फिल्म इंडस्ट्री में 10 साल पूरे होने पर सैयामी खेर ने साझा किए अनुभव, करियर के शुरुआती दिनों में क्यों छोड़े बड़े प्रोजेक्ट्स सिनेमा जगत में एक दशक पूरा करने वाली अभिनेत्री सैयामी खेर ने खुलासा किया है कि उन्होंने अपनी पहली फिल्म की रिलीज से पहले दो बड़े ऑफर्स क्यों ठुकरा दिए थे। फिल्म उद्योग में एक दशक का सफर पूरा कर चुकीं अभिनेत्री सैयामी खेर ने अपने करियर की शुरुआती चुनौतियों और प्राथमिकताओं पर खुलकर बात की है। साल 2016 में हर्षवर्धन कपूर के साथ आई फिल्म ‘मिर्जया’ बॉक्स ऑफिस पर बजट भी नहीं निकाल सकी थी और बेहद कमजोर साबित हुई थी। इसके बावजूद पिछले दस वर्षों के दौरान सैयामी ने विभिन्न भूमिकाओं के जरिए दर्शकों और समीक्षकों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई है। शुरुआती नाकामी के बाद भी उन्होंने कभी काम की गुणवत्ता और अपनी शर्तों से समझौता नहीं किया। पहली फिल्म की रिलीज से पहले मिले दो बड़े ऑफर्स को क्यों नकारा सैयामी खेर ने साझा किया कि ‘मिर्जया’ के पर्दे पर आने से पहले ही उन्हें दो बड़े प्रोजेक्ट्स की पेशकश मिली थी। इंडस्ट्री में बिल्कुल नई होने के बाद भी उन्होंने दोनों फिल्मों के प्रस्ताव बिना किसी झिझक के ठुकरा दिए थे। इन भूमिकाओं को छोड़ने की मुख्य वजह यह थी कि मेकर्स ने उन्हें पूरी स्क्रिप्ट तक नहीं दी थी। उनसे केवल इतना कहा गया था कि कहानी में मुख्य अभिनेता के साथ उनके दो दृश्य हैं। सैयामी के मुताबिक, जब किसी किरदार की कहानी या उसका आधार ही स्पष्ट न हो, तो केवल बड़े नाम के सहारे काम करने का कोई मतलब नहीं रह जाता। पारिवारिक पृष्ठभूमि और बॉलीवुड में बाहरी सलाह का दबाव सैयामी पूरी तरह से सिनेमाई दुनिया के लिए अनजान नहीं थीं। उनकी दादी उषा किरण मराठी सिनेमा की जानी-मानी दिग्गज अभिनेत्री थीं, जबकि दिग्गज अभिनेत्री तन्वी आजमी उनकी रिश्तेदार हैं। इसके बावजूद हिंदी फिल्म जगत में अपनी पहचान बनाना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं रहा। उन्होंने बताया कि किस तरह नए कलाकारों को उनकी कला के बजाय दिखावे और बाहरी व्यक्तित्व के आधार पर आंका जाता है। करियर के शुरुआती दौर में कई लोग उन्हें आगे बढ़ने के लिए किसी बड़े अभिनेता या निर्देशक को डेट करने की सलाह देते थे। इतना ही नहीं, उन्हें अपने चेहरे को बदलने के लिए लिप जॉब कराने तक के सुझाव दिए गए थे। स्क्रीन पर वक्त बिताने से ज्यादा किरदार के प्रभाव को दी प्राथमिकता सैयामी खेर का मानना है कि केवल किसी बड़े बजट के प्रोजेक्ट में नाम जुड़वाने का कोई फायदा नहीं होता। वह किसी भव्य फिल्म में छोटी सी भूमिका निभाने के बजाय एक सीमित बजट की फिल्म में असरदार और केंद्रीय किरदार निभाना ज्यादा पसंद करती हैं। उनके लिए पर्दे पर कितने मिनट दिखना है, यह गिनती मायने नहीं रखती, बल्कि वह किरदार कहानी में क्या बदलाव ला रहा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसी सोच के कारण उन्होंने अपनी पहली फिल्म के फ्लॉप होने के बाद भी केवल स्क्रिप्ट और कहानी के दम पर अपने रास्ते चुने। पुरुष सह-कलाकारों की असुरक्षा और वरिष्ठ अभिनेताओं का पेशेवर रवैया फिल्म सेट पर काम करने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए सैयामी ने पुरुष सह-कलाकारों के बर्ताव पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में कुछ बड़े सितारे ऐसे भी हैं जो अपनी असुरक्षा के चलते सामने मौजूद महिला कलाकार को सामान्य प्रतिक्रिया देने तक का मौका नहीं देते। इसके विपरीत उन्होंने अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार की कार्यशैली की जमकर सराहना की। सैयामी के अनुसार, यह दोनों अनुभवी कलाकार सेट पर बिल्कुल अलग हैं और अपने सह-कलाकारों को पूरा सम्मान व काम करने का बेहतरीन माहौल देते हैं। अपने दस वर्षों के इस सफर में सैयामी ने शॉर्टकट अपनाने के बजाय अभिनय को ही अपनी असली ताकत बनाए रखा है। इसका आप पर असर फिल्म उद्योग में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं और दर्शकों के लिए इस बातचीत से व्यावहारिक सबक मिलते हैं। • करियर में प्राथमिकताओं का चयन: अपने काम की गुणवत्ता और गरिमा को बनाए रखने के लिए कभी-कभी तात्कालिक बड़े मौकों को छोड़ना पड़ता है। सैयामी खेर का यह फैसला सिखाता है कि बिना ठोस आधार वाली भूमिकाओं को ना कहना करियर के लिए लंबे समय में फायदेमंद साबित होता है। • उद्योग के बाहरी दबाव से बचाव: नए कलाकारों को अक्सर कॉस्मेटिक बदलावों या अनैतिक सुझावों का सामना करना पड़ता है। अपनी स्वाभाविक पहचान बनाए रखना और दबाव में झुके बिना अपनी प्रतिभा पर भरोसा करना ही टिकाऊ पहचान दिलाता है। • स्क्रीन टाइम बनाम किरदार की ताकत: काम के आकार से ज्यादा उसकी गहराई को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है। केवल चर्चा में रहने के बजाय यादगार काम करना पेशेवर जीवन में स्थिरता लाता है। • पेशेवर कार्य संस्कृति की पहचान: कार्यस्थल पर सहयोगियों के बर्ताव और असुरक्षा से निपटना एक जरूरी हुनर है। वरिष्ठ कलाकारों के सकारात्मक सहयोग से सीख लेकर काम के माहौल को बेहतर बनाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह बातचीत सैयामी खेर द्वारा फिल्म इंडस्ट्री में अपने दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर अपने अनुभवों को साझा करने के दौरान सामने आई। • दस साल का मील का पत्थर: सैयामी खेर ने इंडस्ट्री में एक दशक पूरा कर लिया है, जिसके चलते उन्होंने अपने शुरुआती संघर्षों और फैसलों का विश्लेषण किया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि कैसे शुरुआती असफलता के बाद भी उन्होंने खुद को स्थापित किया। • बिना स्क्रिप्ट के प्रस्ताव मिलना: करियर की शुरुआत में उन्हें जो दो फिल्में ऑफर की गई थीं, उनमें केवल दो सीन करने को कहा गया था और स्क्रिप्ट तक नहीं दी गई थी। इसी अस्पष्टता के कारण उन्होंने उन दोनों बड़े ऑफर्स को ठुकराने का फैसला किया। • इंडस्ट्री में सतही अपेक्षाएं: हिंदी सिनेमा में अक्सर प्रतिभा से पहले बाहरी रंग-रूप और व्यक्तिगत संपर्कों को तरजीह दी जाती है। इसी माहौल के कारण उन्हें लिप जॉब कराने और किसी को डेट करने जैसी अनुचित सलाहें दी गई थीं। • सह-कलाकारों की असुरक्षा: सेट पर काम करते हुए उन्हें कुछ प्रमुख पुरुष अभिनेताओं के असहयोगात्मक रवैये का सामना करना पड़ा, जिससे उन्होंने सीखा कि पेशेवर गरिमा को कैसे बनाए रखा जाता है। सवाल-जवाब 1. सैयामी खेर की पहली बॉलीवुड फिल्म कौन सी थी? सैयामी खेर की पहली बॉलीवुड फिल्म ‘मिर्जया’ थी, जो साल 2016 में रिलीज हुई थी और उसमें उनके साथ हर्षवर्धन कपूर मुख्य भूमिका में थे। 2. सैयामी खेर ने करियर की शुरुआत में दो बड़ी फिल्में क्यों ठुकरा दी थीं? उन्हें उन फिल्मों की स्क्रिप्ट तक नहीं दी गई थी और सिर्फ इतना बताया गया था कि हीरो के साथ दो सीन करने हैं, इसलिए उन्होंने वे रोल रिजेक्ट कर दिए। 3. सैयामी खेर का पारिवारिक फिल्मी बैकग्राउंड क्या है? उनकी दादी उषा किरण मराठी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री थीं और वरिष्ठ अभिनेत्री तन्वी आजमी उनकी रिश्तेदार हैं। 4. करियर के शुरुआती दौर में सैयामी को क्या सलाहें दी जाती थीं? उन्हें आगे बढ़ने के लिए किसी अभिनेता या निर्देशक को डेट करने और चेहरे के लिए लिप जॉब कराने जैसी सलाहें दी जाती थीं। 5. सैयामी खेर ने किन वरिष्ठ अभिनेताओं की तारीफ की है? सैयामी खेर ने अमिताभ बच्चन और अक्षय कुमार की उनके बेहतरीन पेशेवर व्यवहार और सह-कलाकारों को सम्मान देने के लिए तारीफ की है। प्रेरणा और सबक सैयामी खेर का दस साल का सफर दिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों और बड़े दबावों के बावजूद अपनी शर्तों पर काम करके भी जगह बनाई जा सकती है। • सिद्धांतों से समझौता न करना: शुरुआती दिनों में जब काम पाने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब भी उन्होंने बिना स्क्रिप्ट के काम करने से इनकार किया। यह दिखाता है कि स्वाभिमान और स्पष्टता सफलता की पहली शर्त है। • असफलता के बाद वापसी: ‘मिर्जया’ के फ्लॉप होने और बजट तक न निकाल पाने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने लगातार अपने अभिनय कौशल को तराशा और अपनी अलग पहचान बनाई। • दिखावे पर प्रतिभा की जीत: लोगों द्वारा दिए गए कॉस्मेटिक बदलावों और गैर-जरूरी सलाहों को दरकिनार करते हुए उन्होंने केवल अपनी कला पर ध्यान दिया। अपनी मूल पहचान पर अडिग रहना ही असली मजबूती है। • गुणवत्ता को मात्रा से ऊपर रखना: बड़ी फिल्म में महत्वहीन रोल करने के बजाय उन्होंने सार्थक काम को चुना। यह सोच सिखाती है कि प्रभाव हमेशा आकार से बड़ा होता है। https://trendkia.com/bollywood/saiyami-kher-ne-kariyara-ki-shuruata-men-chhore-bare-projektsa-10-sala-pure-hone-para-sajha-kie-anubhava-54886 TrendKia — Har trend, sabse pehle.