अगस्त-सितंबर में फूलगोभी की बुवाई से किसानों को मिल सकता है 60 दिन में मोटा मुनाफा मुरादाबाद के किसान अगस्त-सितंबर में फूलगोभी और पत्तागोभी की अगेती व मध्यम किस्मों की बुवाई कर 60 से 100 दिन के भीतर अच्छी कमाई कर सकते हैं, बशर्ते समय पर पौध और सही जल निकासी का ध्यान रखा जाए। मुरादाबाद क्षेत्र में अगस्त और सितंबर का महीना फूलगोभी और पत्तागोभी की अगेती व मध्यम किस्मों की बुवाई के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। सही समय पर पौध तैयार करने और खेत में जल निकासी का पूरा इंतजाम रखने से यही फसल किसानों की कमाई का बड़ा जरिया बन जाती है। अगस्त-सितंबर में बुवाई और रोपाई पूरी करने वाले किसानों को उपज भी अच्छी मिलती है और इससे अच्छा मुनाफा भी होता है। बुवाई का सही समय और किस्में बरसात के मौसम में भी फूलगोभी की खेती की जा सकती है, बस इसके लिए किस्म का चुनाव सही होना चाहिए। फूलगोभी की बुवाई मुख्य रूप से दो तरीकों से की जाती है, अगेती और मध्यम। अगेती किस्मों में पूसा मेघल और पूसा कार्तिक हाइब्रिड प्रमुख हैं। इसके अलावा सिंजेंटा कंपनी की NS 60 और NS 83 किस्में भी किसानों के बीच लोकप्रिय हैं। इंडिया मैग्नेट 03 भी अगेती बुवाई की एक बेहतर किस्म मानी जाती है। इन सभी किस्मों की बुवाई अगस्त-सितंबर में की जाती है, जिससे किसानों को अच्छी उपज और उससे अच्छी आमदनी हासिल होती है। ये किस्में 60 से 75 दिन के भीतर तैयार हो जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर तक इनकी अच्छी कीमत मिल जाती है। वहीं मध्यम किस्मों की बात करें तो पूसा शरद, हिसार नंबर 1 और स्नो बॉल हाइब्रिड के अलावा अलग-अलग कंपनियों की कई हाइब्रिड किस्में भी बाजार में उपलब्ध हैं। ये किस्में तैयार होने में थोड़ा ज्यादा समय लेती हैं, यानी करीब 80 से 100 दिन। ठंड के मौसम में मिलता है सबसे ज्यादा फायदा फूलगोभी की फसल ठंड के मौसम में सबसे बेहतर मानी जाती है। दिसंबर-जनवरी के दौरान इसकी खेती से किसानों को खासतौर पर अच्छी आमदनी होती है। खेत तैयार करने के लिए दो से तीन बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरी बनाना जरूरी है। इसके साथ ही प्रति एकड़ 15 से 20 टन गोबर की खाद डालनी चाहिए। जमीन का pH मान 6.2 से 7.5 के बीच होना इस फसल के लिए उपयुक्त माना गया है। रोपाई के लिए अगस्त-सितंबर का समय ही सबसे सही रहता है। अगेती किस्मों में लाइन से लाइन की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी भी 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए, जबकि मध्यम किस्मों में लाइन से लाइन की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर रखी जाती है। खाद और उर्वरक के साथ-साथ NPK का इस्तेमाल भी मिट्टी की जांच करवाने के बाद ही करना चाहिए, जिससे खेत को उसकी जरूरत के मुताबिक पोषण मिल सके। रासायनिक विधि, सिंचाई और कीट प्रबंधन का ध्यान किसान चाहें तो रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर भी इस फसल की खेती कर सकते हैं। हालांकि खेत में बोरॉन की कमी होने पर फूलगोभी में सूखा सड़न रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है। अगर मिट्टी की जांच के बाद खेत में बोरॉन की कमी पाई जाए और समय रहते इसकी पूर्ति कर दी जाए, तो फसल की क्वालिटी काफी अच्छी हो जाती है। यही वजह है कि रोपाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर करवा लेनी चाहिए। रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई कर देनी चाहिए, इसके बाद हर 7 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। ध्यान रहे कि खेत में कहीं भी पानी का जमाव न होने पाए, क्योंकि इससे जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। कीट और रोग से बचाव के लिए प्रति लीटर पानी में तय मात्रा में नीम का तेल मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा बीमारियों से फसल को बचाने के लिए गोमूत्र का स्प्रे भी कारगर उपाय माना जाता है। इन सभी बातों का ध्यान रखकर किसान कम लागत में भी फूलगोभी और पत्तागोभी की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: सब्जी उगाने वाले किसान इस अगेती-मध्यम बुवाई मॉडल को अपनाकर 60 से 100 दिन के छोटे चक्र में ही अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं। • मुरादाबाद में: यहां के किसान अगस्त-सितंबर में सही किस्म, मिट्टी जांच और सिंचाई का ध्यान रखकर सर्दियों तक अच्छी कमाई कर सकते हैं, जिससे स्थानीय मंडियों में फूलगोभी-पत्तागोभी की आवक भी बढ़ेगी। सवाल-जवाब 1. फूलगोभी की अगेती किस्में कितने दिन में तैयार होती हैं? अगेती किस्में जैसे पूसा मेघल, पूसा कार्तिक हाइब्रिड, NS 60, NS 83 और इंडिया मैग्नेट 03, 60 से 75 दिन में तैयार हो जाती हैं। 2. मध्यम किस्मों को तैयार होने में कितना समय लगता है? पूसा शरद, हिसार नंबर 1 और स्नो बॉल हाइब्रिड जैसी मध्यम किस्मों को तैयार होने में करीब 80 से 100 दिन लगते हैं। 3. फूलगोभी की बुवाई और रोपाई के लिए सबसे अच्छा समय कौन सा है? अगस्त-सितंबर का महीना बुवाई और रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। 4. खेत की मिट्टी का pH मान कितना होना चाहिए? फूलगोभी के लिए मिट्टी का pH मान 6.2 से 7.5 के बीच होना चाहिए। 5. बोरॉन की कमी से फसल को क्या नुकसान होता है? बोरॉन की कमी से फूलगोभी में सूखा सड़न रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए मिट्टी की जांच जरूरी है। 6. फूलगोभी में सिंचाई कितने अंतराल पर करनी चाहिए? रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें और उसके बाद हर 7 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहें। 7. प्रति एकड़ कितनी गोबर की खाद चाहिए? खेत तैयार करने के लिए प्रति एकड़ 15 से 20 टन गोबर की खाद की जरूरत होती है। https://trendkia.com/business/agasta-sitnbara-men-phulagobhi-ki-buvai-se-kisanon-ko-mila-sakata-hai-60-dina-men-mota-munapha-13445 TrendKia — Har trend, sabse pehle.