पिता का बिजनेस छोड़कर थिएटर चुना, आज करीना कपूर की रील लाइफ के 'चाचा' पवन मल्होत्रा मना रहे जन्मदिन दूरदर्शन के मशहूर सीरियल 'नुक्कड़' से लेकर 'जब वी मेट' के गुस्सैल चाचाजी तक, पवन मल्होत्रा का सफर बताता है कि पारिवारिक दबाव के बावजूद सच्चे जुनून को कैसे जिया जाता है. 2 जुलाई को एक्टर अपना जन्मदिन मना रहे हैं. बॉलीवुड में पवन मल्होत्रा उन गिने-चुने कलाकारों में गिने जाते हैं, जिनकी एक्टिंग की तारीफ हर कोई करता है, लेकिन उनकी यह पहचान इतनी आसानी से नहीं मिली. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद पवन के सामने एक ऐसा मोड़ आया, जहां उन्हें अपने सपने और परिवार की उम्मीदों में से एक को चुनना था. दोस्तों संग देखा नाटक, जाग उठा एक्टर पवन का रुझान एक्टिंग की तरफ अचानक तब मुड़ा, जब वह अपने दोस्तों के साथ एक नाटक देखने पहुंचे. उसी दिन से थिएटर उनके लिए महज शौक नहीं, बल्कि एक जुनून बन गया. दूसरी तरफ उनके पिता की इच्छा थी कि बेटा उनका जमाया हुआ फैमिली बिजनेस आगे बढ़ाए. पिता को खुश रखने के लिए पवन ने कारोबार में हाथ आजमाने की कोशिश भी की, लेकिन उनका मन तो थिएटर की दुनिया में ही अटका रहता था. आखिरकार फैमिली बिजनेस में दिल न लगने के बावजूद उन्होंने थिएटर का साथ कभी नहीं छोड़ा. 'नुक्कड़' के 'सईद' ने रातों-रात बदली किस्मत पवन की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साल 1986 में आया, जब उन्हें दूरदर्शन के मशहूर सीरियल 'नुक्कड़' में 'सईद' का किरदार निभाने का मौका मिला. यह रोल लोगों के दिलों में कुछ इस तरह उतरा कि पवन रातों-रात घर-घर में मशहूर हो गए. जब यह सीरियल सुपरहिट साबित हुआ, तो पवन की एक झलक पाने के लिए फैंस उनके पिता के ऑफिस के बाहर भीड़ लगाने लगे. बेटे को मिल रहे इस प्यार को देखकर पिता का दिल भी पिघल गया और उन्हें यकीन हो गया कि बेटे ने जो राह चुनी है, वह बिल्कुल सही है. इसके बाद पवन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. बड़े पर्दे पर बनाई मजबूत और संजीदा पहचान टीवी पर नाम कमाने के बाद पवन ने फिल्मों का रुख किया. उन्होंने साल 1984 में फिल्म 'अब आएगा मजा' से बड़े पर्दे पर डेब्यू किया था, लेकिन असली पहचान उन्हें 1989 में आई फिल्म 'बाघ बहादुर' से मिली, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत और संजीदा एक्टर के तौर पर स्थापित कर दिया. इसके बाद पवन ने हर तरह के मुश्किल किरदार निभाए. फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' में उनका गहरा और तीखा रोल हो या 'जब वी मेट' में गीत के गुस्सैल चाचाजी का किरदार, पवन हर फ्रेम में पूरी तरह ढल गए. हालिया प्रोजेक्ट्स भी रहे चर्चा में पवन ने फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर भी खूब सुर्खियां बटोरीं. इसके अलावा उनकी वेब सीरीज 'ग्रहण' को भी दर्शकों ने खासा पसंद किया. 2 जुलाई को मना रहे जन्मदिन पवन मल्होत्रा का सफर यह सिखाता है कि अगर काम को लेकर दिल में सच्चा जुनून हो, तो कोई भी मुश्किल राह आसान बनाई जा सकती है. आज वह न सिर्फ एक कामयाब एक्टर हैं, बल्कि कई युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा भी बन चुके हैं. 2 जुलाई को यह दिग्गज कलाकार अपना जन्मदिन मना रहे हैं और फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि वे अपनी दमदार एक्टिंग से आगे भी दर्शकों का मनोरंजन करते रहेंगे. सच ही कहा गया है कि जो किस्मत में लिखा होता है, वह रास्ता खुद ढूंढ लेता है, पवन के मामले में थिएटर और 'नुक्कड़' ने उनकी तकदीर हमेशा के लिए बदल दी. इसका आप पर असर दर्शकों और फैंस के लिए: पवन मल्होत्रा की कहानी 'नुक्कड़', 'बाघ बहादुर', 'ब्लैक फ्राइडे', 'जब वी मेट' और 'ग्रहण' जैसे उनके पुराने काम को फिर से देखने या याद करने का मौका देती है, साथ ही आने वाले समय में उनके नए प्रोजेक्ट्स पर नजर बनाए रखने की वजह भी बनती है. सवाल-जवाब 1. पवन मल्होत्रा कौन हैं? पवन मल्होत्रा बॉलीवुड के एक सम्मानित एक्टर हैं, जो अपनी दमदार और संजीदा एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं. 2. उनकी पढ़ाई कहां से हुई? पवन ने अपनी पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूरी की थी. 3. एक्टिंग की तरफ उनका रुझान कैसे हुआ? दोस्तों के साथ एक नाटक देखने जाने के बाद उनके भीतर का एक्टर जाग उठा और थिएटर उनके लिए जुनून बन गया. 4. 'नुक्कड़' में उनका कौन सा किरदार था? साल 1986 में पवन ने दूरदर्शन के सीरियल 'नुक्कड़' में 'सईद' का किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातों-रात मशहूर कर दिया. 5. उन्होंने बड़े पर्दे पर डेब्यू कब किया था? पवन ने 1984 में फिल्म 'अब आएगा मजा' से बड़े पर्दे पर डेब्यू किया था. 6. 'जब वी मेट' में उनका किरदार क्या था? 'जब वी मेट' में उन्होंने करीना कपूर के किरदार गीत के गुस्सैल चाचाजी का रोल निभाया था. 7. पवन मल्होत्रा का जन्मदिन कब है? पवन मल्होत्रा 2 जुलाई को अपना जन्मदिन मनाते हैं. 8. हाल में उनकी कौन सी वेब सीरीज पसंद की गई? उनकी वेब सीरीज 'ग्रहण' को दर्शकों ने काफी पसंद किया था. प्रेरणा और सबक • अपने जुनून को न छोड़ें: फैमिली बिजनेस में मन न लगने के बावजूद पवन ने थिएटर का साथ नहीं छोड़ा, यही दृढ़ता आगे चलकर उनकी पहचान बनी. • पारिवारिक इच्छाओं का सम्मान करते हुए भी खुद पर भरोसा रखें: पिता को खुश करने के लिए उन्होंने कारोबार में कोशिश की, लेकिन आखिर में अपने दिल की सुनी. • छोटे मौके भी बड़ा मोड़ ला सकते हैं: दोस्तों के साथ देखा गया एक नाटक ही उनके अंदर के एक्टर को जगाने की वजह बना. • मेहनत और किरदार में गहराई से डूब जाना: 'सईद' से लेकर 'ब्लैक फ्राइडे' और 'चाचाजी' तक, हर किरदार में उन्होंने खुद को पूरी तरह ढाला, जिससे उन्हें एक सशक्त अभिनेता की पहचान मिली. • नतीजे खुद बोलते हैं: 'नुक्कड़' की कामयाबी ने आखिरकार उनके पिता को भी यकीन दिला दिया कि बेटे का चुना रास्ता सही था. https://trendkia.com/bollywood/pita-ka-bijanesa-chhorakara-thietara-chuna-aja-kareena-kapoor-ki-rila-laipha-ke-chacha-pawan-malhotra-mana-rahe-janmadina-3957 TrendKia — Har trend, sabse pehle.