# साउथ कलाकारों के हिंदी एक्सेंट पर आलोचना गलत, कशिका कपूर ने रश्मिका मंदाना के समर्थन में कही बड़ी बात

> अभिनेत्री कशिका कपूर ने साउथ भारतीय कलाकारों के हिंदी लहजे पर होने वाली ट्रोलिंग की आलोचना करते हुए कहा कि किसी भी कलाकार की पहचान उसकी परफॉर्मेंस से होनी चाहिए, न कि भाषा या एक्सेंट से।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/sautha-kalakaron-ke-hindi-eksenta-para-alochana-galata-kashika-kapoor-ne-rashmika-mandanna-ke-samarthana-men-kahi-bari-bata-55959 · **Language:** Hindi
**Tags:** रश्मिका मंदाना, कशिका कपूर, साउथ सिनेमा, हिंदी सिनेमा, बॉलीवुड, एनिमल, पुष्पा

हिंदी सिनेमा में काम करने वाले दक्षिण भारतीय कलाकारों को अक्सर उनके बोलने के अंदाज या खास लहजे की वजह से सोशल मीडिया पर आलोचना का निशाना बनाया जाता है। इस तरह के भेदभाव और भाषा आधारित टिप्पणियों पर अभिनेत्री कशिका कपूर ने खुलकर अपनी बात रखी है। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार का मूल्यांकन केवल उसके अभिनय कौशल और मंच पर उसकी उपस्थिति के आधार पर होना चाहिए, न कि इस बात पर कि वह किस लहजे में संवाद बोलता है। फिल्म जगत को अलग-अलग क्षेत्रीय सीमाओं में बांटने के बजाय एक साझा मंच के रूप में देखा जाना चाहिए।

## सिनेमा में भाषा नहीं बननी चाहिए कोई दीवार
कशिका कपूर के अनुसार, कई बार ऐसा देखा गया है कि गैर-हिंदी पृष्ठभूमि से आने वाले कलाकारों को उनके उच्चारण के लिए अनुचित रूप से परखा जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक परफॉर्मर के लिए भाषा कभी भी कोई रुकावट नहीं बननी चाहिए। भारतीय मनोरंजन उद्योग को तेलुगु फिल्म उद्योग या हिंदी फिल्म उद्योग जैसी संकीर्ण श्रेणियों में विभाजित करने की प्रवृत्ति पूरी तरह अनुचित है। जब कोई कलाकार कैमरे के सामने आता है, तो उसकी मूल पहचान सिर्फ एक एक्टर के रूप में होनी चाहिए, जिसे दर्शकों तक भावनाएं पहुंचाने की उसकी कला से आंका जाए।

## अपने लहजे पर रश्मिका मंदाना का नजरिया
एक्सेंट के आधार पर होने वाली ट्रोलिंग का सामना कर चुकी अभिनेत्रियों में रश्मिका मंदाना का नाम प्रमुखता से सामने आता है। चैट शो ‘कॉफी विद करण’ में अपनी उपस्थिति के दौरान उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि उन्हें अपने पूरे करियर में अपने बोलने के लहजे को लेकर लगातार आलोचनाएं झेलनी पड़ी हैं। हालांकि उन्होंने इस नकारात्मकता को कभी अपने काम के आड़े नहीं आने दिया और अलग-अलग भाषा उद्योगों में काम करना जारी रखा। दक्षिण भारत से ताल्लुक रखने के कारण उनका यह लहजा स्वाभाविक है, और ‘पुष्पा’ फेम इस अभिनेत्री ने हमेशा खुद को किसी एक खास इंडस्ट्री तक सीमित रखने के बजाय विविध भाषाओं के प्रोजेक्ट्स में काम करने को प्राथमिकता दी है।

## प्रतिभा और परफॉर्मेंस ही तय करती है असली पहचान
रश्मिका मंदाना का उदाहरण देते हुए कशिका कपूर ने स्पष्ट किया कि ‘द गर्लफ्रेंड’ की अभिनेत्री जिस तरह की नकारात्मक टिप्पणियों का सामना करती हैं, वह उसके बिल्कुल भी योग्य नहीं हैं। हर कलाकार अपनी भूमिका के लिए बेहद कड़ा परिश्रम करता है और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देता है। रश्मिका एक बेहतरीन अदाकारा हैं और किसी को भी उनके एक्सेंट के आधार पर उनके काम को कम आंकने का अधिकार नहीं है। किसी कलाकार की जड़ें और उसकी मूल पृष्ठभूमि उसकी पहचान का वह हिस्सा होती हैं जो उसे दूसरों से अलग बनाती हैं। अंततः पर्दे पर कलाकार का अभिनय ही सबसे बड़ा सच होता है। रश्मिका ‘एनिमल’ जैसी विशाल फिल्मों का हिस्सा बनकर शानदार काम कर चुकी हैं, इसलिए अभिनेताओं को उनके उच्चारण पर घेरने के बजाय उनकी कलात्मक प्रतिभा के लिए सम्मान दिया जाना चाहिए।

## इसका आप पर असर
फिल्म उद्योग में भाषा और एक्सेंट को लेकर कलाकारों के रुख से दर्शकों और समाज में भाषाई विविधता के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है।

- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह बहस विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों के कलाकारों के काम को बिना किसी पूर्वाग्रह के देखने का अवसर देती है। दर्शक अब तकनीकी संवाद अदायगी के बजाय अभिनेता के भाव और अभिनय पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
- **कलाकारों और युवाओं के लिए:** क्षेत्रीय पृष्ठभूमि से आने वाले कलाकारों को इससे आत्मविश्वास मिलता है कि उनकी मूल पहचान उनकी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत है। वे अपनी स्थानीय जड़ों को छिपाए बिना राष्ट्रीय स्तर पर काम करने की प्रेरणा ले सकते हैं।
- **उद्योग की समझ:** यह बदलाव भारतीय सिनेमा को क्षेत्रीय दीवारों से बाहर निकालकर एक साझा पैन-इंडिया पहचान देता है। अलग-अलग इंडस्ट्री के बीच बढ़ रहे तालमेल से दर्शकों को अधिक विविधतापूर्ण कहानियां देखने को मिलेंगी।
- **सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए:** ऑनलाइन ट्रोलिंग और सतही आलोचना के नकारात्मक प्रभाव को समझने में मदद मिलती है। रचनात्मक आलोचना और व्यक्तिगत लहजे पर टिप्पणी करने के बीच के अंतर को समझना आसान होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
दक्षिण भारतीय कलाकारों के हिंदी लहजे पर ऑनलाइन ट्रोलिंग और कशिका कपूर द्वारा उठाए गए समर्थन के पीछे भाषाई पूर्वाग्रह और कलाकारों का बदलता रुख मुख्य कारण हैं।

- **हिंदी संवादों में क्षेत्रीय लहजा:** जब दक्षिण भारत से जुड़े कलाकार हिंदी फिल्मों में अपनी मूल आवाज में संवाद बोलते हैं, तो उनका प्राकृतिक उच्चारण कुछ दर्शकों को अलग लगता है। इसी अंतर को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियां शुरू हो जाती हैं।
- **पैन-इंडिया सिनेमा का विस्तार:** हाल के वर्षों में कई साउथ भारतीय सितारे हिंदी सिनेमा और बड़े बजट की पैन-इंडिया फिल्मों में लगातार प्रमुख भूमिकाएं निभा रहे हैं। इस बढ़ते प्रभाव के साथ कलाकारों की भाषा और लहजे की बारीकी से जांच भी बढ़ गई है।
- **कलाकारों का मुखर होना:** रश्मिका मंदाना द्वारा टॉक शो में अपने संघर्ष को साझा करने और कशिका कपूर द्वारा उनके समर्थन में खुलकर बोलने से यह मुद्दा सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। इंडस्ट्री के कलाकार अब बिना संकोच अपनी भाषाई पहचान के पक्ष में खड़े हो रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. कशिका कपूर ने साउथ सितारों की ट्रोलिंग पर क्या कहा?
कशिका कपूर ने कहा कि एक एक्टर की पहचान हमेशा एक परफॉर्मर के तौर पर होनी चाहिए और भाषा उनके लिए कोई रुकावट नहीं बननी चाहिए।

### 2. रश्मिका मंदाना ने अपने एक्सेंट की आलोचना पर क्या रुख अपनाया था?
रश्मिका मंदाना ने बताया कि पूरे करियर में एक्सेंट पर आलोचना झेलने के बावजूद उन्होंने खुद को अलग-अलग भाषाओं और फिल्म इंडस्ट्रीज में काम करने से कभी नहीं रोका।

### 3. रश्मिका मंदाना ने अपने लहजे को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया था?
रश्मिका ने बताया था कि वह साउथ इंडिया से ताल्लुक रखती हैं, इसलिए उनका यह एक्सेंट पूरी तरह से स्वाभाविक है।

### 4. कशिका कपूर ने रश्मिका मंदाना की किन प्रमुख फिल्मों का उल्लेख किया?
कशिका कपूर ने रश्मिका के काम का समर्थन करते हुए उनकी फिल्म 'एनिमल' और 'द गर्लफ्रेंड' का जिक्र किया।

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