# शेखर सुमन ने बेटे आयुष को खोने का दर्द साझा किया, काशी विश्वनाथ में गूंजी थी रहस्यमयी आवाज़

> अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन ने अपने 11 वर्षीय बेटे आयुष को 1994 में एक दुर्लभ हृदय रोग से खोने के अपने गहरे दर्द को साझा किया है, साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर में हुई एक रहस्यमयी घटना का भी जिक्र किया,…

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-06-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/shekhara-sumana-ne-bete-ayusha-ko-khone-ka-darda-sajha-kiya-kashi-vishvanatha-me-1684 · **Language:** Hindi
**Tags:** शेखर सुमन, आयुष सुमन, अल्का सुमन, एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस, काशी विश्वनाथ, बॉलीवुड अभिनेता, मृत बेटे की यादें, पुनर्जन्म

बेटे को खोने का दुख जीवन भर रहता है, और बॉलीवुड अभिनेता व होस्ट शेखर सुमन के लिए भी यह कड़वी सच्चाई है. 1994 में अपने 11 वर्षीय बेटे आयुष को खोने के बाद भी, शेखर सुमन आज भी उसकी यादों और मौजूदगी को अपने करीब महसूस करते हैं. हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने जीवन के सबसे दर्दनाक पलों और एक अविश्वसनीय घटना का खुलासा किया, जिसने उनके परिवार को अंदर तक हिला दिया था.

## शुरुआती लक्षण और एक चौंकाने वाला खुलासा
शेखर सुमन ने लेहरेन रेट्रो को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उनके डॉक्टर पिता ने सबसे पहले आयुष की बीमारी के लक्षणों को पहचाना था. जब आयुष बचपन में अपने दादा की गोद में बैठा था, तभी उनके पिता को कुछ गड़बड़ महसूस हुई. पेशे से डॉक्टर होने के कारण, उन्होंने तुरंत शेखर सुमन को मुंबई लौटकर बच्चे के लीवर की जांच कराने की सलाह दी, क्योंकि उन्हें लगा कि वह थोड़ा बढ़ा हुआ है. उन्होंने परिवार को घबराने से मना किया लेकिन जांच को ज़रूरी बताया.

## लाइलाज बीमारी: एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस
पिता की सलाह पर शेखर सुमन ने मुंबई लौटकर आयुष के मेडिकल टेस्ट करवाए. इन टेस्ट्स के नतीजों ने परिवार को सदमे में डाल दिया. डॉक्टरों ने बताया कि आयुष एक गंभीर और दुर्लभ हृदय रोग 'एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस' से पीड़ित था. यह एक ऐसी लाइलाज बीमारी है जो करोड़ों लोगों में से किसी एक को होती है. जब शेखर सुमन ने फोन पर अपने पिता को इस बीमारी के बारे में बताया, तो दूसरी तरफ सन्नाटा छा गया, और उनके पिता के मुंह से केवल 'हे भगवान' निकला.

शेखर सुमन के अनुसार, उनके पिता की इस प्रतिक्रिया ने उन्हें बीमारी की गंभीरता का एहसास करा दिया था. परिवार को जल्द ही पता चल गया कि आयुष की हालत बेहद नाज़ुक है और बीमारी एक लाइलाज चरण में पहुँच चुकी है. तमाम कोशिशों के बावजूद, आयुष का 1994 में, केवल 11 साल की उम्र में निधन हो गया.

## काशी विश्वनाथ मंदिर में एक रहस्यमयी घटना
बेटे को खोने के दर्द पर बात करते हुए शेखर सुमन ने कहा कि ऐसी क्षति से कोई कभी पूरी तरह उबर नहीं सकता. उनका परिवार आज भी रोज़ आयुष को याद करता है और उसकी तस्वीरें देखता है. समय भले ही आगे बढ़ जाए, लेकिन बच्चे को खोने का दर्द जीवन भर साथ रहता है.

इसी इंटरव्यू में, शेखर सुमन ने एक ऐसा अनुभव साझा किया जिसे उनका परिवार कभी नहीं भूल पाया. यह घटना 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान हुई थी, जब शेखर सुमन चुनाव प्रचार में व्यस्त थे. तभी उनकी पत्नी अल्का सुमन का फोन आया, जो वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में थीं. अल्का बेहद घबराई हुई और रो रही थीं. इससे पहले कि वह कुछ कह पातीं, शेखर सुमन ने उनसे पूछा, 'क्या तुम आयुष से मिलीं?' अल्का यह सुनकर स्तब्ध रह गईं.

## आयुष की आवाज़ और अचानक गायब हुआ व्यक्ति
अल्का सुमन ने बताया कि मंदिर में दर्शन करने के बाद जब वह बाहर निकलीं, तो एक व्यक्ति उनके पास आया और पैसे मांगने लगा. अल्का ने जैसे ही उसे कुछ पैसे दिए, उस व्यक्ति ने आयुष की हूबहू आवाज़ और उसी अंदाज़ में कहा, 'इतने से मेरा क्या होगा?' शेखर सुमन ने बताया कि यह बिल्कुल वही लाइन थी जो आयुष बचपन में अक्सर बोला करता था. बीमारी के कारण उसके खाने-पीने पर कड़ी पाबंदी थी, और उसे बहुत कम खाना दिया जाता था. तब वह हमेशा इसी अंदाज़ में चिढ़कर कहता था 'इतने से मेरा क्या होगा?'

आयुष की आवाज़ सुनकर अल्का इतनी हैरान हुईं कि वह तुरंत पर्स से और पैसे निकालने के लिए मुड़ीं, लेकिन जब उन्होंने सिर उठाया, तो वह व्यक्ति वहां से पूरी तरह गायब हो चुका था. उन्होंने आसपास उसे बहुत ढूंढा, लेकिन वह कहीं नहीं मिला. यह घटना और भी अजीब थी क्योंकि भीड़भाड़ वाली जगह से कोई भी इतनी जल्दी ओझल नहीं हो सकता था.

## पुनर्जन्म की उम्मीद: 'अध्ययन के बेटे के रूप में लौटेगा'
शेखर सुमन ने बताया कि कई पुजारियों और ज्योतिषियों ने उन्हें सांत्वना दी थी कि आयुष एक दिन उन्हें अपनी मौजूदगी का कोई न कोई संकेत ज़रूर देगा. अल्का सुमन का आज भी दृढ़ विश्वास है कि वह साया और कोई नहीं, बल्कि उनका बेटा आयुष ही था. शेखर सुमन ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उन्हें कई लोगों ने यह भी बताया है कि आयुष एक दिन दूसरे रूप में उनके परिवार में वापस लौटेगा. उनसे कहा गया है कि वह अध्ययन के बेटे के रूप में दोबारा जन्म लेगा. शेखर सुमन और उनका परिवार उस पल का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है. शेखर सुमन कहते हैं, 'मुझे सच में महसूस होता है कि वह हमारे आसपास ही है, मैं उसकी आवाज़ सुन सकता हूँ.'

## इसका आप पर असर
- **दुःख से जूझ रहे लोगों के लिए:** शेखर सुमन की कहानी बच्चे को खोने के गहरे दर्द को दर्शाती है और ऐसी क्षति से निपटने पर एक मार्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, यह बताती है कि समय शायद हर घाव को पूरी तरह नहीं भरता.
- **अध्यात्म में विश्वास रखने वालों के लिए:** काशी विश्वनाथ मंदिर की रहस्यमयी घटना उन व्यक्तियों के लिए एक प्रेरक प्रसंग है जो आध्यात्मिक जुड़ाव और दिवंगत प्रियजनों से मिलने वाले संकेतों में विश्वास रखते हैं.
- **शेखर सुमन के प्रशंसकों के लिए:** यह व्यक्तिगत वृत्तांत अभिनेता के भावनात्मक जीवन की गहरी समझ प्रदान करता है, जिसमें उनके दिवंगत बेटे आयुष के प्रति उनके अटूट प्रेम और आशा को दिखाया गया है.

## सवाल-जवाब

### 1. शेखर सुमन के दिवंगत बेटे का नाम क्या था?
शेखर सुमन के दिवंगत बेटे का नाम आयुष था, जिनका निधन 11 साल की उम्र में हुआ था.

### 2. आयुष को कौन सी बीमारी थी?
आयुष को 'एंडोमायोकार्डियल फाइब्रोसिस' नामक एक गंभीर और दुर्लभ हृदय रोग था, जिसे लाइलाज माना जाता है.

### 3. आयुष का निधन कब हुआ था?
आयुष का निधन साल 1994 में हुआ था, जब वह 11 साल के थे.

### 4. काशी विश्वनाथ मंदिर में क्या रहस्यमयी घटना हुई थी?
2009 में, शेखर सुमन की पत्नी अल्का सुमन को काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर एक व्यक्ति मिला, जिसने आयुष की आवाज़ में बचपन का एक वाक्य दोहराया और फिर अचानक गायब हो गया.

### 5. आयुष बचपन में कौन सा वाक्य अक्सर बोला करता था?
आयुष बचपन में अक्सर 'इतने से मेरा क्या होगा?' यह वाक्य बोला करता था, क्योंकि उसकी बीमारी के कारण उसे बहुत कम खाना दिया जाता था.

### 6. परिवार को आयुष के बारे में क्या उम्मीद है?
कई पुजारियों और ज्योतिषियों ने परिवार को बताया है कि आयुष एक दिन वापस लौटेगा और अध्ययन के बेटे के रूप में दोबारा जन्म लेगा.

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