एयर इंडिया के नए बॉस की रेस तेज, टाटा समूह भारतीय चेहरे को दे सकता है कमान कैम्पबेल विल्सन के इस्तीफे के बाद एयर इंडिया में नए नेतृत्व की तलाश तेज हो गई है, जिसमें निपुन अग्रवाल और विनोद कन्नन का नाम सबसे आगे चल रहा है। टाटा के स्वामित्व वाली एयर इंडिया में बड़े नेतृत्व बदलाव की तैयारी जब से टाटा समूह ने सरकार से एयर इंडिया का अधिग्रहण किया है, तब से इस विमानन कंपनी के सामने लगातार कई चुनौतियां आ रही हैं। अप्रैल में एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अचानक इस्तीफा देने के बाद से नए नेतृत्व की तलाश तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, टाटा समूह अब एयर इंडिया की कमान किसी भारतीय नागरिक को सौंपने पर विचार कर रहा है, जो पहले से ही कंपनी के भीतर कार्यरत है। इस समय CEO पद की इस दौड़ में दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं, जिनमें निपुन अग्रवाल और विनोद कन्नन शामिल हैं। CEO पद के मुख्य दावेदारों का मूल्यांकन नितिन अग्रवाल वर्तमान में एयर इंडिया में चीफ कॉमर्शियल ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं और कंपनी में चल रहे बदलावों के पीछे एक महत्वपूर्ण कड़ी रहे हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि वे बेहद अनुशासित व्यक्ति हैं और वित्तीय नियंत्रण के साथ-साथ ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर उनकी मजबूत पकड़ है, जो उन्हें इस पद के लिए एक मजबूत दावेदार बनाती है। हालांकि, विरोधियों का तर्क है कि उनके पास इतनी बड़ी एयरलाइंस को संभालने का पर्याप्त अनुभव नहीं है। इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि किसी भी कंपनी के लिए वित्तीय कौशल जरूरी है, लेकिन वैश्विक स्तर की एयरलाइंस चलाने के लिए व्यापक अनुभव की आवश्यकता होती है। दूसरी तरफ, विनोद कन्नन के पास एयरलाइंस क्षेत्र का काफी मजबूत अनुभव है। वे विस्तारा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में काम कर चुके हैं। एक बड़ी विमानन कंपनी को सफलतापूर्वक चलाने का उनका यह अनुभव उन्हें CEO पद की रेस में सबसे आगे रखता है। हालांकि, अंतिम निर्णय के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा क्योंकि टाटा संस इस समय भविष्य के नेतृत्व को लेकर काफी दबाव में है और वह बहुत सोच-समझकर कदम उठा रही है। वित्तीय घाटा और भू-राजनीतिक चुनौतियां TrendKia की एक रिपोर्ट के अनुसार, टाटा समूह अपनी इस विमानन कंपनी को संकट से निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। पिछले वित्त वर्ष में एयर इंडिया को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इसके अलावा, पाकिस्तान द्वारा अपना एयरस्पेस बंद किए जाने के बाद कंपनी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बुरी तरह प्रभावित हुईं। बाद में, ईरान संकट ने एयर इंडिया की मुश्किलों को और बढ़ा दिया, जिससे कंपनी का वित्तीय घाटा बढ़ गया और उसे अपनी उड़ानों में 20 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ी। कैम्पबेल विल्सन का इस्तीफा और आगे की राह एयर इंडिया में यह पद खाली होने की वजह न्यूजीलैंड के कैम्पबेल विल्सन का इस्तीफा है, जिन्होंने पिछले अप्रैल महीने में CEO पद छोड़ दिया था। इस बीच, रेस में शामिल अग्रवाल ने हाल ही में कहा था कि वे एन चंद्रशेखरन को अपना सहयोग देना जारी रखेंगे। हालांकि, चंद्रशेखरन के खुद के भविष्य को लेकर भी कुछ अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, इसलिए वे नए प्रमुख के नाम पर अंतिम मुहर लगाने से पहले सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करेंगे। इसका आप पर असर • हवाई यात्रियों पर असर: एयर इंडिया के नेतृत्व में बदलाव और उड़ानों में कटौती से अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर टिकट की कीमतों और उड़ान विकल्पों पर असर पड़ सकता है। • टाटा के ग्राहकों के लिए: कंपनी की वित्तीय स्थिरता और नए घरेलू नेतृत्व से आने वाले समय में सेवाओं और समयबद्धता में सुधार होने की उम्मीद है। सवाल-जवाब 1. एयर इंडिया नए CEO की तलाश क्यों कर रही है? पिछले अप्रैल महीने में न्यूजीलैंड के कैम्पबेल विल्सन के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद एयर इंडिया में नए मुख्य कार्यकारी की तलाश शुरू हुई थी। 2. इस पद के लिए कौन से दो नाम सबसे आगे चल रहे हैं? एयर इंडिया के चीफ कॉमर्शियल ऑफिसर निपुन अग्रवाल और विस्तारा के पूर्व मुख्य कार्यकारी विनोद कन्नन इस दौड़ में सबसे आगे हैं। 3. वर्तमान में एयर इंडिया किन मुख्य चुनौतियों का सामना कर रही है? एयरलाइन भारी वित्तीय नुकसान, पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद होने से उड़ानों पर प्रभाव और ईरान संकट के कारण परिचालन में कटौती जैसी समस्याओं से जूझ रही है। 4. इस बार भारतीय मूल का ही CEO बनाने पर क्यों जोर दिया जा रहा है? टाटा समूह विमानन कंपनी को मुश्किलों से बाहर निकालने के लिए एक आंतरिक भारतीय चेहरे को कमान सौंपना चाहता है जो कंपनी की कार्यप्रणाली को अच्छे से समझता हो। https://trendkia.com/business/air-india-ke-nae-bosa-ki-resa-teja-tata-samuha-bharatiya-chehare-ko-de-sakata-ha-1940 TrendKia — Har trend, sabse pehle.