स्मिता पाटिल संग राज बब्बर की अधूरी दास्तान, सेट पर तकरार से शुरू हुआ था प्यार राज बब्बर और स्मिता पाटिल के रिश्ते ने अस्सी के दशक में खूब सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन शादी और बेटे के जन्म के कुछ ही दिनों बाद यह प्रेम कहानी दुखद अंत पर पहुंच गई। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी प्रेम कहानियां दर्ज हैं जो जितनी भावुक रहीं, उतनी ही विवादों और दर्द से भी घिरी रहीं। अभिनेता राज बब्बर और दिग्गज अदाकारा स्मिता पाटिल का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था। अस्सी के दशक में जब राज बब्बर 'इंसाफ का तराजू', 'निकाह' और 'आज की आवाज' जैसी शानदार फिल्मों के जरिए अपने अभिनय का लोहा मनवा रहे थे, उसी दौर में उनकी निजी जिंदगी भी एक अप्रत्याशित मोड़ ले रही थी। पहले से शादीशुदा और दो बच्चों के पिता होने के बावजूद राज बब्बर का दिल स्मिता पाटिल पर आ गया था। इस रिश्ते ने समाज और सिनेमा जगत में काफी हलचल मचाई, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और यह दास्तान बहुत जल्द एक दर्दनाक मोड़ पर खत्म हो गई। राउरकेला के सेट पर नोकझोंक से हुई थी शुरुआत राज बब्बर और स्मिता पाटिल की पहली मुलाकात किसी तय योजना का हिस्सा नहीं थी। दोनों की पहली संयुक्त फिल्म भले ही 1980 में सामने आई हो, लेकिन उनके रिश्ते की असली शुरुआत निर्देशक सतीश मिश्रा की फिल्म 'भीगी पलकें' के सेट पर हुई थी। इस फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में पूरी यूनिट ओडिशा के राउरकेला शहर में मौजूद थी। उसी दौरान दोनों कलाकारों का पहली बार आमना-सामना हुआ था। उस पहली मुलाकात को याद करते हुए राज बब्बर ने एक बातचीत में साझा किया था कि उनका पहला परिचय एक मीठी नोकझोंक के साथ खत्म हुआ था। उन्होंने बताया था कि वही हल्की-फुल्की तकरार आगे चलकर उनके मजबूत रिश्ते की नींव बन गई। राज बब्बर पहली ही नजर में स्मिता के तेज, उनकी सादगी और उनके काम के प्रति समर्पण से बेहद प्रभावित हो गए थे। दोस्ती, सलाह और फिर प्यार का सफर स्मिता पाटिल की सादगी, गहरी समझ और अनूठे आकर्षण ने धीरे-धीरे राज बब्बर को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया। दोनों के बीच की पेशेवर बातचीत समय बीतने के साथ निजी जुड़ाव में बदलने लगी। सेट पर साथ काम करते हुए दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई थी। स्मिता स्वभाव से काफी संवेदनशील और मिलनसार थीं और कई महत्वपूर्ण मामलों पर राज बब्बर से राय भी लिया करती थीं। राज बब्बर ने बाद में साफ किया था कि स्मिता के प्रति उनका यह गहरा खिंचाव उनकी पहली शादी में किसी अनबन या दरार का नतीजा बिल्कुल नहीं था। उन्होंने बताया था कि उनकी पहली पत्नी नादिरा जहीर के साथ सब कुछ सामान्य था। स्मिता अप्रत्याशित रूप से उनके जीवन में आई थीं। जब वे स्मिता से मिले, तो उन्हें उनके व्यक्तित्व में एक अलग तरह की गहराई महसूस हुई। दोनों के बीच आपसी समझ इतनी बढ़ गई कि यह आकर्षण एक अटूट रिश्ते में बदल गया। शादी, पारिवारिक तनाव और भावनात्मक उलझनें राज बब्बर पहले से नादिरा जहीर के साथ वैवाहिक रिश्ते में बंधे हुए थे और उनके दो बच्चे जूही बब्बर तथा आर्य बब्बर थे। यह जानते हुए भी कि राज का अपना एक भरा-पूरा परिवार है, स्मिता पाटिल ने उनके साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। साल 1983 में दोनों ने विवाह कर लिया और साथ रहने लगे। इस फैसले की वजह से उस वक्त काफी विवाद और आलोचनाएं भी हुईं। हालांकि इन मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी परिवार के भीतर रिश्तों को संभालने की कोशिश की गई। राज बब्बर के मुताबिक, नादिरा इतनी समझदार थीं कि उन्होंने उनकी भावनाओं को समझा। इतना ही नहीं, बेटी जूही को भी स्मिता पाटिल के साथ वक्त बिताना काफी पसंद था। इसके बावजूद स्मिता खुद इस बात से अनजान नहीं थीं कि इस रिश्ते की वजह से नादिरा को किस मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ रहा था। स्मिता को वह साथ तो मिला जिसे वे चाहती थीं, लेकिन यह रिश्ता अपने साथ कई आंतरिक द्वंद्व भी लेकर आया था। प्रतीक का जन्म और सिर्फ 31 की उम्र में विदाई साल 1986 में इस रिश्ते में सबसे बड़ी खुशी तब आई जब स्मिता पाटिल ने बेटे प्रतीक बब्बर को जन्म दिया। दोनों परिवारों को लगा कि अब जिंदगी एक स्थिर राह पर आगे बढ़ेगी, लेकिन यह खुशी बेहद कम समय के लिए ही टिक सकी। बेटे के जन्म के बाद स्मिता की तबीयत बिगड़ने लगी। प्रसव के बाद पैदा हुई गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के चलते 13 दिसंबर 1986 को स्मिता पाटिल ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उस वक्त प्रतीक महज 15 दिन के थे और स्मिता की उम्र सिर्फ 31 वर्ष थी। महज 31 साल की उम्र में स्मिता के इस अचानक निधन ने राज बब्बर, उनके पूरे परिवार और समूचे भारतीय सिनेमा जगत को गहरे सदमे में डाल दिया था। एक प्रेम कहानी जो तमाम सामाजिक बंधनों को तोड़कर शुरू हुई थी, वह इस तरह असमय और अधूरे अंजाम पर पहुंच गई। इसका आप पर असर यह दास्तान उन पाठकों के लिए एक भावनात्मक और व्यावहारिक आईना है जो सार्वजनिक हस्तियों की निजी जिंदगी और जटिल पारिवारिक रिश्तों की वास्तविकताओं को समझना चाहते हैं। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह प्रसंग दिखाता है कि पर्दे पर ग्लैमरस दिखने वाले कलाकारों का निजी जीवन अक्सर कितनी बड़ी भावनात्मक दुविधाओं और सामाजिक आलोचनाओं से भरा होता है। इससे दर्शकों को कलाकारों के निजी फैसलों और उनके मानवीय पहलुओं को अधिक संवेदनशीलता से देखने का नजरिया मिलता है। • पारिवारिक रिश्तों के स्तर पर: यह घटनाक्रम सिखाता है कि जटिल पारिवारिक परिस्थितियों में परिपक्वता और आपसी समझदारी कितनी आवश्यक होती है। पहली पत्नी नादिरा का बच्चों की खातिर गरिमा बनाए रखना यह रेखांकित करता है कि संकट के समय संवाद कितना अहम है। • मातृत्व और स्वास्थ्य जागरूकता: स्मिता पाटिल का महज 31 वर्ष की उम्र में प्रसव संबंधी समस्याओं के कारण निधन होना प्रसवोत्तर स्वास्थ्य देखभाल की गंभीरता को उजागर करता है। आज के समय में यह परिवारों को याद दिलाता है कि बच्चे के जन्म के बाद मां की मेडिकल मॉनिटरिंग में जरा भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। • संतानों पर प्रभाव: माता-पिता के ऐसे फैसलों और त्रासदियों का सबसे गहरा असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ता है, जैसा प्रतीक बब्बर के जीवन में दिखा। ऐसे में परिवारों को बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ राज बब्बर और स्मिता पाटिल का रिश्ता पेशेवर मुलाकातों के जरिए पनपा और कई सामाजिक चुनौतियों के बीच आगे बढ़ा, जिसका अंत एक अप्रत्याशित चिकित्सीय त्रासदी के रूप में हुआ। • शूटिंग के दौरान उपजा आकर्षण: साल 1980 के दशक की शुरुआत में ओडिशा के राउरकेला में फिल्म 'भीगी पलकें' की शूटिंग के दौरान दोनों का परिचय हुआ था। पहली मुलाकात में हुई हल्की नोकझोंक और स्मिता के गंभीर व संवेदनशील व्यक्तित्व ने राज बब्बर को उनकी तरफ गहराई से आकर्षित किया। • विवाहित होने के बावजूद नया कदम: राज बब्बर पहले से नादिरा जहीर से विवाहित थे और दो बच्चों के पिता थे, फिर भी स्मिता के प्रति उनका भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता गया। राज के अनुसार यह आकर्षण उनकी पुरानी शादी में किसी दरार का परिणाम नहीं था, बल्कि अनपेक्षित रूप से हुआ जिसके चलते दोनों ने 1983 में साथ आने का निर्णय लिया। • प्रसव के बाद गंभीर जटिलताएं: साल 1986 में बेटे प्रतीक बब्बर के जन्म के कुछ ही दिनों बाद स्मिता पाटिल को प्रसवोत्तर गंभीर चिकित्सीय समस्याओं का सामना करना पड़ा। उचित देखरेख के बावजूद यह जटिलताएं जानलेवा साबित हुईं और 13 दिसंबर 1986 को महज 31 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। सवाल-जवाब 1. राज बब्बर और स्मिता पाटिल की पहली मुलाकात कहां और किस फिल्म के दौरान हुई थी? दोनों की पहली मुलाकात ओडिशा के राउरकेला में निर्देशक सतीश मिश्रा की फिल्म 'भीगी पलकें' के सेट पर हुई थी। 2. स्मिता पाटिल से शादी के वक्त राज बब्बर के परिवार में कौन-कौन था? उस समय राज बब्बर की पहली पत्नी नादिरा जहीर थीं और उनके दो बच्चे जूही बब्बर तथा आर्य बब्बर थे। 3. राज बब्बर और स्मिता पाटिल का विवाह किस वर्ष हुआ था? राज बब्बर और स्मिता पाटिल ने वर्ष 1983 में शादी की थी। 4. स्मिता पाटिल का निधन कब और किस वजह से हुआ था? स्मिता पाटिल का निधन 13 दिसंबर 1986 को महज 31 वर्ष की उम्र में बेटे के जन्म के बाद हुई स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण हुआ था। 5. स्मिता पाटिल के निधन के समय उनके बेटे प्रतीक बब्बर की उम्र कितनी थी? अपनी मां स्मिता पाटिल के निधन के समय प्रतीक बब्बर केवल 15 दिन के थे। https://trendkia.com/bollywood/smita-patil-snga-raj-babbar-ki-adhuri-dastana-seta-para-takarara-se-shuru-hua-tha-pyara-48862 TrendKia — Har trend, sabse pehle.