सौ से ज्यादा फिल्मों में अभिनय करने वाले दिग्गज मोहन शर्मा पहुंचे ओल्ड एज होम, कभी थे जयललिता के पड़ोसी दक्षिण भारतीय सिनेमा के मशहूर अभिनेता और निर्माता मोहन शर्मा आज गंभीर वित्तीय तंगी और बीमारियों के कारण चेन्नई के एक ओल्ड एज होम में रहने को मजबूर हैं। एक गलत फैसले और कर्ज के जाल ने उन्हें इस स्थिति में ला दिया है। मनोरंजन जगत की रंगीन और चकाचौंध भरी दुनिया बाहर से जितनी आकर्षक नजर आती है, अंदरूनी हकीकत उतनी ही अनिश्चितताओं और जोखिमों से घिरी होती है। इस इंडस्ट्री में शोहरत और सफलता की कोई स्थायी गारंटी नहीं होती है। जरा सी चूक या एक गलत आर्थिक निर्णय किसी भी कामयाब इंसान को रातों-रात बुलंदियों से जमीन पर ला सकता है। भारतीय सिनेमा के लंबे इतिहास में ऐसे कई मझे हुए कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपने दौर में जबरदस्त लोकप्रियता और मान-सम्मान हासिल किया, लेकिन जीवन के ढलते वर्षों में वे तन्हाई, गुमनामी और आर्थिक लाचारी का शिकार हो गए। ऐसी ही एक बेहद दर्दनाक और झकझोर कर रख देने वाली दास्तान दक्षिण भारतीय फिल्मों के बहुमुखी अभिनेता, निर्माता और निर्देशक मोहन शर्मा की है। तमिल, तेलुगु और मलयालम सिनेमा में अपनी मजबूत छाप छोड़ने वाले मोहन शर्मा इन दिनों चेन्नई के एक वृद्धाश्रम में बेहद तंगहाली और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के बीच जीवन गुजारने को विवश हैं। जिस शख्स ने अपने करियर के दौरान अनगिनत फिल्मों का निर्माण किया और सौ से ज्यादा फिल्मों में मुख्य नायक की भूमिका निभाई, आज वह अपनी रोजमर्रा की दवाइयों के खर्च के लिए भी दूसरों की मदद पर आशਰিত है। शानदार फिल्मी सफर और ऐतिहासिक उपलब्धियां मोहन शर्मा सिर्फ एक अभिनेता भर नहीं थे, बल्कि वे सिनेमा की विधाओं के गहरे जानकार और उद्यमी व्यक्ति थे। अपने सुनहरे करियर के कालखंड में उन्होंने लगभग 20 फिल्मों का निर्माण किया और सौ से अधिक फिल्मों में बतौर लीड एक्टर अपनी कला का प्रदर्शन किया। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य भाषाओं की 50 से अधिक फिल्मों में बेहद मजबूत चरित्र किरदार निभाए। भारतीय फिल्म जगत में उनके रुतबे और कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे दक्षिण भारत की सभी चारों प्रमुख भाषाओं यानी तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ में मोशन पिक्चर्स का निर्माण करने वाले इंडस्ट्री के पहले निर्माता बने थे। उन्होंने साउथ इंडियन फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष के पद की जिम्मेदारी भी संभाली थी। उन्होंने अपने अभिनय के बल पर 'चट्टाकरी' (1974), 'नेल्लू' (1974), 'सागरा संगमाम' (1983), 'सुलभ' और 'फ्रेंड्स' (2001) जैसी कई व्यावसायिक रूप से सफल और यादगार फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। एक महत्वाकांक्षी फिल्म और बर्बादी का दौर मोहन शर्मा के जीवन में उथल-पुथल का दौर तब शुरू हुआ जब उन्होंने अपनी महत्त्वाकांक्षाओं से जुड़ी द्विभाषी फिल्म 'ग्रामम / नम्मा ग्रामम' बनाने का जोखिम उठाया। हालांकि इस मूवी को फिल्म समीक्षकों द्वारा बेहद सराहा गया और इसे कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पुरस्कार भी मिले, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म पूरी तरह पिट गई और व्यावसायिक तौर पर भीषण असफलता का सामना करना पड़ा। इस फिल्म का निर्माण करते वक्त खर्च अनुमानित बजट से कहीं ज्यादा निकल गया। जिस प्रोजेक्ट पर शुरुआत में लगभग 1.25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था, वह बढ़कर 2 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। फिल्म की थिएटर्स में रिलीज, भव्य प्रचार और पोस्टरों के वितरण का खर्च उठाने के लिए मोहन शर्मा को भारी-भरकम कर्ज लेना पड़ गया। इस चढ़ते हुए कर्ज के बोझ से उबरने के लिए उन्हें अपनी जिंदगी की सबसे कीमती अचल संपत्ति, चेन्नई के अत्यंत पॉश इलाके पोएस गार्डन में स्थित अपना आलीशान फ्लैट बेचना पड़ गया। जयललिता से करीबी संबंध और पोएस गार्डन का आशियाना यह वही पोएस गार्डन इलाका है जो तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज अभिनेत्री जे जयललिता का निवास स्थान हुआ करता था। मोहन शर्मा ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने जयललिता की ही सलाह पर वहां प्रापर्टी खरीदी थी। एवीएम स्टूडियो में एक शूटिंग के दौरान हुई मुलाकात में जयललिता ने उन्हें पोएस गार्डन के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी थी और वहां 2500 वर्ग फीट का एक फ्लैट खरीदने का सुझाव दिया था। जयललिता और मोहन शर्मा के बीच बहुत आत्मीय और गहरे सम्मान वाले रिश्ते थे। मोहन शर्मा का यह भी दावा है कि वे फिल्म उद्योग से जुड़े आखिरी व्यक्ति थे जिन्होंने जे जयललिता को अस्पताल में भर्ती होने से ठीक पहले उनके घर पर देखा था। जयललिता के अचानक निधन का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत गहरा और बुरा असर पड़ा, जिससे वे कभी पूरी तरह मानसिक रूप से उबर नहीं पाए। गंभीर बीमारियां और वृद्धाश्रम का कड़वा सच आर्थिक तंगी के इसी दौर में स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर परेशानियों ने मोहन शर्मा की हालत और अधिक बदतर कर दी। पैर में ट्यूमर जैसी गांठ (ग्रोथ) उभरने के कारण उनकी सर्जरी करवानी पड़ी, जिसकी वजह से उनका चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया था। इसके अलावा घुटने के लिगामेंट टियर के उपचार और ऑपरेशनों में उनके 4-5 लाख रुपये पानी की तरह बह गए। वर्तमान समय में वे वर्टिगो यानी चक्कर आने की बीमारी, उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। उन्हें हर रोज इंसुलिन के इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। उनके अपने मुताबिक केवल उनकी दवाइयों का मासिक खर्च ही करीब 35000 रुपये बैठता है। जब हालात यहां तक आ गए कि उनके पास दवा की गोलियां खरीदने तक के पैसे नहीं बचे, तब रोटरी क्लब से जुड़े उनके कुछ मित्रों ने, जो वृद्धाश्रम के ट्रस्टी थे, उन्हें वहां रहकर जीवन बिताने की सलाह दी। पारिवारिक अलगाव और बेघर होने का दर्द मोहन शर्मा की निजी जिंदगी भी तमाम पारिवारिक उतार-चढ़ाव और कलह से अछूती नहीं रही। उन्होंने साल 1975 में अपनी सह-कलाकार और बेहद मशहूर अभिनेत्री लक्ष्मी के साथ विवाह किया था, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला और 1980 में दोनों का कानूनी रूप से तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने शांति नाम की एक महिला से दूसरी शादी रचाई। मौजूदा समय में अपनी दूसरी पत्नी और साले के साथ उपजे गंभीर विवाद के बाद उन्हें उस अपार्टमेंट से बाहर निकलना पड़ा जो उनकी पत्नी के नाम पर दर्ज था। पत्नी के परिवार के दबाव और दखलअंदाजी के कारण उन्हें कानूनी रूप से तलाक का नोटिस भी थमा दिया गया। उनका इकलौता बेटा है जो फिलहाल जर्मनी में रहता है और अपने मकान की होम लोन ईएमआई चुका रहा है, जिसकी वजह से वह तत्काल अपने पिता को कोई बड़ी आर्थिक सहायता भेजने में असमर्थ है। हालांकि उनका बेटा भारत आकर उनकी देखरेख करने को तैयार था, लेकिन मोहन शर्मा ने उसके उज्ज्वल भविष्य और करियर को ध्यान में रखते हुए उसे ऐसा करने से मना कर दिया। संकट की घड़ी में रजनीकांत बने मसीहा इस भीषण आर्थिक तंगी और लाचारी के माहौल में मोहन शर्मा के लिए दक्षिण भारतीय सिनेमा के महानायक रजनीकांत एक बड़े फरिश्ते के रूप में सामने आए। मोहन शर्मा ने बेहद भावुक होते हुए बताया कि जब उन्हें जिंदगी में सबसे ज्यादा सहारे की दरकार थी, तब खुद सुपरस्टार रजनीकांत ने उन्हें फोन पर संपर्क किया। रजनीकांत ने बातचीत के दौरान उनका बैंक अकाउंट नंबर मंगवाया और अगले ही दिन बिना किसी औपचारिकता के उनके खाते में 1 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इस वाकये को याद करते हुए मोहन शर्मा ने कहा कि रजनीकांत उनके जीवन में भगवान के अवतार की भांति आए हैं जिन्होंने उनकी मान-मर्यादा और इज्जत बचा ली। दुनिया की नजरों में वे भले ही एक मेगास्टार हों, लेकिन उनके लिए वे सीधे तौर पर ईश्वर का रूप हैं। मुख्यमंत्री विजय से आस और भविष्य की उम्मीदें फिलहाल कुछ रिश्तेदारों और पुराने दोस्तों द्वारा दी जा रही छोटी-मोटी मदद के सहारे अपने दिन काट रहे मोहन शर्मा ने अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की टीम के सामने मदद की गुहार लगाई है। मोहन शर्मा का ऐसा कहना है कि वे विजय को पिछले 25 वर्षों से भली-भांति जानते हैं और उनकी फिल्मों में अभिनय भी कर चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मिलने का समय मांगा है। उन्हें पूरा भरोसा है कि यदि मुख्यमंत्री से उनकी सीधी मुलाकात हो जाती है, तो उनके रहने और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का कोई स्थायी और ठोस समाधान निकल सकेगा। मोहन शर्मा की यह आपबीती इस बात का आईना है कि कैसे फिल्म इंडस्ट्री की रंगीनियत के पीछे एक ऐसा स्याह सच भी छिपा होता है, जहां कभी शिखर पर राज करने वाले सितारे भी वक्त की मार के आगे पूरी तरह असहाय हो जाते हैं. इसका आप पर असर मनोरंजन जगत में: यह कहानी कलाकारों के जीवन की अनिश्चितताओं और वित्तीय सुरक्षा के महत्व को दर्शाती है। सवाल-जवाब 1. मोहन शर्मा कौन हैं? मोहन शर्मा दक्षिण भारतीय सिनेमा के एक बहुमुखी अभिनेता, निर्माता और निर्देशक हैं जिन्होंने सौ से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। 2. मोहन शर्मा वर्तमान में कहाँ रह रहे हैं? मोहन शर्मा गंभीर आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वर्तमान में चेन्नई के एक ओल्ड एज होम में रह रहे हैं। 3. मोहन शर्मा की किस फिल्म के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ी? उनकी द्विभाषी फिल्म 'ग्रामम / नम्मा ग्रामम' के व्यावसायिक रूप से विफल होने और बजट बढ़ने के कारण उनकी वित्तीय स्थिति बिगड़ गई थी। 4. संकट के समय मोहन शर्मा की मदद किसने की? सुपरस्टार रजनीकांत ने फोन पर संपर्क कर मोहन शर्मा के बैंक खाते में 1 लाख रुपये ट्रांसफर करके उनकी मदद की। https://trendkia.com/bollywood/veteran-actor-mohan-sharma-who-worked-in-over-100-films-and-lived-near-jayalalithaa-moves-to-old-age-home-13647 TrendKia — Har trend, sabse pehle.