50 लाख रुपये के बजट से शुरू करें गीले कचरे का कारोबार, सीईईडब्ल्यू की प्रियंका सिंह ने बताए कमाई के विकल्प अगर आपके पास 50 लाख रुपये का बजट है और आप बिना बैंक लोन लिए गीले कचरे से बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं, तो छोटे कंपोस्टिंग यूनिट से लेकर वेस्ट सेग्रिगेशन और कंसल्टिंग ऐप तक कई विकल्प मौजूद हैं। सीईईडब्ल्यू की प्रियंका सिंह के अनुसार, 2047 तक भारत में वेस्ट-टू-वेल्थ मार्केट 61 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है। अगर आपके पास 50 लाख रुपये का बजट है और आप बिना बैंक लोन लिए गीले कचरे या जैविक कचरे के प्रोसेसिंग क्षेत्र में नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो इस क्षेत्र में संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। भारत में वेस्ट-टू-वेल्थ यानी कचरे से संपत्ति बनाने के सेक्टर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। बिना किसी वित्तीय कर्ज में फंसे अपने ही पैसों से कारोबार शुरू करने वाले नए उद्यमियों के लिए छोटे स्तर के कंपोस्टिंग यूनिट्स से लेकर कचरा छंटाई प्लांट और डिजिटल सलाह सेवाओं तक कई आकर्षक मौके उपलब्ध हैं। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की सीनियर प्रोग्राम लीड प्रियंका सिंह के अनुसार, सही रणनीति और योजना के साथ 50 लाख रुपये की पूंजी से इस हरित क्षेत्र में एक सफल कदम रखा जा सकता है। 50 लाख रुपये के पूंजीगत बजट से शुरू होने वाले प्रमुख बिज़नेस विकल्प 50 लाख रुपये के बजट को ध्यान में रखते हुए उद्यमी तीन मुख्य व्यावसायिक मॉडलों पर काम कर सकते हैं। पहला विकल्प एक छोटा कंपोस्टिंग यूनिट स्थापित करना है। यह यूनिट आसपास के क्षेत्रों से रोजाना निकलने वाले गीले कचरे को इकट्ठा कर जैविक खाद तैयार करने का काम करती है। इस खाद की मांग कृषि और बागवानी क्षेत्रों में काफी अधिक रहती है। दूसरा प्रमुख विकल्प कचरे की छंटाई यानी सेग्रिगेशन का छोटा प्लांट लगाना है। इस प्लांट का प्राथमिक उद्देश्य गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करना होता है। इसके बाद छंटाई किए गए गीले कचरे को बड़े कंपोस्टिंग या बायोमेथेनेशन प्लांटों तक कच्चे माल के रूप में सप्लाई किया जाता है। तीसरा विकल्प डिजिटल ऐप या कंसल्टिंग सेवा की शुरुआत करना है। यह टेक-आधारित प्लेटफ़ॉर्म उन लोगों और संस्थाओं को तकनीकी सलाह, फ़ायदे के तरीके और संचालन प्रक्रिया की जानकारी देता है जो इस सेक्टर में कदम रखना चाहते हैं। भारत में वेस्ट-टू-वेल्थ सेक्टर का दायरा और 2047 तक बाज़ार का अनुमान सीईईडब्ल्यू के विश्लेषणात्मक आकलनों से पता चलता है कि भारत में ऑर्गेनिक वेस्ट सेक्टर में सर्कुलर इकोनॉमी का बाज़ार आने वाले दशकों में विशाल रूप लेने वाला है। वर्ष 2047 तक यह बाज़ार वर्तमान के लगभग 10 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 5 से 6 गुना तक पहुँच सकता है। इसका अर्थ है कि यह सेक्टर 50 अरब अमेरिकी डॉलर से 61 अरब अमेरिकी डॉलर तक का बड़ा आकार ले सकता है। इस बड़े बाज़ार को विकसित करने और इसके पूर्ण उपयोग के लिए लगभग 24 अरब अमेरिकी डॉलर से 30 अरब अमेरिकी डॉलर के कुल निवेश की आवश्यकता होगी। यदि इस क्षेत्र में सही नीतियां लागू की जाएं, कचरे की शुरुआती स्तर पर ही सही छंटाई सुनिश्चित हो और तैयार उत्पादों को बेचने के लिए स्पष्ट बाज़ार व्यवस्था बनाई जाए, तो इससे 26 लाख लोगों तक के लिए सीधे रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। पर्यावरण और वायु प्रदूषण पर वेस्ट-टू-वेल्थ का सकारात्मक प्रभाव जैविक कचरे का उचित प्रबंधन केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरों में पर्यावरण सुधार के लिए भी एक किफायती जरिया है। वर्तमान में खुले में जलाया जाने वाला कचरा भारतीय शहरों में पीएम 2.5 प्रदूषण का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा बनता है। इसके अलावा, लैंडफिल में सड़ने वाला कचरा भारी मात्रा में मीथेन गैस का उत्सर्जन करता है, जो जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है। ऑर्गेनिक वेस्ट को सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल में शामिल करके शहरों की हवा को साफ बनाया जा सकता है। गीले कचरे को खुले में जलने या लैंडफिल में जमा होने से रोककर मीथेन उत्सर्जन को कम करना एक बेहद प्रभावी और कम लागत वाला तरीका साबित होता है। सप्लाई चेन में उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए अन्य अवसर जैविक कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में व्यापार के अवसर केवल कंपोस्ट या बायोगैस का अंतिम प्लांट लगाने तक ही सीमित नहीं हैं। पूरी सप्लाई चेन में कई ऐसे व्यावसायिक क्षेत्र हैं जहां उद्यमी अपनी विशेषज्ञता के आधार पर प्रवेश कर सकते हैं • कचरा प्रोसेसिंग: कंपोस्टिंग और बायोमेथेनेशन तकनीकों का उपयोग करके कचरे को मूल्यवान जैविक खाद या ऊर्जा में बदलना। • फाइनेंशियल एडवाइजरी और फंडिंग: वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए पूंजी जुटाने और रणनीतिक सलाह देने वाली एजेंसियों का संचालन करना। • मार्केट डेवलपमेंट: तैयार कंपोस्ट, बायोगैस और अन्य सह-उत्पादों की बिक्री के लिए मजबूत बाज़ार और सप्लाई नेटवर्क तैयार करना। • शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) का क्षमता निर्माण: नगर निगमों और स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को कचरा प्रबंधन, छंटाई और नई तकनीकों की ट्रेनिंग देना। इसका आप पर असर भारत में: जैविक कचरे का सही प्रबंधन शहरों में वायु प्रदूषण (PM 2.5) को कम करने और 2047 तक लाखों नए रोजगार पैदा करने में मदद करेगा। उद्यमियों के लिए: 50 लाख रुपये के सीमित बजट में बिना बैंक लोन लिए कंपोस्टिंग यूनिट, कचरा छंटाई प्लांट या डिजिटल कंसल्टिंग सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। सवाल-जवाब 1. 50 लाख रुपये के बजट में गीले कचरे से कौन सा बिज़नेस शुरू किया जा सकता है? 50 लाख रुपये के बजट से छोटा कंपोस्टिंग यूनिट, गीले और सूखे कचरे की छंटाई (सेग्रिगेशन) का प्लांट या फिर कचरा प्रबंधन में सलाह देने वाली डिजिटल ऐप सेवा शुरू की जा सकती है। 2. भारत में वेस्ट-टू-वेल्थ सेक्टर का 2047 तक कितना बड़ा बाज़ार बनने का अनुमान है? सीईईडब्ल्यू के अनुमान के अनुसार, 2047 तक भारत में ऑर्गेनिक वेस्ट सेक्टर में सर्कुलर इकोनॉमी का बाज़ार 10 अरब डॉलर से बढ़कर 50 से 61 अरब डॉलर तक पहुँच सकता है। 3. ऑर्गेनिक वेस्ट सेक्टर में कितने प्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं? उचित नीतियों और कचरा छंटाई की बेहतर व्यवस्था होने पर इस सेक्टर में लगभग 26 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। 4. खुले में कचरा जलाने से शहरों में कितना वायु प्रदूषण होता है? खुले में जलाया जाने वाला कचरा भारतीय शहरों में PM 2.5 प्रदूषण का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा बनता है और भारी मात्रा में मीथेन गैस छोड़ता है। 5. कचरा प्रबंधन में बायोगैस और कंपोस्टिंग के अलावा कौन से कारोबारी अवसर हैं? सप्लाई चेन में पैसा जुटाने व कंसल्टिंग, तैयार कंपोस्ट व बायोगैस के लिए बाज़ार बनाने और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की ट्रेनिंग व क्षमता निर्माण जैसे कई अवसर उपलब्ध हैं। https://trendkia.com/business/50-lakha-rupaye-ke-bajata-se-shuru-karen-gile-kachare-ka-karobara-ceew-ki-priyanka-singh-ne-batae-kamai-ke-vikalpa-16322 TrendKia — Har trend, sabse pehle.