सेट पर डांट खाने वाले असिस्टेंट डायरेक्टर राज शेखर कैसे बन गए बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार बिहार के मधेपुरा से निकलकर रंगमंच और टीवी की दुनिया पार करते हुए राज शेखर ने डमी गानों के जरिए गीतकारी में कदम रखा और कई यादगार नग्मे दिए। सिनेमा के पर्दे पर गूंजने वाले गीतों के पीछे अक्सर कुछ ऐसे शब्दकार होते हैं, जिनकी कलम सीधे किरदारों के अंतर्मन को छूती है। हिंदी फिल्म उद्योग में राज शेखर एक ऐसा ही नाम हैं, जिनकी रचनाओं में महज़ तुकबंदी नहीं बल्कि कहानी की रूह और किरदारों का दर्द झलकता है। ‘एनिमल’ का चर्चित गीत ‘पहले भी मैं’ हो या ‘सैयारा’ का ‘तुम हो तो’, उनकी कलम ने हर बार श्रोताओं के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है। हाल ही में अभिनेता यश की बहुचर्चित फिल्म ‘टॉक्सिक’ के लिए उनका लिखा गाना ‘तबाही’ भी श्रोताओं की जुबां पर चढ़ चुका है। हालांकि, संगीत की इस दुनिया में उनका मुकाम किसी सोची-समझी योजना का नतीजा नहीं था, बल्कि वे एक असिस्टेंट डायरेक्टर की जिम्मेदारी निभाते हुए अप्रत्याशित रूप से गीतकार बन गए थे। मधेपुरा से दिल्ली के रंगमंच तक का सफर राज शेखर का जन्म 22 सितंबर 1980 को बिहार के मधेपुरा जिले में हुआ था। उन्हें बचपन के दिनों से ही शब्दों से गहरा लगाव था और वे कविताएं व कहानियां लिखने के शौकीन थे। जीवन में आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए वे राजधानी दिल्ली पहुंचे। कॉलेज के दिनों में वे मशहूर थिएटर ग्रुप ‘प्लेयर्स’ का हिस्सा बने, जहां उन्हें कई नाटकों के निर्देशन, अभिनय और लेखन का मौका मिला। रंगमंच के इस माहौल ने उनके वैचारिक दृष्टिकोण को नई दिशा दी। उनके अनुसार, रंगमंच के अनुभवों ने समाज, मानवीय रिश्तों और आम लोगों के मनोविज्ञान को गहराई से परखने का नजरिया सिखाया, जिसने आगे चलकर उनकी लेखनी को संवारा। न्यूज चैनल की नौकरी और मुंबई का चुनौतीपूर्ण रुख शिक्षा पूरी करने के बाद राज शेखर ने कुछ वक्त एक न्यूज चैनल में बतौर लेखक नौकरी की। मगर उनके भीतर की रचनात्मकता उन्हें बड़े कैनवास की तरफ खींच रही थी, जिसके चलते वे मुंबई पहुंच गए। साल 2010 में निर्देशक आनंद एल. राय अपनी फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ की तैयारी कर रहे थे, जिसमें राज शेखर को असिस्टेंट डायरेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई। राज शेखर खुद इस बात को स्वीकार करते हैं कि सेट पर असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में वे बहुत कुशल नहीं थे। अक्सर लॉजिस्टिक्स और प्रबंधन से जुड़े कामकाज को लेकर उन्हें डांट सुननी पड़ती थी। इसके बावजूद, इसी सेट पर उनकी तकदीर ने एक नया मोड़ लिया। डमी लिरिक्स से बदली तकदीर और बने गीतकार फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ के लिए जब उपयुक्त गीतकार की तलाश चल रही थी, तब टीम ने राज शेखर से कुछ डमी लिरिक्स लिखने को कहा ताकि धुन पर काम आगे बढ़ सके। उन्होंने उसी दिन ‘मनु भैया’ और ‘रंगरेज’ जैसे गानों के बोल तैयार किए। जब ये पंक्तियां निर्देशक आनंद एल. राय के सामने पेश की गईं, तो वे इन शब्दों की सादगी और असर से बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने तय किया कि इन गीतों को किसी अन्य लेखक से बदलवाने के बजाय इन्हीं बोलों के साथ फिल्म में शामिल किया जाएगा। इस तरह सेट पर काम की डांट खाने वाले असिस्टेंट डायरेक्टर अचानक एक मुख्यधारा की फिल्म के गीतकार बन गए, जिसे वे खुद अपने ‘एक्सीडेंटल लिरिसिस्ट’ बनने का दिलचस्प वाकया बताते हैं। संघर्ष का दौर और टेलीविजन का सहारा ‘तनु वेड्स मनु’ के संगीत को दर्शकों और श्रोताओं से भरपूर प्यार मिला। ‘रंगरेज’, ‘यूं ही’ और ‘मनु भैया’ जैसे नगमों ने संगीत प्रेमियों के बीच उनकी एक खास पहचान बना दी। हालांकि, इस शुरुआती कामयाबी के बाद भी राह आसान नहीं रही। रेडियो पर गाने बजने और तारीफ मिलने के बाद भी उन्हें नए प्रोजेक्ट्स के लिए वैसा काम नहीं मिल पा रहा था, जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। कई प्रोजेक्ट्स बीच में रुक गए, जबकि कुछ फिल्में बनकर भी रिलीज नहीं हो सकीं। इस आर्थिक तंगी के दौर में अपनी आजीविका चलाने और घर खर्च संभालने के लिए उन्होंने अपराध आधारित लोकप्रिय टीवी शो ‘सावधान इंडिया’ के लिए संवाद लेखन का काम संभाला। फिल्म ‘टॉक्सिक’ और बहुभाषी सिनेमा का अनूठा अनुभव राज शेखर की कार्यशैली बेहद व्यवस्थित है। किसी भी फिल्म से जुड़ने के बाद वे बाकायदा नोट्स बनाते हैं, जिससे कहानी के मिजाज और किरदारों के मनोभावों को गीतों में ढाला जा सके। उनके लिखे ‘कितने दफे’, ‘जाने दे’, ‘घनी बावरी’, ‘उड़ता तीतर’ और ‘तुम्हें दिल्लगी’ जैसे गानों में यही संवेदनशीलता साफ दिखाई देती है। वर्ष 2026 में प्रदर्शित फिल्म ‘टॉक्सिक’ के गाने ‘तबाही’ के जरिए उन्होंने एक नए रचनात्मक अनुभव का सामना किया। इस कन्नड़ फिल्म का निर्देशन मलयालम सिनेमा की गीतू मोहनदास ने किया, अभिनेता यश कन्नड़ इंडस्ट्री से थे और इसका संगीत विशाल मिश्रा ने तैयार किया था। अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमियों और फिल्म शैलियों से जुड़े कलाकारों के साथ मिलकर काम करना उनके लिए एक अनोखा और समृद्ध अनुभव साबित हुआ। इसका आप पर असर फिल्म और कला जगत में करियर बनाने की उम्मीद रखने वाले युवाओं के लिए यह सफर बताता है कि असफलता के बीच भी छिपी प्रतिभा कैसे रास्ता बनाती है। • करियर के विकल्प: फिल्म इंडस्ट्री में किसी एक काम में संघर्ष के दौरान अन्य रचनात्मक कौशलों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। किसी अन्य पद पर काम करते हुए भी अपनी वास्तविक प्रतिभा को प्रस्तुत करने से बड़े अवसर खुल सकते हैं। • आर्थिक सुरक्षा: बड़े प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलने के बाद भी लंबे समय तक काम की कमी या आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। कठिन समय में छोटे स्तर के काम या टीवी लेखन से भी अपने खर्चे संभाले जा सकते हैं। • बहुभाषी सिनेमा का महत्व: अलग-अलग क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों का आपस में जुड़ना लेखकों और कलाकारों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है। क्षेत्रीय सिनेमा के साथ मिलकर काम करने से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच मजबूत होती है। • तैयारी और अध्ययन: किसी भी प्रोजेक्ट पर काम करते समय नोट्स बनाना और किरदारों की भावनाओं को समझना परिणाम को बेहतर बनाता है। पेशेवर जीवन में मेहनत और लगन से काम करने का तरीका पहचान दिलाता है। ऐसा क्यों हुआ राज शेखर का गीतकार बनना किसी पूर्वनिर्धारित योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि सेट की आकस्मिक परिस्थितियों और उनकी रचनात्मक तैयारी के संयोग से संभव हुआ। • असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में संघर्ष: फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ के सेट पर राज शेखर लॉजिस्टिक्स संभालने में कमजोर साबित हो रहे थे और लगातार डांट सुन रहे थे। इस स्थिति के बावजूद वे फिल्म निर्माण की प्रक्रिया और कहानी के मिजाज से पूरी तरह जुड़े रहे। • डमी लिरिक्स की तात्कालिक जरूरत: फिल्म के लिए मुख्य गीतकार तय न होने पर धुन तैयार करने के उद्देश्य से उनसे कामचलाऊ बोल लिखने को कहा गया। कॉलेज थिएटर और न्यूज चैनल के लेखन अनुभव के चलते उन्होंने उसी दिन दो बेहतरीन गाने तैयार कर दिए। • निर्देशक का त्वरित निर्णय: निर्देशक आनंद एल. राय ने जब उन पंक्तियों को सुना तो उन्हें किसी बदलाव की जरूरत नहीं लगी और उन्होंने उन बोलों को सीधे फिल्म में शामिल कर लिया। इस त्वरित फैसले ने एक सहायक निर्देशक को रातोंरात आधिकारिक गीतकार में तब्दील कर दिया। सवाल-जवाब 1. राज शेखर का जन्म कब और कहां हुआ था? राज शेखर का जन्म 22 सितंबर 1980 को बिहार के मधेपुरा जिले में हुआ था। 2. राज शेखर को बॉलीवुड में पहला बड़ा ब्रेक किस फिल्म से मिला? उन्हें पहला बड़ा ब्रेक साल 2010 में निर्देशक आनंद एल. राय की फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ से मिला था। 3. राज शेखर असिस्टेंट डायरेक्टर से गीतकार कैसे बने? ‘तनु वेड्स मनु’ के सेट पर उनसे धुन के लिए डमी लिरिक्स लिखने को कहा गया था, जो निर्देशक को इतने पसंद आए कि उन्हें ही मुख्य गीतकार बना दिया गया। 4. फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ के कौन से गाने राज शेखर ने लिखे थे? उन्होंने इस फिल्म के लिए ‘रंगरेज’, ‘यूं ही’ और ‘मनु भैया’ जैसे लोकप्रिय गीत लिखे थे। 5. आर्थिक तंगी के दौर में राज शेखर ने क्या काम किया था? फिल्में रुकने और काम न मिलने के दौरान उन्होंने खर्च चलाने के लिए टीवी शो ‘सावधान इंडिया’ के डायलॉग लिखे थे। 6. फिल्म ‘टॉक्सिक’ के किस गाने को राज शेखर ने लिखा है? उन्होंने यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ के लिए ‘तबाही’ गाना लिखा है, जिसका संगीत विशाल मिश्रा ने दिया है। प्रेरणा और सबक कठिन परिस्थितियों और असफलताओं के बीच अपनी स्वाभाविक प्रतिभा पर भरोसा बनाए रखने का यह एक जीवंत उदाहरण है। • गलतियों से न घबराएं: किसी एक काम में कमजोर होने का अर्थ यह नहीं कि आपमें कोई हुनर नहीं है। अपनी गलतियों के बावजूद सीखने की प्रक्रिया जारी रखने से सही दिशा मिल जाती है। • हर अवसर के लिए तैयार रहें: तात्कालिक या छोटे समझे जाने वाले काम को भी पूरी ईमानदारी से करने पर वह जीवन का सबसे बड़ा मौका बन सकता है। जब डमी बोल लिखने को कहा गया, तब उन्होंने पूरी निष्ठा से काम किया। • संघर्ष के दिनों में लचीलापन: सफलता मिलने के बाद भी यदि आर्थिक तंगी आए तो किसी भी काम को छोटा न समझें। टीवी सीरियल लिखकर गुजारा करना उनकी व्यावहारिक सोच को दर्शाता है। • गहन अध्ययन और संवेदनशीलता: काम शुरू करने से पहले पात्रों और परिस्थितियों के नोट्स बनाना यह सिखाता है कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। निरंतर अध्ययन से कार्य में गहराई आती है। https://trendkia.com/bollywood/seta-para-danta-khane-vale-assistant-director-raj-shekhar-kaise-bana-gae-bollywood-ke-diggaja-gitakara-35988 TrendKia — Har trend, sabse pehle.