# सलीम-जावेद के संवादों से बॉलीवुड पर छाए अमिताभ बच्चन, जानिए उन 5 ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बारे में जिन्होंने उन्हें बनाया 'एंग्री यंग मैन'

> 1970 के दशक में जब हिंदी सिनेमा में रोमांटिक फिल्मों का बोलबाला था, तब अमिताभ बच्चन ने पर्दे पर 'एंग्री यंग मैन' के रूप में कदम रखकर हीरो की परिभाषा बदल दी। जानिए उनकी उन 5 ऐतिहासिक एक्शन फिल्मों के बारे में जो आज भी कल्ट क्लासिक मानी जाती हैं।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-08-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/salim-javed-ke-snvadon-se-bolivuda-para-chhae-amitabh-bachchan-janie-una-5-blokabastara-philmon-ke-bare-men-jinhonne-unhen-banaya--18856 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमिताभ बच्चन, एंग्री यंग मैन, शोले, दीवार, जंजीर, डॉन, अग्निपथ, हिंदी सिनेमा

भारतीय सिनेमा के इतिहास में 1970 का दशक एक ऐतिहासिक मोड़ माना जाता है। उस दौर में जब बड़े पर्दे पर मुख्य रूप से रोमांटिक कहानियों का बोलबाला था, तब एक लंबे कद के अभिनेता ने अपनी कड़क आवाज और तीव्र अभिनय से दर्शकों को चौंका दिया। वह अभिनेता थे अमिताभ बच्चन, जिन्होंने पर्दे पर **एंग्री यंग मैन** का अवतार धारण कर हिंदी सिनेमा में नायक की पूरी परिभाषा ही बदलकर रख दी। महान लेखक जोड़ी सलीम-जावेद की कलम से निकले दमदार संवादों और अमिताभ बच्चन के जबरदस्त एक्शन ने दर्शकों के दिलों पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी कि वह देखते ही देखते भारतीय फिल्म जगत के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए। उनकी इसी अद्वितीय लोकप्रियता और स्क्रीन प्रेजेंस को देखकर फ्रांस के विख्यात फिल्म निर्माता फ्रांस्वा ट्रूफों ने उन्हें **वन मैन इंडस्ट्री** की उपाधि तक दे दी थी।

 अमिताभ बच्चन की इन एक्शन फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे सिर्फ मारधाड़ या स्टंट्स तक सीमित नहीं थीं। उनके द्वारा निभाए गए किरदारों में व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा, बेबसी का दर्द, अपनों को खोने का बदला, सामाजिक संघर्ष और आम इंसान के लिए न्याय की लड़ाई गहराई से समाई हुई थी। इसी सामाजिक जुड़ाव के कारण उनका यह दौर आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार और स्वर्णिम अध्यायों में गिना जाता है। आइए जानते हैं अमिताभ बच्चन की उन 5 कालजयी फिल्मों के बारे में, जिन्होंने उन्हें एक्शन सिनेमा का बेताज बादशाह बना दिया।

 

## 1. जंजीर (1973): 'एंग्री यंग मैन' के सफर की शुरुआत

प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी फिल्म **जंजीर** को अमिताभ बच्चन के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है। 1973 में प्रदर्शित हुई इस फिल्म में उन्होंने इंस्पेक्टर विजय खन्ना का जीवंत किरदार निभाया था। कहानी एक ऐसे ईमानदार पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ते हुए अपने माता-पिता के कातिलों से बदला लेने की मुहिम में जुट जाता है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन की आंखों का गुस्सा और कड़क संवाद अदायगी दर्शकों के मन को छू गई। _जंजीर_ के बाद ही बॉलीवुड में 'एंग्री यंग मैन' के दौर का औपचारिक आगाज हुआ। यदि आप इस ऐतिहासिक फिल्म का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो यह वर्तमान में यूट्यूब पर मुफ्त में देखने के लिए उपलब्ध है।

 

## 2. दीवार (1975): कानून और अपराध के दो छोर पर खड़ा हीरो

वर्ष 1975 में निर्देशक यश चोपड़ा की फिल्म **दीवार** सिनेमाघरों में रिलीज हुई, जिसने अमिताभ बच्चन के 'एंग्री यंग मैन' वाले रूप को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इस फिल्म में उन्होंने विजय नाम के एक ऐसे युवक की भूमिका निभाई, जो विषम परिस्थितियों और सामाजिक असमानता से जूझते हुए अपराध की काली दुनिया में कदम रखने को मजबूर हो जाता है। दूसरी तरफ उनका सगा भाई रवि एक निष्ठावान पुलिस अधिकारी के रूप में कानून की रक्षा करता है। _दीवार_ में दर्शाया गया विजय का दर्द, बगावत और अंतर्द्वंद्व तत्कालीन समाज के असंतोष से सीधे तौर पर जुड़ गया था। इस ब्लॉकबस्टर फिल्म को दर्शक नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम वीडियो और जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम कर सकते हैं।

 

## 3. शोले (1975): स्टार से सुपरस्टार बनने का सफर

यदि _जंजीर_ ने अमिताभ बच्चन को एक स्थापित स्टार बनाया, तो रमेश सिप्पी की कालजयी रचना **शोले** ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार के सिंहासन पर बैठा दिया। 1975 में आई इस महाकाव्य फिल्म में अमिताभ ने जय का शांत, गंभीर और वफादार किरदार निभाया, जो अपने साथी वीरू के साथ मिलकर पूर्व पुलिस अधिकारी ठाकुर की मदद के लिए खूंखार डाकू गब्बर सिंह का डटकर मुकाबला करता है। फिल्म में उनके एक्शन सीन्स, मुंह में माचिस की तीली दबाने का अंदाज और अमजद खान के साथ संवाद टकराव आज भी सिनेप्रेमियों के जेहन में तरोताजा हैं।

 दिलचस्प बात यह है कि साल 2026 में भी इस फिल्म का जादू दुनिया भर में सिर चढ़कर बोल रहा है। हाल ही में अमिताभ बच्चन ने एक वाकया साझा करते हुए बताया कि इटली में _शोले_ की रिस्टोर्ड प्रिंट स्क्रीनिंग आयोजित की गई थी, जहां लगभग 2,000 लोगों ने देर रात 11 बजे से तड़के 3 बजे तक बैठकर पूरी फिल्म का आनंद लिया। यह ऐतिहासिक फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो और जियोहॉटस्टार पर ऑनलाइन देखने के लिए उपलब्ध है।

 

## 4. डॉन (1978): डबल रोल में बिग बी की बेमिसाल अदाकारी

चंद्र बारोट के निर्देशन में बनी 1978 की क्राइम थ्रिलर फिल्म **डॉन** में अमिताभ बच्चन ने अपनी अभिनय क्षमता का नया विस्तार दिखाया। इस फिल्म में उन्होंने दो बिल्कुल विपरीत किरदार निभाए, एक तरफ जहां वह बेखौफ और शातिर अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर डॉन के रूप में नजर आए, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने सीधे-सादे पान खाने वाले विजय का किरदार निभाया। स्टाइलिश एक्शन, बैकग्राउंड म्यूजिक और अमिताभ बच्चन की करिश्माई स्क्रीन प्रेजेंस ने इस फिल्म को हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन क्राइम फिल्मों में शामिल कर दिया। वर्तमान में _डॉन_ को अमेज़न प्राइम वीडियो, जियोहॉटस्टार और जी5 पर देखा जा सकता है।

 

## 5. अग्निपथ (1990): विजय दीनानाथ चौहान का कल्ट अंदाज

मुकुल एस. आनंद निर्देशित 1990 की फिल्म **अग्निपथ** में अमिताभ बच्चन ने विजय दीनानाथ चौहान का ऐतिहासिक किरदार निभाया था। अपने पिता के अपमान और हत्या का बदला लेने के लिए वह जुर्म के दलदल में उतरता है। इस फिल्म में अमिताभ का भारी-भरकम कोट, भारी आवाज और आंखों में जलती बदले की आग वाला रूप उस दौर के पारंपरिक सिनेमा से एकदम अलग था। यद्यपि रिलीज के समय फिल्म को वैसी व्यावसायिक सफलता नहीं मिली जैसी उम्मीद थी, लेकिन समय के साथ यह भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी कल्ट फिल्मों में शुमार हो गई। आज विजय दीनानाथ चौहान के संवाद हर सिनेमा प्रेमी की जुबान पर हैं। इस कल्ट क्लासिक फिल्म को नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम वीडियो पर देखा जा सकता है।

 

## नायक की परिभाषा बदलने वाले महानायक

अमिताभ बच्चन की एक्शन फिल्मों ने न केवल 1970 और 1980 के दशक का रुख मोड़ा, बल्कि हिंदी सिनेमा में हीरो की पूरी अवधारणा को हमेशा के लिए पुनर्रचित कर दिया। 1973 में _जंजीर_ के इंस्पेक्टर विजय खन्ना से शुरू हुआ यह सफर _दीवार_, _शोले_, _डॉन_ और _अग्निपथ_ जैसी फिल्मों के जरिए सफलता के नए शिखरों तक पहुंचा। उनके किरदारों की सबसे बड़ी ताकत यह थी कि वे केवल शारीरिक बल का प्रदर्शन नहीं करते थे, बल्कि उनके पीछे सामाजिक अन्याय, बगावत और आम आदमी की पीड़ा छिपी होती थी। इसी जुड़ाव, भारी आवाज और अद्वितीय स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें बॉलीवुड का सबसे बड़ा और अमर सुपरस्टार बना दिया।

## इसका आप पर असर
- **दर्शकों और सिनेप्रेमियों के लिए:** यह समीक्षा और विश्लेषण अमिताभ बच्चन की कालजयी एक्शन फिल्मों की प्रासंगिकता और उनके ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्धता की पूरी जानकारी देता है, जिससे प्रशंसक आसानी से इन क्लासिक्स को देख सकते हैं।

- **भारतीय सिनेमा प्रेमियों के लिए:** 1970 और 1980 के दशक के 'एंग्री यंग मैन' दौर और भारतीय सिनेमा में हीरो के स्वरूप में आए बदलाव को समझने के लिए यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज है।

## सवाल-जवाब

### 1. अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' का खिताब किस फिल्म से मिला?
अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' की छवि 1973 में आई प्रकाश मेहरा की फिल्म 'जंजीर' में इंस्पेक्टर विजय खन्ना का किरदार निभाने के बाद मिली।

### 2. किस मशहूर फिल्म निर्माता ने अमिताभ बच्चन को 'वन मैन इंडस्ट्री' कहा था?
फ्रांस के जाने-माने फिल्म निर्माता फ्रांस्वा ट्रूफों ने अमिताभ बच्चन के भारतीय सिनेमा में दबदबे को देखकर उन्हें 'वन मैन इंडस्ट्री' कहा था।

### 3. फिल्म 'शोले' की स्क्रीनिंग को लेकर 2026 में क्या नया वाकया सामने आया?
अमिताभ बच्चन ने बताया कि 2026 में इटली में 'शोले' की रिस्टोर्ड स्क्रीनिंग हुई, जिसे लगभग 2,000 लोगों ने रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक देखा।

### 4. अमिताभ बच्चन की फिल्म 'दीवार' किस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है?
1975 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'दीवार' को दर्शक नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम वीडियो और जियोहॉटस्टार पर देख सकते हैं।

### 5. फिल्म 'डॉन' में अमिताभ बच्चन का क्या किरदार था?
1978 की फिल्म 'डॉन' में अमिताभ बच्चन ने डबल रोल निभाया था, जिसमें वह खतरनाक गैंगस्टर डॉन और उसके हमशक्ल विजय दोनों रूपों में नजर आए थे।

### 6. रिलीज के समय फ्लॉप मानी जाने वाली कौन सी फिल्म बाद में कल्ट क्लासिक बनी?
1990 में रिलीज हुई फिल्म 'अग्निपथ' को शुरुआत में बड़ी सफलता नहीं मिली थी, लेकिन बाद में विजय दीनानाथ चौहान का किरदार भारतीय सिनेमा की कल्ट क्लासिक बन गया।

## प्रेरणा और सबक
- **संघर्ष से सफलता:** शुरुआती विफलता और कठिन दौर के बावजूद अमिताभ बच्चन ने अपनी अलग पहचान बनाई और अपनी अभिनय शैली से पूरे उद्योग को बदल दिया।

- **बहुमुखी प्रतिभा:** डॉन में डबल रोल और अग्निपथ में अलग तरह की आवाज का प्रयोग यह सिखाता है कि सफलता के लिए प्रयोगधर्मिता और विविधता जरूरी है।

- **समय से परे प्रासंगिकता:** शोले का 2026 में भी इटली जैसे देश में देर रात तक देखा जाना यह साबित करता है कि गुणवत्तापूर्ण काम सीमाओं और समय से परे हमेशा जीवित रहता है।

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