# शिवाजी साटम ने याद किए नाना पाटेकर के दिन, पत्नी को कैंसर होने पर की थी मदद

> शिवाजी साटम ने हाल ही में नाना पाटेकर को याद करते हुए बताया कि कैसे मुश्किल समय में उन्होंने आर्थिक और मानसिक रूप से उनकी मदद की थी।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/shivaji-satam-ne-yada-kie-nana-patekar-ke-dina-patni-ko-cancer-hone-para-ki-thi-madada-49164 · **Language:** Hindi
**Tags:** नाना पाटेकर, शिवाजी साटम, बॉलीवुड, मनोरंजन, सिनेमा

नाना पाटेकर अपने बेहतरीन अभिनय के साथ-साथ अपनी दरियादिली के लिए भी फिल्म इंडस्ट्री में खास पहचान रखते थे। वह अक्सर कलाकारों की मुश्किलों में उनके साथ खड़े नजर आते थे और किसानों की सहायता के लिए भी हमेशा तत्पर रहते थे। 8 अक्टूबर को नाना पाटेकर ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया, जिससे पूरी फिल्म इंडस्ट्री सदमे में डूब गई। उनके निधन को 9 दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनके चाहने वाले और सहकलाकार अभी भी इस गहरे दुख से उबर नहीं पाए हैं। कई सितारे उनसे जुड़ी पुरानी यादें साझा कर रहे हैं, और इसी कड़ी में अभिनेता शिवाजी साटम ने भी नाना के साथ बिताए पलों को याद किया है।

 

## शिवाजी साटम के लिए मसीहा बने थे नाना पाटेकर

टेलीविजन के लोकप्रिय शो सीआईडी में एसीपी प्रद्युमन का किरदार निभाने वाले शिवाजी साटम हाल ही में नाना पाटेकर की प्रार्थना सभा में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने दिवंगत अभिनेता से जुड़े कई पुराने संस्मरण साझा किए और बताया कि कैसे मुश्किल दौर में नाना उनके लिए एक बड़े सहारे के रूप में सामने आए थे। शिवाजी साटम ने खुलासा किया कि हिंदी सिनेमा में उनके काम करने की शुरुआत भी नाना पाटेकर की वजह से ही संभव हो पाई थी। उनकी पहली हिंदी फिल्म 'यशवंत' थी, जिसमें उन्होंने एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई थी। उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह यह रोल करने को लेकर असमंजस में थे और इसे करना नहीं चाहते थे, लेकिन नाना ने उन्हें समझाया और उनके समझाने पर ही वह इस भूमिका के लिए तैयार हुए थे।

 

## प्रोड्यूसर से दिलवाई थी सही फीस

सिनेमा जगत से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए शिवाजी साटम ने एक और किस्सा बताया कि जब फिल्म की शूटिंग पूरी हो गई थी, तब नाना पाटेकर ने उनसे उनकी फीस के बारे में जानकारी ली थी। जब शिवाजी ने उन्हें मिलने वाले पैसों की रकम बताई, तो वह काफी नाराज हो गए और बोले कि निर्माता ने उन्हें बहुत कम पारिश्रमिक दिया है। शिवाजी साटम ने उस वक्त नाना को निर्माता से बातचीत करने से मना किया था, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और तुरंत निर्माता को बुलाकर स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि उन्होंने शिवाजी को उनकी मेहनत के हिसाब से बेहद कम फीस दी है। शिवाजी साटम का कहना था कि नाना हमेशा अपने दोस्तों के अधिकारों और हक के लिए मजबूती से खड़े रहते थे और जब भी किसी सहकर्मी की मदद का अवसर आता था, वह कभी पीछे नहीं हटते थे।

 

## जब पत्नी को हुआ कैंसर तो बढ़ाया मदद का हाथ

मुंबई के प्रभादेवी स्थित पीएल देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी परिसर में 'अठवणीतले नाना' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जहाँ नाना को श्रद्धांजलि देते हुए शिवाजी साटम उस बेहद कठिन समय को याद कर भावुक हो गए जब उनकी पत्नी को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया था। शिवाजी साटम ने बताया कि जिस वक्त वह 'गुलाम-ए-मुस्तफा' फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थे, उसी दौरान नाना को इस बात की जानकारी मिल गई थी कि उनकी पत्नी कैंसर से जूझ रही हैं। उन्होंने उस वाकये को याद करते हुए बताया कि उन्होंने नाना से कह दिया था कि अब वह इस फिल्म में आगे काम जारी नहीं रख पाएंगे, लेकिन नाना ने उनकी इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने फिल्म के निर्देशक और अन्य जिम्मेदार लोगों से खुद बातचीत की और अगले ही दिन निर्देशक ने आकर कहा कि वह दोपहर 12 बजे सेट पर आएं और शाम 8 बजे अपने घर चले जाएं। शिवाजी साटम ने स्पष्ट किया कि यदि उस मुश्किल समय में नाना पाटेकर का साथ नहीं मिलता, तो उनके लिए यह सब संभाल पाना बिल्कुल मुमकिन नहीं हो पाता, क्योंकि वह इंसानियत की मिसाल थे।

## सवाल-जवाब

### 1. नाना पाटेकर का निधन कब हुआ था?
नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर को हुआ था।

### 2. शिवाजी साटम की पहली हिंदी फिल्म कौन सी थी?
शिवाजी साटम की पहली हिंदी फिल्म 'यशवंत' थी, जिसमें उन्होंने पुलिसवाले की भूमिका निभाई थी।

### 3. शिवाजी साटम की पत्नी को कौन सी बीमारी हुई थी?
शिवाजी साटम की पत्नी को कैंसर हुआ था, जिसका पता उन्हें 'गुलाम-ए-मुस्तफा' की शूटिंग के दौरान चला था।

### 4. नाना पाटेकर को याद करने के लिए कार्यक्रम कहाँ आयोजित हुआ था?
यह कार्यक्रम मुंबई के प्रभादेवी स्थित पीएल देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी परिसर में आयोजित किया गया था।

## प्रेरणा और सबक
दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के जीवन से यह प्रेरणा मिलती है कि एक सफल इंसान वही है जो अपने सहकर्मियों और जरूरतमंदों के मुश्किल समय में हमेशा उनके साथ खड़ा रहे।

- **मदद का हाथ:** जीवन में जब भी किसी अपने को सहायता की आवश्यकता हो, तो बिना झिझक के आगे आना चाहिए।

- **हक की लड़ाई:** अपने साथियों के अधिकारों और उचित पारिश्रमिक के लिए हमेशा मजबूती से आवाज उठानी चाहिए।

- **संकट में साथ:** किसी प्रियजन के गंभीर स्वास्थ्य संकट के समय अपनों का मानसिक और व्यावहारिक समर्थन सबसे बड़ा संबल बनता है।

- **साادगी और दरियादिली:** शोहरत मिलने के बाद भी अपनी जड़ों और इंसानियत को कभी नहीं भूलना चाहिए।

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