# वेलकम का मशहूर हॉकी डायलॉग स्क्रिप्ट से था नदारद, मुश्ताक खान की बात सुनकर अनीस बज्मी ने बदली थी कहानी

> कॉमेडी फिल्म वेलकम में मुश्ताक खान का नकली टांग वाला लोकप्रिय संवाद शुरुआत में पटकथा का हिस्सा नहीं था, जिसे निर्देशक ने अभिनेता के कहने पर रातभर जागकर जोड़ा था।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/welcome-ka-mashahura-hoki-dayaloga-skripta-se-tha-nadarada-mushtaq-khan-ki-bata-sunakara-anees-bazmee-ne-badali-thi-kahani-38463 · **Language:** Hindi
**Tags:** वेलकम, मुश्ताक खान, अनीस बज्मी, अनिल कपूर, नाना पाटेकर, अक्षय कुमार, बॉलीवुड कॉमेडी

सिनेमा प्रेमियों के बीच साल 2007 में पर्दे पर आई कॉमेडी फिल्म **वेलकम** आज भी अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग और यादगार किरदारों के लिए बेहद खास मानी जाती है। अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, अनिल कपूर और नाना पाटेकर जैसे बड़े सितारों से सजी इस फिल्म में अभिनेता मुश्ताक खान का स्क्रीन टाइम भले ही सीमित था, लेकिन उनके अभिनय ने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। विशेष रूप से उनका बोला गया संवाद, जिसमें वह अपनी नकली टांग और हॉकी खिलाड़ी होने का जिक्र करते हैं, लोगों को आज भी हंसने पर मजबूर कर देता है। हालांकि इस लोकप्रिय दृश्य के पीछे एक बेहद दिलचस्प किस्सा छिपा हुआ है, क्योंकि यह संवाद मूल पटकथा में शामिल ही नहीं था।

## शुरुआत में अभिनेता के लिए नहीं था कोई बड़ा रोल
फिल्म के निर्देशन की कमान संभालने वाले अनीस बज्मी ने इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि निर्माण के शुरुआती दौर में उनके पास मुश्ताक खान के लिए कोई महत्वपूर्ण या विस्तृत भूमिका उपलब्ध नहीं थी। निर्देशक और अभिनेता के बीच पुरानी और गहरी दोस्ती थी, इसलिए उन्होंने अभिनेता से कोई भी बात घुमा-फिराकर नहीं कही। उन्होंने सीधे तौर पर अभिनेता को स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें दृश्य में महज बॉडीगार्ड के पीछे खड़े रहने का काम मिलेगा। इसके बावजूद निर्देशक ने अपने मित्र को यह भरोसा दिलाया था कि वह आगे चलकर उनके किरदार के लिए कोई न कोई गुंजाइश जरूर तलाश लेंगे।

मुश्ताक खान को भी अपने निर्देशक मित्र की बात पर पूरा यकीन था, जिसके चलते उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के इस छोटे से हिस्से के लिए अपनी सहमति दे दी थी। फिल्म की शूटिंग शुरू होने के बाद कुछ दिन सामान्य तरीके से बीते, लेकिन अभिनेता के मन में अपने काम को लेकर स्वाभाविक चिंता बनी रही। कुछ दिनों के काम के बाद उन्होंने निर्देशक से अपनी स्थिति साझा करते हुए कहा कि उनके हिस्से में अब तक बोलने के लिए कोई संवाद नहीं आया है।

## रातभर जागकर निर्देशक ने पटकथा में किया बदलाव
दोस्त की यह सहज गुजारिश निर्देशक के दिल को छू गई और उनके दिमाग में लगातार यह विचार चलने लगा कि इस भूमिका को किस तरह प्रभावी बनाया जाए। मुश्ताक खान के किरदार में जान फूंकने के इरादे से निर्देशक ने उसी रात पूरी स्क्रिप्ट को दोबारा खंगालना शुरू किया। उन्होंने रातभर बैठकर दृश्य की रूपरेखा बदली और उसी दौरान वह मशहूर संवाद रचा गया, जहां किरदार कहता है कि उसकी एक टांग नकली है और वह कभी हॉकी का बड़ा खिलाड़ी हुआ करता था। इस एक बदलाव ने पूरी स्थिति को साधारण से बेहद मनोरंजक बना दिया।

## बड़े कलाकारों ने खुशी-खुशी दिया सहयोग
पटकथा में फेरबदल करने के बाद अगली चुनौती यह थी कि उस दृश्य में मुख्य रूप से मौजूद वरिष्ठ सितारों को इस बदलाव के लिए राजी किया जाए। निर्देशक ने अनिल कपूर और नाना पाटेकर से संपर्क किया और उनसे अनुरोध किया कि वे उस विशेष दृश्य में अपने संवाद न बोलें। उन्होंने दोनों स्थापित अभिनेताओं को स्थिति समझाते हुए कहा कि वे उस पल में थोड़े पीछे रहेंगे और पूरे दृश्य की कमान मुश्ताक खान संभालेंगे।

अनिल कपूर और नाना पाटेकर के साथ निर्देशक के दोस्ताना और मजबूत संबंध होने के कारण दोनों दिग्गजों ने इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया। उन्होंने बिना किसी झिझक के एक सह-कलाकार को मंच देने का फैसला किया। नतीजतन, यह दृश्य जब पर्दे पर उतरा, तो इसने सिनेमाघरों में जबरदस्त ठहाके बटोरे। रिलीज के बाद से यह दृश्य आधुनिक मीम्स और आम बातचीत का अभिन्न अंग बन गया, जिसने एक छोटे से किरदार को सिनेमाई इतिहास में सदाबहार बना दिया।

## इसका आप पर असर
यह किस्सा फिल्म जगत में सहयोग और संवाद लेखन की रचनात्मक प्रक्रिया को समझने का एक शानदार उदाहरण प्रस्तुत करता है।

- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह जानकारी दर्शकों को दर्शाती है कि फिल्मों में कई यादगार दृश्य पहले से तय नहीं होते, बल्कि सेट पर आपसी समझ से बनते हैं। ऐसे में पर्दे के पीछे की कहानियां पुरानी फिल्मों को दोबारा देखने का नजरिया बदल देती हैं।
- **कलाकारों और लेखकों के लिए:** यह प्रसंग रचनात्मक अभिव्यक्ति में अपनी बात रखने और साथी कलाकारों के साथ तालमेल के महत्व को रेखांकित करता है। वरिष्ठ कलाकारों का नए प्रयोगों को जगह देना टीम भावना का बेहतरीन पाठ है।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्म वेलकम के इस आइकॉनिक दृश्य का निर्माण पटकथा में पहले से मौजूद योजना की जगह एक अभिनेता की गुजारिश और निर्देशक की त्वरित सूझबूझ का परिणाम था।

- **भूमिका का अभाव:** शुरुआत में मुश्ताक खान के लिए केवल पृष्ठभूमि में बॉडीगार्ड के पीछे खड़े रहने का मामूली काम तय किया गया था। इस कारण कई दिनों तक शूटिंग जारी रहने के बावजूद उनके पास बोलने के लिए कोई संवाद मौजूद नहीं था।
- **अभिनेता का निवेदन:** जब मुश्ताक खान ने अपने निर्देशक मित्र को याद दिलाया कि उन्हें कोई लाइन नहीं मिली है, तब निर्देशक ने स्थिति को सुधारने का फैसला किया। निर्देशक ने उसी रात बैठकर पूरी स्थिति को हास्य में बदलने वाला हॉकी और नकली टांग वाला नया संवाद लिखा।
- **वरिष्ठ कलाकारों की सहमति:** दृश्य को प्रभावी बनाने के लिए अनिल कपूर और नाना पाटेकर ने निर्देशक के कहने पर अपने संवाद छोड़कर पीछे रहना स्वीकार किया। इस आपसी सहयोग के बिना उस नए संवाद को केंद्रीय स्थान मिल पाना संभव नहीं था।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म वेलकम में मुश्ताक खान का मशहूर डायलॉग क्या था?
मुश्ताक खान ने फिल्म में यह प्रसिद्ध संवाद बोला था कि उनकी एक टांग नकली है और वह कभी हॉकी के बहुत बड़े खिलाड़ी हुआ करते थे।

### 2. क्या यह डायलॉग फिल्म की असली स्क्रिप्ट में पहले से लिखा हुआ था?
नहीं, यह डायलॉग मूल पटकथा में शामिल नहीं था और इसे शूटिंग शुरू होने के बाद जोड़ा गया था।

### 3. फिल्म वेलकम के निर्देशक कौन थे?
इस फिल्म का निर्देशन अनीस बज्मी ने किया था।

### 4. मुश्ताक खान को शुरुआत में फिल्म में क्या किरदार दिया गया था?
शुरुआत में उनके लिए कोई बड़ा किरदार नहीं था और उन्हें केवल बॉडीगार्ड के पीछे खड़े रहने के लिए कहा गया था।

### 5. इस संवाद को जोड़ने के लिए निर्देशक ने क्या कदम उठाया?
निर्देशक ने अभिनेता की बात सुनने के बाद रातभर बैठकर स्क्रिप्ट में बदलाव किए और नया दृश्य तैयार किया।

### 6. उस दृश्य में अनिल कपूर और नाना पाटेकर की क्या भूमिका थी?
निर्देशक के अनुरोध पर अनिल कपूर और नाना पाटेकर ने अपने संवाद बोलने से मना कर दिया और मुश्ताक खान को बोलने का पूरा मौका दिया।

## प्रेरणा और सबक
यह प्रसंग जीवन और कार्यक्षेत्र में अपनी बात रखने और आपसी सहयोग के दम पर सफलता हासिल करने की सुंदर सीख देता है।

- **अपनी बात रखना:** अगर आपको लगता है कि आपकी क्षमता का सही उपयोग नहीं हो रहा है, तो उचित मंच पर विनम्रता से अपनी बात जरूर कहें। मुश्ताक खान की एक जायज गुजारिश ने उनके करियर का सबसे यादगार दृश्य तैयार कर दिया।
- **वादों को निभाना:** एक अच्छे मार्गदर्शक या नेता के रूप में दूसरों को दिए गए भरोसे को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करने से पीछे नहीं हटना चाहिए। निर्देशक ने रातभर जागकर अपने दोस्त को दिया हुआ वादा पूरी ईमानदारी से निभाया।
- **अहंकार से दूरी:** किसी टीम प्रोजेक्ट में सफलता पाने के लिए बड़े और स्थापित साथियों का दूसरों को अवसर देना बहुत मायने रखता है। वरिष्ठ कलाकारों का पीछे हटकर साथी कलाकार को आगे बढ़ाना सच्चे पेशेवर व्यवहार का प्रमाण है।

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