# तमन्ना भाटिया के 'छठी मैया' गीत में दिखा बॉलीवुड का रंग, पटना के 400 साल पुराने मंदिर से जुड़ा 'द वन' का नाता और गर्माया सिद्धार्थ मल्होत्रा का भोजपुरी विवाद

> फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' का नया भक्ति गीत 'छठी मैया' अपनी भव्यता और पटना के ऐतिहासिक मंदिर से जुड़ाव को लेकर खूब चर्चा बटोर रहा है, वहीं मुख्य अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा की एक पुरानी विवादित टिप्पणी भी सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गई है।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/tamannaah-bhatia-ke-chhathi-maiya-gita-men-dikha-bolivuda-ka-rnga-patna-ke-400-sala-purane-mndira-se-jura-the-one-ka-nata-aura-gar-31946 · **Language:** Hindi
**Tags:** तमन्ना भाटिया, सिद्धार्थ मल्होत्रा, छठी मैया सॉन्ग, छठ पूजा 2026, द वन फिल्म, मनोज बाजपेयी भोजपुरी विवाद, पटना वन देवी मंदिर

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' का नया गीत 'छठी मैया' इन दिनों दर्शकों के बीच काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। अभिनेत्री तमन्ना भाटिया पर फिल्माए गए इस भक्ति गीत में अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा की भी एक विशेष झलक देखने को मिलती है। यह गीत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े और पवित्र महापर्व छठ पूजा की समृद्ध परंपराओं और आस्था को समर्पित है। जैसे ही यह गीत सोशल मीडिया पर जारी किया गया, वैसे ही इसके दृश्य और इसकी कहानी को लेकर लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। इंटरनेट पर कई उपयोगकर्ताओं द्वारा इस गाने के पीछे की पौराणिक पृष्ठभूमि को पटना के समीप स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

## पटना के ऐतिहासिक मंदिर से गहरा संबंध

इस मधुर गीत का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार विशाल मिश्रा ने तैयार किया है, जबकि इसके भावुक और भक्तिमय बोल कौशल किशोर द्वारा लिखे गए हैं। यह गीत केवल एक साधारण ट्रैक नहीं है, बल्कि यह फिल्म की मुख्य कहानी में शामिल 'वन देवी' की लोककथा और प्रकृति के प्रति मूक मानवीय विश्वास के इर्द-गिर्द बुना गया है। इस गीत के रिलीज होने के साथ ही, अब इस फिल्म की पटकथा को पटना में स्थित करीब 400 साल पुराने एक रहस्यमयी मंदिर से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और स्थानीय लोगों में इसके प्रति अगाध श्रद्धा है।

ऐसी खबरें हैं कि इस गीत के फिल्मांकन और रचना से पहले, फिल्म के निर्माताओं ने स्वयं इस ऐतिहासिक मंदिर का दौरा किया था। वहां उन्होंने देवी के दर्शन किए और मंदिर के मुख्य पुजारियों और स्थानीय निवासियों से बातचीत करके इसके धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं को विस्तार से समझा था।

 

## विद्यानंद मिश्रा और कंका माता की लोककथा

इस 400 साल पुराने मंदिर से जुड़ी कई दिलचस्प और रहस्यमयी लोककथाएं आज भी क्षेत्र में प्रचलित हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कथा एक परम भक्त विद्यानंद मिश्रा से संबंधित है। माना जाता है कि विद्यानंद मिश्रा मां विंध्यवासिनी के बहुत बड़े उपासक थे और वे नियमित रूप से देवी के दर्शन करने के लिए उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में स्थित विंध्याचल धाम की कठिन यात्रा किया करते थे। जैसे-जैसे समय बीतता गया और वृद्धावस्था के कारण उनका शरीर कमजोर होने लगा, वैसे-वैसे उनके लिए इतनी लंबी और दुर्गम यात्रा करना असंभव हो गया। अपने भक्त की इस विवशता और सच्ची भक्ति को देखकर देवी विंध्यवासिनी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए। देवी ने उन्हें निर्देश दिया कि वे उनकी पवित्र पिंड का एक अंश अपने निवास स्थान के पास ले जाएं और उसे स्थापित करें।

देवी के आदेश का पालन करते हुए, विद्यानंद मिश्रा ने उस पावन अंश को स्थानीय जंगल के भीतर स्थापित कर दिया और वहीं बैठकर कठोर तपस्या में लीन हो गए। इस कथा के एक अन्य भाग में एक संन्यासी का जिक्र आता है, जिसने जंगल में विद्यानंद मिश्रा की तपस्या में बाधा डालने का प्रयास किया था। भक्त ने उस संन्यासी के समक्ष एक मिट्टी का घड़ा रख दिया, जिसमें संन्यासी के सभी प्रश्नों के उत्तर समाहित थे। परंतु, क्रोध में आकर संन्यासी ने उस घड़े को तोड़ दिया, जिससे देवी अत्यंत कुपित हो गईं। देवी ने संन्यासी को उसके इस कृत्य के लिए कड़ा दंड दिया। इसी घटना के बाद से स्थानीय लोग देवी को 'कंका माता' के नाम से भी पुकारने लगे। आज भी स्थानीय लोगों का यह दृढ़ विश्वास है कि कंका माता उनके पूरे क्षेत्र को सभी प्रकार की नकारात्मक और बुरी शक्तियों से सुरक्षित रखती हैं।

 

## गाने में छठ पूजा की प्रस्तुति और वास्तविकता का अंतर

छठ पूजा भारतीय संस्कृति में अत्यंत कठिन और कठोर नियमों वाले पर्वों में से एक माना जाता है। यह चार दिनों तक चलने वाला एक महापर्व है, जिसमें व्रती बेहद कड़े नियमों का पालन करते हैं, निर्जला उपवास रखते हैं और अंत में डूबते व उगते सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपनी पूजा संपन्न करते हैं। फिल्म के इस गीत में भी व्रत, अनुष्ठानों और घाट पर अर्घ्य देने के विभिन्न दृश्यों को बेहद खूबसूरती से दिखाने का प्रयास किया गया है। गाने के वीडियो में तमन्ना भाटिया पारंपरिक बांस का सूप हाथ में लिए छठ घाट पर अन्य व्रती महिलाओं के बीच खड़ी दिखाई देती हैं। उन्होंने एक पारंपरिक व्रती की भांति पूरा सोलह श्रृंगार किया हुआ है और वे सूर्य देव की आराधना के साथ-साथ अर्घ्य की तैयारियों में जुटी नजर आती हैं।

हालांकि, इस पूरे गीत में भक्ति का एक सुंदर माहौल तैयार किया गया है, लेकिन बिहार और झारखंड के पारंपरिक छठ व्रतियों और स्थानीय लोगों की इस पर एक अलग राय है। कई दर्शकों का मानना है कि इस गाने में दिखाए गए दृश्य वास्तविक पूजा पद्धति की तुलना में अत्यधिक फिल्मी और बॉलीवुड शैली से प्रभावित लगते हैं। उनका कहना है कि पूजा की थाली सजाने का तरीका और बांस के सूप का जो इस्तेमाल गाने में किया गया है, वह वास्तविक पूजा के पारंपरिक और अत्यंत शुद्ध नियमों से पूरी तरह मेल नहीं खाता।

 

## पहनावे और शैली पर उठते सवाल

इस गीत में तमन्ना भाटिया के पहनावे और उनके लुक को लेकर भी सोशल मीडिया पर काफी बहस छिड़ गई है। वीडियो में अभिनेत्री लाल रंग की साड़ी पहने हुए हैं, जिसका पल्ला 'उल्टा पल्ला' शैली में ड्रेप किया गया है, और उनके सिर पर लाल रंग का दुपट्टा है। जबकि, पारंपरिक रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड की महिलाएं छठ महापर्व के दौरान 'सीधा पल्ला' शैली की साड़ी पहनना पसंद करती हैं, जिसे स्थानीय संस्कृति में अत्यंत शुभ और पारंपरिक माना जाता है।

हालांकि, इन छोटे-मोटे बदलावों का अर्थ यह कतई नहीं है कि गीत में छठ पूजा को गलत तरीके से पेश किया गया है। वास्तव में, छठ पूजा केवल कपड़ों या बाहरी दिखावे का पर्व नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से आंतरिक शुद्धता, कड़े अनुशासन और सात्विकता का प्रतीक है। व्रतियों के साथ-साथ उनका पूरा परिवार बेहद शुद्ध वातावरण में मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी का उपयोग करके पूरी तरह से शाकाहारी प्रसाद और भोग तैयार करता है। इन सभी कठोर नियमों के कारण ही दर्शकों को यह गाना असली पूजा की तुलना में बॉलीवुड का एक ग्लैमरस प्रदर्शन अधिक लग रहा है। इसके बावजूद, यह गीत छठी मैया और सूर्य देव के प्रति आम जनमानस की गहरी आस्था और उनके भावनात्मक लगाव को बखूबी प्रदर्शित करने में सफल रहा है।

 

## सिद्धार्थ मल्होत्रा का पुराना भोजपुरी विवाद

एक तरफ जहां इस फिल्म के निर्माता और कलाकार पूर्वांचल की इस महान लोक आस्था को अपने प्रोजेक्ट के जरिए भुनाने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मुख्य अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा का एक पुराना विवाद फिर से चर्चा का केंद्र बन गया है। यह विवाद साल 2018 का है, जब सिद्धार्थ मल्होत्रा अपनी फिल्म 'अय्यारी' के प्रमोशन के लिए सह-कलाकारों मनोज बाजपेयी और रकुल प्रीत सिंह के साथ लोकप्रिय रियलिटी शो 'बिग बॉस 11' के मंच पर पहुंचे थे।

शो के दौरान, बिहार से ताल्लुक रखने वाले बेहतरीन अभिनेता मनोज बाजपेयी ने मजाकिया अंदाज में सिद्धार्थ से भोजपुरी भाषा में एक वाक्य बोलने का अनुरोध किया था। सिद्धार्थ ने जैसे-तैसे उस वाक्य को बोला, लेकिन उसके तुरंत बाद उन्होंने एक अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर कहा कि भोजपुरी भाषा बोलने से उन्हें 'लैट्रीन' या 'टॉयलेट' जैसी फीलिंग आती है। उनके इस असंवेदनशील बयान ने उस समय बड़े पैमाने पर विवाद खड़ा कर दिया था। भोजपुरी भाषी समुदाय और बिहार-यूपी के लोगों ने इस टिप्पणी पर गहरा रोष व्यक्त किया था और इसे अपनी भाषा तथा संस्कृति का घोर अपमान माना था।

 

## सिनेमाई संतुलन और फिल्म की रिलीज

अब जब सिद्धार्थ मल्होत्रा एक ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बने हैं जो सीधे तौर पर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सबसे पवित्र धार्मिक आस्था यानी छठ पूजा से जुड़ा है, तो उनका वह पुराना बयान एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है। लोग उनके इस दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं और नाराजगी जता रहे हैं।

कुल मिलाकर, 'छठी मैया' गीत के माध्यम से निर्माताओं ने व्यावसायिक और धार्मिक दोनों पक्षों को संतुलित करने की कोशिश की है। उन्होंने पारंपरिक पूजा के कुछ महत्वपूर्ण तत्वों को अवश्य शामिल किया है, लेकिन उसे पूरी तरह से पारंपरिक न रखकर बॉलीवुड के रंग-बिरंगे और भव्य अंदाज में पेश किया है। फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक इस फिल्म और इसकी कहानी को कितना प्यार देते हैं।

## इसका आप पर असर
इस गीत के रिलीज होने और इसके साथ ही जुड़े विवादों से सामान्य दर्शकों, विशेषकर पूर्वांचल क्षेत्र के लोगों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

- **सांस्कृतिक चित्रण:** मुख्यधारा के सिनेमा में क्षेत्रीय त्योहारों का चित्रण होने से देश-विदेश में त्योहार की पहचान बढ़ती है, लेकिन इसके पारंपरिक तौर-तरीकों में बदलाव से वास्तविक अनुयायियों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
- **विवादों का असर:** किसी बड़े अभिनेता द्वारा पूर्व में की गई क्षेत्रीय टिप्पणियां उनके नए प्रोजेक्ट्स की स्वीकार्यता को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे दर्शकों में उनके प्रति नाराजगी बढ़ सकती है।
- **धार्मिक जागरूकता:** इस प्रकार के गीतों से युवा पीढ़ी और देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले लोगों को सदियों पुरानी परंपराओं तथा पटना के ऐतिहासिक मंदिरों के बारे में जानने का अवसर मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस गीत के चर्चा में आने और अभिनेता के पुराने विवाद के फिर से गरमाने के पीछे कई मुख्य कारण और पृष्ठभूमि हैं।

- **सिनेमाई बनाम वास्तविकता:** निर्माताओं ने गीत को व्यावसायिक रूप से आकर्षक बनाने के लिए पारंपरिक अनुष्ठानों और पोशाकों में बदलाव किए, जिसके कारण वास्तविक व्रतियों ने इसे प्रामाणिक मानने से इनकार कर दिया।
- **ऐतिहासिक अनुसंधान:** फिल्म की कहानी को अधिक प्रामाणिक और रहस्यमयी बनाने के लिए मेकर्स ने पटना के 400 साल पुराने वन देवी मंदिर का दौरा किया और वहां की लोककथाओं को पटकथा में शामिल किया।
- **पुरानी टिप्पणियों की संवेदनशीलता:** साल 2018 में बिग बॉस 11 के मंच पर सिद्धार्थ मल्होत्रा द्वारा भोजपुरी भाषा को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत असंवेदनशील थी, जो अब उनके एक छठ-केंद्रित प्रोजेक्ट से जुड़ने के कारण पुनः जनता के आक्रोश का कारण बनी है।

## सवाल-जवाब

### 1. 'छठी मैया' गीत किस फिल्म का हिस्सा है और यह कब रिलीज होगी?
यह गीत 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' फिल्म का हिस्सा है, जो 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

### 2. इस गीत का पटना के किस मंदिर से संबंध बताया जा रहा है?
इसका संबंध पटना के पास स्थित लगभग 400 साल पुराने वन देवी मंदिर से जोड़ा जा रहा है, जिसे 'कंका माता' मंदिर भी कहा जाता है।

### 3. सिद्धार्थ मल्होत्रा का भोजपुरी विवाद क्या है?
साल 2018 में बिग बॉस 11 में अपनी फिल्म 'अय्यारी' के प्रमोशन के दौरान, सिद्धार्थ ने भोजपुरी बोलने पर एक विवादित टिप्पणी की थी जिसमें उन्होंने इसे 'लैट्रीन' जैसी फीलिंग देने वाला बताया था।

### 4. दर्शकों ने गाने में तमन्ना भाटिया के लुक पर क्या आपत्तियां जताई हैं?
दर्शकों ने आपत्ति जताई है कि तमन्ना ने सीधे पल्ले के बजाय उल्टे पल्ले की साड़ी पहनी है, जो पारंपरिक छठ व्रतियों के पहनावे से भिन्न है।

### 5. इस गीत के संगीतकार और गीतकार कौन हैं?
इस गीत को विशाल मिश्रा ने कंपोज किया है और इसके बोल कौशल किशोर ने लिखे हैं।

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