अक्टूबर में महंगाई के नए रिकॉर्ड की आशंका, थोक दर 12% और खुदरा 6% के पार पहुंचने का अनुमान इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के अनुसार अक्टूबर 2026 में थोक महंगाई 12 प्रतिशत और खुदरा महंगाई 6 प्रतिशत के पार जा सकती है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों, मौसम के असर और कमजोर रुपये के कारण भारतीय रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। घरेलू बजट और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर बना दबाव आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) के ताज़ा अनुमानों के अनुसार अक्टूबर 2026 में देश की थोक महंगाई 12 प्रतिशत से ऊपर निकल सकती है, जबकि खुदरा महंगाई के 6 प्रतिशत के स्तर को पार कर जाने की आशंका बनी हुई है। मौसम में हुए बदलावों, ईंधन तथा ऊर्जा की बढ़ती लागत और प्रतिकूल बेस इफेक्ट की वजह से कीमतों में यह उछाल आने की संभावना जताई गई है। थोक मूल्य सूचकांक में दोहरे अंकों का दबाव थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई आने वाले कई महीनों तक ऊंचे पायदान पर टिके रहने के संकेत दे रही है। रेटिंग एजेंसी के मुताबिक प्रतिकूल बेस इफेक्ट के असर से फरवरी 2027 तक थोक मुद्रास्फीति दोहरे अंकों में बनी रह सकती है। इससे पहले सितंबर के आधिकारिक आंकड़ों में थोक महंगाई बढ़कर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो मौजूदा सीरीज का सबसे ऊंचा स्तर दर्ज हुआ था। अगस्त में यह आंकड़ा 9.92 प्रतिशत रहा था, यानी एक ही महीने के अंतराल में थोक कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई थी। उपभोक्ता बाजार और खुदरा महंगाई की स्थिति बाजार से खरीदारी करने वाले आम उपभोक्ताओं के लिए भी राहत के संकेत नहीं मिल रहे हैं। सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जो पिछले 23 महीनों का सर्वाधिक स्तर है, जबकि इससे पिछले महीने यानी अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत दर्ज की गई थी। एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत के विश्लेषण के अनुसार अक्टूबर में खुदरा आंकड़ा 6 प्रतिशत की सीमा लांघ सकता है, जिससे दैनिक खर्च चलाने वाले परिवारों की वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। कच्चा तेल, कमजोर मुद्रा और आयात पर असर थोक दरों में होने वाले बदलावों पर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय भावों का सीधा और तीव्र असर देखने को मिलता है। दूसरी ओर, खुदरा स्तर पर पेट्रोल और डीजल की दरों के साथ सरकारी करों और शुल्कों के निर्धारण का व्यापक प्रभाव पड़ता है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की कमजोरी ने भी आयात को महंगा बनाकर इस दबाव को बढ़ाया है। मुख्य अर्थशास्त्री के अनुसार दोनों ही श्रेणियों में महंगाई का दायरा अब व्यापक हो रहा है। यदि पश्चिम एशिया का तनाव कम होता है, तो वास्तविक आंकड़े अनुमानों से कुछ नीचे रह सकते हैं। कर्ज और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपने मौजूदा मौद्रिक कड़ेपन के क्रम में नीतिगत ब्याज दरों में 50 से 75 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है। पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक ने रेपो दर में 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा कर इसे 5.50 प्रतिशत निर्धारित किया था, जो फरवरी 2023 के बाद पहली बार की गई दर वृद्धि थी। यदि ब्याज दरों में यह वृद्धि आगे भी जारी रहती है, तो वाणिज्यिक बैंकों से मिलने वाले आवास ऋण और अन्य प्रकार के उपभोक्ता ऋणों की मासिक किस्त यानी EMI में इजाफा होना तय माना जा रहा है। इसका आप पर असर इस पूर्वानुमान का सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट और बैंक से लिए गए कर्जों पर देखने को मिलेगा। • दैनिक खर्च पर: आवश्यक खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रह सकती है। इससे अक्टूबर और आने वाले महीनों में घरेलू बचत पर दबाव बढ़ेगा। • लोन की EMI पर: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में 50 से 75 बेसिस पॉइंट की संभावित वृद्धि से नए और मौजूदा लोन महंगे हो जाएंगे। होम लोन तथा पर्सनल लोन लेने वाले उपभोक्ताओं को हर महीने अधिक किस्त चुकानी पड़ सकती है। • ईंधन और यात्रा पर: कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की बढ़ी हुई कीमतें स्थानीय माल ढुलाई को प्रभावित कर सकती हैं। इसका असर परिवहन और दैनिक यात्रा खर्चों में वृद्धि के रूप में दिख सकता है। • आयातित सामान पर: रुपये की कमजोरी की वजह से बाहर से आने वाले उत्पाद और कच्चे माल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इस स्थिति में इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य तैयार उत्पादों के खुदरा दाम ऊंचे बने रह सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ थोक और खुदरा महंगाई में इस उछाल के पीछे वैश्विक कमोडिटी बाजार, मौसम की अनिश्चितता और पिछले साल का तुलनात्मक स्तर मुख्य कारक हैं। • प्रतिकूल बेस इफेक्ट: पिछले साल के समान समय में दर्ज कम तुलनात्मक आधार के चलते आंकड़ों में तेज प्रतिशत वृद्धि दिख रही है। इस तकनीकी असर के चलते थोक महंगाई के फरवरी 2027 तक दोहरे अंकों में रहने का अनुमान है। • कच्चे तेल और ऊर्जा की लागत: पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतें थोक लागत को सीधे तौर पर प्रभावित करती हैं। इस क्षेत्र में दर्ज की गई मजबूती ने उत्पादन और माल ढुलाई की लागत दोनों को बढ़ा दिया है। • मौसम और कृषि उत्पादन: मौसमी परिस्थितियों में आए बदलावों ने खाद्य पदार्थों की आपूर्ति और उपलब्धता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इससे प्राथमिक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आई है। • रुपये की कमजोरी: विदेशी मुद्रा विनिमय में रुपये के नरम पड़ने से आयातित कच्चा माल और कच्चा तेल अधिक खर्चीला हो गया है। इस स्थिति से घरेलू बाजार में आयातित महंगाई का दबाव बढ़ा है। सवाल-जवाब 1. अक्टूबर 2026 में महंगाई को लेकर क्या अनुमान लगाया गया है? इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के अनुसार अक्टूबर में थोक महंगाई 12 प्रतिशत के पार और खुदरा महंगाई 6 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है। 2. सितंबर 2026 में थोक और खुदरा महंगाई के आंकड़े क्या थे? सितंबर में थोक महंगाई 11.39 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर थी, जबकि खुदरा महंगाई 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। 3. आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कितनी बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है? बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक मौजूदा सख्ती के दौर में नीतिगत दरों में 50 से 75 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी कर सकता है। 4. आरबीआई ने पिछली बार रेपो रेट में कब और कितना बदलाव किया था? आरबीआई ने हाल ही में रेपो दर को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत किया था, जो फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि थी। 5. थोक महंगाई कब तक ऊंचे स्तर पर बनी रहने का अनुमान है? प्रतिकूल बेस इफेक्ट के प्रभाव से थोक महंगाई फरवरी 2027 तक दोहरे अंकों में बने रहने का अनुमान है। 6. किन मुख्य कारणों से महंगाई में बढ़ोतरी हो रही है? ऊर्जा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मौसम में आए बदलाव, कमजोर रुपया और प्रतिकूल बेस इफेक्ट इसके मुख्य कारण हैं। https://trendkia.com/business/aktubara-men-mahngai-ke-nae-rikorda-ki-ashnka-thoka-dara-12-aura-khudara-6-ke-para-pahunchane-ka-anumana-47809 TrendKia — Har trend, sabse pehle.