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  "type": "article",
  "title": "68 की उम्र में खड़ी की हजारों करोड़ की कंपनी, विप्रो से आईटीसी सौदे तक अशोक सूता के मैजिक मैन बनने का सफर",
  "summary": "आईटी उद्योग के दिग्गज अशोक सूता ने 68 वर्ष की आयु में हैप्पीएस्ट माइंड्स की नींव रखी और बाद में आईटीसी को 1,330 करोड़ रुपये में अपनी 22.1 फीसदी हिस्सेदारी बेची। विप्रो, माइंडट्री और अब हैप्पीएस्ट हैल्थ के साथ उनकी सफलता की प्रेरक कहानी पढ़ें।",
  "content": "भारतीय आईटी उद्योग में सफलता की कई कहानियां हैं, लेकिन अशोक सूता का व्यावसायिक सफर अपनी तरह का अनोखा उदाहरण है। जहां अधिकांश लोग 60 वर्ष की आयु के बाद सेवानिवृत्ति लेकर आराम की जिंदगी बिताना पसंद करते हैं, वहीं अशोक सूता ने उस उम्र में एक नया उद्यम शुरू करने का साहसिक कदम उठाया जब आमतौर पर लोग अपना करियर समाप्त मान लेते हैं। उन्होंने 68 साल की उम्र में एक ऐसी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी की स्थापना की, जिसने कुछ ही वर्षों में अपार सफलता हासिल की और बाद में दिग्गज एफएमसीजी कंपनी आईटीसी के साथ विलय के बड़े सौदे तक पहुंची। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान, व्यापारिक दूरदर्शिता और कभी न हार मानने वाले जज्बे के कारण उन्हें उद्योग जगत में 'मैजिक मैन' के नाम से जाना जाता है। हाल ही में उन्होंने अपनी बनाई कंपनी हैप्पीएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज में अपनी 22.1 फीसदी हिस्सेदारी आईटीसी को 1,330 करोड़ रुपये में बेचने का फैसला किया है, जिसके तहत हैप्पीएस्ट माइंड्स का आईटीसी इन्फोटेक में विलय किया जाएगा।\n\nशैक्षणिक पृष्ठभूमि और विप्रो में ऐतिहासिक कायाकल्प\nअशोक सूता का जन्म भारत की स्वतंत्रता से 5 साल पहले हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा और उच्च अध्ययन देश व विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने फिलीपींस स्थित एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करियर की शुरुआत श्रीराम ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के साथ की, जहां उन्होंने कॉरपोरेट जगत की बुनियादी कार्यप्रणाली को समझा।\n\nहालांकि, उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साल 1984 में आया जब उन्होंने विप्रो की कमान संभाली। उस समय अजीम प्रेमजी की यह कंपनी सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संघर्ष कर रही थी और अपनी पहचान बनाने की कोशिशों में लगी थी। अशोक सूता ने विप्रो के आईटी व्यवसाय की जिम्मेदारी संभाली और महज 20 लाख डॉलर के राजस्व वाले कारोबार को बढ़ाकर 50 करोड़ डॉलर के विशाल स्तर तक पहुंचा दिया। इस शानदार प्रगति के बाद वे अजीम प्रेमजी के सबसे भरोसेमंद सलाहकारों और व्यावसायिक नेतृत्वकर्ताओं में गिने जाने लगे। उन्होंने विप्रो इन्फोटेक के अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं और कंपनी को वैश्विक पटल पर स्थापित किया।\n\nमाइंडट्री का गठन और 103 गुना सब्सक्रिप्शन का रिकॉर्ड\nविप्रो में अपार सफलता और लंबा समय बिताने के बाद भी अशोक सूता की व्यावसायिक महत्वाकांक्षा शांत नहीं हुई थी। लगभग 50 वर्ष की आयु में उनके मन में खुद का उद्यम स्थापित करने का विचार आया। उन्होंने साल 1999 में 10 अन्य पेशेवरों के साथ मिलकर अपनी पहली अपनी कंपनी माइंडट्री की नींव रखी। माइंडट्री ने बहुत कम समय में आईटी सेवा क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बना ली।\n\nकंपनी की तेज प्रगति को देखते हुए साल 2007 में माइंडट्री का आईपीओ बाजार में उतारा गया। उस दौर में इस आईपीओ को लेकर निवेशकों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया और इसे 103 गुना अधिक बोलियां प्राप्त हुईं। यह उस समय के सबसे सफल आईपीओ में से एक साबित हुआ। हालांकि, जब माइंडट्री सफलता के नए शिखरों को छू रही थी, तब कंपनी के सह-संस्थापकों के बीच आंतरिक मतभेद उत्पन्न हो गए। इन विवादों के बाद अशोक सूता ने कंपनी छोड़ने का कठोर निर्णय लिया और माइंडट्री में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचकर बाहर हो गए।\n\n68 की उम्र में हैप्पीएस्ट माइंड्स और महामारी में ऐतिहासिक लिस्टिंग\nमाइंडट्री से बाहर आने के बाद उद्योग जगत का मानना था कि अशोक सूता अब सेवानिवृत्त होकर सुकून भरा जीवन व्यतीत करेंगे। लेकिन उन्होंने साल 2011 में बैंगलुरु से अपनी नई कंपनी हैप्पीएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज की शुरुआत करके सभी को चौंका दिया। उस समय उनकी उम्र 68 वर्ष थी और उनके पास कोई चालू व्यवसाय नहीं था। उन्होंने अपनी नई कंपनी के लिए 'बॉर्न डिजिटल-बॉर्न एजाइल' का आधुनिक मॉडल चुना। कंपनी ने क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे आधुनिक तकनीकी मानकों पर ध्यान केंद्रित किया। इसके चलते दुनियाभर से बड़े क्लाइंट्स कंपनी के साथ जुड़ते चले गए।\n\nसाल 2020 में जब पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी के संकट और आर्थिक मंदी से जूझ रही थी, तब 77 वर्ष की आयु में अशोक सूता ने हैप्पीएस्ट माइंड्स का आईपीओ लाने का साहसिक निर्णय लिया। बाजार विशेषज्ञों का कहना था कि महामारी के समय आईपीओ लाना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन नतीजे उम्मीदों से परे रहे। हैप्पीएस्ट माइंड्स के आईपीओ को 150 गुना ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला। शेयर बाजार में लिस्टिंग वाले पहले ही दिन निवेशकों को 100 फीसदी से अधिक का शानदार रिटर्न प्राप्त हुआ। हाल ही में उन्होंने इस कंपनी में अपनी 22.1 फीसदी हिस्सेदारी को 1,330 करोड़ रुपये में एफएमसीजी दिग्गज आईटीसी को बेचने का समझौता किया है, जिसके तहत कंपनी का आईटीसी इन्फोटेक में विलय होना तय हुआ है।\n\n79 वर्ष में चौथा अध्याय और हैप्पीएस्ट हैल्थ का विज़न\nहैप्पीएस्ट माइंड्स में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने के बाद भी अशोक सूता के कदम थमने वाले नहीं हैं। उन्होंने 4 साल पहले यानी 2022 में 79 वर्ष की आयु में अपने तीसरे नए स्टार्टअप हैप्पीएस्ट हैल्थ की शुरुआत की थी। यह नया उद्यम स्वास्थ्य और वेलनेस क्षेत्र में काम कर रहा है और ज्ञान-आधारित स्वास्थ्य समाधान प्रदान करता है। अशोक सूता ने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया है कि वे जल्द ही हैप्पीएस्ट हैल्थ का आईपीओ भी शेयर बाजार में लाने की योजना बना रहे हैं।\n\nव्यवसाय प्रबंधन और नवाचार के साथ-साथ अशोक सूता ने सामाजिक और शोध कार्यों में भी योगदान दिया है। उन्होंने एक मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट की स्थापना की है जो स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधानों को बढ़ावा देता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने नए उद्यमियों के मार्गदर्शन के लिए 'एंटरप्रेन्योरशिप सिंपलीफाइड: फ्रॉम आइडिया टू आईपीओ' नामक एक पुस्तक भी लिखी है, जो उद्योग जगत में काफी लोकप्रिय हुई है।\n\nशेयर बाजार में हलचल और निवेशकों का रुख\nअशोक सूता द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचे जाने की खबर के बाद शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों पर तुरंत प्रभाव देखने को मिला। 2 सितंबर को शुरुआती कारोबारी सत्र के दौरान हैप्पीएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज के शेयर में लगभग 2.29 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 354 रुपये के स्तर पर कारोबार करता हुआ देखा गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि संस्थापक और मुख्य प्रमोटर की हिस्सेदारी बिक्री से निवेशकों के मनोबल पर तात्कालिक असर पड़ा है, हालांकि कंपनी का बुनियादी व्यावसायिक ढांचा मजबूत बना हुआ है।\n\nइसका आप पर असर\nअशोक सूता द्वारा हैप्पीएस्ट माइंड्स में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेचने और आईटीसी के साथ विलय के इस घटनाक्रम का आईटी शेयरधारकों और कॉरपोरेट जगत पर सीधा प्रभाव पड़ा है।\n\n• शेयरधारकों के लिए: 2 सितंबर को शुरुआती सत्र में स्टॉक 2.29 फीसदी गिरकर 354 रुपये पर आ गया, जिससे प्रमोटर के निकलने पर निवेशकों में अल्पकालिक अस्थिरता देखी गई।\n• आईटीसी और उद्योग के लिए: 1,330 करोड़ रुपये के इस 22.1 फीसदी हिस्सेदारी सौदे से आईटीसी इन्फोटेक को डिजिटल और एआई सेवाओं में विस्तार का नया अवसर मिलेगा।\n• नए उद्यमियों के लिए: यह घटनाक्रम यह सिद्ध करता है कि 68 या 79 की उम्र में भी नई टेक कंपनियां बनाकर उन्हें सार्वजनिक बाजार (आईपीओ) तक सफलतापूर्वक ले जाया जा सकता है।\n• स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेशकों के लिए: सूता के अगले वेंचर 'हैप्पीएस्ट हैल्थ' के आगामी आईपीओ से हेल्थकेयर और वेलनेस सेक्टर में नए निवेश के रास्ते खुलेंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अशोक सूता ने 68 साल की उम्र में किस कंपनी की स्थापना की थी?\nउन्होंने 68 वर्ष की आयु में 2011 में बैंगलुरु से हैप्पीएस्ट माइंड्स टेक्नोलॉजीज की स्थापना की थी।\n\n2. अशोक सूता ने हाल ही में आईटीसी को अपनी कितनी हिस्सेदारी बेची है?\nउन्होंने हैप्पीएस्ट माइंड्स में अपनी 22.1 फीसदी हिस्सेदारी आईटीसी को 1,330 करोड़ रुपये में बेची है।\n\n3. विप्रो में अशोक सूता का क्या योगदान रहा था?\n1984 में विप्रो से जुड़कर उन्होंने कंपनी के आईटी बिजनेस को 20 लाख डॉलर से बढ़ाकर 50 करोड़ डॉलर तक पहुंचाया था।\n\n4. माइंडट्री का आईपीओ किस वर्ष आया था और उसे कितना सब्सक्रिप्शन मिला था?\nमाइंडट्री का आईपीओ साल 2007 में आया था और उसे 103 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।\n\n5. 79 वर्ष की उम्र में अशोक सूता ने कौन सा नया स्टार्टअप शुरू किया?\nउन्होंने 2022 में 79 वर्ष की आयु में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा स्टार्टअप 'हैप्पीएस्ट हैल्थ' शुरू किया, जिसके आईपीओ की योजना बनाई जा रही है।\n\n6. हिस्सेदारी बिक्री की खबर के बाद 2 सितंबर को शेयर बाजार में क्या असर पड़ा?\n2 सितंबर को शुरुआती कारोबार में हैप्पीएस्ट माइंड्स का शेयर 2.29 फीसदी गिरकर 354 रुपये पर आ गया था।\n\nप्रेरणा और सबक\nअशोक सूता का व्यावसायिक सफर हर उम्र के उद्यमियों के लिए एक अनूठा उदाहरण और सीख प्रस्तुत करता है।\n\n• उम्र केवल एक संख्या है: 68 की उम्र में हैप्पीएस्ट माइंड्स और 79 की उम्र में हैप्पीएस्ट हैल्थ शुरू करके उन्होंने साबित किया कि नवाचार के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है।\n• तकनीकी बदलाव को अपनाना: विप्रो के पारंपरिक आईटी मॉडल से लेकर हैप्पीएस्ट माइंड्स के 'बॉर्न डिजिटल' मॉडल तक, वे हमेशा नई तकनीकों के साथ खुद को बदलते रहे।\n• कठिन समय में साहस: 2020 की महामारी के मंदी के दौर में 77 की उम्र में आईपीओ लाना और 150 गुना सब्सक्रिप्शन पाना उनकी हिम्मत और फैसले पर विश्वास को दिखाता है।\n• अनुभव और ज्ञान का विस्तार: अपनी किताब 'एंटरप्रेन्योरशिप सिंपलीफाइड' और मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट के जरिए उन्होंने समाज और युवा उद्यमियों को लगातार प्रेरित किया।",
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  "publishedAt": "2026-09-02",
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