# सावन की रिमझिम में आज भी छा जाता है 'गोपी किशन' का रोमांटिक नगमा, जानिए कजरी से बॉलीवुड गानों तक का मानसूनी सफर

> मानसून का मौसम आते ही 90 के दशक का सुपरहिट गीत 'छतरी ना खोल बरसात में' फिर से प्लेलिस्ट में गूंजने लगता है। जानिए कैसे बॉलीवुड गानों और कजरी की परंपरा ने बारिश के एहसास को अमर बनाया है।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-08-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/savana-ki-rimajhima-men-aja-bhi-chha-jata-hai-gopi-kishan-ka-romantika-nagama-janie-kajari-se-bolivuda-ganon-taka-ka-manasuni-saph-14339 · **Language:** Hindi
**Tags:** गोपी किशन, कुमार सानू, पूर्णिमा, आनंद मिलिंद, बारिश के गाने, कजरी लोकगीत, बॉलीवुड मानसून

मानसून की पहली दस्तक के साथ ही हवाओं में एक खास सुरीला अहसास घुल जाता है। बारिश की बूंदों और प्यार के मौसम का बॉलीवुड संगीत से पुराना नाता रहा है। जब भी सावन की झड़ी लगती है, संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट में 90 के दशक के सदाबहार नगमें अपने आप जगह बना लेते हैं। इनमें 1994 में आई फिल्म **गोपी किशन** का बेहद लोकप्रिय रोमांटिक गीत **छतरी ना खोल बरसात में** शीर्ष पर रहता है। तीन दशक बीत जाने के बाद भी यह गाना रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मानसून के दौरान जमकर सुना और पसंद किया जाता है।

## कुमार सानू और पूर्णिमा की आवाज का जादू
फिल्म **गोपी किशन** के इस यादगार गीत को पार्श्व गायक **कुमार सानू** और गायिका **पूर्णिमा** ने अपनी मधुर आवाजों से सजाया था। गाने की मस्ती, रोमांस और मानसूनी फुहारों का संयोजन दर्शकों को बहुत पसंद आया। इस ट्रैक का संगीत **आनंद-मिलिंद** की प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी ने तैयार किया था, जबकि इसके खूबसूरत और चुलबुले बोल गीतकार **समीर** ने लिखे थे। 90 के दशक की सरगम और बोलों की सादगी ने इस गीत को हर वर्ग के श्रोताओं के बीच लोकप्रिय बना दिया।

## 51 साल बाद भी अमर हैं लता मंगेशकर के बारिश गीत
भारतीय सिनेमा में मानसून और गानों का रिश्ता **गोपी किशन** से काफी पुराना है। सावन के महीने में लगभग 51 साल बाद भी **लता मंगेशकर** के गाए सदाबहार बारिश गीत लोगों के दिलों को धड़काते हैं। महान अभिनेत्री **शर्मिला टैगोर** पर फिल्माए गए ऐसे ही कई गीतों की मनमोहक अदाओं और शास्त्रीय धुनों ने मानसून के गानों को अमर बना दिया। बॉलीवुड ने हमेशा से बारिश को विरह, मिलन और रोमांस के प्रतीक के रूप में पेश किया है।

## लोक संगीत की कजरी परंपरा और बदलता दौर
फिल्मी गानों से इतर, भारतीय ग्रामीण संस्कृति में बारिश के मौसम का स्वागत पारंपरिक लोक संगीत **कजरी** से करने की समृद्ध परंपरा रही है। कजरी के जरिए बारिश, विरह और प्रेम की मधुर अभिव्यक्ति की जाती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण इलाकों में सावन के आगमन पर पेड़ों पर झूले पड़ते थे और खेतों में कजरी की मधुर तान गूंजती थी। हालांकि आधुनिक जीवनशैली के कारण गांवों से झूलों का रिवाज और खेतों से कजरी के सुर धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं, लेकिन डिजिटल माध्यमों और बॉलीवुड गानों के जरिए मानसून का यह संगीतमय सफर आज भी बरकरार है।

## इसका आप पर असर
**संगीत प्रेमियों के लिए:** मानसून के दौरान क्लासिक बॉलीवुड और पारंपरिक लोक संगीत सुनने का अवसर मिलता है, जिससे पुरानी यादें ताजा होती हैं।

**सांस्कृतिक जुड़ाव:** कजरी और पुरानी फिल्मों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय बारिश संगीत और लोक परंपराओं को समझने का मौका मिलता है।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म 'गोपी किशन' का यह मशहूर गाना किस साल रिलीज हुआ था?
यह गाना 1994 में आई फिल्म 'गोपी किशन' का हिस्सा था, जो लगभग तीन दशक पुराना है।

### 2. 'छतरी ना खोल बरसात में' गाना किन गायकों ने गाया है?
इस गाने को पार्श्व गायक कुमार सानू और पूर्णिमा ने अपनी आवाज दी है।

### 3. इस गीत के संगीतकार और गीतकार कौन हैं?
इस गाने का संगीत आनंद-मिलिंद ने तैयार किया था और इसके बोल समीर ने लिखे थे।

### 4. कजरी क्या है और इसका बारिश से क्या संबंध है?
कजरी भारत का एक पारंपरिक लोक संगीत है जो सावन और बारिश के मौसम में विरह और प्रेम को अभिव्यक्त करने के लिए गाया जाता है।

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