# यश चोपड़ा ने 50 बार नकारा था वो ट्रैक, उदय चोपड़ा की पसंद से बना ब्लॉकबस्टर

> फिल्म 'दिल तो पागल है' का कल्ट गाना 'अरे रे अरे' 50 बार खारिज होने के बाद उदय चोपड़ा के दखल से फाइनल हुआ था, जिसके बोल आनंद बख्शी ने 10 मिनट में लिखे थे।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/yash-chopra-ne-50-bara-nakara-tha-vo-traika-uday-chopra-ki-pasnda-se-bana-blokabastara-41397 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल तो पागल है, शाहरुख खान, उदित नारायण, लता मंगेशकर, यश चोपड़ा, उदय चोपड़ा, उत्तम सिंह, आनंद बख्शी

बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे कई सदाबहार गीत दर्ज हैं, जिनकी शुरुआत बेहद निराशाजनक दौर से गुजरी थी। शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर की मुख्य भूमिकाओं वाली म्यूजिकल ब्लॉकबस्टर 'दिल तो पागल है' का सबसे लोकप्रिय गीत 'अरे रे अरे ये क्या हुआ' भी ऐसे ही लंबे संघर्ष के बाद दर्शकों तक पहुंचा था। आज तीन दशक बाद भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर चढ़ा यह ट्रैक एक समय निर्देशक यश चोपड़ा और उनकी संगीत टीम को बिल्कुल रास नहीं आ रहा था और इसे दर्जनों बार खारिज किया जा चुका था।

## संगीतकार उत्तम सिंह का छह महीने लंबा इम्तिहान
इस यादगार धुन को तैयार करने वाले संगीतकार उत्तम सिंह के लिए इस गाने को मंजूरी दिलाना आसान नहीं था। उन्होंने एक बातचीत में साझा किया था कि वे लगातार छह महीने तक निर्देशक यश चोपड़ा को इस गाने का म्यूजिक सुनाते रहे, लेकिन निर्देशक को इसमें कोई खास दम नजर नहीं आ रहा था। यश चोपड़ा को लगता था कि यह धुन फिल्म के मिजाज और चार्टबस्टर की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। इसी कशमकश में यह कंपोजिशन करीब 50 बार रिजेक्ट की गई और हर बार इसे दरकिनार कर दिया जाता था।

## उदय चोपड़ा की दखल और धुन को मिली हरी झंडी
जब तमाम कोशिशों के बाद भी यश चोपड़ा इस धुन पर राजी नहीं हुए, तब उत्तम सिंह ने एक दिन यह कंपोजिशन उदय चोपड़ा को सुनाई। उदय चोपड़ा, जो आगे चलकर फिल्मी पर्दे पर एक सफल अभिनेता के तौर पर अपनी पहचान नहीं बना पाए, उन्हें पहली ही बार में यह संगीत बेहद पसंद आ गया। उदय चोपड़ा के जोरदार समर्थन और जिद के चलते आखिरकार टीम इस धुन को 'दिल तो पागल है' में शामिल करने के लिए सहमत हो गई। शुरुआत में मेकर्स ने इसे केवल औपचारिकता के तौर पर फिल्म में जगह दी थी, लेकिन यह फैसला फिल्म के पक्ष में ऐतिहासिक साबित हुआ।

## गीत के बोल तय करने में आई अड़चनें
धुन फाइनल होने के बाद असली चुनौती शुरू हुई कि इस संगीत पर शब्द कौन से बिठाए जाएं। गाने के बोल तैयार करने की कशमकश इतनी बढ़ गई थी कि खुद निर्देशक यश चोपड़ा, उनकी पत्नी और बेटे आदित्य चोपड़ा ने भी अपने स्तर पर लाइनें लिखने की कोशिश की। हालांकि पारिवारिक टीम के तमाम प्रयासों के बावजूद कोई भी प्रारूप उस धुन की लय और गरिमा से मेल नहीं खा पा रहा था। संगीत के अनुकूल उपयुक्त ताने-बाने को गढ़ने में पूरी निर्माण टीम को करीब 3 साल का लंबा वक्त लग गया था।

## आनंद बख्शी का दस मिनट का करिश्मा
आखिरकार जब यह धुन दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी को सुनाई गई, तो उन्होंने कुछ अनोखा किया। धुन सुनने के तुरंत बाद वे बिना कुछ कहे कमरे से बाहर निकल गए, जिससे वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए कि कहीं उन्हें संगीत नापसंद तो नहीं आया। मगर सबको चौंकाते हुए आनंद बख्शी महज दस मिनट के भीतर कमरे में वापस लौटे और उन्होंने पूरा गाना लिखकर टेबल पर रख दिया। उन्होंने सिर्फ 10 मिनट में उन अमर शब्दों की रचना कर दी थी जिसे तलाशने में मेकर्स सालों से जूझ रहे थे।

## उदित नारायण और लता मंगेशकर की आवाज ने बनाया कल्ट
आनंद बख्शी के लिखे इन बोलों को दिग्गज पार्श्व गायिका लता मंगेशकर और उदित नारायण ने अपनी जादुई आवाजों में रिकॉर्ड किया। साल 1997 में सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली यश चोपड़ा निर्देशित फिल्म 'दिल तो पागल है' उस साल की सबसे बड़ी कमाई करने वाली फिल्मों में शुमार हुई और इसने 3 राष्ट्रीय पुरस्कार भी अपने नाम किए। कॉलेज के युवाओं, आधुनिक नृत्य और प्रेम त्रिकोण पर आधारित इस फिल्म में 'अरे रे अरे ये क्या हुआ' कई मौकों पर बैकग्राउंड में गूंजता है और रिलीज के बाद यह पूरी फिल्म का सबसे बड़ा सिग्नेचर गाना बनकर उभरा जिसे लोग 29 साल बाद भी गुनगुनाते हैं।

## इसका आप पर असर
बॉलीवुड संगीत की इस अनसुनी दास्तान से संगीत प्रेमियों और नए रचनाकारों को रचनात्मक प्रक्रियाओं की जटिलताओं को समझने में मदद मिलती है।

- **रचनात्मक धैर्य:** बेहतरीन काम के निर्माण में समय और लगातार खारिज होने का जोखिम शामिल रहता है। संगीतकार उत्तम सिंह की छह महीने की मशक्कत दिखाती है कि असफलता के बावजूद अपनी कला पर भरोसा रखना जरूरी है।
- **पारंपरिक नजरिए से हटकर सोच:** किसी रचना की कद्र कभी भी गैर-पारंपरिक स्रोतों से मिल सकती है। स्थापित फिल्मकारों द्वारा नकारे जाने के बाद एक नौसिखिए की पसंद ने इस गाने को अमर बना दिया।
- **त्वरित प्रेरणा की शक्ति:** वर्षों के गतिरोध को सही रचनाकार कुछ ही मिनटों में सुलझा सकता है। आनंद बख्शी द्वारा 10 मिनट में लिखे बोल बताते हैं कि गहरी समझ त्वरित समाधान दे सकती है।
- **सिनेमाई इतिहास का महत्व:** क्लासिक गानों के पीछे के संघर्ष को जानकर श्रोता संगीत को और गहराई से सराह पाते हैं। यह जानकारी दशकों पुराने गीतों को दोबारा सुनने का एक नया नजरिया देती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह यादगार गाना इसलिए अस्तित्व में आ सका क्योंकि संगीतकार ने अपनी धुन को यश चोपड़ा के बार-बार खारिज करने के बाद भी छोड़ा नहीं और उदय चोपड़ा ने इसमें संभावनाएं पहचानीं।

- **यश चोपड़ा की झिझक:** निर्देशक यश चोपड़ा को छह महीने तक सुनाए जाने के बावजूद यह संगीत किसी हिट ट्रैक जैसा नहीं लग रहा था। इस वजह से उन्होंने इसे लगभग 50 बार खारिज कर दिया था।
- **उदय चोपड़ा की मध्यस्थता:** संगीतकार उत्तम सिंह द्वारा धुन सुनाए जाने पर उदय चोपड़ा को वह संगीत तुरंत पसंद आ गया। उनके सहमत होने और कहने पर ही इस धुन को आखिरकार फिल्म में शामिल करने की मंजूरी मिली।
- **बोल लिखने में परिवार का संघर्ष:** धुन तय होने के बाद यश चोपड़ा, उनकी पत्नी और आदित्य चोपड़ा ने बोल लिखने की कोशिश की मगर बात नहीं बनी। म्यूजिक तैयार करने और शब्दों के तालमेल में 3 साल का समय लग गया।
- **आनंद बख्शी का अचानक हस्तक्षेप:** धुन सुनने के बाद आनंद बख्शी कमरे से बाहर चले गए और 10 मिनट में पूरे बोल लिखकर ले आए। इसके बाद उदित नारायण और लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड होकर यह सिग्नेचर गाना बन गया।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म 'दिल तो पागल है' का कौन सा गाना 50 बार रिजेक्ट हुआ था?
उदित नारायण और लता मंगेशकर का गाया मशहूर गाना 'अरे रे अरे ये क्या हुआ' मेकर्स द्वारा करीब 50 बार खारिज किया गया था।

### 2. यश चोपड़ा के बार-बार मना करने के बाद इस गाने को किसने पसंद किया?
संगीतकार उत्तम सिंह से यह धुन सुनने के बाद उदय चोपड़ा ने इसे तुरंत पसंद किया और फिल्म में शामिल कराने में मदद की।

### 3. आनंद बख्शी ने इस गाने के बोल लिखने में कितना समय लिया था?
आनंद बख्शी ने धुन सुनने के बाद कमरे से बाहर जाकर महज 10 मिनट के अंदर पूरा गाना लिखकर तैयार कर दिया था।

### 4. फिल्म 'दिल तो पागल है' को कितने नेशनल अवॉर्ड मिले थे?
साल 1997 में रिलीज हुई यश चोपड़ा निर्देशित फिल्म 'दिल तो पागल है' ने 3 राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे।

### 5. इस गाने का संगीत तैयार करने में मेकर्स को कितना समय लगा था?
बोल के हिसाब से इस गाने का संगीत तैयार करने में मेकर्स को करीब 3 साल का समय लग गया था।

## प्रेरणा और सबक
अस्वीकृति के बीच अपने काम पर दृढ़ विश्वास और रचनात्मक संकल्प की यह एक दुर्लभ प्रेरक मिसाल है।

- **अस्वीकृति से न घबराना:** जब आपकी रचना 50 बार भी खारिज हो जाए, तब भी अपने हुनर पर संदेह न करें। उत्तम सिंह की दृढ़ता ने अंततः उनकी धुन को एक कल्ट क्लासिक में बदल दिया।
- **वैकल्पिक दृष्टिकोण का सम्मान:** कभी-कभी वह व्यक्ति सही क्षमता पहचान लेता है जिसे दुनिया कम आंकती है। उदय चोपड़ा के समर्थन ने साबित किया कि अच्छी सलाह और सही राय किसी से भी मिल सकती है।
- **वर्षों के अभ्यास का फल:** आनंद बख्शी का 10 मिनट में पूरा गीत लिख देना वर्षों के अभ्यास और समर्पण का परिणाम था। कड़ी मेहनत इंसान को कठिन चुनौतियों में भी तात्कालिक सफलता दिलाती है।

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