यश चोपड़ा की फिल्म लम्हे के गाने में हुआ था कुदरती करिश्मा, जब श्रीदेवी के डांस के बीच सच में बरसने लगा था पानी साल 1991 में आई फिल्म लम्हे के लोकप्रिय गीत मेघा रे मेघा की शूटिंग के दौरान नकली फुहारों की जगह कुदरत ने खुद बादलों से पानी बरसा दिया था। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे जादुई पल दर्ज हैं, जो किसी तय योजना का हिस्सा नहीं थे बल्कि अचानक घटी घटनाओं ने उन्हें सदाबहार बना दिया। ऐसा ही एक दिलचस्प वाकया तीन दशक से भी पहले एक खास गीत के फिल्मांकन के दौरान देखने को मिला था। इस गीत में लता मंगेशकर और ईला अरुण की जुगलबंदी ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया था, वहीं परदे पर मुख्य अभिनेत्री ने अपने जोरदार नृत्य और मनमोहक अंदाज से हर दर्शक का दिल जीत लिया था। गाने की शूटिंग के वक्त हुआ कुदरती करिश्मा इतना अप्रत्याशित था कि खुद फिल्म निर्माता और निर्देशक भी दंग रह गए थे। फिल्म लम्हे और उसका लीक से हटकर ताना-बाना साल 1991 में बड़े परदे पर निर्देशक यश चोपड़ा की एक महत्वाकांक्षी फिल्म रिलीज हुई थी, जिसका नाम लम्हे था। इस बहुचर्चित सिनेमाई रचना में श्रीदेवी और अनिल कपूर मुख्य भूमिकाओं में दिखाई दिए थे। उस जमाने की आम मुख्यधारा की फिल्मों से हटकर इसकी पटकथा काफी साहसी और लीक से अलग थी। उस दौर के सामाजिक परिवेश के लिहाज से कहानी इतनी अनोखी थी कि आम दर्शकों के लिए इसे सहजता से स्वीकार कर पाना आसान साबित नहीं हुआ था। इसके बावजूद फिल्म का संगीत बेहद पसंद किया गया और इसके गानों ने संगीत की दुनिया में खूब वाहवाही बटोरी। मेघा रे मेघा की शूटिंग और नकली बारिश के बीच आया कुदरती तूफान इस फिल्म का सबसे चर्चित प्रसंग इसके प्रसिद्ध वर्षा गीत के साथ जुड़ा हुआ है, जिसके बोल थे 'मेघा रे मेघा, तेरा मन तरसा रे, पानी क्यों बरसा रे'। इस दृश्य में श्रीदेवी अपनी सहेलियों के संग बादलों की रिमझिम में मोरनी की तरह थिरकती हुई नजर आती हैं, जबकि दृश्य में अनिल कपूर की मौजूदगी भी दिखाई देती है। जब इस विशेष गीत को कैमरे में कैद करने की तैयारी चल रही थी, तब अभिनेत्री को सावन की फुहारों में भीगते हुए नृत्य करना था। निर्देशक यश चोपड़ा ने इसके लिए सेट पर नकली बारिश करवाने के पूरे पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। जैसे ही कैमरे का स्विच ऑन हुआ और शूटिंग शुरू हुई, ठीक उसी क्षण आसमान से सचमुच बारिश होने लगी। पूरी टीम ने इस अप्रत्याशित कुदरती बारिश का भरपूर लाभ उठाया और असली बादलों के बरसते पानी के बीच ही पूरे गाने की शूटिंग पूरी की गई। शानदार संगीत, दिग्गज आवाजें और अदाकारी का जादू गीत को यादगार बनाने में कई दिग्गजों का अमूल्य योगदान रहा। स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी मीठी आवाज से इसे संवारा, तो लोक गायिका ईला अरुण ने भी इसमें अपनी सशक्त आवाज का योगदान दिया। प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी शिव हरि ने इसकी सुरीली धुन तैयार की थी, जबकि इसके बोल गीतकार आनंद बक्शी की कलम से निकले थे। इस गीत पर श्रीदेवी ने अपनी भाव-भंगिमाओं और ऊर्जावान ठुमकों से ऐसा समां बांधा कि उनके चाहने वाले पूरी तरह मोहित हो गए थे। बॉक्स ऑफिस पर असफलता के बावजूद कल्ट क्लासिक बनी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ढेर हो गई थी। अनिल कपूर और श्रीदेवी जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी भी इसे टिकट खिड़की पर व्यावसायिक सफलता नहीं दिला सकी, क्योंकि तत्कालीन दर्शक इसकी बोल्ड कहानी को हजम नहीं कर पाए थे। हालांकि, निर्देशक यश चोपड़ा अपनी फिल्म के इस खास गाने और इसके निर्माण से बेहद खुश थे। फिल्म में श्रीदेवी, अनिल कपूर, अनुपम खेर और वहीदा रहमान जैसे उम्दा कलाकारों की टोली मौजूद थी। श्रीदेवी ने इसमें दोहरा किरदार निभाया था। अपनी उत्कृष्ट अदाकारी के दम पर उन्होंने आलोचकों की भरपूर प्रशंसा बटोरी और उन्हें इस भूमिका के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से लेकर फिल्मफेयर पुरस्कार तक से नवाजा गया। वक्त के साथ आज इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की एक कल्ट रचना का दर्जा मिल चुका है। अलग-अलग जोड़ियों में श्रीदेवी का जलवा श्रीदेवी ने अपने पूरे फिल्मी सफर में हर तरह के मुश्किल और चुनौतीपूर्ण किरदारों को बखूबी निभाया। पर्दे पर उनकी जोड़ी कई दिग्गज अभिनेताओं के साथ खूब सराही गई। एक दौर में अभिनेता जितेंद्र के साथ उनकी जोड़ी सिनेमाघरों में भारी भीड़ खींचने के लिए जानी जाती थी। इसके अलावा अनिल कपूर और ऋषि कपूर के साथ भी उनकी फिल्मी जोड़ी ने बड़े परदे पर जबर्दस्त कमाल दिखाया और दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। इसका आप पर असर सिनेमा प्रेमियों और संगीत के कद्रदानों के लिए यह किस्सा भारतीय फिल्मों के सुनहरे दौर और निर्माण की चुनौतियों को समझने का एक शानदार अवसर है। • सिनेमाई इतिहास की समझ: यह प्रसंग दिखाता है कि कैसे बिना आधुनिक वीएफएक्स और कंप्यूटर ग्राफिक्स के उस दौर में कुदरती परिस्थितियों में यथार्थवादी दृश्य फिल्माए जाते थे। फिल्म निर्माण के शौकीनों और छात्रों के लिए पुराने दौर की यह रचनात्मकता आज भी प्रेरणा देती है। • संगीत के कद्रदानों के लिए: लता मंगेशकर और ईला अरुण का यह गीत आज भी विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध है। श्रोता उस दौर के सुरीले वाद्ययंत्रों और बेजोड़ गायकी के जादू को दोबारा महसूस कर सकते हैं। • फिल्म देखने की नई दृष्टि: बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने के बावजूद कल्ट क्लासिक बनने वाली फिल्मों का अध्ययन करने वालों को यह समझने में मदद मिलती है कि तात्कालिक कमाई ही अच्छी कला का एकमात्र पैमाना नहीं होती। दर्शक आज के ओटीटी दौर में ऐसी क्लासिक फिल्मों को एक नए नजरिए से देख सकते हैं। • अभिनय के प्रति समर्पण: मौसम की अचानक बदली परिस्थितियों और असली बारिश के बीच कड़ाके की ठंड में काम करने का यह अनुभव नए कलाकारों को पेशेवर प्रतिबद्धता सिखाता है। विपरीत मौसम में भी बेहतरीन शॉट देने का जज्बा किसी भी कलाकार के लिए अनुकरणीय है। ऐसा क्यों हुआ फिल्म लम्हे के इस खास दृश्य के दौरान असली बारिश होने और बाद में फिल्म के कल्ट क्लासिक बनने के पीछे कई तकनीकी और कहानी से जुड़े कारण मौजूद थे। • तकनीकी तैयारी और मौसम का संयोग: दृश्य की मांग के अनुसार यश चोपड़ा ने सेट पर कृत्रिम फुहारों के लिए पानी के पाइप और मोटर की पूरी व्यवस्था कर रखी थी। ठीक उसी समय प्राकृतिक मौसम में बदलाव हुआ और कैमरा चालू होते ही बादलों से वास्तविक वर्षा शुरू हो गई, जिसे निर्माताओं ने बिना समय गंवाए रिकॉर्ड कर लिया। • कहानी का समय से आगे होना: बॉक्स ऑफिस पर असफलता का मुख्य कारण यह था कि फिल्म की मुख्य कहानी उस जमाने के सामाजिक मानदंडों के लिहाज से बेहद बोल्ड थी। पारंपरिक दर्शक उस दौर में इस तरह के पारिवारिक रिश्तों और प्रेम त्रिकोण के विषय को पचाने के लिए तैयार नहीं थे। • संगीत और अभिनय की बेजोड़ गुणवत्ता: व्यावसायिक विफलता के बावजूद फिल्म को अमर बनाने का श्रेय इसके असाधारण गानों और कलाकारों के समर्पण को जाता है। लता मंगेशकर, शिव हरि, आनंद बक्शी और श्रीदेवी की अद्भुत प्रतिभा ने इस पूरे प्रोजेक्ट को एक कालातीत कलाकृति में बदल दिया। सवाल-जवाब 1. फिल्म लम्हे किस साल रिलीज हुई थी? यह फिल्म साल 1991 में रिलीज हुई थी और इसका निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था। 2. गाने मेघा रे मेघा की शूटिंग के दौरान क्या हुआ था? शूटिंग के लिए नकली बारिश की तैयारी की गई थी, लेकिन कैमरा चालू होते ही असली बारिश होने लगी थी। 3. इस गीत को किन गायिकाओं ने अपनी आवाज दी थी? इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया था और इसमें गायिका ईला अरुण ने भी अपनी आवाज का योगदान दिया था। 4. फिल्म में किन प्रमुख कलाकारों ने अभिनय किया था? फिल्म में श्रीदेवी, अनिल कपूर, अनुपम खेर और वहीदा रहमान ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। 5. श्रीदेवी को इस फिल्म के लिए कौन से पुरस्कार मिले थे? फिल्म में अपने दोहरे किरदार के बेहतरीन अभिनय के लिए श्रीदेवी को राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ था। https://trendkia.com/bollywood/yash-chopra-ki-philma-lamhe-ke-gane-men-hua-tha-kudarati-karishma-jaba-sridevi-ke-dansa-ke-bicha-sacha-men-barasane-laga-tha-pani-35372 TrendKia — Har trend, sabse pehle.