सिल्वर स्क्रीन पर रेखा का जादू जगाने वाले पांच यादगार गाने, जहां भाव और नजाकत ने रचा सिनेमाई इतिहास भारतीय सिनेमा में रेखा ने शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों और लाजवाब भाव-भंगिमाओं से फिल्मी गानों को अमर बना दिया। जानिए 'उमराव जान' से लेकर 'परिणीता' तक उनके पांच सबसे बेमिसाल डांस परफॉर्मेंस। भारतीय सिनेमा के इतिहास में रेखा का नाम एक ऐसी अदाकारा के रूप में दर्ज है, जिन्होंने अपनी भावपूर्ण नृत्य शैली और सधे हुए अभिनय से पर्दे पर एक अलग ही मुकाम हासिल किया। उनके गानों को केवल एक आम डांस परफॉर्मेंस के दायरे में नहीं बांधा जा सकता, बल्कि वे कला, ठहराव और शास्त्रीय सौंदर्य का अद्भुत संगम रहे हैं। फिल्मी धुनों के बीच शास्त्रीय नजाकत को जिस सहजता से उन्होंने पेश किया, उसने दर्शकों को हर दौर में मंत्रमुग्ध किया। उनके डांस में जल्दबाजी की जगह एक गरिमामयी ठहराव नजर आता था, जो हर एक मुद्रा को बेहद खास बना देता था। सिनेमा के सुनहरे दौर से लेकर आधुनिक फिल्मों तक, उनके कई ऐसे गीत हैं जो आज भी अभिनय और नृत्य के विद्यार्थियों के लिए एक मिसाल बने हुए हैं। उमराव जान की नजाकत और 'इन आंखों की मस्ती' का सम्मोहन निर्देशक मुजफ्फर अली की कल्ट क्लासिक फिल्म 'उमराव जान' में रेखा ने जो काम किया, वह भारतीय सिनेमा की सबसे चमकदार उपलब्धियों में गिना जाता है। इस फिल्म का अमर गीत 'इन आंखों की मस्ती' अवध की तहजीब और नजाकत को पर्दे पर साकार करता है। इस गीत में रेखा ने कथक पर आधारित बेहद सधे हुए कदम उठाए। गाने की सबसे बड़ी खासियत इसकी सिटिंग कोरियोग्राफी यानी बैठकर किए जाने वाले नृत्य की मुद्राएं थीं, जहां उन्होंने अपनी आंखों के इशारों और चेहरे के भावों से समूची महफिल को मोह लिया था। इस सदाबहार नगमे को सुर साम्राज्ञी आशा भोसले ने अपनी मखमली आवाज दी थी, जबकि संगीतकार खय्याम ने इसे अपनी अमर धुनों से सजाया था। फिल्म 'उमराव जान' में अपने इस अविस्मरणीय अभिनय और भाव-प्रवण नृत्य के बल पर ही रेखा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल हुआ था। यह परफॉर्मेंस आज भी भारतीय नृत्य शैलियों के अध्ययन में एक अहम स्थान रखती है। 'दिल चीज क्या है' में कथक और आदाब का जादू साल 1981 में बड़े पर्दे पर आई फिल्म 'उमराव जान' का एक और गीत 'दिल चीज क्या है' कला प्रेमियों के दिलों में खास जगह रखता है। इस गीत में भी रेखा के अभिनय और नृत्य की जुगलबंदी ने एक नया पैमाना तय किया। गाने के दौरान कथक की पारंपरिक मुद्राओं, हाथों की बारीक मुद्राओं और पैरों की सटीक थाप को उन्होंने बेहद सहज अंदाज में पर्दे पर उतारा। उनकी आंखों की मस्ती, नजाकत के साथ पलकों का झुकना और सलाम करने का उनका खास 'आदाब' अंदाज इस पूरे दृश्य को जादुई बना देता है। चेहरे के हर एक भाव में जिस तरह की नफासत उन्होंने दिखाई, उसने इस प्रस्तुति को हमेशा के लिए एक क्लासिक रचना के रूप में स्थापित कर दिया। 'सलाम-ए-इश्क मेरी जान' में जोहरा बाई का बेमिसाल अंदाज साल 1978 में रिलीज हुई निर्देशक प्रकाश मेहरा की फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' का गीत 'सलाम-ए-इश्क मेरी जान' हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय रोमांटिक गीतों में शामिल है। इस फिल्म में रेखा ने 'जोहरा बाई' नाम की तवायफ की भूमिका निभाई थी, जिसमें उनका नृत्य और अभिनय आज भी एक मास्टरक्लास के तौर पर देखा जाता है। गाने में रेखा ने कथक नृत्य की खूबसूरत भाव-भंगिमाओं का भरपूर और सटीक उपयोग किया था। उनके उठने और बैठने के अंदाज में जो गजब का ठहराव और शालीनता थी, उसने पर्दे पर एक गहरी कशिश पैदा की। यह गाना रेखा के करियर के उन पड़ावों में शामिल है, जिसने उन्हें दर्शकों के बीच एक संवेदनशील और संपूर्ण कलाकार के रूप में स्थापित किया। 'परदेसिया' की बंजारन और लोक धुनों पर थिरकन फिल्म 'मिस्टर नटवरलाल' का चर्चित गीत 'परदेसिया' रेखा के एक बिल्कुल अलग और चुलबुले अंदाज को सामने लाता है। इस गाने में वह बंजारन की पारंपरिक पोशाक में नजर आई थीं। गाने में उनके जोशीले डांस और अमिताभ बच्चन के साथ उनकी शानदार ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने दर्शकों को पूरी तरह झूमने पर मजबूर कर दिया था। इस सदाबहार गीत को लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने अपनी कालजयी आवाजों से सजाया था, जबकि इसका संगीत संगीतकार राजेश रोशन ने तैयार किया था। इस गाने की लोकप्रियता का आलम यह है कि आज भी यह देश भर में शादी-ब्याह और उत्सवों के मौकों पर खूब बजाया और पसंद किया जाता है। 'कैसी पहेली जिंदगानी' में रेट्रो-जैज का नया रंग अपने लंबे और सफल करियर में कई दशकों बाद रेखा ने निर्देशक प्रदीप सरकार की फिल्म 'परिणीता' में एक बेहद अलग अंदाज में वापसी की। फिल्म के चर्चित गीत 'कैसी पहेली जिंदगानी' में उन्होंने एक स्पेशल रेट्रो-जैज अपीयरेंस दी थी। इस गाने में वह 1950 और 1960 के दशक के किसी क्लब की जैज सिंगर के रूप में नजर आई थीं। यहां उनका डांस पारंपरिक बॉलीवुड या शास्त्रीय विधा से हटकर कैबरे और जैज संगीत की धुनों पर आधारित था। इस आधुनिक और पश्चिमी रंगत वाले परफॉर्मेंस में भी उन्होंने अपनी उसी अदा, शालीनता और भावों के जादू को बनाए रखा, जो उनकी पहचान रहा है। इसका आप पर असर क्लासिकल डांस और रेट्रो सिनेमा के शौकीनों के लिए रेखा के ये चुनिंदा गाने कलात्मक अभिव्यक्ति की बेहतरीन समझ विकसित करने का जरिया हैं। • कला प्रेमियों के लिए: यह संकलन शास्त्रीय नृत्य और सिनेमाई अभिनय के तालमेल को समझने के लिए एक संपूर्ण संदर्भ प्रदान करता है। नए कलाकार सीख सकते हैं कि कैसे केवल चेहरे के भावों और आंखों के इशारों से गहरे जज्बात पर्दे पर उतारे जाते हैं। • संगीत श्रोताओं के लिए: पुरानी धुनों को दोबारा सुनने और खय्याम, राजेश रोशन जैसे दिग्गजों के काम को सराहने का यह बेहतरीन अवसर है। दर्शक यूट्यूब या स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर जाकर इन ऐतिहासिक गानों के विजुअल्स का आनंद ले सकते हैं। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह उन फिल्मों को दोबारा देखने का निमंत्रण है जिन्होंने भारतीय सिनेमा का स्वरूप बदला। इससे 70 और 80 के दशक के स्वर्णिम दौर की फिल्मों के प्रति दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ती है। • सांस्कृतिक महत्व: पारंपरिक तहजीब और कथक जैसी प्राचीन विधाओं को मुख्यधारा के सिनेमा में सुरक्षित रखने का महत्व इससे रेखांकित होता है। युवा पीढ़ी भी भारतीय लोक और शास्त्रीय शैलियों की समृद्ध विरासत से जुड़ पाती है। ऐसा क्यों हुआ रेखा के इन पांच गानों की अमरता उनके अनूठे नृत्य शिल्प, शास्त्रीय प्रशिक्षण और उस दौर के महान निर्देशकों व संगीतकारों की परिकल्पना से संभव हुई। उस समय सिनेमा में महज तेज डांस के बजाय चेहरे के भावों और ठहराव को केंद्र में रखा जाता था। • शास्त्रीय नृत्य का आधार: 'उमराव जान' और 'मुकद्दर का सिकंदर' जैसी फिल्मों में कथक और पारंपरिक मुजरा शैली की मूल मुद्राओं का शुद्ध इस्तेमाल किया गया था। इस अनुशासन ने इन गानों को केवल फंतासी न रखकर एक वास्तविक सांस्कृतिक दस्तावेज बना दिया। • दिग्गज संगीतकारों और गायकों का संगम: इन गीतों को आशा भोसले, लता मंगेशकर और किशोर कुमार जैसे गायकों तथा खय्याम और राजेश रोशन जैसे संगीतकारों का साथ मिला। धुनों की गहराई ने रेखा के लिए पर्दे पर भावुक अभिनय की जमीन तैयार की। • निर्देशकों की मजबूत दृष्टि: मुजफ्फर अली और प्रदीप सरकार जैसे फिल्मकारों ने गीतों को फिल्म की कहानी का अभिन्न हिस्सा बनाया। उन्होंने हर एक गाने की पृष्ठभूमि, पोशाक और माहौल को प्रामाणिक बनाने पर खासा ध्यान दिया। सवाल-जवाब 1. फिल्म 'उमराव जान' के लिए रेखा को कौन सा बड़ा सम्मान मिला था? साल 1981 में आई फिल्म 'उमराव जान' में अपने उत्कृष्ट अभिनय और भावपूर्ण प्रदर्शन के लिए रेखा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। 2. 'इन आंखों की मस्ती' गाने के संगीतकार और गायिका कौन थे? इस कालजयी गाने को आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी और इसका संगीत प्रसिद्ध संगीतकार खय्याम ने तैयार किया था। 3. फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' में रेखा ने किस किरदार का रोल किया था? साल 1978 की इस फिल्म में रेखा ने 'जोहरा बाई' नाम की तवायफ का किरदार निभाया था और 'सलाम-ए-इश्क मेरी जान' गाने पर डांस किया था। 4. 'परदेसिया' गाने में रेखा का पहनावा और उनके सह-कलाकार कौन थे? फिल्म 'मिस्टर नटवरलाल' के इस लोकप्रिय गीत में रेखा ने बंजारन ड्रेस पहनी थी और उनके साथ पर्दे पर अमिताभ बच्चन नजर आए थे। 5. फिल्म 'परिणीता' के गाने 'कैसी पहेली जिंदगानी' में रेखा का अंदाज कैसा था? निर्देशक प्रदीप सरकार की फिल्म 'परिणीता' के इस गाने में रेखा ने 1950 और 60 के दशक के क्लबों की रेट्रो-जैज और कैबरे डांसर के रूप में विशेष अपीयरेंस दी थी। https://trendkia.com/bollywood/silvara-skrina-para-rekha-ka-jadu-jagane-vale-pancha-yadagara-gane-jahan-bhava-aura-najakata-ne-racha-sinemai-itihasa-45644 TrendKia — Har trend, sabse pehle.