक प्रदर्शन करना है। उन्होंने बताया कि कई अभिनेता और अभिनेत्रियां अपने पालतू कुत्तों को शूटिंग स्थल तक साथ लाते हैं। जब काम के बीच में उन्हें थोड़ा आराम चाहिए होता है या उनका मन करता है, तो वे अपने कुत्ते को बुलाकर उसके साथ वक्त बिताते हैं। दयानंद शेट्टी ने यह पूरी बात बेहद सहज और हास्य भरे अंदाज में कही, लेकिन इसने चकाचौंध से भरी इस दुनिया की एक अलग सच्चाई को सामने ला दिया।

## नैनी का काम, कपड़े, सनग्लास और पेट्स की तैयारी
दयानंद शेट्टी ने इस बात का विस्तार से ब्योरा दिया कि सेट पर लाए जाने वाले इन पालतू कुत्तों की सेवा में बाकायदा एक व्यक्ति तैनात रहता है। उस व्यक्ति की जिम्मेदारी कुत्ते को समय पर टहलाने, उसका खाना खिलाने और अन्य सभी जरूरतों को पूरा करने की होती है। इतना ही नहीं, इन जानवरों की दिखावट पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है। उन्होंने बताया कि कुछ पालतू कुत्तों को आकर्षक कपड़े पहनाए जाते हैं, उन्हें सनग्लासेस लगाए जाते हैं और यहां तक कि उनका हल्का मेकअप या खास ग्रूमिंग भी कराई जाती है। यानी जिस तरह बड़े कलाकार अपने पहनावे और स्टाइल का ख्याल रखते हैं, वैसा ही प्रबंध इन बेजुबानों के लिए भी किया जाता है। जब उनसे पूछा गया कि वे इस पूरी व्यवस्था को किस नजरिए से देखते हैं, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि ऐसा डॉग तो वास्तव में बहुत किस्मत वाला है। उनका कहना था कि अगर कोई इन बातों पर बहुत गहराई से सोचेगा तो परेशान हो सकता है, लेकिन हल्के मन से देखा जाए तो इसमें उलझने की जरूरत नहीं है।

## वैनिटी वैन की लंबी मांग और निर्माताओं की मुश्किलें
फिल्मों की शूटिंग के दौरान कलाकारों की अतिरिक्त सुविधाओं और वैनिटी वैन की मांग पर पहले भी कई प्रमुख निर्देशक अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। कांटे, जिंदा और शूटआउट एट वडाला जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन करने वाले जाने-माने निर्देशक संजय गुप्ता ने एक बातचीत में बताया था कि कुछ कलाकार शूटिंग के दौरान छह-छह वैनिटी वैन तक की मांग रख देते हैं। उन्होंने यह भी इशारा किया था कि अत्यधिक और अनुचित मांगों के चलते एक अभिनेता को दक्षिण भारत के एक बड़े प्रोजेक्ट से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया था। इस खुलासे के बाद फिल्म जगत में सितारों के अनावश्यक खर्चों को लेकर काफी बहस छिड़ गई थी।

## निजी शेफ के भारी भरकम खर्च और करण जौहर की आपत्ति
सितारों की लग्जरी मांगों पर निर्देशक अनुराग कश्यप भी पहले अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था कि कई कलाकार अपने साथ निजी शेफ लेकर चलते हैं, जिसकी प्रतिदिन की फीस करीब 2 लाख रुपये तक हो सकती है। अनुराग कश्यप के अनुसार ये शेफ बेहद विशिष्ट और संतुलित आहार तैयार करते हैं, जिसे देखकर उन्हें वह सामान्य भोजन के बजाय पक्षियों के दाने जैसा प्रतीत होता था। दूसरी ओर, फिल्म निर्माता करण जौहर ने भी इस बढ़ते चलन पर अपनी हैरानी दर्ज कराई थी। करण जौहर का मानना था कि जब कलाकारों को पहले से ही एक बड़ी फीस का भुगतान किया जाता है, तो फिर व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का बिल निर्माताओं पर डालना बेहद अजीब है। उन्होंने सवाल उठाया था कि कलाकारों को अपने इर्द-गिर्द छह से आठ लोगों की अनावश्यक फौज लेकर घूमने की क्या आवश्यकता है।

## इसका आप पर असर
फिल्म उद्योग में कलाकारों के महंगे तामझाम और एंटॉरेज संस्कृति से जुड़े ये खुलासे दर्शकों और सिनेमा प्रेमियों को पर्दे के पीछे की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर देते हैं।

- **दर्शकों के लिए:** यह खबर दर्शकों को इस बात की स्पष्ट जानकारी देती है कि फिल्मों का निर्माण बजट केवल तकनीकी काम में नहीं, बल्कि सितारों की व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं पर भी खर्च होता है। इससे सिनेमा प्रेमियों को यह समझने में मदद मिलती है कि फिल्मों की टिकट दरें और प्रोजेक्ट लागत लगातार क्यों बढ़ रही हैं।
- **मनोरंजन उद्योग के लिए:** निर्माताओं और वरिष्ठ निर्देशकों की तरफ से उठाई जा रही यह आवाज फिल्म निर्माण के बढ़ते खर्चों पर अंकुश लगाने की मांग को मजबूत करती है। यदि निर्माता इन अनावश्यक खर्चों में कटौती करते हैं, तो बजट का बड़ा हिस्सा पटकथा और तकनीकी गुणवत्ता पर लगाया जा सकेगा।
- **नए कलाकारों के लिए:** यह जानकारी उभरते हुए अभिनेताओं और अभिनेत्रियों को पेशेवर आचरण और गैर-जरूरी मांगों के बीच अंतर समझने की सीख देती है। अनुशासनहीन या अत्यधिक मांगों के कारण प्रोजेक्ट से बाहर निकाले जाने के उदाहरण नए कलाकारों के लिए सबक हैं।
- **सिनेमा संस्कृति पर:** यह मामला फिल्म निर्माण से जुड़े बुनियादी कर्मचारियों और बड़े सितारों के बीच मौजूद बड़े वित्तीय अंतर को उजागर करता है। इससे इंडस्ट्री में संसाधनों के निष्पक्ष और संतुलित वितरण को लेकर बहस तेज हो सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्मी सेटों पर कलाकारों के विशाल अमले और पालतू जानवरों के रखरखाव का यह चलन दशकों से चली आ रही स्टारडम संस्कृति और बढ़ती फीस व्यवस्था का परिणाम है।

- **स्टारडम की मानसिकता:** दयानंद शेट्टी के अनुसार कई कलाकार एक खास भव्य जीवनशैली को ही अपने स्टार होने की पहचान मानते हैं। इसी सोच के तहत वे अपने पालतू जानवरों और व्यक्तिगत सहायकों को शूटिंग सेट पर साथ लाते हैं।
- **निजी सुख-सुविधाओं पर बढ़ता जोर:** लंबे और तनावपूर्ण शूटिंग शेड्यूल के दौरान मानसिक सुकून के नाम पर सितारे अपने पेट्स, पसंदीदा डाइट और पर्सनल शेफ जैसी व्यवस्थाओं की मांग करते हैं। काम के ब्रेक में समय बिताने के लिए वे इन व्यवस्थाओं को अनिवार्य हिस्सा बना लेते हैं।
- **निर्माताओं द्वारा मांगों की स्वीकृति:** बड़े नामों को फिल्मों से जोड़ने के लिए कई निर्माता पूर्व में ऐसी व्यक्तिगत मांगों को आसानी से स्वीकार करते रहे हैं। इस ढिलाई के कारण कलाकारों का यह एंटॉरेज कल्चर धीरे-धीरे एक स्थापित परंपरा बन गया, जिस पर अब खुलकर सवाल उठ रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. दयानंद शेट्टी ने फिल्म सेट पर पालतू कुत्तों को लेकर क्या खुलासा किया?
उन्होंने बताया कि कई कलाकार सेट पर अपने पालतू कुत्तों को लाते हैं, जिनकी देखभाल के लिए विशेष नैनी होती है और उन्हें कपड़े, सनग्लासेस व मेकअप तक कराया जाता है।

### 2. अभिनेता ने यह बातचीत किस मंच पर साझा की?
दयानंद शेट्टी ने यह जानकारी सिद्धार्थ कन्नन के यूट्यूब चैनल पर दिए गए एक साक्षात्कार के दौरान साझा की।

### 3. संजय गुप्ता ने वैनिटी वैन को लेकर क्या दावा किया था?
निर्देशक संजय गुप्ता ने बताया था कि कुछ कलाकार छह वैनिटी वैन तक मांगते हैं और अत्यधिक मांग के कारण एक अभिनेता को साउथ के प्रोजेक्ट से हटा दिया गया था।

### 4. अनुराग कश्यप ने शेफ की फीस के बारे में क्या कहा था?
अनुराग कश्यप ने बताया था कि कुछ कलाकार निजी शेफ साथ रखते हैं, जिनकी फीस प्रतिदिन लगभग 2 लाख रुपये तक हो सकती है।

### 5. करण जौहर ने सितारों की एंटॉरेज पर क्या प्रतिक्रिया दी थी?
करण जौहर ने कहा था कि भारी फीस मिलने के बाद व्यक्तिगत खर्च निर्माताओं पर डालना और 6 से 8 लोगों की टीम लेकर घूमना समझ से परे है।

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