शेखर कपूर ने याद किए मिस्टर इंडिया के दिन, बताया कैमरे के सामने आते ही कैसे बदल जाती थीं श्रीदेवी निर्देशक शेखर कपूर ने इंस्टाग्राम पर 1987 की फिल्म मिस्टर इंडिया के दिनों की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए श्रीदेवी के साथ काम करने के अपने अनूठे अनुभवों को याद किया है। फिल्म निर्देशक शेखर कपूर ने 1987 में आई हिंदी सिनेमा की ऐतिहासिक फिल्म मिस्टर इंडिया के निर्माण के दौरान श्रीदेवी के साथ काम करने के अपने अनुभवों को याद किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर श्रीदेवी के साथ अपनी एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने बताया कि कैमरे के सामने श्रीदेवी को अभिनय करते देखना किसी चमत्कारिक अनुभव से कम नहीं था। श्रीदेवी ने अपने करियर में सदमा की मानसिक रूप से कमजोर लड़की से लेकर इंग्लिश विंग्लिश की आत्मविश्वासी गृहिणी तक कई यादगार किरदार निभाए और सिनेमा जगत में अपना एक अनूठा स्टारडम स्थापित किया, जिसकी वजह से लोग आज भी उन्हें बहुत सम्मान के साथ याद करते हैं। सेट पर सादगी और कैमरे के सामने अद्भुत बदलाव शेखर कपूर ने श्रीदेवी के ऑफ कैमरा और ऑन कैमरा बर्ताव के बीच के बड़े अंतर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब शूटिंग के दौरान कैमरा बंद रहता था या फोकस उन पर नहीं होता था, तब वे बेहद शांत भाव से अपनी कुर्सी पर बैठी रहती थीं। वे सेट पर किसी भी तरह के स्टारडम का दिखावा नहीं करती थीं और बहुत सामान्य तरीके से अन्य लोगों के बीच मौजूद रहती थीं। हालांकि, जैसे ही कैमरा उनकी तरफ घूमता था, उनका पूरा व्यक्तित्व एकदम बदल जाता था। कैमरे के सामने आते ही वे एक अलग ही ऊर्जा से भर जाती थीं और उनकी वह सकारात्मक ऊर्जा सेट पर मौजूद हर कलाकार और तकनीशियन तक पहुंचती थी। डांस परफॉर्मेंस में खोकर कट कहना भूल जाना गाने और डांस सीक्वेंस की शूटिंग के दिनों को याद करते हुए निर्देशक ने बताया कि श्रीदेवी का प्रदर्शन इतना सम्मोहक होता था कि पूरा माहौल उनकी कला के रंग में ढल जाता था। डांस के दृश्यों के दौरान शेखर कपूर खुद उनकी परफॉर्मेंस और अभिव्यक्तियों में इस कदर खो जाते थे कि उन्हें कैमरा रोकने के लिए कट बोलना तक याद नहीं रहता था। उनके अभिनय और नृत्य में एक ऐसी बिजली जैसी चमक होती थी, जो पूरे सेट को अपने प्रभाव में ले लेती थी। यही वजह थी कि निर्देशक के लिए हर दिन सेट पर जाना एक नया रोमांच लेकर आता था। निर्देशक की सबसे अच्छी दोस्त और अनूठी साझेदारी शेखर कपूर ने स्पष्ट किया कि श्रीदेवी के साथ इस शानदार कलात्मक साझेदारी के बिना मिस्टर इंडिया जैसी फिल्म का बनना संभव ही नहीं था। वे हर दिन अपने काम से निर्देशक को चौंका देती थीं, क्योंकि किसी को पहले से अंदाजा नहीं होता था कि वे उस दिन दृश्य में क्या नया प्रयोग करने वाली हैं। अपनी साझा की गई सबसे शुरुआती तस्वीर का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि श्रीदेवी के चेहरे की मासूमियत और आंखों की चमक सालों बाद भी वैसी ही बनी रही। उन्होंने कहा, "मेरे लिए श्रीदेवी सिर्फ स्टार नहीं, बल्कि 'डायरेक्टर की सबसे अच्छी दोस्त' थीं।" 1987 की ब्लॉकबस्टर मिस्टर इंडिया की खास यादें गौरतलब है कि 1987 में रिलीज हुई मिस्टर इंडिया में श्रीदेवी ने निडर पत्रकार सीमा सोनी की भूमिका निभाई थी, जबकि अभिनेता अनिल कपूर ने मुख्य किरदार अरुण वर्मा का रोल अदा किया था। इस फिल्म में सतीश कौशिक और अमरीश पुरी ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म के मशहूर गाने हवा हवाई और काटे नहीं कटते में श्रीदेवी के डांस स्टेप्स और उनकी टाइमिंग आज भी भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर की बेहतरीन मिसालों में गिने जाते हैं। इसका आप पर असर सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह संस्मरण भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर और अभिनय तकनीक की बारीकियों को समझने का बेहतरीन अवसर देता है। फिल्म प्रशंसकों के लिए: 1987 की क्लासिक फिल्म मिस्टर इंडिया के परदे के पीछे की मेकिंग और श्रीदेवी की कार्यशैली से जुड़े अनछुए पहलू जानने को मिलते हैं। सवाल-जवाब 1. शेखर कपूर ने इंस्टाग्राम पर श्रीदेवी के बारे में क्या साझा किया? शेखर कपूर ने इंस्टाग्राम पर 1987 की फिल्म मिस्टर इंडिया के दिनों की श्रीदेवी के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर साझा की और उनके साथ काम करने की पुरानी यादें ताजा कीं। 2. फिल्म मिस्टर इंडिया किस वर्ष रिलीज हुई थी? फिल्म मिस्टर इंडिया 1987 में सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। 3. मिस्टर इंडिया में श्रीदेवी और अनिल कपूर के किरदारों के नाम क्या थे? फिल्म में श्रीदेवी ने पत्रकार सीमा सोनी और अनिल कपूर ने अरुण वर्मा का किरदार निभाया था। 4. श्रीदेवी के डांस के दौरान निर्देशक कट बोलना क्यों भूल जाते थे? श्रीदेवी की डांस परफॉर्मेंस और अभिव्यक्तियां इतनी सम्मोहक होती थीं कि निर्देशक शेखर कपूर उनके अभिनय में खो जाते थे और कैमरा रोकने के लिए कट कहना भूल जाते थे। प्रेरणा और सबक श्रीदेवी के इस संस्मरण से कला और पेशवेर जीवन के लिए कई प्रेरणादायक सबक मिलते हैं: • अहंकारमुक्त व्यवहार: कैमरे के पीछे अपने स्टारडम का दिखावा न करना और पूरी सादगी से रहना। • तत्काल फोकस: काम शुरू होते ही खुद को पूरी तरह किरदार में ढाल लेने की क्षमता। • निरंतर नया प्रयोग: हर दिन अपने काम में नयापन लाकर सहयोगियों को सकारात्मक रूप से चकित करना। https://trendkia.com/bollywood/shekhar-kapur-ne-yada-kie-mr-india-ke-dina-bataya-kaimare-ke-samane-ate-hi-kaise-badala-jati-thin-sridevi-16703 TrendKia — Har trend, sabse pehle.