# सात दशक बाद भी टूटे दिलों का साथी बना यह गाना, तलत महमूद की उस आवाज़ की कहानी जिसे कभी कमजोरी समझा गया

> 1950 की फिल्म आरजू का गाना 'ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल' 76 साल बाद भी उतना ही असरदार है, और इसकी वजह है तलत महमूद की वो कांपती आवाज़ जिसे कभी गायकी की खामी माना जाता था.

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/sata-dashaka-bada-bhi-tute-dilon-ka-sathi-bana-yaha-gana-talat-mahmood-ki-usa-avaza-ki-kahani-jise-kabhi-kamajori-samajha-gaya-28242 · **Language:** Hindi
**Tags:** फिल्म आरजू, तलत महमूद, दिलीप कुमार, अनिल बिस्वास, मजरूह सुल्तानपुरी, कामिनी कौशल, पुराने गाने

1950 में रिलीज हुई फिल्म आरजू ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की थी, लेकिन आज इस फिल्म को असली पहचान इसके गानों से मिलती है. खासकर गाना 'ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहां कोई ना हो' आज भी संगीत प्रेमियों के बीच उतना ही मशहूर है जितना 76 साल पहले था. तलत महमूद की आवाज़ में गाया यह गीत सुनते ही ऐसा लगता है जैसे कोई टूटा हुआ दिल दुनिया से दूर सुकून की तलाश में निकल पड़ा हो. यही वजह है कि तलत महमूद की आवाज़ आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में उतनी ही जिंदा है जितनी सात दशक पहले थी.

## किसने बनाया यह गीत
इस गाने का संगीत अनिल बिस्वास ने तैयार किया था, जबकि बोल मजरूह सुल्तानपुरी की कलम से निकले थे. गाने में मुख्य भूमिका दिलीप कुमार ने निभाई थी. सात दशक गुजर जाने के बावजूद गीत के भाव आज भी उतने ही असरदार लगते हैं जितने रिलीज के वक्त लगते थे. प्यार और जुदाई के दर्द को जिस खूबसूरती से इस गाने में पिरोया गया है, वही वजह है कि यह आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा गीतों में गिना जाता है.

## जिस कंपन को कमजोरी समझा गया, वही बनी पहचान
तलत महमूद की आवाज़ में एक हल्की सी कंपकंपाहट थी. उस दौर में इसे गायकी की खामी माना जाता था और ज्यादातर गायक इसे छिपाने की कोशिश करते थे. लेकिन संगीतकार अनिल बिस्वास ने इसे कमजोरी नहीं बल्कि तलत महमूद की आवाज़ की सबसे बड़ी खूबी मान लिया. उन्होंने इस कंपन को गाने से हटाने के बजाय इसे वैसे ही रहने दिया. नतीजा यह हुआ कि 'ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल' में दर्द और गहरा उतर आया. यही वो गाना था जिसने तलत महमूद को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई और उन्हें दर्द भरे गीतों का सबसे बड़ा गायक बना दिया.

## दिलीप कुमार और कामिनी कौशल की कहानी पर फिल्माया गया गीत
फिल्म आरजू में यह गीत दिलीप कुमार और कामिनी कौशल के किरदारों की कहानी से जुड़ा हुआ था. फिल्म में दिलीप कुमार ने 'बादल' नाम का किरदार निभाया था, जबकि कामिनी कौशल ने 'कामिनी' का किरदार निभाया. फिल्म का निर्देशन शाहिद लतीफ ने किया था और संगीत की जिम्मेदारी अनिल बिस्वास ने संभाली थी. फिल्म के बारे में कहा जाता है कि इसकी कहानी एमिली ब्रोंटे के मशहूर उपन्यास 'वर्थरिंग हाइट्स' से प्रेरित थी.

आज, रिलीज के 76 साल बाद भी जब कोई इस गाने को सुनता है तो तलत महमूद की उस कांपती आवाज़ में छिपा दर्द सीधे दिल तक पहुंचता है. यही वजह है कि पुरानी पीढ़ी से लेकर नई पीढ़ी तक, यह गीत हर दौर के आशिकों के दिलों पर राज करता आया है.

## सवाल-जवाब

### 1. यह गाना किस फिल्म का है?
यह गाना 1950 की फिल्म आरजू का है.

### 2. गाने को आवाज़ किसने दी है?
गाना तलत महमूद ने गाया है.

### 3. गाने का संगीत किसने दिया है?
गाने का संगीत अनिल बिस्वास ने कंपोज किया है.

### 4. गाने के बोल किसने लिखे हैं?
गाने के बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे हैं.

### 5. गाना किन कलाकारों पर फिल्माया गया है?
गाना दिलीप कुमार और कामिनी कौशल पर फिल्माया गया है, जिन्होंने फिल्म में क्रमशः 'बादल' और 'कामिनी' का किरदार निभाया था.

### 6. फिल्म आरजू किस उपन्यास से प्रेरित बताई जाती है?
कहा जाता है कि फिल्म एमिली ब्रोंटे के मशहूर उपन्यास 'वर्थरिंग हाइट्स' से प्रेरित है.

### 7. गाने को रिलीज हुए कितने साल हो गए हैं?
गाने को रिलीज हुए 76 साल हो गए हैं.

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