सेंसर बोर्ड की 120 कट्स की मांग को दरकिनार कर तीन साल बाद रिलीज हुई 'सतलज', परमजीत कौर बोलीं- कहानी वैसी ही है जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक 'सतलज' ओटीटी पर रिलीज होते ही पत्नी परमजीत कौर खालरा ने साफ किया कि फिल्म में कोई काट-छांट नहीं हुई, सेंसर बोर्ड की 120 कट्स की मांग के बावजूद असली सच्चाई बरकरार रखी गई. पंजाब में उग्रवाद के दौर में हजारों लापता लोगों का मुद्दा उठाने वाले एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर बनी बायोपिक 'सतलज' अब ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर देखी जा सकती है. फिल्म रिलीज होते ही जसवंत सिंह की पत्नी परमजीत कौर खालरा खुलकर इसके समर्थन में सामने आईं. उन्होंने एक्स पर लिखा कि फिल्म में कहीं कोई काट-छांट नहीं हुई है और इसमें कहानी की असली आत्मा और सच्चाई पूरी तरह बरकरार रखी गई है. उनके इस बयान ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि सेंसर बोर्ड के दबाव में फिल्म से कई अहम सीन हटा दिए गए हैं. सेंसर बोर्ड की 120 कट्स की मांग और तीन साल का इंतजार परमजीत कौर के मुताबिक दबाव के बावजूद निर्देशक हनी त्रेहान ने फिल्म की सच्चाई से कोई समझौता नहीं किया. सेंसर बोर्ड ने शुरुआत में फिल्म में करीब 120 जगह कट लगाने की मांग रखी थी. इनमें पंजाब पुलिस, कस्टडी में हुई हिंसा और उस दौर की कई ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े सीन शामिल थे. मेकर्स ने ये बदलाव मानने से साफ इनकार कर दिया, यही वजह रही कि फिल्म को सर्टिफिकेट मिलने में पूरे तीन साल लग गए. आखिरकार परमजीत कौर ने फिल्म के ऑरिजिनल वर्जन को अपनी मंजूरी दी और राहत जताई कि फिल्म दर्शकों तक ठीक वैसी ही पहुंची है, जैसी शुरुआत में परिवार को दिखाई गई थी. दिलजीत दोसांझ ने भी की पुष्टि, सिर्फ नाम बदला गया फिल्म में लीड रोल निभाने वाले एक्टर दिलजीत दोसांझ ने भी सोशल मीडिया पर इस बात की पुष्टि की. उन्होंने साफ लिखा कि अगर फिल्म में एक भी सीन काटा गया होता, तो वह इसका प्रमोशन कभी नहीं करते. निर्देशक हनी त्रेहान और अभिनेता दिलजीत दोसांझ दोनों ने एक सुर में कहा कि फिल्म में सिर्फ नाम बदला गया है, कहानी बिल्कुल वैसी ही रखी गई है. फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह जसवंत सिंह खालरा ने पंजाब में उग्रवाद के दौर में 25000 से ज्यादा लावारिस लाशों का मुद्दा उठाया था, जो उस समय एक बड़ा और संवेदनशील सवाल बन गया था. परमजीत कौर की कानूनी लड़ाई और राजनीति में कदम जसवंत सिंह खालरा को 1995 में उनके घर के बाहर से अगवा कर मार डाला गया था. इसके बाद परमजीत कौर ने न्याय के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. वह लगातार अदालतों के चक्कर काटती रहीं और उन्होंने इस मुद्दे को ग्लोबल लेवल पर जिंदा रखा, जिसका नतीजा यह निकला कि दोषी पुलिसकर्मियों को सजा मिली. अब 70 की उम्र पार कर चुकीं परमजीत कौर ने राजनीति में भी हाथ आजमाया और लगातार मानवाधिकारों की वकालत करती रहीं. उन्हें उम्मीद है कि 'सतलज' उनके पति की विरासत को सही सम्मान देगी और दुनिया को न्याय व इंसानियत की अहमियत समझाएगी. इसका आप पर असर यह खबर सीधे तौर पर मनोरंजन जगत से जुड़ी है, इसका असर उन दर्शकों और फिल्म प्रेमियों पर पड़ता है जो जसवंत सिंह खालरा की कहानी और पंजाब के उस दौर के इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं. • दर्शकों के लिए: जो लोग ओटीटी पर 'सतलज' देखने की सोच रहे हैं, उन्हें अब भरोसा है कि फिल्म बिना किसी काट-छांट के अपने असली रूप में उपलब्ध है. • पंजाब से जुड़े लोगों के लिए: जसवंत सिंह खालरा के मुद्दे और उनके परिवार की लंबी लड़ाई से वाकिफ लोगों के लिए यह पुष्टि अहम है कि उनकी विरासत को बिना बदलाव के पर्दे पर उतारा गया है. सवाल-जवाब 1. फिल्म 'सतलज' किस पर आधारित है? यह फिल्म एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित बायोपिक है. 2. 'सतलज' कहां देखी जा सकती है? फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हो चुकी है. 3. क्या सेंसर बोर्ड के दबाव में फिल्म से सीन हटाए गए? नहीं, परमजीत कौर खालरा ने साफ किया है कि फिल्म में कोई काट-छांट नहीं हुई, हालांकि सेंसर बोर्ड ने पहले करीब 120 कट्स की मांग की थी. 4. परमजीत कौर खालरा ने फिल्म के बारे में क्या कहा? उन्होंने एक्स पर लिखा कि फिल्म की असली आत्मा और सच्चाई पूरी तरह बरकरार रखी गई है और यह वैसी ही है जैसी परिवार को दिखाई गई थी. 5. क्या दिलजीत दोसांझ ने भी इसकी पुष्टि की? हां, दिलजीत दोसांझ ने कहा कि अगर फिल्म में एक भी कट लगा होता तो वह इसका प्रमोशन नहीं करते. 6. फिल्म को सर्टिफिकेट मिलने में इतना समय क्यों लगा? मेकर्स ने सेंसर बोर्ड की करीब 120 कट्स की मांग मानने से इनकार कर दिया था, जिस वजह से सर्टिफिकेट मिलने में तीन साल लग गए. 7. फिल्म में किस घटना को दिखाया गया है? फिल्म में दिखाया गया है कि जसवंत सिंह खालरा ने पंजाब में उग्रवाद के दौर में 25000 से ज्यादा लावारिस लाशों का मुद्दा उठाया था. 8. जसवंत सिंह खालरा का क्या हुआ था? उन्हें 1995 में उनके घर के बाहर से अगवा कर मार डाला गया था. प्रेरणा और सबक परमजीत कौर खालरा की कहानी दिखाती है कि कैसे एक व्यक्ति निजी नुकसान को न्याय की लंबी लड़ाई में बदल सकता है. • उन्होंने पति के अगवा होने और मारे जाने के बाद हार मानने के बजाय अदालतों में लगातार संघर्ष किया. • उन्होंने मुद्दे को सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे ग्लोबल लेवल पर जिंदा रखा, जिससे दोषियों को सजा मिल सकी. • उन्होंने राजनीति में कदम रखकर और मानवाधिकारों की वकालत करके अपने संघर्ष को व्यापक मंच दिया. • फिल्म निर्माण के दौरान भी उन्होंने सच्चाई से समझौता नहीं किया और सेंसर बोर्ड के दबाव के आगे झुकने से इनकार करने वाले मेकर्स का साथ दिया. https://trendkia.com/bollywood/sensara-borda-ki-120-katsa-ki-manga-ko-darakinara-kara-tina-sala-bada-rilija-hui-satluj-paramjeet-kaur-bolin-kahani-vaisi-hi-hai-4676 TrendKia — Har trend, sabse pehle.