राष्ट्रीय पुरस्कार से पहले अपने कुर्ते पर खुद इस्त्री चलाते दिखे संजय मिश्रा 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में भक्षक के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता चुने गए संजय मिश्रा का एक सादगी भरा वीडियो सामने आया है, जिसमें वे राष्ट्रपति से सम्मान लेने जाने से पहले अपने कपड़े खुद प्रेस करते दिख रहे हैं। सिनेमा जगत में जब भी किसी कलाकार को देश के सबसे बड़े मंच पर सम्मानित किया जाना होता है, तो अमूमन उनके इर्द-गिर्द स्टाइलिस्ट, मेकअप मैन और सहायकों का बड़ा हुजूम दिखाई देता है। मगर 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के मंच पर जाने से ठीक पहले अनुभवी अभिनेता संजय मिश्रा ने कुछ ऐसा किया, जिसने हर किसी को हैरान भी किया और भावुक भी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का तमगा लेने निकलने से पहले वे किसी तामझाम के बिना खुद अपने वस्त्रों पर इस्त्री करते नजर आए। साधारण तैयारी के साथ राष्ट्रीय सम्मान के सफर पर सार्वजनिक हुए दृश्य में संजय मिश्रा सफेद लिबास पहने नजर आ रहे हैं। वे एक साधारण प्रेसिंग बोर्ड के सामने एकाग्र होकर अपने कपड़ों की सिलवटें मिटाने में व्यस्त हैं। इस सादगी भरे क्षण की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उसी दोपहर उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित मंच पर राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत किया जाना था। जहां सितारे ऐसे मौकों पर कई दिनों पहले से महंगे फैशन डिजाइनरों और सहायकों की टोली तैयार रखते हैं, वहीं इस मंझे हुए कलाकार ने अपनी साज-सज्जा की जिम्मेदारी पूरी तरह अपने ही कंधों पर रखी। फैशन और दिखावे से कोसों दूर रहने वाले इस कलाकार का यह अनूठा अंदाज तेजी से चर्चा का केंद्र बन गया। किसी बड़े आयोजन में शिरकत करने से पहले ऐसी सहजता भारतीय फिल्म उद्योग में बहुत कम देखने को मिलती है। बिना किसी दिखावे के अपने काम को खुद निपटाने की यह आदत बताती है कि वर्षों की शोहरत के बाद भी जमीन से उनका जुड़ाव रत्ती भर भी कम नहीं हुआ है। फिल्म भक्षक में पत्रकार की सशक्त ढाल बने संजय मिश्रा को यह राष्ट्रीय सम्मान निर्देशक पुलकित की चर्चित फिल्म भक्षक में उनके बेजोड़ काम के लिए प्रदान किया गया है। इस फिल्म में भूमि पेडनेकर मुख्य किरदार में थीं, जिन्होंने एक ऐसी खोजी पत्रकार की भूमिका निभाई जो एक बालिका संरक्षण गृह में चल रहे गंभीर शोषण के मामलों को उजागर करने के लिए व्यवस्था से टकरा जाती है। संजय मिश्रा ने इस पूरी मुहिम में उस साहसी पत्रकार का साथ देने वाले साथी की भूमिका निभाई थी। उनके किरदार की गंभीरता और स्वाभाविक प्रस्तुति ने पूरी पटकथा को एक गहरा भावनात्मक संबल दिया था। आलोचकों और आम सिनेप्रेमियों दोनों ने ही उनके अभिनय को बहुत सराहा था, जिसे अब भारत सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है। स्वाभाविक अभिनय और जमीन से जुड़ी पहचान संजय मिश्रा का पूरा करियर इस बात का गवाह रहा है कि अभिनय में बनावट की जरूरत नहीं होती। उन्होंने हास्य से भरपूर किरदारों में जितनी आसानी से लोगों को गुदगुदाया है, उतनी ही शिद्दत से गंभीर सामाजिक मुद्दों वाली फिल्मों में दर्शकों की आंखें नम की हैं। उनकी फिल्मों की फेहरिस्त में आंखों देखी, मसान, कड़वी हवा और कामयाब जैसे नाम शामिल हैं, जिनमें उन्होंने मध्यमवर्गीय और संघर्षशील इंसानों के दर्द को बिना किसी गैरजरूरी ड्रामे के पर्दे पर जीवंत किया। यही सहजता और वास्तविकता उनके निजी जीवन में भी साफ दिखाई देती है। एकता नगर में सजा सिनेमाई दिग्गजों का जमावड़ा इस बार का 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह एक ऐतिहासिक बदलाव का भी गवाह बना। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह का मंच दिल्ली से बाहर ले जाकर गुजरात के एकता नगर में तैयार किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश भर के चुनिंदा फिल्मकारों और कलाकारों को उनकी उत्कृष्ट कला के लिए सम्मानित किया। इस समारोह में अभिनय के अन्य शीर्ष पुरस्कारों की बात करें तो यामी गौतम को फिल्म आर्टिकल 370 में अपने दमदार प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री घोषित किया गया। इसके अलावा पुरुष वर्ग में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की ट्रॉफी संयुक्त रूप से ममूटी को उनकी मलयालम फिल्म ब्रह्मयुगम और कार्तिक आर्यन को चंदू चैंपियन के लिए सौंपी गई। सिनेमा जगत के इस ऐतिहासिक जलसे में संजय मिश्रा की यह जमीनी सादगी सबसे अलग छाप छोड़ गई। इसका आप पर असर फिल्म उद्योग में सितारों की भव्यता और दिखावे के दौर में संजय मिश्रा का यह व्यवहार आम दर्शकों और प्रशंसकों को सादगी का गहरा संदेश देता है। • कला प्रेमियों के लिए: यह घटना दिखाती है कि उपलब्धियों के शीर्ष पर पहुंचकर भी इंसान अपने बुनियादी तौर-तरीके नहीं भूलता। दर्शक अपने पसंदीदा कलाकारों में जब ऐसी सादगी देखते हैं तो उनका आदर और अधिक बढ़ जाता है। • युवा पीढ़ी के लिए: आत्मनिर्भरता और अपने काम को खुद करने की आदत किसी भी व्यक्ति के कद को छोटा नहीं करती। किसी बड़े सम्मान के लिए तैयार होते वक्त खुद कपड़े प्रेस करना काम के प्रति सच्चे समर्पण को दर्शाता है। • सिनेमा उद्योग के लिए: स्टारडम के तड़क-भड़क भरे माहौल में यह प्रसंग कलाकारों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। पुरस्कार की असली गरिमा दिखावे में नहीं बल्कि कला और सादगी में निहित होती है। • समारोह की नई परंपरा: राष्ट्रीय पुरस्कारों का पहली बार दिल्ली से बाहर एकता नगर में होना यह संकेत देता है कि देश के सांस्कृतिक आयोजन अब अन्य राज्यों तक पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में अन्य शहरों को भी ऐसे प्रतिष्ठित आयोजनों की मेजबानी का अवसर मिल सकता है। ऐसा क्यों हुआ संजय मिश्रा का यह वीडियो इसलिए व्यापक रूप से चर्चा में आया क्योंकि इसमें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक से पूर्व की तैयारी दिखाई गई थी। आमतौर पर ऐसी रस्मों के पीछे भारी तामझाम होता है, लेकिन यहां स्थिति एकदम विपरीत रही। • सहज जीवनशैली की निरंतरता: संजय मिश्रा हमेशा से सादा जीवन जीने और दिखावे से दूर रहने के लिए जाने जाते रहे हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार जैसे विशाल अवसर पर भी उन्होंने अपनी इसी जीवनशैली को कायम रखा और अपनी पोशाक खुद तैयार की। • सोशल मीडिया पर वीडियो का प्रसार: समारोह में शामिल होने से ठीक पहले का यह निजी क्षण कैमरे में कैद होकर सोशल मीडिया पर पहुंचा। दर्शकों ने एक राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता को आम इंसान की तरह कपड़े प्रेस करते देखा, जिससे यह तेजी से वायरल हुआ। • कैरियर का महत्वपूर्ण पड़ाव: भक्षक में उनके अभिनय को समीक्षकों से भरपूर सराहना मिली थी, जिसे केंद्र सरकार ने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय सम्मान दिया। इस बड़े पड़ाव ने इस साधारण से दृश्य को और अधिक ऐतिहासिक बना दिया। सवाल-जवाब 1. संजय मिश्रा को किस फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिया गया? संजय मिश्रा को निर्देशक पुलकित की फिल्म 'भक्षक' में उनके शानदार अभिनय के लिए 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान मिला। 2. संजय मिश्रा का कौन सा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ? समारोह में राष्ट्रपति से पुरस्कार लेने जाने से पहले संजय मिश्रा द्वारा खुद अपने कपड़े प्रेस करने का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया गया। 3. 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह कहां आयोजित किया गया? यह समारोह पहली बार देश की राजधानी दिल्ली से बाहर गुजरात के एकता नगर में आयोजित किया गया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विजेताओं को सम्मानित किया। 4. इस समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और अभिनेत्री का पुरस्कार किन्हें मिला? यामी गौतम को फिल्म 'आर्टिकल 370' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, जबकि ममूटी को 'ब्रह्मयुगम' और कार्तिक आर्यन को 'चंदू चैंपियन' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। प्रेरणा और सबक संजय मिश्रा की यह सादगी भरी तस्वीर जीवन और कार्यक्षेत्र में सफलता संभालने के कई अहम सबक सिखाती है। • जमीन से जुड़ाव: चाहे आप अपने क्षेत्र के सबसे ऊंचे शिखर पर क्यों न पहुंच जाएं, अपनी सादगी और मूल संस्कारों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। • आत्मनिर्भरता का महत्व: अपने व्यक्तिगत दैनिक कार्य खुद करने में संकोच न करना इंसान के स्वाभिमान और विनम्रता को दर्शाता है। • काम के प्रति निष्ठा: बाहरी दिखावे और आडंबर के बजाय अपनी कला और कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करना ही सच्ची पहचान दिलाता है। • सफलता में सहजता: जीवन की सबसे बड़ी खुशियों और पुरस्कारों के पलों में भी शांत और सहज बने रहना ही महान व्यक्तित्व की पहचान है। https://trendkia.com/bollywood/rashtriya-puraskara-se-pahale-apane-kurte-para-khuda-istri-chalate-dikhe-sanjay-mishra-36844 TrendKia — Har trend, sabse pehle.