साल 1996 के एक गाने की वजह से गोविंदा और शिल्पा शेट्टी को 23 साल तक क्यों लगाने पड़े अदालत के चक्कर फिल्म छोटे सरकार के चर्चित गाने एक चुम्मा तू मुझको उधार दे दे के बोल पर दर्ज मुकदमे के बाद गोविंदा और शिल्पा शेट्टी को दो दशक से भी अधिक समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी थी। बॉलीवुड में अक्सर गानों और फिल्मों को लेकर विवाद खड़े होते रहे हैं, लेकिन साल 1996 में आई फिल्म छोटे सरकार का एक गाना ऐसा था जिसकी वजह से मुख्य कलाकारों को 23 वर्षों तक अदालती प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। इस फिल्म के बेहद लोकप्रिय ट्रैक एक चुम्मा तू मुझको उधार दे दे में किसी तरह की गाली या प्रत्यक्ष अश्लील शब्द मौजूद नहीं थे, फिर भी इसके पीछे एक लंबा कानूनी विवाद खड़ा हो गया था। इस गाने पर कई लोगों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं, जिससे अभिनेता गोविंदा और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी की परेशानियां काफी बढ़ गई थीं। विवाद की वजह और मुकदमे की शुरुआत इस गाने के संगीत को आनंद-मिलिंद की जोड़ी ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल रानी मलिक ने लिखे थे। गाने को मशहूर गायक उदित नारायण और गायिका अलका याग्निक ने अपनी आवाज दी थी। रिलीज होते ही यह गाना शादियों और उत्सवों की पहली पसंद बन गया था। हालांकि, गाने की यही विशाल लोकप्रियता बाद में एक बड़ी मुसीबत बन गई। गाने के बोलों में चुम्मे के बदले उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों से जुड़ी पंक्तियों को शामिल किया गया था। इस तुलना और भाषा पर आपत्ति जताते हुए पाकुड़, जो कि अब झारखंड राज्य में स्थित है, के एक स्थानीय वकील ने अदालत में शिकायत दर्ज करवाई। मानहानि और अश्लीलता के आरोप शिकायतकर्ता का तर्क था कि गाने में इस्तेमाल की गई शब्दावली उत्तर प्रदेश और बिहार के निवासियों का अपमान करती है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यह गाना सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और अश्लीलता को बढ़ावा देता है। इसी आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 294 और मानहानि से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। मामले ने तब और भी गंभीर रूप ले लिया जब पाकुड़ की अदालत की ओर से गोविंदा, शिल्पा शेट्टी, फिल्म के निर्देशक और गाने से जुड़े अन्य कलाकारों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिए गए। सेंसर बोर्ड की मंजूरी और गोविंदा का पक्ष कानूनी शिकंजे में फंसने के बाद गोविंदा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि फिल्म और इसके सभी गानों को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) से बाकायदा मंजूरी मिली हुई थी। उनका स्पष्ट कहना था कि कलाकारों या निर्माताओं का इरादा किसी भी राज्य या क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को आहत करना अथवा उन्हें बदनाम करना बिल्कुल नहीं था। इसके बावजूद मुकदमे की प्रक्रिया वर्षों तक खिंचती चली गई और कलाकारों को कोर्ट के चक्कर काटने पड़े। अदालत से मिली राहत करीब 23 वर्षों की लंबी कानूनी खींचतान के बाद साल 2019 में अदालत ने गोविंदा और शिल्पा शेट्टी को इस मामले में बड़ी राहत प्रदान की। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस तथ्य को बेहद महत्वपूर्ण माना कि फिल्म और गाने को सेंसर बोर्ड द्वारा आधिकारिक तौर पर हरी झंडी दी गई थी। इस फैसले के बाद ही दो दशकों से चला आ रहा यह विवाद पूरी तरह से समाप्त हो सका। इसका आप पर असर फिल्म उद्योग और कलात्मक अभिव्यक्ति के मामले में इस तरह के कानूनी मुकदमों का दूरगामी प्रभाव पड़ता है। • कलाकारों और निर्माताओं के लिए: यह मामला दिखाता है कि सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद भी गानों के बोल पर स्थानीय स्तर पर शिकायत दर्ज हो सकती है। • दर्शक और श्रोताओं के लिए: क्षेत्रीय अस्मिता या सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़े विषय पर बने गानों की व्याख्या कानूनी मुकदमों का कारण बन सकती है। • न्यायिक प्रक्रिया के मामले में: इस केस का निपटारा यह स्पष्ट करता है कि सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट किसी भी व्यावसायिक कलात्मक सामग्री के बचाव में अहम कानूनी आधार बनता है। सवाल-जवाब 1. यह विवाद किस फिल्म और गाने से जुड़ा था? यह विवाद साल 1996 में आई फिल्म 'छोटे सरकार' के गाने 'एक चुम्मा तू मुझको उधार दे दे' से जुड़ा था। 2. गोविंदा और शिल्पा शेट्टी के खिलाफ केस कहां दर्ज हुआ था? यह केस झारखंड के पाकुड़ जिले में एक स्थानीय वकील द्वारा दर्ज कराया गया था। 3. कानूनी शिकायत में क्या मुख्य आरोप लगाए गए थे? शिकायत में गाने के बोलों पर अश्लीलता फैलाने तथा उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। 4. अदालत से इस मामले में राहत कब और किस आधार पर मिली? साल 2019 में अदालत ने सेंसर बोर्ड द्वारा मिली पूर्व मंजूरी को मुख्य आधार मानते हुए गोविंदा और शिल्पा शेट्टी को राहत प्रदान की। https://trendkia.com/bollywood/sala-1996-ke-eka-gane-ki-vajaha-se-govinda-aura-shilpa-shetty-ko-23-sala-taka-kyon-lagane-pare-adalata-ke-chakkara-26652 TrendKia — Har trend, sabse pehle.