# सिविल सेवा की तैयारी छोड़कर बॉलीवुड पहुंचे चंद्रचूड़ सिंह, पहली ही बड़ी फिल्म से छा गए थे सिनेमा के पर्दे पर

> आईएएस अधिकारी बनने का सपना देखने और स्कूल में पढ़ाने के बाद चंद्रचूड़ सिंह ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और अपनी खास पहचान बनाई।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/sivila-seva-ki-taiyari-chhorakara-bollywood-pahunche-chandrachur-singh-pahali-hi-bari-philma-se-chha-gae-the-sinema-ke-parde-para-46161 · **Language:** Hindi
**Tags:** चंद्रचूड़ सिंह, माचिस, बॉलीवुड अभिनेता, ऐश्वर्या राय, तेरे मेरे सपने, जोश, अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकारों की कहानियां दर्ज हैं, जिनका सफर किसी तयशुदा लीक पर नहीं चला। उन्हीं में से एक नाम अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह का भी है, जिन्होंने बड़े पर्दे पर अपनी एक बिल्कुल अलग और सौम्य छाप छोड़ी। एक समय ऐसा था जब वह अभिनय से कोसों दूर देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनने की तैयारी में जुटे थे, लेकिन उनकी राहें बदलती चली गईं। स्कूल में बच्चों को संगीत और इतिहास की तालीम देने से लेकर फिल्मों के सेट तक पहुंचने का उनका यह सफर बेहद दिलचस्प रहा। जब सिनेमा के पर्दे पर उनकी मौजूदगी सामने आई, तो पहली ही बड़ी चर्चा बटोरने वाली फिल्म के बाद लोग उनकी सादगी भरे अंदाज के कायल हो गए। 11 अक्टूबर 1968 को जन्मे अभिनेता 11 अक्टूबर को अपना 58वां जन्मदिन मना रहे हैं।

## शाही घराने और सियासत से जुड़ा पारिवारिक इतिहास
चंद्रचूड़ सिंह का जन्म देश की राजधानी दिल्ली में हुआ था। उनका पारिवारिक ताल्लुक राजनीति और राजसी पृष्ठभूमि दोनों से काफी गहरा रहा है। उनके पिता कैप्टन बलदेव सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में खैर क्षेत्र से जुड़े थे और वह सक्रिय राजनीति का हिस्सा भी रहे। वहीं, दूसरी तरफ उनकी मां कृष्णा कुमारी देवी ओडिशा के बोलांगीर के शाही घराने से ताल्लुक रखती थीं। घर में तीन भाइयों का माहौल था और रचनात्मकता परिवार के भीतर काफी घुली-मिली थी। चंद्रचूड़ के दोनों भाई भी आगे चलकर सिनेमाई दुनिया से जुड़े। उनके एक भाई अभिमन्यु सिंह ने अभिनेता और निर्देशक के तौर पर अपनी पहचान बनाई, जबकि दूसरे भाई आदित्य सिंह फिल्म निर्माण के काम से जुड़े रहे।

## दून स्कूल, वेल्हम और सेंट स्टीफंस: क्लासरूम से यूपीएससी तक
उनकी शुरुआती तालीम देहरादून के जाने-माने संस्थानों वेल्हम बॉयज स्कूल और दून स्कूल में पूरी हुई। स्कूल का दौर खत्म होने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली लौटे, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में दाखिला लिया और वहां से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS की राह चुनने का पक्का मन बनाया और यूपीएससी परीक्षा की कठिन तैयारी में पूरी तरह जुट गए।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ उनके भीतर कला और संगीत का गहरा लगाव भी हमेशा जीवित रहा। वह बाकायदा शास्त्रीय संगीत के प्रशिक्षित गायक हैं। फिल्मी दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने से पहले उन्होंने कुछ समय तक अध्यापन का काम भी संभाला। उन्होंने दिल्ली के वसंत वैली स्कूल में नन्हे बच्चों को संगीत की शिक्षा दी। इसके अलावा, जिस दून स्कूल में उन्होंने खुद अपनी स्कूली पढ़ाई की थी, वहां उन्होंने इतिहास के शिक्षक के रूप में भी अध्यापकीय जिम्मेदारी निभाई। हालांकि, धीरे-धीरे उनका रुझान सिनेमा की तरफ बढ़ता चला गया और आखिरकार उन्होंने अभिनय को ही अपनी मंजिल बनाने का फैसला किया।

## पहली फिल्म की दस्तक और माचिस से रातोंरात स्टारडम
सिनेमाई पर्दे पर चंद्रचूड़ सिंह का पहला कदम साल 1996 में पड़ा, जब उनकी पहली फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ रिलीज हुई। यह फिल्म दिग्गज अभिनेता की कंपनी अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी ABCL के बैनर तले बनाई गई थी। इस शुरुआत के फौरन बाद उसी दौर में आई फिल्म ‘माचिस’ ने उनके पूरे करियर का रुख ही बदलकर रख दिया।

गंभीर और संजीदा विषय पर बनी फिल्म ‘माचिस’ में चंद्रचूड़ के सशक्त और स्वाभाविक अभिनय को दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों ने भी हाथों-हाथ लिया। इस फिल्म में उनके काम को इतनी बड़ी पहचान मिली कि उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड भी दिया गया। इस बड़ी कामयाबी ने उन्हें 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में हिंदी सिनेमा के एक बेहद होनहार और उभरते हुए चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया। इस कामयाबी के बाद निर्देशकों और निर्माताओं के बीच उनकी मांग तेजी से बढ़ी और उनके पास फिल्मों की कतार लग गई।

## ऐश्वर्या राय के साथ जोड़ी और अन्य यादगार किरदार
सफलता का यह दौर आगे भी कई चर्चित फिल्मों में जारी रहा। उन्होंने अपने करियर में रोमांटिक, संजीदा और पारिवारिक हर तरह के जॉनर में काम किया। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में ‘दिल क्या करे’, ‘क्या कहना’, ‘दाग: द फायर’ और ‘आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया’ जैसी फिल्में शामिल रहीं। खासकर साल 2000 के दौर में आई फिल्म ‘जोश’ में वह अभिनेत्री ऐश्वर्या राय के हीरो के रूप में नजर आए, जहां उनके किरदार को काफी पसंद किया गया।

चंद्रचूड़ सिंह को दर्शकों के बीच उनकी सादगी, स्क्रीन पर गरिमामयी मौजूदगी और शांत स्वभाव वाले किरदारों के लिए हमेशा याद किया जाता है। भले ही उनका फिल्मी करियर कई समकालीन सितारों की तुलना में बहुत लंबा या लगातार विवादों और सुर्खियों में रहने वाला नहीं रहा, लेकिन ‘माचिस’ समेत उनकी तमाम फिल्मों में निभाए गए किरदारों ने दर्शकों के जेहन में एक अमिट छाप छोड़ी है।

## निजी जीवन और आज का मुकाम
अगर उनके निजी जीवन की बात करें, तो चंद्रचूड़ सिंह ने साल 1999 में अवंतिका कुमारी के साथ शादी रचाई थी। हालांकि, समय बीतने के साथ दोनों की राहें अलग हो गईं और उनका वैवाहिक रिश्ता खत्म हो गया। इस शादी से उनका एक बेटा है। सिविल सेवा में जाकर प्रशासनिक अधिकारी बनने की ख्वाहिश से लेकर सिनेमा के रुपहले पर्दे पर अपनी खास पहचान बनाने तक, चंद्रचूड़ सिंह का सफर इस बात का गवाह है कि लगन और हुनर किस तरह किसी भी इंसान को अप्रत्याशित रास्तों पर भी एक अलग मुकाम दिला सकते हैं।

## इसका आप पर असर
चंद्रचूड़ सिंह का यह सफर किसी भी ऐसे पाठक के लिए बेहद प्रासंगिक है जो अपने करियर के चौराहे पर खड़े हैं।

- **करियर में बदलाव:** अपनी पुरानी पढ़ाई या तैयारी से हटकर अपने शौक को पेशा बनाया जा सकता है। प्रशासनिक परीक्षा की राह छोड़कर अभिनय में कदम रखकर उन्होंने यह साबित किया कि सही दिशा में लिया गया फैसला पहचान दिला सकता है।
- **हुनर और बहुमुखी प्रतिभा:** किसी एक क्षेत्र की विशेषज्ञता दूसरे क्षेत्रों में भी आत्मविश्वास देती है। संगीत और इतिहास का उनका ज्ञान उनके व्यक्तित्व और अभिनय की गहराई में साफ नजर आया।
- **सफलता का पैमाना:** लंबे समय तक पर्दे पर बने रहने से ज्यादा महत्वपूर्ण काम की गुणवत्ता होती है। कुछ चुनिंदा लेकिन दमदार फिल्मों के दम पर दशकों बाद भी दर्शकों के दिलों में जगह बनाई जा सकती है।
- **नई पीढ़ी के लिए सीख:** यदि किसी योजना में बदलाव करना पड़े तो हिचकिचाना नहीं चाहिए। मेहनत और लगन से नए क्षेत्र में भी खुद को स्थापित किया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
चंद्रचूड़ सिंह के करियर में यह बड़ा बदलाव कला के प्रति उनके आंतरिक झुकाव और परिवार में रचनात्मक माहौल के कारण संभव हुआ।

- **कला और संगीत से गहरा जुड़ाव:** प्रशासनिक सेवा की तैयारी के दौरान भी उनका शास्त्रीय संगीत की तरफ गहरा रुझान बना रहा। इस रचनात्मक पृष्ठभूमि ने उन्हें अंततः अभिनय की तरफ बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
- **पारिवारिक माहौल:** उनके परिवार में कला और सिनेमा से जुड़ाव पहले से मौजूद था। उनके दोनों भाइयों का आगे चलकर अभिनय, निर्देशन और निर्माण में शामिल होना इस रचनात्मक वातावरण को दर्शाता है।
- **पहली बड़ी शुरुआत:** अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रोजेक्ट से शुरुआत के बाद फिल्म 'माचिस' में दमदार भूमिका मिलने से उन्हें तुरंत पहचान मिली। इस सफलता ने उनके फैसले को सही साबित कर दिया और उनके लिए कई नए रास्ते खोल दिए।

## सवाल-जवाब

### 1. चंद्रचूड़ सिंह का जन्म कब और कहां हुआ था?
चंद्रचूड़ सिंह का जन्म 11 अक्टूबर 1968 को दिल्ली में हुआ था।

### 2. फिल्मी दुनिया में आने से पहले वह किस परीक्षा की तैयारी कर रहे थे?
वह भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS में जाने के लिए यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।

### 3. चंद्रचूड़ सिंह ने अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई कहां से की?
उन्होंने देहरादून के वेल्हम बॉयज स्कूल और दून स्कूल से पढ़ाई की, जबकि ग्रेजुएशन दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से पूरा किया।

### 4. अभिनय में आने से पहले उन्होंने क्या काम किया था?
वह वसंत वैली स्कूल में बच्चों को संगीत सिखाते थे और दून स्कूल में इतिहास के शिक्षक के रूप में काम कर चुके थे।

### 5. चंद्रचूड़ सिंह की पहली फिल्म कौन सी थी?
उनकी पहली फिल्म साल 1996 में आई 'तेरे मेरे सपने' थी, जो अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ABCL) के बैनर तले बनी थी।

### 6. उन्हें किस फिल्म के लिए फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू का अवॉर्ड मिला?
उन्हें फिल्म 'माचिस' में शानदार अभिनय के लिए फिल्मफेयर का बेस्ट मेल डेब्यू अवॉर्ड दिया गया था।

### 7. चंद्रचूड़ सिंह ने किस फिल्म में ऐश्वर्या राय के साथ काम किया था?
उन्होंने साल 2000 में आई फिल्म 'जोश' में ऐश्वर्या राय के हीरो का किरदार निभाया था।

### 8. उनकी शादी कब हुई थी और उनका पारिवारिक जीवन कैसा रहा?
उनकी शादी 1999 में अवंतिका कुमारी से हुई थी, हालांकि बाद में दोनों अलग हो गए। इस शादी से उनका एक बेटा है।

## प्रेरणा और सबक
चंद्रचूड़ सिंह की जीवन यात्रा यह सिखाती है कि पारंपरिक रास्तों को छोड़कर भी अपनी असली पहचान पाई जा सकती है।

- **असली रुचि की पहचान:** समाज की अपेक्षाओं से परे जाकर अपने हुनर को पहचानना चाहिए। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के बीच संगीत और अभिनय के प्रति अपने सच्चे झुकाव को समझा और उसे अपनाया।
- **बहुमुखी ज्ञान का सम्मान:** शिक्षा और कला कभी व्यर्थ नहीं जातीं। इतिहास पढ़ाने और संगीत सिखाने का उनका अनुभव उनके व्यक्तित्व को निखारने में मददगार साबित हुआ।
- **काम की गहराई पर जोर:** हर चमकती हुई चीज के पीछे भागने के बजाय चुनिंदा और सार्थक काम करना चाहिए। उन्होंने सीमित फिल्मों में काम करके भी अपनी खास पहचान हमेशा के लिए बनाई।

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