# सुरेश ओबेरॉय ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के घर आने का किस्सा किया साझा, आरएसएस और राजनीति पर खुलकर रखी बात

> अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने एक इंटरव्यू में आरएसएस और मोहन भागवत के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने 2004 में बीजेपी से जुड़ने और फिर राजनीति से मोहभंग होने की वजह भी बताई।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-08-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/suresh-oberoi-ne-sngha-pramukha-mohan-bhagwat-ke-ghara-ane-ka-kissa-kiya-sajha-rss-aura-rajaniti-para-khulakara-rakhi-bata-18671 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुरेश ओबेरॉय, मोहन भागवत, आरएसएस, बीजेपी, निधि वसंदानी, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार के बाद चर्चा के केंद्र में हैं। निधि वसंदानी के यूट्यूब चैनल पर बातचीत करते हुए उन्होंने अपने जीवन के कई अनछुए पहलुओं को साझा किया। इस दौरान उन्होंने राजनीति से जुड़े अपने पुराने अनुभवों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उसके सरसंघचालक मोहन भागवत के साथ अपने निजी संबंधों पर खुलकर अपने विचार रखे। अभिनेता ने अपनी विचारधारा को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे संगठन के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं और खुद को इसके प्रशंसकों में गिनते हैं, हालांकि वे औपचारिक रूप से इसके सदस्य नहीं बने हैं।

## नाश्ते पर जब घर पहुंचे आरएसएस प्रमुख
वार्ता के दौरान सुरेश ओबेरॉय ने संघ प्रमुख के साथ अपनी आत्मीयता को दर्शाने वाली एक पुरानी याद साझा की। उन्होंने बताया कि मोहन भागवत के साथ उनकी काफी अच्छी व्यक्तिगत पहचान है। इसी आत्मीय संबंध का एक संस्मरण याद करते हुए उन्होंने उस दिन का जिक्र किया जब आरएसएस प्रमुख सुबह के नाश्ते के लिए उनके घर पधारे थे। उनके आगमन से परिवार में खासा उत्साह और खुशी का माहौल था। इस विशेष अवसर पर उनकी पत्नी ने अपने हाथों से खास हलवा तैयार किया था, जिसे मोहन भागवत ने बेहद पसंद किया। अभिनेता ने कहा कि यह मुलाकात उनके बीच मौजूद व्यक्तिगत गर्मजोशी और परस्पर सम्मान को दर्शाती है।

## संघ की विचारधारा से लगाव लेकिन सदस्यता से दूरी
सुरेश ओबेरॉय ने स्पष्ट किया कि संगठन से उनका जुड़ाव केवल व्यक्तिगत विश्वास और वैचारिक पसंद के कारण है, न कि किसी कागजी सदस्यता की वजह से। उन्होंने मोहन भागवत के प्रति अपनी व्यक्तिगत प्रशंसा व्यक्त की और खुद को आरएसएस का प्रशंसक बताया। इसके बावजूद, उन्होंने यह साफ कर दिया कि उनकी इस नजदीकी का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि वे संगठन के नियमित कार्यकर्ता हैं। वे न तो सुबह के समय आयोजित होने वाली आरएसएस की शाखाओं में हिस्सा लेते हैं और न ही संघ के आधिकारिक कार्यक्रमों में एक सदस्य के तौर पर शामिल होते हैं।

## 2004 में बीजेपी से जुड़ाव और राजनीति से मोहभंग
साक्षात्कार में अभिनेता ने अपने राजनीतिक सफर के पन्नों को भी पलटा। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2004 में वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुए थे। पार्टी में सक्रिय रहने के दौरान उन्हें शीर्ष नेतृत्व से मिलने और संवाद करने का अवसर मिला। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ अपनी मुलाकातों और अनुभवों का विशेष रूप से उल्लेख किया। हालांकि, राजनीति के क्षेत्र में कुछ समय बिताने के बाद उन्हें निराशा का सामना करना पड़ा और धीरे-धीरे उनका इससे मोहभंग होने लगा। सुरेश ओबेरॉय के अनुसार, जब वे राजनीति में आए थे तब उनका मानना था कि यह देश और समाज की निस्वार्थ सेवा का एक सशक्त जरिया है, लेकिन समय बीतने के साथ धरातल पर उनका वास्तविक अनुभव काफी अलग और चुनौतीपूर्ण रहा।

## इसका आप पर असर
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## सवाल-जवाब

### 1. सुरेश ओबेरॉय ने हाल ही में किस मंच पर साक्षात्कार दिया?
सुरेश ओबेरॉय ने निधि वसंदानी के यूट्यूब चैनल पर अपना साक्षात्कार दिया।

### 2. क्या सुरेश ओबेरॉय आरएसएस के औपचारिक सदस्य हैं?
नहीं, सुरेश ओबेरॉय ने स्पष्ट किया है कि वे आरएसएस के प्रशंसक हैं, लेकिन वे संगठन के औपचारिक सदस्य नहीं हैं और न ही शाखाओं में जाते हैं।

### 3. संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ नाश्ते से जुड़ा क्या किस्सा है?
मोहन भागवत जब सुरेश ओबेरॉय के घर नाश्ते पर आए थे, तो अभिनेता की पत्नी ने खास तौर पर हलवा बनाया था, जिसे संघ प्रमुख ने काफी पसंद किया था।

### 4. सुरेश ओबेरॉय किस वर्ष बीजेपी में शामिल हुए थे?
सुरेश ओबेरॉय वर्ष 2004 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जुड़े थे।

### 5. सुरेश ओबेरॉय का राजनीति से मोहभंग क्यों हुआ?
शुरुआत में वे राजनीति को देश सेवा का माध्यम मानते थे, लेकिन राजनीति में समय बिताने के बाद उनका वास्तविक अनुभव अलग रहा, जिससे उनका मोहभंग हो गया।

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