# 2,800 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का नेटवर्क पूरा, नरेंद्र मोदी ने बताया 21वीं सदी की जीवनरेखा

> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2,800 किलोमीटर से अधिक लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूर्ण संचालन की शुरुआत की। इस विशाल परियोजना से माल ढुलाई का समय घटने, परिवहन लागत कम होने और किसानों को अपने उत्पाद तेजी से बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की बात कही गई है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/2-800-km-long-freight-corridor-network-completed-narendra-modi-calls-it-lifeline-of-21st-century-29524 · **Language:** Hindi
**Tags:** डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, नरेंद्र मोदी, वडोदरा, भारतीय रेलवे, लॉजिस्टिक्स, मालगाड़ी

देशभर में माल परिवहन की व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के लिए शुरू की गई डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना का नेटवर्क अब पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान इस बात की घोषणा की और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतिम महत्वपूर्ण खंडों को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह विशाल ढांचागत नेटवर्क 21वीं सदी के भारत की प्रगति का एक अहम प्रतीक है।

## पश्चिमी कॉरिडोर के आखिरी खंड और कुल लागत
पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के तहत जिन आखिरी तीन खंडों को चालू किया गया है, उनकी कुल लंबाई 326 रूट किलोमीटर है। इन हिस्सों के निर्माण पर कुल मिलाकर 20,700 करोड़ रुपए से अधिक का भारी निवेश किया गया है। इन नए हिस्सों के जुड़ने के साथ ही पूर्वी और पश्चिमी दोनों समर्पित फ्रेट कॉरिडोर अपनी पूरी लंबाई में सुचारू रूप से परिचालित होने लगे हैं।

## यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों का अलग संचालन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि यह गलियारा तेजी से आगे बढ़ रहे देश की जीवनरेखा बन चुका है। अतीत में मालगाड़ियों और यात्री गाड़ियों को एक ही रेल मार्ग साझा करना पड़ता था, जिससे दोनों की गति और समय-सारणी बाधित होती थी। अब माल ढुलाई के लिए बिल्कुल अलग पटरियां होने से मालगाड़ियां बिना किसी रुकावट के अपने तय रास्तों पर फर्राटा भर सकती हैं।

## दुकानों और बाजारों तक तेजी से पहुंचता सामान
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी कॉरिडोर पर रोजाना 430 से अधिक मालगाड़ियां दौड़ रही हैं। पहले जो दूरी तय करने में मालगाड़ियों को करीब साढ़े छह घंटे लगते थे, वह अब आधे से भी कम समय में पूरी हो जाती है। सड़क परिवहन से तुलना करें तो जो सामान ट्रकों के जरिए पहुंचाने में लगभग 30 घंटे लगते थे, वही काम अब इस कॉरिडोर के माध्यम से मात्र 10 से 12 घंटे के भीतर हो जाता है।

## ईंधन की बचत और उद्योगों को बढ़ावा
इस परियोजना से मिलने वाले लाभ केवल समय की बचत तक सीमित नहीं हैं बल्कि इससे ईंधन की खपत कम हुई है, ढुलाई की लागत घटी है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिला है। सरकार का यह मानना है कि लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर आने वाली लागत कम होने से भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी और आयात-निर्यात से जुड़े कामकाज बेहद कुशल हो जाएंगे।

## बंदरगाहों से सीधी कनेक्टिविटी और मुंबई पर घटता दबाव
हाल ही में जिन तीन नए खंडों को शुरू किया गया है, वे साणंद नॉर्थ, मकरपुरा, न्यू उंबरगांव, न्यू सफाले और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी को आपस में जोड़ते हैं। इसके चलते देश के सबसे अहम बंदरगाहों में शुमार जेएनपीए तक सीधे माल पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है। इससे आयात-निर्यात कार्गो की आवाजाही में तेजी आएगी, लॉजिस्टिक्स का खर्च घटेगा और मुंबई के अत्यधिक व्यस्त रेल नेटवर्क पर ट्रेनों का बोझ कम होगा।

## किसानों और कृषि उत्पादों को बड़ा फायदा
इस पूरी व्यवस्था का लाभ देश के अन्नदाताओं को भी बड़े पैमाने पर मिलेगा। अब देश के विभिन्न हिस्सों के किसान अपने फल, सब्जियां और फूल जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों को कम समय में देश के बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। इससे किसानों को अपनी फसल का अधिक और बेहतर मूल्य मिलने की प्रबल संभावनाएं बनेंगी।

## डबल-स्टैक कंटेनर और नई यात्री ट्रेन
प्रधानमंत्री ने हाल ही में जेएनपीटी से वडोदरा के बीच चलाई गई डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी का जिक्र करते हुए बताया कि उसने अकेले ही 250 से अधिक ट्रकों के बराबर माल ढोया था। इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान जोबट-टांडा रोड रेलवे लाइन को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया। यह लाइन छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना का हिस्सा है जो मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जैसे सुदूर आदिवासी क्षेत्रों को मुख्य राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है।

## इसका आप पर असर
इस फ्रेट कॉरिडोर के पूर्ण संचालन से देश के आम नागरिकों, उद्योगों और किसानों को सीधे तौर पर तेज और सस्ती परिवहन सेवाएं मिलेंगी।

- **भारत भर में:** पूरे देश में माल ढुलाई का समय आधा होने से जरूरी सामान और औद्योगिक उत्पादों की आवाजाही तेज होगी, जिससे महंगाई पर अंकुश लगने में मदद मिलेगी।
- **वडोदरा और गुजरात में:** स्थानीय उद्योगों और बंदरगाहों तक सीधी कनेक्टिविटी मिलने से विनिर्माण इकाइयों का परिवहन खर्च घटेगा और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
- **किसानों के लिए:** फल, सब्जियां और फूल जैसे जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पाद कम समय में बड़े शहरी बाजारों तक पहुंचेंगे, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।
- **यात्री यातायात पर:** मालगाड़ियों के अलग पटरियों पर चलने से यात्री ट्रेनों का सफर अधिक समय पर और सुरक्षित होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विशाल गलियारा भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती लॉजिस्टिक्स जरूरतों और भारी भीड़भाड़ वाले पारंपरिक रेल नेटवर्क के दबाव को कम करने के लिए विकसित किया गया है।

- **पारंपरिक नेटवर्क पर अत्यधिक दबाव:** यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के एक ही पटरी पर चलने से दोनों की गति धीमी हो जाती थी और आपूर्ति श्रृंखला में देरी होती थी।
- **बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत:** सड़क परिवहन और मिश्रित रेल मार्गों के कारण माल ढुलाई का खर्च अधिक था, जिससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा घट रही थी।
- **बंदरगाहों और बाजारों को जोड़ना:** जेएनपीए जैसे प्रमुख बंदरगाहों तक सीधी और तेज माल ढुलाई की आवश्यकता थी ताकि आयात-निर्यात गतिविधियों को सुचारू बनाया जा सके।
- **कृषि अपव्यय रोकना:** किसानों के जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को समय पर बाजार न मिलने से होने वाले वित्तीय नुकसान को कम करना इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी है?
इस पूरे समर्पित माल गलियारे की कुल लंबाई 2,800 किलोमीटर से अधिक है।

### 2. पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतिम खंडों के निर्माण पर कितना खर्च आया है?
पश्चिमी कॉरिडोर के अंतिम तीन खंडों के विकास पर 20,700 करोड़ रुपए से अधिक की लागत आई है।

### 3. नए चालू किए गए खंड किन क्षेत्रों को आपस में जोड़ते हैं?
ये खंड साणंद नॉर्थ, मकरपुरा, न्यू उंबरगांव, न्यू सफाले और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी को जोड़ते हैं।

### 4. माल ढुलाई का समय पहले की तुलना में कितना कम हुआ है?
जो दूरी तय करने में पहले लगभग साढ़े छह घंटे लगते थे, वह अब आधे से भी कम समय में पूरी हो जाती है।

### 5. इस परियोजना का उद्घाटन कहां किया गया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस परियोजना के खंडों को राष्ट्र को समर्पित किया।

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